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  • 3 days ago
स्वास्तिक यात्रा के जरिए देश को एकसूत्र में पिरोना मकसद, देखें क्या बोले मोरारी बापू

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00:07नमस्कार मैं हूँ श्पीता सिंग और आप देख रहे हैं आज तक ये जो समय होता है पूरे भारत वर्ष
00:13में त्योहारूं का समय होता है
00:15नवरात्र चल रहे हैं, दशेहरे की प्रतीक्षा है, दीपावली का परवाने वाला है, महापर छठ उसके बाद हो जाएगा
00:22तो अभी एक-एक आप जितनी गिंती गिने उतना पावन समय यह है और ऐसे समय में एक बहुत पावन
00:28विक्ति हमारे साथ इस समय जुड़ रहे हैं
00:31मुरारी बापू हमारे साथ है बहुत-बहुत आपका स्वागत है बापू
00:35स्वास्तिक यात्रा के साथ निकले हैं बापू और इसमें आप ऐसे समझे कि अगर संपूर भारत के नक्षे को आप
00:43देखेंगे तो उसमें एक स्वास्तिक का चिन्न बहुत सुंदर तरीके से आकृत होता है
00:48क्या आपकी सोच रही है बापू इस यात्रा पर निकलने के लिए
00:54जगत गुरु आदी शंक्राचारी बगान ने
00:58पूरब पश्चिम उतर द्रक्षिंग चार पीठ सापित करके भारत को जोडने के एक बहुत
01:10उपकारक निर्णे किया था उसने चार पीठ सापित करके जोडने का तो काम किया है
01:17इसी परंपरा में महत्मा गांधी भी चले जिसने पूरे बारत की आत्रा की
01:27विनोबा जी ने भी पदी आत्रा की भुदान की आत्रा और पुर भारत में की पार्ट
01:33हमारी यात्रा इन सभी पुर्व यात्राओं की शुब काम ना प्राप्त करके उसके पद चिन्ह पर चलते चलते यह अध्यात्मी
01:45की आत्रा है
01:48मानवी का मन, मानवी का चीत, मानवी की बुद्धी परस पर जूड जाएं
01:59हम अपने जीवन में हमारे वर्तमान में भी भारत का विशेश रूप में
02:08मैं कहता रहता हूँ कि भव्य भारत तो पहले रहा ही
02:15आचारियों ने उसको दिव्य भारत बना दिया
02:19कहीं सादु संतों ने उसको सेव्य रूप दे दिया
02:23कि भारत सेवन करने जैसा मुल्क है
02:27और कहीं लोगों ने उसको नव्य रूप दिया
02:31तो यह आत्रा सभी आत्राओं की चिनन पर चलते हूए अध्यात्म की आt्रा
02:46जैसे दिल मिला लेते हैं अगर हाथ मिलने वाले, यह जो शेर है
02:51हाथ तो हमने बहुत मिला यह, मिलने चाहिए, लगिन अब दिल मिल जाए
02:56तो देश एक हो जाए, देश अखंड हो जाए, देश महान हो जाए, जो है विशेश रूप में हो जाए.
