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00:00This is the village of Haryali, where people were happy and happy.
00:04The village of Hira's name was a man named Hira.
00:10Come here! Come here!
00:13Eat the most popular, the most famous Hira's house.
00:15If you eat one time, you will never forget.
00:18And you will go to the house of 2,000 rupees.
00:21The village of Ganga Ram was listening to his house,
00:25and he stopped listening to Hira's voice.
00:27You are a man named Hira.
00:29You will eat the same?
00:31You are a man named Hira.
00:33I am a man named Hira.
00:34This is the thing.
00:35But you can eat the same thing.
00:36The village of Hira is not the same.
00:39But the village of Hira's house is only 2,000 rupees of money.
00:46You will be a man named Hira.
00:47This is a matter of 6.
00:49The village of Hira.
00:50The village of Hira.
00:53Now I am a man named Hira.
00:55I don't know.
01:25ौफ अरे बापरे ये क्या खिला दिया रे तुने ये गोल कप्पा है या मिर्च का गोला पानी दो कोई
01:32चल्दी से ठंडा पानी दो मुझे
01:35क्यों गंगाराम भाई निकल गई सारी हेकडी केवल एक ही गोल कप्पा खा पाए और ढोल पीट रहे थे
01:40शर्त के मुताबिक तुम हार गए हो तो आप पूरे पैसे निकालो ये ले अपने पैसे पर भाई तेरे इन
01:47गोल कप्पो का तीखापन कोई भी साधारन इंसान बरदाश्ती नहीं कर सकता
01:51पैसों के लिए शुक्रिया चौधरी जी अब बताओ अगला सूर्मा कौन है जो 2000 रुपई का इनाम जीतना चाहता है
01:57हीरा के 2000 रुपई के नकद इनाम की बात पूरे चौराहे पर आग की तरह पहल गई
02:02थोड़े ही समय में वहां गाउं के नौजवानों और पिसानों का भारी ताता जमा हो गया
02:07हर किसी को लग रहा था कि गंगाराम तो कमजोर निकला लेकिन वो खुद 6 गोलगपे आसानी से खा लेगा
02:13हीरा मन ही मन बहुत खुश हो रहा था क्योंकि वो जानता था कि उसकी मिर्च का तीखापन सहना किसी
02:19के बस की बात नहीं थी
02:20हटो हटो सब पीछे हटो तुम सब गीधर हो हीरा अपने 2000 रुपए निकाल कर मेज पर रख दे आज
02:27तेरा ये ठेला मैं ही खाली करूँगा
02:29वा बलदेव भाई तुम्हारी हिम्मद देखकर बड़ा अच्छा लगा ये लो तुम्हारा पहला गोलगप्पा जरा संभालना अपनी जीब को
02:36बलदेव ने बड़ी घमंड के साथ पहला गोलगप्पा मुँ में ढखे लिया कुछ सेकेंड तक तो उसने दर्द दबाया लेकिन
02:43जैसे ही तीखापन पीट में उत्रा उसकी पसीने छूट गए फिर भी लालच में उसने दूसरा गोलगप्पा भी खा लिया
02:52उमाथा घूम गया रे मेरा हीरा इसमें तुने कौन सी तीखी मिर्च में लाई है रे बलदेव भाई अभी तो
02:59सिर्फ दो ही गोलगप्पे हुए हैं चार और बाकी हैं हिम्मत मतारो भाई दो हजार रुपए तुम्हारा इंतजार कर रहे
03:04हैं
03:05ना भाई ना दो हजार रुपए जाए भाण में मैं और एक भी गोलगप्पा नहीं खा सकता मुझे तुरंत मीठा
03:11पानी दे वरना मैं यहीं गिर पड़ूगा
03:14देख लिया ना शर्त तो शर्त होती है बल्देव भाई अब चुपचा पूरी एक प्लेट गोलगप्पों के पूरे पैसे निकालो
03:20यहां कोई मुफ्त में भंडारा नहीं चल रहा है
03:27अरे हीरा तु यह सही काम नहीं कर रहा है तु इतना तीखा पानी बनाता है कि कोई दो तीन
03:33गोलगप्पों से ज्यादा खा ही नहीं सकता तु तो गाउं के मासूम लोगों को इनाम का लालच देकर उनके पैसे
03:39एट रहा है
03:39अरे काका मैंने किसी की जेब से जबरदस्ती पैसे निकाने है क्या मैं तो साफ साफ शर्ट बता कर गोलगप्पे
03:45खिलाता हूँ जिसकी हिम्मत हो वो खाये जिसकी हिम्मत ना हो विद्दूर खड़ा हो कर तमाशा देखे मैं तो बस
03:50अपनी महनत की कमाई ले रहा हूँ
03:52ये महनत नहीं, सरासर ठगी है, तु लोगों की लाचारी और लानच का फायदा उठा रहा है, काका मेरे सामने
03:59ग्यान मत बाटो, अगर गाउं में कोई ऐसा शूरवीर है जो 6 गोलगप्ते खा सके, तो उसे सामने लाओ और
04:04इनाम ले जाओ, वरना मुझे अपना काम करने दो.
