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यूपी की सत्ता और सियासत के दौर में कैसे बदले मुख्यमंत्रियों के चेहरे? देखें 'सरकार'

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00:04वो जो देश का संदेश है सत्ता का द्वार प्रवेश है राजमीत के प्रारब्ध की ये भूमी उत्तर प्रदेश है
00:32नमस्कार वे उश्वेता सिंग और आप मुझसे सुन रहे हैं कहानी उत्तर प्रदेश की सरकार
00:38राजनीती का पहला और अंतिम लक्ष होता है सत्ता न पाप न पुण्य न धर्म न धर्म सब कुछ नीती
00:44है और यही राजनीती
00:45पहले मुख्यमंत्री गोविंद बल्लब पंच से शुरू होकर यूपी की राजनीती चौधरी चरण सिंग तक आते याते सिध्धानतों से अलग
00:53सत्ता सिध्धी तक आप पहुँची थी इस दौर ने ऐसी मीव रखी जिसने उत्तर प्रदेश को दशकों चैन की सांस
01:00नहीं ले दे
01:15तो किर्दार ऐसे ऐसे होते हैं जो पुराना और तय जियोमेट्री जोग्राफिया पल में बदल देते हैं
01:211979 के चुनावों तक आते याते यूपी में यही हो रहा था
01:26ये भूमी उप्तर प्रदेश है
01:29में 1979 में कॉंग्रिस बहुमत से दूर रही पर सरकार बना ली सरकार चली एक साल से कुछ कम फिर
01:38चौधरी चरण सिंह की सरकार आई
01:40225 दिन की इसके बाद फिर लगा रश्रुपति शासर लेकिन 17 दिन बाद ही सरकार बन गई
01:52सीएम बने त्रिभुवन नारायन सिंह 166 दिन बाद ये सरकार भी नहीं थे
02:00अब सीएम बने कमलापती त्रिपाटी उल दो साल 79 दिन के लिए
02:09फिर लगा राश्रुपति शासर 148 दिन बाद जब फिर बनी सरकार तो मुख्यमंत्री बने हेमवती नंदन भूखुणा
02:21इसके बाद तत्काल चुना होने वाले थे और चुनाव में एक भागदोड करने वाले युवा मुख्यमंत्री की जरूरत थी
02:32इसलिए हेम उतिन भूखुणा का नाम पंडित उमाशंग का दिखित के कहने पर
02:40पंडित कमलापति जी ने इंद्रा गांधी को सुझा रहे था
02:46पांच में विधान सभा में अब तक चार मुख्यमंत्री बदल चुके थे
02:50और दूसरी बार राश्च्रुपति शासन लग चुका था
02:53लेकिन मुख्यमंत्रियों की कहानी का पड़ा ट्वेस्ट आना बाकी था
02:59इंद्रा गांधी से नाराज चल रहे पहाडी नेता हेमवती नंदन भूखुणा को दिल्ली से यूपी भेज दिया गया
03:06और बहुत सोच समझ कर ये फैसला लिया गया था
03:10केंद्रा गांधी स्वयम में इतनी मजबूत नेता थी कि वह शायद ऐसा उनके बारे में कहा जाता है कि वह
03:17अपने पीछे भी कोई सेकंड लाइन के नेता नहीं देखना चाहती थी
03:20बहुगुना के बारे में ये कहा जाता था कि अगर उनकी लोकप्रीता इसी तरह से बढ़ती गई तो वह एक
03:25दिन पुनार मंतरी पत के दावेदार हो सकते हैं
03:28तो ऐसे में उनकी लोकप्रीता की वज़े से उन्हें मुख मंतरी तो बनाया गया
03:36बहुगुना भेजे गए थी इसलिए कि केंद्र से उनके रिष्टे अच्छे हो जाएंगे क्योंकि वो बड़े और जनाधार वाले नेता
03:42थे