03:05आपने तो पहले भी बहुत यात्राइं की हैं, अलग-अलग रूप में की हैं, जोतिरलिंगों के साथ अगर समूचे भारत
03:13को एक करने की यात्रा हो,
03:14को या फिर जहां जहां राम चलन चलन जाहीं वहां भी उस रास्ते पे भी आप निकले स्वास्तिक क्यों स्वास्तिक
03:24से क्या अर्थ समझें स्वास्तिक का अर्थ शब्द कोशों में और वेद से लेकर हमारे लोग तक स्वास्तिक का अर्थ
03:35है सब का शूब
03:38सब का कल्यान
03:39सब का मंगल
03:42इस वस्ती के
03:43सगूतरी अर्थ है
03:45तो
03:47इसके पीछे
03:48एक यही मनोभाव है
03:50कि भारत
03:52में चल रही यातरा
03:55द्यात्मिक यातरा के थ्रू
03:58भारत का
04:00शूब, मंगल
04:01कल्यान हो और भारत के थ्रू
04:03पूरे विश्व का
04:06कल्यान हो मंगल हो
04:09बहुत चर्चा बापू होती है
04:11विश्व गुरू भारत की
04:13आपको लगता है इस समय हम उस भूमिका में है
04:18पहले हम
04:19विश्व गुरू के रूप में रहे ही है
04:24बीच में या तो हम भूल गए
04:26या तो भूलाया गया ख़बर ने
04:27बीच का काल ने क्या किया
04:31लेकिन
04:31मैंने कहीं बार
04:33ऐसे साक्षात कार में भी कहा है
04:36मैं फिर दोहरा रहा हूँ
04:38मैं प्रमान नहीं दे पांगा
04:41लेकिन
04:41मेरी अंताकरण की प्रवृत्ती
04:44ये कहती है
04:46कि भारत का बविश्व
04:49एस उजवल भारत के थुरू विश्व भी विशेश
04:55रुप में प्रकाशित होगा
04:57तो विश्व को प्रकाशित करना
05:01विश्व को प्रेलीत करना
05:03विश्व को प्रेरणा देना
05:05ये कारिय भारत करे हुँ
05:09वह जगध गुरुव locked ka विश्व गुरूव John Kaur
05:14आपने विश्व को प्रेवना देने की बात की और उससे पहले वाले प्रशन में आपने कहा कि दिल मिलाने की
05:20आवशकता है।
05:22आपको लगता है कि कुछ दिल छिटक रहे हैं, बिखर रहे हैं।
05:27हम देखते रहते हैं, प्रिंट मिडिया के द्वारा करनों पकरनों हम देखते रहते हैं कि अरेक छेतर से कुछ लिकिन
05:41थोड़ा हम तूटे जा रहे हैं।
05:47विभक्त हो जाएं। इसे समय में फिर एक बार ऐसा प्रयास हो।
05:54कि हम संग अच्छ द्वम, वेद कहता है, हम एक साथ चले।
06:01वेद ने आदिकाल से का, संग अच्छ द्वम, एक साथ चले।
06:07संवदद्वम, हम एक साथ बोले।
06:11क्योंकि सूरिया चंद्र यह हमारे जो पुर्वज है, वो ऐसे ही चले थे।
06:17तो कभी कभी लगता है कि हम संग संग सास नहीं चल पार है, कहीं बोध है, कहीं विरोध है,
06:24और एक आवाज में, एक भारती आवाज, जो भारती नाद है, इस सिंग नाद, शंख नाद, दमरू का नाद, मेघ
06:37नाद, वरुन नाद, जो नाद है, वो भारत का एक नाद हो, एक �
06:44आवाज हो तो इसलिए हमें प्रमानिक प्रयत्न करने चाहिए प्रमात्मा करे उसका शुप प्रिणाम हो
06:56आधिगुरु शंकराचार्य और उनकी वो यात्रा की बात आपने की और वो तो एक बहुत छोटी सी आयू में निकले
07:04थे कैसी यात्रा के लिए जिस समय एकता की आवशक्ता सबको थी और उन्होंने केवल तरक के आधार पर
07:14आपको लग रहा है कि कहीं पर आज शोर शराबे में वो तरक भी छूटता है और आपकी बातें उस
07:20तरक पे तरक बहस इससे किसी को आपत्ती नहीं होती है पर टकराओ नहीं होना चाहिए शायद