04:22ुशामपुर गाउं में, जहां भरी दोपहर में खेतों में किसान पसीना बहा रहे थे, उसी गाउं के एक बड़ी जमीनदार
04:27के खेत में संजय नाम का एक घरीब और सीधा साधा किसान लगातार खेती कर रहा था।
04:52संजय के पास आया।
05:22और घर से लाया खाने का डबबा खोलने लगा।
05:27संजय के पास भले ही धन दौलत नहीं थी, लेकिन उसकी एक बहुत ही अनोखी आदत थी।
06:03उसे बचपन से ही तीखा खाना बेहत पसंद था।
06:07अरे पारवती, तू इतनी चिंता क्यों करती है।
06:25मुझे बहुत बुरा लगता है।
06:27अरे पारवती, संतोश से बड़ा कोई धन नहीं होता।
06:30महनत की कमाई की सूखी रोटी में जो सुकून है, वो किसी और चीज में कहा।
06:34और तुझे तो पताई है कि मुझे तीखा खाना कितना पसंद है।
06:38संजय ने बड़े चाव से लाल मिर्च के साथ सूखी रोटी का निवाला मुँ में रख लिया।
06:43वाह पारवती, ये मिर्च तो सच में बहुत तीखी और मज़ेदार है।
06:47इसे खाकर तो दिन भर की सारी थकान ही दूर हो गई।
06:50आप भी ना बस, हमेशा मुस्कुराते रहते हैं।
06:54भगवान करी, हमारी गरीबी के दिन जल्दी खत्म हो जाए।
06:58ऐसे ही दिन बीटते गए और एक दिन रामपुर गाउं के चौराहे पर
07:15ऐसा स्वाज जो कभी भुलाया नहीं जा सकता और ऐसा इनाम जो आपकी किस्मत बदल दे।
07:22तब ही गाव का एक आदमी मदन गोल गप्पे की रीधी के पास आया।
07:26अरे भाई गोल गप्पे तो बहुत खाए हैं पर तो किस किस्मत बदलने और इनाम की बात कर रहा है।
07:32साफ साफ बता।
07:34अरे भाईया हीरा की दुकान पर सिर्फ स्वाद नहीं दो हजार रुपे का नकट इनाम भी मिलता है।
07:40शर्त बस इतनी है कि मेरे ठेले के तीखे गोल गप्पे खाना हर किसी के बस की बात नहीं है।
07:46लेकिन जो भी लगातार छे तीखे गोल गप्पे बिना पानी पिये खा लेगा उसे मेरी तरफ से दो हजार रुपे
07:53का नकट इनाम मिलेगा।
07:55बस शे गोल गप्पे अरे ये तो मेरे बाएं हाथ का खेल है। ला भाई पहला गोल गप्पा मुझे ही
08:01खिला दें। आज तेरा ठेला खाली करके ही मानूगा।
08:04लेकिन एक बात ध्यान से सुन लो अगर छे गोल गप्पे पूरे नहीं खा पाए और बीच में हार मान
08:10ली तो एक प्लेट गोल गप्पों के पूरे पैसे अपनी जेब से देने पड़ेंगे। फिर बाद में मत कहना कि
08:16हीरा ने बताया नहीं था।
08:18हीरा की बात सुनते ही चौराहे पर लोगों का जमावरा लग दया। इनाम का लालच देखकर हर कोई अपनी बहादुरी
08:25दिखाने आगे आने लगा।
08:26मदन में बड़े घमंड में पहला गोल गप्पा मूं में रखा लेकिन रखती ही उसकी आँखे बड़ी हो गए।
08:33अरे बापरी उफ ये क्या खिला दिया तुने मेरी जीव पानी दो कोई मीठा पानी लाओ रहे है।
08:42क्यों वया हो गया खेल खतम बस एक ही गोल गप्पा खा पाए लाओ अब पूरी एक प्लेट गोल गप्पों
08:48के पैसे निकालो।
08:49तब ही गाव का पहलवान भीमा भीड को चीरता हुआ आगे आया।
08:54अरे ये लड़का कमजोर निकला, हट पीछे, मुझे खिला ही रा, मैं भी तो देखूं कि तेरी मिर्च में कितना
09:01दम है।
09:01भीमा ने पहला गोल गप्पा तो जैसे तैसे चबा लिया, पर दूसरा गोल गप्पा मुँ में डालते ही उसका चहरा
09:07लाल हो गया।
09:31अरे ये लड़का हारा अपने घर की ओर लोट रहा था, जैसे ही वो गाउं के चौराहे पर पहुँचा, उसे
09:36हीरा के थेले के पास जमा भारी भीड और जोर-जोर से हसने की आवाजे सुनाई दी।
