Skip to playerSkip to main content
  • 3 days ago
दीपावली पर जिनके बनाए दीये से लोगों के घर रोशन होते हैं, वे खुद उदासी भरी जिंदगी गुजार रहे हैं. नीरज कुमार की रिपोर्ट.

Category

🗞
News
Transcript
00:21ुपूरा परिवार छट और दिपावली को लेकर मिट्टी के बरतन को तयार कर रहा है
00:27इनके तरह ही पलामों के तीस जार परिवार को भी दिपावली और छट का इंतजार रहता है
00:34इस दोरा नुए बड़े पमाने पर मिट्टी के दिया और बरतन को तयार करते हैं
00:40हलाकि दिपावली और छट खत्म हो जाने के बाद भी इनके घरों का दिये नहीं जलते हैं
01:12मिटी के बरतन तयार करने वाले कुमहार परिवार आज संकट के दोर से
01:17घुजर रहे हैं पीछले एक दसक में मिटी के दिया और बरतन की लागत आज से दस गुना बढ़ गई
01:25है
01:26जिस मिटी को कुमहार असानी से खरीद लेते थे अब उसके लिए बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है
01:33यहां तक कि जलावन के लिए भी कुमहार को बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है
01:39अब बड़ी के लिए बड़ी कोई अथी नहीं है बिटी बात दुर्गा पुजा बोशी हो गया
01:45कल्सा बंद करके लोग का अस्तर करके नहीं लेगे लोग
01:49हम लोग के यह अथी है तक का वो ने कुमहार लागते अतना है कि पैदा का होगा इसे मान
01:54के चलिए
02:08पलामों में तीस हजार से भी अधीक परिवार मिटी के कारवार से जुड़े हुए है
02:14इन में से अधिकतर परिवार कई पिडियों से इसी कारे से जुड़े है
02:19हजारों की संख्या में वैसे परिवार हैं जो मिटी के बरतन का और मिटी के न्रमानकारे को छोड़ चुके हैं
02:26पलामों के इलाके में एक बार फिर से इनके लिए संरट्चन की बात शुरू हो गई है

Recommended