07:29मेरा एक स्पष्ट मानना है कि बिना समवाद ठीक से जो परिणाम हम लाना चाहते हो नहीं आएगा अब समवाद
07:39का स्थान जब विवाग ले लेता है
07:43विवाद भी सफल नहों तो फिद दुर्वाद चलने लगता है
07:48और दुर्वाद से भी काम नहीं चलता तो फिर एक दुसरे का अपवाद शरू हो जाता है चाहे कोई भी
07:53ख्षेत्र हो इवन धर्मक्षेत्र भी
07:59तो समवाद को मैं महा मंत्र समझता हूं
08:02श्रीकृष्णा शरणंग्म्म यह तो परम मंत्र है, राम महा मंत्र है, नमख शिवा उसकी क्या महिमा है, गायत तरी मंत्र
08:12की क्या महिमा है, लेकिन इन सबी परम मंत्रों को आत्मसाथ करने के लिए
08:18समवाद का मंत्र बहुत जरूदी है
08:20और ये समवाद कहीं न कहीं खंडीत हो रहा है
08:24और फिर अपवाद, दुरवाद, विवाद
08:27इसलिए समवाद वाला वाद
08:30गीता में परमात्मा की विभूती है
08:34पगवान कृष्ण कहते है अरजुन
08:37समवाद की छाया में किया हुआ
08:39कोई आरजु करे, कोई तर्क करे, कोई ये करे
08:42उसका स्वागत है
08:44छाया समवाद की होनी चाहिए
08:46समवाद की छाया में हुआ वाद
08:48कृष्ण की विभूती है
08:53अभी नवरात्र का समय चल रहा है
08:55रामलीला का मंचन चल रहा है
08:57एक कथा जो मुझे लगता है कि कभी इस पृत्वी पर पुरानी नहीं हो सकती है
09:02हर पीड़ी अपनी रूप में उसको देखता है समझता है
09:06वो राम की कथा है
09:08बिलकुल बिलकुल
09:10सुर्य कभी हमें पुराना नहीं लगा
09:13युग बीत गए और कितने बीतेंगे ख़वर में
09:17लेकिन सुर्य पुराना नहीं लगा
09:19और जो सुर्य पुराना नहीं लगता
09:22उस सुर्य को भी जो प्रकाशित करता है
09:25वो राम कैसे पुराने लग सकते है
09:27चंदर पुराना नहीं लगता
09:29और जिस चंद्रवंश में आये भगवान कृष्ण वो कैसे पुराना लग लिखता है
09:35जिसके भाल में दूज का चांद न कभी कम होता है न कभी बढ़ता है
09:41वो महादेव के भाल वाला चंद्रवान वो कैसे पुराना होई
09:45यह सब सनातन है
09:49बाप भी हाली में किसी ने कहा एक बड़े नेता ने कहा
09:53कि राम जी अमीरों के भगवान है और शिव जी गरीवों के भगवान है
09:58यह क्या तारकिक है
10:04इस सत्य निवेदन नहीं है
10:08क्योंकि और गरंथ छोड़ दे लेकिन जिस गरंथ को लेकर मैं निकला हूँ दुनिया में
10:14उसके वल राम चरत मानस गरंथ ले और निश्पक्ष आँखों से अवलोकन करे
10:25प्रथम द्रश्टी से लगेगा कि राम सब के हैं और वन्चीत उपेक्षीत तिरस्कृत के तो पहले हैं
10:36अमीर के गर्हाने में प्रगट हुए हैं जरूर गये तो अंतिम लोगों के तक
10:42और चौदह साल तक बिना पदतरान वो आखिरी मानस में लिखा है
10:50कि राम ही केवल प्रेम प्यारा राम को पुझा इतनी प्रिय नहीं है करो तरो
10:57राम को आप प्रतिष्ठा दो वो प्रिय नहीं है दो दो लेकिन मानस में लिखा राम ही केवल प्रेम प्यारा
11:05तो राम को आप अमीर का नहीं कह सकते
11:08यह आप, जो कहते हैं उसके पाँस वह जानकारी नहीं है, वह राम्टिरत मानस को चूई नहीं है, थूँब तो
11:16अभी उनके हाथ इतने पवित्र नहीं हूई होंगे कि राम्टिरत मानस को चूप आए.
