00:00अनुबव उसका ये है कि विश्वत में भारत के प्रती एक नया कुतुहल जग रहा है।
00:09भारत की और ज्ञान गया है। देश का स्थान बढ़ा है। देश आगे बढ़ रहा है। वैसे भारत के प्रती
00:17जिद्नियासा भी बढ़ रही है।
00:19क्योंकि जडवाद, व्यक्तिवाद और सयम रहित उपभोग पर आधारित उनका जो जीवन चलता है। अधूरी दृष्टी के कारण जो समस्याएं
00:29उनके जीवन में उत्पन्नों हुई है। भावतिक दृष्टी से सर्वसंपन्नों होने के बाद भी उन समस्याओं की चिंता
00:37उनके मन में है। उनको ये पता नहीं है कि इतनी बड़ी विधताओं को दुनिया की कैसे सम्हालें एक साथ।
00:47विकास और परियावरण को एक साथ कैसे चलाएं। जो अपने जैसे नहीं है। उनसे भी अपने पन से कैसे बरतें।
00:57कुटुम्ब का जीवन उसमें क्षरण हो रहा है। नई EPD के संस्कारों में क्षरण हो रहा है। उसको कैसे रोखना
01:06आजी समस्याओं का उत्तरून के पास नहीं है।
01:10और इसलिए हम देख रहे हैं कि सब ठीक होने के बाद भी विश्व में प्राकृतिक तनाव तो बढ़ा ही
01:18रहे हैं। भूराजन इतिक तनाव भी बढ़ रहे हैं।
01:21आर्थिक अनिष्टितता और पर्यावरणिय संकट और वर्चस्व की लढ़ाई से विनाश हो रहा है। यह हम देख रहे हैं।
01:30और दुनिया यह जानती है कि भारत के पास इसके उत्तर है। और इसलिए भारत अगर बढ़ा हो रहा है
01:38तो भारत का कहना क्या है।
01:41इसको बड़े ध्यान से सुनते है हमारे कारेकरताओं के वहाँ के बाशनों को वहाँ के कत्थ्यों को और बहुत ध्यान
01:49से सुना गया और उसकी चर्चाय भी चल पड़ी है।