00:00SIR और CC ग्यानेश पर सुप्रिम कोट में सुनवाई
00:05सुप्रिम कोट में क्या हुई बहस?
00:07क्या देश में मदाता सूची से जुड़े फैसले मुख्य चुनाव यूक्त अकेले लेते हैं?
00:12या चुनाव आयोक के सभी सदस्य मिलकर उन पर मुहर लगाते हैं?
00:16आयोक का कहना है कि मुख्य चुनाव आयोक्त ग्यानेश कुमार पर अकेले फैसले लेने का आरोप सही नहीं है
00:21और SIR से जुड़े एहम आदेश सर्वसम्मती से लिए गए थे
00:24चुनाव आयोक्योर से सुप्रिम कोट में दाखिल सयुक्त हलफ नामे में
00:27नसर्फ फैसले लेने की प्रक्रिया का बचाव किया गया है
00:30बल्कि मुख्य चुनाव आयोक्त को पत से हटाने
00:33और उनके कामकास पर रोक लगाने से जुड़ी कानूनी दलीले भी रखी गई है
00:36ऐसे में ये मामला खेवल एक अधिकारी के कामकास तक समित नहीं रहा
00:40बल्कि चुनाव आयोक की निर्णय प्रक्रिया, मदाता सूची की विश्वसनी अता
00:44और समयधानिक संस्थाओं की जवाब देही से भी जुड़ गया है
00:48तीनों आयोक्तों की सहमती से हुए SIR के फैसले
00:52चुनाव आयोक ने अपने हलफ नामे में साफ कहा है कि जून 2025, ऑक्टूबर 2025 और मई 2026 में
00:58विशेश गहनपू निरिक्षन यानि SIR को लेकर जारी किये गए आदेश आयोक के सामुहिक और सर्वसंबत फैसले थे
01:04आयोक ने इस आरोक को खारिच किया कि गानेश कुमार अकेले निर्नय ले रहे हैं या बाके निर्वाचन आयोक्तों की
01:10राय को नजर अंदाज किया जा रहा है
01:12आयोक के मुताबिक फैसले लेने की एक तैप रक्रिया है
01:15किसी मामले की फाइल पहले एक निर्वाचन आयोग के पास जाती है फिर दूसरे निर्वाचन आयोग के पास और आखिर
01:21में मुख्य चुनाव आयोग के सामने रखी जाती है
01:23सभी स्तरों पर विचार और मन्जूरी के बाद ही फैसला अधिकारी करूप लेता है
01:28इसके बाद आयोग के सच्चिवाले की ओर से सम्बंधित आदेश या सूचना जारी की जाती है
01:33आयोग ने ये भी सपष्ट किया कि फाइल पर किसी अधिकारी या निर्वाचन आयोग की ओर से दर्ज सवाल, सुझाव
01:39या टपनी को अपने आप में अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता
01:42अंतिम नर्णय वही होता है जिसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत मन्जूरी देकर आधिकारिक रूप से दर्ज किया गया हो
01:49या निचुनाव आयोग का तर्ख है कि किसी फाइल पर अलग-अलग राया सवाल सामने आना इस बात का प्रमाण
01:55नहीं है कि अंतिम नर्णय किसी एक व्यक्ती ने लिया
01:58हलाकि इस प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का अंतिम न्याइक आकलन अदालत अभी आगे करेगी
02:03फॉर्म 6 और ओनलाइन आवेदन पर क्या कहा
02:06हलफनामे में मदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 का मुद्दा भी शामिल है
02:12आयोग ने कहा कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया क्योंकि इसमें संशोधन करने का अधिकार किंद सरकार
02:18के पास है
02:19हाला कि ओनलाइन आवेदन प्रक्रिया में बदलाव जैसा दिखाई देने के सवाल पर आयोगनिस पश्टी करन दिया
02:24उनके अनुसार 21 अक्टूबर से आवेदन और घोशना पत्र को अलग करने की व्यवस्था अपनाई गई है
02:30आयोग का कहना है कि इसे फॉर्म 6 में आवचारिक बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए
02:35ये मुद्दा इसलिए महत्वपुन है क्योंकि मद्दाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया में किसी भी बदलाव का सीधा असर
02:41आमनागरिकों पर पढ़ सकता है
02:43ऐसे में ये समझना जरूरी है कि नियम में बदलाव हुआ है या केवल आवेदन जमा करने के तरीके में
02:49अंतर आया है
02:50जिन मद्दाताओं की मैपिंग नहीं हुई उनका क्या होगा
02:53SIR के दोराव जिन मद्दाताओं ने पुराने रिकॉर्ड की मैपिंग नहीं हो पाती उन्हें लेकर भी सवाल उठाए गए
03:00चुनाव आयोग ने कहा है कि ऐसे सभी मद्दाताओं को सुनवाई के लिए बुलाना निवारे नहीं है
03:04आयोग के मुताबिक बूत लेवल ओफिसर यानि बियलो घर जाकर जरूरी दस्तावेज जुटा सकते हैं
03:10आयोग ने ये भी कहा कि ECI NET पर किसी मद्दाता का नाम जोडने या हटाने का काम निर्वाचन पंजनिया
03:17अधिकारी यानि की ERO के आदेश के बिना नहीं होता
03:20इसका मतलब है कि आयोग के अनुसार मद्दाता सूची से नाम हटाने या जोडने के लिए निर्धारित प्रक्रिया और सक्षम
03:26अधिकारी का आदेश जरूरी है
03:29गुवा का उधारन देते हुए आयोग ने उन 97 मद्दाताओं के बारे में भी जानकारी दी जिनकी सूची से छूटने
03:37की बात कही गई थी
03:38आयोग के अनुसार इनमे 88 पहले से ही मद्दाता सूची में शामिल थे छेविदेश में थे और तीन के पास
03:44पुर्तगाली पासपोर्ट था
03:46ये आयोग की ओर से दिया गया स्पष्टी करन है इन आकणों के आधार पर पूरे SIR की प्रक्रिया के
03:51बारे में कोई व्यापक नुश्कर्श निकालने से पहले संबंधित रिकॉर्ड और संदर्व को देखना जरूरी होगा
03:58के मुखे चुनाव आयोगत के खिलाफ याचिका सुनवाई योगय नहीं?
04:14इसी आधार पर आयोगा कहना है कि CS को उन Usir क करताव्यों के निर्वहन से रोकने की मांगवाली याचिका
04:21सुनवाई योगय नहीं है
04:23यहां एक बात समझना जरूरी है। यह चुनाव आयोग की ओर से अदालत में रखी गई कानूनी दलीले हैं। सुप्रिम
04:29कोट का अंतिम फैसला नहीं है। या चुका कि पोश्णियता यानि अदालत में उस पर सुनवाई हो सकती है या
04:34नहीं सकनर नहीं आयाले आगे करेगा।
04:37आयोग ने ये भी कहा कि उसने किसी आंतरिक नोट या फाइल को मीडिया से साज़ा करने की अनुमती नहीं
04:43दी थी। दशेहरा अवकाश के कारण आयोग ने फिलहाल संचप्त जवाब दाखल किया है और विस्तरत बिंदुवार जवाब देने की
04:50अनुमती मागी है। तो अ�
05:04सायार से जुड़े आदेश उसामुहिक सम्मती से और सहमती से लिए गए हैं और नर्धार इतनियमों के तहत ही लागू
05:10किये गए हैं। आखिरकार इस विवाद कम है तो इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि मद्दाता सूची लोगतांतरिक प्रक्रिया की बुनियाद
05:17है। लो
05:34आयोग ने अपना पक्ष रख दिया है लेकर इस मामले का कानून निशकर्ष अदालत के फैसले के बाद ही सामने
05:39आने वाला है। उस खबर में इतना ही आप क्या सोचते हैं हमें कॉमेंट में जरूर बताइए और हाँ अदालत
05:44के आगे आने फैसल उपर हमारी नजर बनी रह
05:46आने वाली है तो जो भी नए अपडेट्स आएंगे आप तक हम पहुंच आते रहेंगे तब तक बाकी खबरों के
05:51लिए देखते रही है One India Hindi