00:00उर्वा एक हंस्ती खेलती लड़की थी,
00:03जिसे नहीं मालूम था कि जिन्दगी का एक लम्हा उसकी पूरी दुनिया बदल देगा.
00:09अबू, अगर जिन्दगी हमेशा ऐसी ही खुबसूरत रहे, तो कितना अच्पा हो?
00:16उर्वा अपनी सहेलियों के साथ पिकनिक मनाने के लिए ट्रेन में सफर कर रही थी.
00:21सब दोस्त खुशी से गीत गा रहे थे, हस रहे थे.
00:24अचानक ट्रेन एक सुनसान रास्ते से गुजरते हुए, जोरदार जटकों से लर्जने लगी.
00:54अचानक होने वाले हादसे ने उर्वा की जिंदगी बदल दी.
01:00जब उसने आँखें खोली, तो उसे अपना नाम तक याद नहीं था.
01:04बेखबर और परेशान उर्वा भटकती हुई रेलवे लाइन के करीब पहुँच गई.
01:09उसे ना अपने घर का पता था, ना अपने माजी का.
01:12तुम यहाँ अकेली क्या कर रही हो? तुम्हें किसी मदद की जरूरत है?
01:16मुझे नहीं मालूम, बस मुझे डर लग रहा है.
01:20डरो मत, मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगा.
01:22आप मुझे जानते हैं?
01:23नहीं, लेकिन किसी की मदद करने के लिए उसे जानना जरूरी नहीं होता.
01:28साहिल उर्वा को अपने घर ले आया.
01:30उर्वा हर चीज को हैरत से देख रही थी.
01:33जैसे दुनिया उसके लिए बिल्कुल नहीं हो.
01:36क्या मैं यहाँ रह सकती हूँ?
01:37फिलाल तुम यहाँ महफूज हो, फिकर मत करो.
01:39अगर मैं आपको परिशान करूं तो?
01:41परिशानी तब होती है जब कोई तकलीफ में हो और हम उसकी मदद ना करें.
01:44साहिल, क्या मेरा भी कोई घर है?
01:46यकीनन है, और वहाँ कोई तुम्हारा इंतजार भी कर रहा होगा.
01:49फिर वो मुझे लेने क्यों नहीं आता?
01:51शायद वो भी तुम्हें तलाश कर रहा हो.
01:55साहिल, उर्वा का खयाल रखने लगा, और उर्वा उस पर ऐसा भरोसा करने लगी, जैसे वो बरसों से उसे जानती
02:01हो.
02:22आपके पास बैठकर मुझे अच्छा लगता है.
02:24क्यों?
02:25पता नहीं, बस दिल नहीं डरता.
02:27शायद इसलिए कि अब तुम खुद को अकेला नहीं समझती.
02:30हाँ, क्योंकि अब मेरे पास आप हैं.
02:32साहिल, आप इतने संजीदा क्यों रहते हैं?
02:34और तुम हर वक्ट शरारतें क्यों करती रहती हो?
02:37क्योंकि आपको हसाना मेरा काम है.
02:39फिर तो मुझे तुमें मुलाजमत पर रख लेना चाहिए.
02:42तुमें कितनी बार का है कि गाउं के लोगों से बात ना किया करो?
02:45कोई तुमें बहला फसला कर कहीं ले जाएगा?
02:47फिर मैं तुमें कहां ढूंडता फिरूंगा?
02:49एक चोटी सी गल्ती पर साहिल ने उर्वा को डांट दिया.
02:52उर्वा खामोशी से घर से निकल गई और साहिल को अपनी सखती पर पच्चतावा होने लगा.
02:57उर्वा, तुम कहां चली गई ओ, वापिस आ जाओ.
02:59उर्वा, मैंने तुम्हें डांटा जरूर था, मगर तुम्हें खोना नहीं चाहता था.
03:03आपको मुझे गुस्सा नहीं करना चाहिए था.
03:06तुम ठीक कहती हो. उर्वा तुमने मुझे कितना परिशान कर दिया.
