00:00ये जो पैसे के अंधा दून दोड है प्लेस्मेंट प्लेस्मेंट ये नशा कैसे नहीं है बताओ ना
00:05मा बच्चों के पीछे लगी हुई है सेटल कब होगा सेटल कब होगा तेरी तो जॉब भी लग गई है
00:09ये नशा कैसे नहीं है
00:11ये जो फिल्मे देखने भागते हो, ये जो एंडलेस स्क्रॉलिंग करते हो, ये नशा नहीं है क्या और ये नशा
00:17क्यों करते हो, किसी किसी को तो इज़त का ही नशा होता है, किसी को ये खुराफाद चल रही है,
00:23भाई को नीचा कैसे दिखाऊं, किसी को ये चल रहा है, फलानी
00:38नौगरी किसकी लग गई, कब निकलने वाला है, UPSC का रिजल्ट,
00:43वहाँ के लड़कों को जा करके मैं कैसे फसाऊंगा,
00:46ये क्या करना है, और ये साथ आप कर रहे हैं, आपका BP बढ़ता जा रहा है,
00:50हम क्यों न मानें कि अभी आप बैटके नशाई कर रहे हो,
00:54बस बोतल दिखाई नहीं दे रही है,
00:59समझो बात को, ये हमने समाज बना कैसा रखा है, इसमें एक जवान आदमी करे क्या,
01:04वो चमकना चाहता है, वो उठना चाहता है, वो बढ़ना चाहता है,
01:08और हम उसको देते हैं दमन, वो करे क्या,
01:14तो फिर अलग-अलग तरीके के नशे सुईकार किये जाते हैं,
01:20और जो लोग मादक दरवियों का नशागर लेते हैं, उनको तो हम कह देते हैं, नशेडी,
01:26पर जो दूसरे तरीके के नशे कर लेते हैं वो अपने आपको इज़तदारी बोलते रहते हैं नशेडी सब हैं
01:32अगर हम दुनिया ऐसी कर पाएं जहां एक जवान आदमी को अपनी उर्जा को सही जगह लगाने का भरपूर मौका
01:44मिले
01:46उसे जीवन के साथ प्रियोग करने की छूट मिले तो उसके पास समय ही नहीं होगा उर्जा ही नहीं होगी
01:53कि वो फाल्तू जाकर के शराब और बाकी तरह के नशे करें उसे ज़रूरत ही नहीं लगेगी
01:58पर जब आप उसको बांध दो गए रोक दो गए तो बिलकुल हो सकता है कि वो परिवार का दिल
02:04रखने के लिए शराब का नशाना करें पर फिर वो कोई और नशा कर लेगा