11:22तियोहारों के बीच ये समय वो भी आता है, जब हर वर्ष हम रावन को रावन दहन करते हैं, पुतला
11:27फूपते हैं
11:28और हर बार चर्चा इस बात को लेकर होती है कि भीतर के रावन को मारो
11:32ये हर वर्ष बार-बार उस रावण को जलाते हुए आपको लग रहा है समाज को अपने अंदर का रावण
11:39याद रहा है
11:39एक बार आदमी निर्वान पद पाल है कि मर गया है चलो वही शब्दी उस करे
11:49तो फुर ये उसका अगनी संसकार मानस में भी है
11:53हम प्रतिवर्ष रावण का अगनी संसकार करके पुना-पुना रावण को प्रगट कर रहे है राम ने उसको पुरा कर
12:01दिया था
12:02रावणी सब्यता समाप्त कर दी दी आसूरी वृत्ती को खत्म कर दी थी
12:07कि शिन किसी कारण हो, श्मृती के कारण, राम का जैजेकार हो, राम राज्य का आदमन के कारण ये बाद
12:14था इन सब की बात, मारिल सिक तोर से, हम उसको इक पर्व के रूप में मनाते रहे हैं, लेकिन
12:23internします
12:25गी घनी सकतु हमें झाल
12:28किसी को जलाते हैं।
12:31को ज़ुम्हा तो हमें इस पर्व के समय क्या याद रखना चाहिए????
12:36उसका ही है की हमारे ळादुर का मौह मेठे, हमारे वेटर का मोह मीटे है रावन अट्व
12:42शुक रवह सब मनाते हैजय कारते हैं
12:47लेकिन तुलसिदार जी ने तो कहा कि मोख ही रावण है, बीतर जो रावण है, उसका जितनी मातरा में नाश
12:59हो, वो दशहरा है
13:03वो दस मस्तक वाल आदमी, दशानन का मतलब है, दस परकार की बुद्धी, educated 10 परकार की बाणि
13:12कभी ये बोलेगा, कभी ये बोलेगा, कभी ये सोचेगा, कभी
13:17ये जो दस प्रकार की वृत्यों से सनलग नरावन है
13:22तो उमर भी तर बेठा है
13:25तो ये परव को इस रूप में भी हम देखना चाहिए कि वो मरे
13:29वो मरे
13:31परकि राम किसी को मारता नहीं, राम किसी को जलता नहीं, राम तरन तारन है विश्व को तारन के लिए
13:40आया
13:41बापु समवाद की बात आपने की, समवाद की एहमियत की आपने
13:46पर अगर उसी समवाद में कुछ अप शब्द निकले Zusammen 후 के छोटों से निकले
13:55तो मन दुखता है आपको लगता है ये कैसे परिवर्ते तो है इसलिए मैंने शब्द कहा कि
13:59जब समवाद आदमे को जो चाहता है वो नहीं करने देगा तो विवाद कहा है विवाद नहीं तुर्ण दुरुबाद पर
14:06आ जाएंगे
14:07फिर अपवाद फिर कुछ भी बोल सकते हैं ये भारत की भाषा नहीं है बरत भारती है तो बरत की
14:18भारती है जो ब्रमलोक में रहती है जो सरस्वती है विना वादक है शास्तर की भाषा बोलती है संगीत की
14:26भाषा बोलती है तो ये तो कहीं भी हो किसी भी रूप में मुझे इस
14:41पर पूरी पीड़ी तो ऐसी नहीं हम देख रहे हैं कि हमारी नई पीड़ी जो है बड़ी संख्या में आपकी
14:47कथाओं में भी हर पीड़ी के लोग हमें देखते हैं
14:49महाकुम्भ में हमने देखा अभी आयुध्या नगरी में जब दीपोटसफ होगा तो छोटे बच्चे युवा सब निकलते हैं वहाँ पर
14:57तो क्या जो शोर करके या तेज बोलता है वो ज्यादा दिखता है लगता है कि सब कहीं ऐसे हूँ
15:05नहीं ऐसा जो बोले किसी कारण वर्ष ये बोलने के लिए वो बाद्य हुए हो ख़बर नहीं लेकिन जिसके लिए
15:15बोला जाए हम सामने से जाकर समवाद करे है हमारे देहातों में हमने देखा मैं आज भी देहात में रहता
15:25हूँ कि तीन-तीन पीडियों का वैर होता है लेकि
