00:00हम सब के लिए सौभा के काच्छन है और मेरे लिए इसलिए विशेश है कि दिल्ली प्रदेश के कायकरता तो
00:09कई बार इस परिसर में आये होंगे
00:14लेकिन मैं बिहार से पार्टी के काम करने के बाद राश्टियस्तर प्रजब पार्टी ने मौका दिया
00:27और उसके बाद पहली बार जन्संग की जब स्थापना दिवस पच्छत्तर हिरक जैनती हम मना रहे हैं
00:36तो उस स्थल पे आने का मौका मिला जहां से ये सफर शुरूआ है तो मैं इस पवित्र स्थान को
00:44इस बड़े एतिहासिक स्थान को नमन करता हूं अभी नंदन करता हूं
00:54भारती जन्ता पार्टी के हमारे प्रदेश के अध्यक्ष आधनिय हर्ष मलोत्रा जी ये बात सही है अध्यक जी ने कहा
01:02पहले ये कायक्रम 75 वर्ष के मुंबई में तै हो रहा था
01:09और एक बड़े कायक्रम की योजना महराष्ट्र प्रदेश बना रही थी लेकिन उसी बीश चर्चा हुई इस स्थान की और
01:19इस स्थान के सभागार की जहां से इसकी नियू रखी गई
01:23तो मुझे भी लगा कायक्रम का स्वरूप किसी भी प्रकार का छोटा और बड़ा हो सकता है पर वो अस्थान
01:31पवित्र है जहां से इसका उद्गम हुआ और मैंने भी अध्यक जी से कहा कि मुझे उसी अस्थान पे उस
01:40कायक्रम में जाना है और कायक्रम का जो रूप रेखा �
01:43भी था, वो संस्परन सुनने का ही है, हमारे मानिय मुक्भमांतरी आदिन्या जिनके लोकप्रिय नत्रत में दिल्ली में लगतार हम
01:56अपने सपनों का दिल्ली बनाने में लगे हैं, वैसे अपनी मानिय स्रीमति रेखा गुप्ताजी,
02:03हमारे बिधान सवा के अध्यक्ष वरिष्ट नेता आदनिय विर्यंद गुप्ता जी
02:09दिल्ली प्रदेश की अपनी शव प्रभारी के रूप में लगत सक्रिय योगदान देने का काम कर रही
02:16आदनिय स्रीमती दर्शना जगदोज जी
02:20हमारे वरिष्ट जिनको कई बार मैंने प्रसिक्षन के काईक्रमों में सीखा है
02:26और आज भी जब वो अपना संबोधन कर रहे थे
02:30तो प्रसिक्षन के समय किस प्रकार के अनुशाशन होनी चाहिए
02:34और एक वक्ता जब बोलता है तो किस प्रकार का उम्मीद अपने स्रोता से करता है
02:40उस सैली को भी उन्होंने हम सब को सिखाने का प्रयास किया
02:44आदनिय स्री महेश्चन सर्मा जी को मैं बहुत बहुत परणाम करता हूँ
02:48बार तेंता पार्टी के सहसंगठन महामंतरी आदनिय बीस सतीर जी
02:53हमारे वरिष्ट अभी सो वर्ष जिन्होंने पूरा किया
02:58उसके बावजूद भी वो हमारे बीच में उपस्तित होके इस काईक्रम को मैं आये
03:02आदनिय जुगल किशोष सर्मा जी
03:04वरिष्ट हमारे ओपी बबबर जी योग ध्यान आहुजा जी आदनिय स्री लाल बिहार इतिवारी जी आदनिय शुभा सार्या जी आदनिय
03:15मूल चंद्र चावला जी
03:16आदनिय रामभज जी, आदनिय वेद ब्यास महाजन जी, आदनिय जगदीश मुखी जी, आदनिय जीतनराम सुलंकी जी
03:27सहित कई वरिष्ट हमारे अविवावक यहां बैठे हैं, मैं सभी को बहुत-बहुत हिर्दय से परणाम करता हूँ, आपका विनन्दन
03:35करता हूँ
03:39हमारे यहां पर उपस्ति सभी पार्टी के सांसद गन, मानिये मंत्री गन, पार्टी के पदादिकारी गन, मैं दिल्ली प्रदेश के
03:49पूरी टीम को बधाई देता हूँ
03:50कि आज आपने वो संस्मरन मुझे सुनाने का मौका दिया, और मैं तो अभी इस मन में ही आया था,
04:01कि मुझे आज यहां पर कुछ सीख के जाना है
04:04और साइद जग्दीजी जी ने या हमारे सभी वक्ताओं ने जो संस्मरन सुनाये हैं, वो हमारी इस पिढ़ी को भविस्थ
04:13की भाजपा बनाने के लिए जरूर काम आएगा
04:18क्योंकि इन्होंने उस बीच को रूपा जिसके फल क्या मिलेंगे, किसी ने उसकी चिंता नहीं की थी, बस केवल मन
04:35में यही था, कि भारतिय अजादी के बाद,
04:42जो भारत कैसा होना चाहिए, उस भारत की कल्पना क्या होनी चाहिए,
04:51अजादी में के समय में लाखों लोगों ने कुर्बानिया दी, सब लोगों ने किबल एक ही धे था कि मेरा
05:01भारत आजाद हो, स्वतंत्र हो,
05:05उस भारत को स्वतंत्र बनाने के साथ साथ, एक ऐसा लोगतंत्र मिले, जिसमें सब की चिन्ता हो,
05:17अंतिम वेक्ति तक विकास की योजनाये पहुचें, सांत्किति विरास्त की जड़े मजबूत हो,
05:26और देश एक श्वाविमानी देश बनकर उभरे, और जब मैं आज जन्संग से के उस पूरे चित्र को देख रहा
05:35था,
05:36तो उसमें एक सब्द का परियोग, दिली परदेश ने बहुत अच्छे सब्दों में किया, जन्संग से जन्जन की यात्रा, मैं
05:45बहुत इसके लिए विवादन देता हूँ,
05:46शायद जो सपना हमारे वरिष्ट पूरोधाओं ने देखा, मैं भी देख रहा था भारतिय जन्संग के अध्यक्षों के तस्वीरों को,
05:57तो जो सपना हमारे पूरोधा ने देखा, कहीं न कहीं उस सपने को सकार करने के लिए हमको जन्जन की
06:05इस विकास यात्रा में हर वेक्ति को विकास के साथ जोडने का संकल्प जो मानिये पधान मंत्री नरेंद मोदी जी
06:11ने दिया है,