10:02तब ही भीड के बीच में से गाउं का एक लड़का सिसकते हुए बाहर निकला।
10:08अरे बाबरे, कोई पानी पिलाओ रे, कोई भूल कर भी इसके ठेले के पास मत जाना।
10:14इतना तीखा है क्या? लोग तो खास रहे हैं, पर मुझे तो ऐसा ही तीखा खाना पसंद है।
10:21हैर, मेरी जेब में तो फूटी कौडी भी नहीं है। अगर आज घर के लिए थोड़ा आटा ले जाना है,
10:26तो इन फालतू चीजों का खयाल दिल से निकाल नहीं होगा।
10:29संजय अपनी खाली जेब पर हात फेटे हुए अपने घर की तरफ बढ़ गया। तभी अगले दिन दोपहर के समय,
10:36कड़क धूप में संजय जमीदार के खेट में खेती कर रहा था। जब दोपहर के खाने का वक्त हुआ तो
10:42वो पेड़ की ठंडी चाओं में बैठ गया। उ
10:59अरे संजय तिरा दिमाग तो ठीक है ना, ये कच्ची लाल मिर्च ऐसे चबा रहा है जैसे कोई मेठी गाजर
11:05खा रहा हो, तुझे तीखा नहीं लगता क्या भाई। अरे बिल्लू भाई, आओ बैठो, अरे कैसा तीखा पन भाई, मुझे
11:12तो बच्पन से ही तीखा खाने का �
11:14जब भी मेरा पास सबजी के पैसे नहीं होते, तो ये मिर्ची मेरी सबजी बन जाती है, हरे भाई, तू
11:20तो महा बली निकला, और तू यहाँ खेत में बैठकर सूखी मिर्च बा रहा है, जबकि चौराहे पर एक बाहरी
11:25गोलगप्पे वाला पूरे गाउं को नीचा दिखा �
11:29गोलगप्पे वाला? हाँ, कल शाम मैंने भीर तो देखी थी, पर बात क्या है बिल्लू भाई? हरे बात मत पूछ,
11:36हीरा नाम का एक शातिर गोलगप्पे वाला आया है, वो शर्त लगाता है कि जो उसके छे सबसे तीखे गोलगप्पे
11:42खा लेगा, वो उसे दो हजार रुप
11:58कमाई या किसी भी तरह की शर्त बाजी में रत्ती भर भी दिल्चस्पी नहीं थी, अरे बिल्लू भाई, मुझे इन
12:04सब शर्तों के चक्कर में नहीं पड़ना, इंसान को अपनी किस्मत और मेहनत की कमाई में खुश रहना चाहिए, लालच
12:09बूरी बला है, और वैसे भी मैं �
12:11शर्त लगा कर पैसे जीतने वाला आदमी नहीं हो, अरे संजय, तु मेरी बात समझ क्यों नहीं रहा, वो हीरा
12:16कोई इमांदार व्यापारी नहीं है, वो तीखे पानी का ढोंग रचकर गाउं के सीधे साधे लोगों को बेवकूफ बना रहा
12:22है, वो गाउं वालों के पसीने क
12:24कमाई को ठग रहा है, तू मिर्च खा सकता है, तो तू क्यों नहीं उसकी अकड धीली करता है, बिल्लू
12:28भाई जो लालच में उसके पास जा रहे हैं, वो अपनी गलती से पैसे गवा रहे हैं, मुझे किसी की
12:33अकड धीली करने या जूटी वहवाही लूटने का कोई शौक न
12:54आस-पास के 5-6 गाउं के गरीब लोगों को लूट कर अब हमारे रामपूर में आ जमा है, प्रणाम
12:59मुखिया जी, पर इसमें मैं भला क्या कर सकता हूँ, मैं तो एक छोटा सा मजदूर हूँ, बेटा, बात सिर्फ
13:05शर्त की नहीं, गाउं के स्वाभिमान की है, वो हीरा हमा
13:30मुखिया जी, मुझे इनाहम के पैसों का कोई लालच नहीं है, लेकिन अगर मेरी वजह से गाउं के लोगों की
13:35भलाई होती है, और उस ठक का घमन तूटता है, तो मैं जरूर जाऊंगा
13:43उसी शाम जब सूरज ढलने को था, और रामपुर के मुख्य चौराहे पर गाउं वालों की भयंकर भीर जुटी हुई
13:50थी, मुख्या जी बिल्लू के साथ हीरा के ठेले की तरफ बढ़ी, बिल्लू के फटे पुराने कपड़े देखकर हीरा जोर
13:57-जोर से हसने लगा, उसे ल
14:08कैसे शूर वीर मैदान में उतर रहे हैं, अरे ओ भाई, फटे कपड़े पहने यहां क्या करने आये हो, गुल