15:29लेकिन दीपावली के बाद नूतन वर्ष में तीन-तीन पीडियों के एक दूसरे की हत्या-दो-दो-वत्या की हो
15:35लेकिन नूतन वर्ष में जाकर राम-राम करेंगे ये राम-राम के थ्रू जो समवाद का सेतु बनता है तो
15:45फिर आदमी बुल जाएगा
15:48आप में कैसे इतनी क्या ये भक्ति की उर्जा होती है कि 14 वर्ष की आयू से लेकर अब 80
15:54वर्ष के हो चले हैं बापू लेकिन मुझे आपके बोलने में आपके आँखों की उस चमक में जब राम का
16:00नाम आता है कोई परिवर्तन नहीं दिखता है
16:02भागवत में लिखा है कि गिरान और वईरज्य बूटे हो सकते हैं बक्ति कभी बूटी नहीं हो सकते हैं निरंतर
16:12युवान रहती है निरंतर जो युद्ध चल रहे हैं संपूर्ण दुनिया में वो आपकी ओर से जो लोग प्रभावित होते
16:23हैं क्योंकि नागरिक तो हर तर
16:32है कि कहीं पर शांती आने रही है हमारे देश की तरफ से भी प्रधान मंत्री की तरफ से भी
16:36कहा गया है और हर बार वो इस बात की बात करते हैं कि यह शांती का समय है युद्ध
16:42का समय नहीं है आपको लगता है यह सब समाप्त होगा
16:48होगा ही
16:52युद्ध नाश्वन्त होता है
16:54समय समय पर होता है
16:56आदिकाल से हम देख रहे हैं
16:58लेकिन युद्ध कभी शास्वत नहीं होता
17:01नाश्वन्त है
17:02दो साल पांच साथ चलो जो भी हो
17:05और बुद्ध शास्वत होते है
17:09वो सनातन होते है
17:11तो दुनिया को कैसे भी शांती के और जाना पड़ेगा
17:16विश्राम के और जाना पड़ेगा ठक जाएंगे सब
17:18श्रमीत हो जाएंगे कब तक करेंगे
17:21मैंने तो अपनी और से दो तिन बार बहुत जाहिर किया है
17:26कि मुझे जहां जहां युद्ध चल रहा है
17:29मुझे यदि इजाज़त दें तो मैं बाउडर पर जाकर कठा करो
17:34ये मेरी आज भी मांग है कि मुझे बेजो युकरेन और रस्या के बाउडर पर
17:40मुझे बेजो इसराइल और जो जिसके साथ एरान हो जो हो जहां भी हो मैं तयार हो
17:48तो मैंने कारगिल के समय हमारे पुर्व नाइब प्रधान मंतरी इसको मैंने विनाई किया था कारगिल के समय
17:58कि मुझे युद्ध शिबीर में भेजो मैं केवल पंडालों में कथा गाऊं रामदुन कराऊं
18:05मेरा मिशन इतना नहीं है मुझे कारगिल भेजो आर्मी की छाउनी में मुझे बेटो मैं मानस का पार्ट करूँ
18:15मैं शस्तर तो नहीं ले सकता शास्तर तो लेकर जा सकता हूं और दुनिया का इतिया से शस्तरों ने जो
18:23काम नहीं किया वो शास्तरों ने काम किया
18:26एक युद्ध वो होता है दूसरा युद्ध होता है अगर जिसे हम सिविल वार की स्थिती कहते हैं
18:31जो हमारे पडोसी देशों में देखने के लिए मिली
18:34चाहे नेपाल हो गया या बांगलादेश वहाँ पर सत्ता परिवर्तन लाया गया उस हिंसा के साथ
18:40भारत में कुछ लोग इस बात को लेकर चर्चा करते हैं कि हम बांगलादेश से प्रिणा लेकर वैसी ही तखता
18:47पलट करें
18:47क्या भारत में इस चीज की जगे है भारत में कभी ऐसा देखा नहीं गया
18:51भारत को किसी से भी प्रिणा लेनी की जरूरत नहीं
18:55कुर्शी वालों को से प्रिरणा न ले रूशियों से प्रिरणा ले
19:01जिन मैंने कथा में भी कहा
19:03कि वो ये देश हैं जहां पहले साधु का मत लिया जाता था
19:08फिर राजमत लिया जाता था फिर लोक मत लिया जाता था
19:12फिर आखिर में वेद मत लिया जाता था
19:14लोक्मत का बारत में कभी इंकार नहीं किया.