03:09आप मुझसे नाराज हैं?
03:10नाराजगी अपनी जगा, मगर तुम्हारी फिकर उससे कहीं ज्यादा है.
03:13तु फिर मुझे डांटे मत.
03:14वादा करता हूँ, पहले तुम्हारी बात सुनूँगा, फिर फैसला करूँगा.
03:17साहिल को एहसास होने लगा कि उर्वा की मौझूदगी उसकी जिन्दगी का एहम हरा बन चुकी है.
03:22लेकिन वो अपने जजबात को नाम देने से ढरता था.
03:25दूसरी तरफ, नवाब फरीद अपनी बेटी की तलाश में दर दर भटक रहे थे.
03:30हर गुजरता दिन उनकी उमीद को कमजोर करता.
03:33एक शख्स ने उर्वा को पहचान लिया और नवाब फरीद को उसके बारे में इत्तिला दी दी.
03:47नवाब फरीद साहिल के घर पहुँचे, मगर उर्वा ने उन्हें पहचानने के बज़ाए, खौफ से साहिल का हाथ पकड़ लिया.
03:55उर्वा, मेरी बच्ची, मैं तुम्हारा अब्बू हूँ. बेटी, मैं तुम्हें लेने आया हूँ.
04:00लेकिन मैं आपको नहीं जानती. तुम मुझे भूल गई हो, मगर मैं तुम्हें एक लम्हे के लिए भी नहीं भूला.
04:05साहिल, क्या ये मुझे आपसे दूर ले जाएंगे?
04:07ये तुम्हारे अब्बू है, उर्वा.
04:09और आप?
04:10मैं यहीं रहूँगा.
04:11फिर मैं किसके साथ हंसूंगी?
04:13तुम्हारे अब्बू तुम्हें बहुत प्यार करेंगे और यहीं मेरे लिए काफी है.
04:15अपना ख्याल रखना, अर्वा.
04:17आप मेरे साथ क्यों नहीं चलते?
04:19क्यूंकि तुम्हारी अपनी दुनिया है.
04:20क्या मैं आपको दुबारा देख सकूंगी?
04:22कुछ मुलाकाते हमारी मर्जी से नहीं किसमत से होती है.
04:25साहिल के लिए ये लमहा इंतहाई मुश्किल था.
04:28वो उर्वा को अपने पास रखना चाहता था.
04:30मगर उसे मालूम था कि उसे अपने खांदान से मिलने का हक है.
04:34साहिल ने अपने दिल पर पत्थर रखकर उर्वा को उसके वालिद के हवाले कर दिया.
04:40तुम्हारे जाने के बाद ये घर फिर खामोश हो गया है.
04:42मगर इस बार खामोशी पहले से ज़्यादा तकलीफ देती है.
04:45पहले मैं तनहा था तो तनहाई मेरी आदत थी.
04:48अब तुम्हारे बाद ये मेरा दर्द बन गई है.
04:49इलाज के दोरान उर्वा की पुरानी यादें आहिस्ता आहिस्ता वापस आने लगी.
04:54वो अपने घर, अपने वालिद और अपने माजी को पहचानने लगी.
04:57साहिल ने हिम्मत नहीं हारी.
04:59उसे उमीद थी कि अगर उर्वा उसे दुबारा देखेगी,
05:02तो शायद उसके दिल में कोई पुरानी पहचान जाग उठे.
05:25नवाब फरीद उर्वा को घर ले जाने के लिए स्टेशन पहुंचे.
05:29खबर मिलते ही साहिल आखरी मुलाकात के लिए दौड पड़ा.
05:35साहिल ने उर्वा को पुरानी खुशियां याद दिलाने की आखरी कोशिश की,
05:39मगर वो उसे पहचान ना सकी.
05:41साहिल तनहा स्टेशन पर खड़ा रहा.
05:44उर्वा के लिए उसके दिल में नफरत नहीं,
05:46सिर्फ वो यादें थीं जिन्हें वो कभी मिटा नहीं सकता था.