14:14गप्पे खाने की हिम्मत है या बस मुफ्त का तमाशा देखने आये हो, अरे भाई हीरा, इनसान के कपड़ों से
14:20उसकी ताकत का अंदाजा नहीं लगाया जाता, स
14:38चलो, अगर पैसे लुटाने का इतना ही शौक है, तो ये लोग पहला गोल गप्पा, हीरा ने पहला गोल गप्पा
14:45संजय की तरफ बढ़ा दिया, संजय ने बिना किसी हिचकी चाहट के गोल गप्पा मुँ में रख लिया, हीरा बड़ी
14:51उत्सुकता से संजय की चहरे पर दर
15:09संजय की शांती देख कर हीरा के माथे पर पहली बार चिंता की लकीरें उभराई, उसने चुक्की से ठेले की
15:16नीचे रखी सबसे भयंकर काली और लाल मिर्च की गाड़ी चटनी निकाली और गोल गप्पे में ठूस ठूस कर भर
15:22दी, अच्छा, तो तुझे तीखा कम लग र
15:41संजय ने दूसरा और फिर तुरन तीसरा गोल गप्पा भी मजे से चबा कर खा लिया, इतने तीखे गोल गप्पे
15:47होने के बाद भी संजय ऐसे खा रहा था जैसे कोई मीठी पूरी खा रहा हो, उसके चहरे पर वही
15:52पुरानी शांत मुस्कान तैर रही थी, इसके बाद हीरा
15:56ने घबराते हुए चौथा, पाँचवा और फिर छठा गोल गप्पा संजय को धमा दिया, ये ये चठा और आखरी गोल
16:03गप्पा है, खा कर दिखा इसे, वाही रभाई, छै के छै गोल गप्पे पूरे हो गए, मिर्च सच में अच्छी
16:10थी, पर मेरी जीब और पेट को इस
16:26आज उसी तीखेपन के सामने एक साधारण और गरीब किसान धाल बनकर खड़ा था, ये कैसे हो सकता है, मेरे
16:34ठेले के गोल गप्पे के मिर्च वाले पानी की एक बूम से बड़े बड़े सूर्मा पानी मांगने लगते हैं, तुन्हे
16:40बिना एक आंसु बाहे पूरे छे गोल
16:46कार, क्यों हीरा भाई निकल गई सारी अकड, कल तक तो तु रामपूर के लोगों का मजाक उड़ा रहा था
16:52न, अब देख ले हमारे गाउं का संजे भाई कैसा है, निकाल अप चुपचाप शर्त के 2000 रुपए, हाँ हाँ
16:58निकाल पैसे, रोस तु गाउं वालों को छल कपट
17:01से लूट कर भाग जाता था, आज तेरी चलाकी का अंत हो गया, हीरा ने थर्थराते हाथों से 2000 रुपए
17:08निकाल कर संजे की तरफ बढ़ाई, ये लीजे संजे जी, आपके 2000 रुपए, आज आपने मेरी आँखे खोल दी, मुझे
17:15लगता था कि दुनिया में पैसों और चलाक
17:19बनाया जा सकता है, पर आज मुझे समझ आया कि छलकपट की उम्र बहुत छोटी होती है, हीरा भाई, पीखापन
17:27मिर्च में नहीं, इनसान की नियत में होता है, तुमने अपने हुनर का इस्तिमान लोगों को गोलगप्पे खिलानी के लिए
17:32नहीं, बलकि उनका लालज भुन
17:52अरे संजय बेटा, ये तो तेरी शर्त की जीत के पैसे है, तु दिन रात खेतों में महनत करता है,
17:58और तेरे घर में तो राशन तक नहीं होता, तु ये पैसे खुद क्यों नहीं रख लेता, नहीं मुखिया जी,
18:03मेरी मा कहती थी कि महनत और पसीने की कमाई से बढ़कर कोई �
18:07धन नहीं होता, शर्त या तुक्के से मिले पैसों से कभी पेट नहीं भरता, मैं तो बस अपने गाउं का
18:11सम्मान बचाने और हीरा भाई को सही रास्ता दिखाने आया था, मुझे महनत की दो रोट्या ही मुबारक है, संजय
18:17भाई मुझे माफ कर दो, मैंने तुम्हारी गरी�
18:33जिसके बाद हीरा ने खटे, मीठे और स्वादिष्ट पानी से गोल गपे बेचना शुरू कर दिया, और संजय हमेशा की
18:40तरह मुस्कुराते हुए वापस अपने घर की ओर बढ़ गया, तो दोस्तों, आप लोगों को ये कहानी कैसी लगी, कमेंट
18:46करकी ज़रूर बताएं, �
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