19:17राज नीती को भी कभी आलोचना नहीं किया.
19:20राज मत भी अपना एक पक्षा है.
19:22जैसे लोक्षाही के चार पिलर होते हैं,
19:25हम जानते हैं.
19:26वैसे रामराज्जु के लिए भी चार मत,
19:29सादू मत,
19:30जनता का मत,
19:32राजकामत और वेदमत तो यह करना चाहिए
19:39ऐसे समय में जब पुरी दुनिया में एक तरीके से उथल उथल चल रही है
19:44मैं आखिर में आपसे जानना चाहती हूँ कि आपकी स्वास्तिक यात्रा जो चल रही है
19:49उसका सबसे बड़ा उदेश है और सबसे बड़ा संदेश सबको क्या जाना है
19:55देखो जब सेतू बना राम की लिला में सेतू तो मैं ऐसा मानता हूँ
20:05कि लिखा नहीं एस पस्त तो मेरा ऐसी आत्म प्रतिती है कि सबसे पहला शीला अनुमान जी ने रखी थी
20:17राम लिख करके जो हो
20:18लेकिन सबसे पहली शीला
20:21अनुमाज जी ने डाले श्री गणेश हुआता
20:24जोडने का
20:27सेतु बंद का
20:29तो आज के समय में
20:33बच्चा हो, यूथ हो
20:35बूड़ा हो, कोई भी हो
20:37क्योंकि मुझे तो मानस ने बता है कि
20:39बाल कांड देखो
20:40तो बच्चों के लिए है, अयुद्या कांडलो यूथ के लिए है
20:45उत्तर कांडलो बुजर्गों के लिए है
20:48तो ये
20:49तीन रूप में
20:50जैसे शंकराचारी भगवान ने
20:53प्रस्थान प्रही कही
20:54वैसे बच्पन से जोबन
20:57जोबन से बुड़ापा
20:58इनको जोडने की प्रक्रिया मानस की
21:01है
21:03और इसमें पहली शीला हनुमान में रखती थी
21:06तो
21:07आज का बच्चा हो
21:09की बज़र्ग हो
21:10के खासकर के यूथ
21:11पूरी दुनिया में आज
21:13ज्यादा से ज्यादा किसी भी प्रकार से
21:15जो हो रहा है दुनिया में इसमें ना जाओ
21:18लेकिन
21:19मनोजवं मारुत तुल्लिवेगं
21:22जितेंद्रियं बुद्धिमताम वरिष्ण
21:24वातात्मजं वानर यूथ मुख्यं
21:29यूथ का मुख्य कौन है हनुमान जी है
21:32चारो यूग परताब तुमारा है
21:35जिसका परताब चारो यूग में जिसका तो आज के यूथ का बच्चों का उसका नायक हनुमान और हनुमान की अगवानी
21:48में यह हम करेंगे
21:49तो तीन बस्तू मिलेगी बल, बुद्धि और विद्या
21:55राष्ट व्यक्ति को समाज को परिवार को बल की जरूरत है
21:59राष्ट बलवान होना चाहिए निर्बल नहीं होना चाहिए
22:03लेकिन केवल बल हो और बुद्धि नो हो तो बल विगड़न करेगा इंसा करेगा विभाजीत कर देगे
22:12बहुत बहुत धन्यवाद भापोष सबाचीत कर देगे
22:15सब के लिए आपके पूरी टीम के लिए दशेरा की बदाए दीपावली की आपके सभी दर्शकों के लिए नई साल
22:24की बहुत बहुत आओ
22:26हम नई साल में नेक और एक बने हमारा विकास विश्राम तक हमें ले चले
22:33सरवे भवन्त सुखिना सरवे संत निरामयाहा सरवे भद्रान पस्चंत मा कश्चित दुख भाग भवे
22:44सभी को प्रणाम जैसियाराण

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