03:42लेकिन बात बिगड़ गई संजय गांधी को लेकार
03:51संजय गांधी की जो छवी बन रही थी उस छवी से हमोतिन बागुणा अपने को नहीं जोड़ना चाहते थे
03:59इंद्रा गांधी से तो जुड़े हुए थे वो
04:03ऐसा भी हुआ कि उसूल टक्राए
04:08अजय गांधी बिल्कुल पसंद ने करते थे हमोतिन बागुणा को इंद्रा गांधी यहीं चाहती थी कि
04:14इनको हमोतिन बागुणा संजय गांधी को लेकर यह खुद बागुणा के अपने इंटर्जू के बात में बसला रहा हूं
04:24तो जाहिसी बात है कि जब राजितिक हस्चे बढ़ने लगे तो बागुणा जैसा करदावर नेता इस्तीफा दे देना चाहता है
04:34इस्तीफा दिया उन्होंने उन्हें मनाया गया
04:38बहराल एक बार कुर्सी छोड़ी तो मना लिये गए और लही दिन यानि 5 मार्च 1974 को कुर्सी पर फिर
04:44वापसी हो गए
04:48लेकिन तब तक काफी कुछ बदल रहा था
04:50पांच जून 1974 को पटना के गांधी मैदान से जैप्रकाश नारान सत्ता परिवर्तन के लिए संपूर्ण करांती का नारा दे
04:58चुके थे
04:59जेपी आंदोलन की आच से बहुगुणा ने यूपी को काफी हद तक बचाय रखा था
05:0525 जून 1975 को देश पर आपात काल थोप दिया गया
05:10बहुगुणा इस फैसले से बहुत आहत थे
05:12लेकिन कॉंग्रेस में वो तब भी बने रहे और दबाओ में सरकार चलती रहे
05:18आखरकार उन्हें इस्तीफा देने को कह दिया गया
05:2129 नवंबर 1975 को बहुगुणा ने इस्तीफा दे दिया
05:25प्रदेश में राश्रुपती शासन लगा दिया गया
05:30बावन दिन तक यूपी में राश्रुपती शासन लगा रहा
05:34इस बीच हर्याना मध्यप्रदेश जैसे राज्यों के सीम बदले गया
05:38इस फैसले में मुख्यमंत्रियों के चुनाओ पर संजय गांधी की पसंद साफ जहलक रही थी
05:44यूपी में भी नए मुख्यमंत्री के तौर पर नाराण दत्तिवारी को कुरसी पर बठा दिया गया
05:49माना जा रहा था एंडी तिवारी भी संजय गांधी की ही पसंद थे
06:08रखते हैं उसके उससे जो उन्होंने संजय गांधी जो समय बहुत प्रभावी थे बहुत प्रभावी थे उनके हां जो इस्थान
06:16मना लिया था बहुणा जी अपना स्वाविवान कायम रखे रहे
06:24तिवारी सरकार एक साल 99 दिन तक चली और इसके बाद एक बार फिर राश्टुपति शासन लगाया गया
06:32राजनीती के लिहाज से अब तक देश काफी बदल चुका था जेपी आंदोलन के बाद उपजे हालात का असर यूपी
06:39में भी देख रहा था
06:42विपक्ष जनता पार्टी के नाम से एक जुट हो एमर्जेंसी के बाद 1977 में यूपी विधान सभा के नए सिरे
06:50से चुनाव हुए
06:50कॉंग्रेस के पेरों तले जमीन ही रही खिसकी सर से आस्मान से मट गया
06:56जनता पार्टी ने प्रदेश की 425 में से 352 सीटें जीत लिए
07:10सांसद राम निरेश यादव को अलइकि तब तक मुलायम से जुट भी यादव वोटर्स के बीच खासमर प्रिया हो चुके
07:17थे
07:18मुलायम सिंग तीन बार के विधायक थे, मुलायम सीम नहीं बने, पशुपालन मंत्री बने, अंदर ही अंदर वो यह समझ
07:24चुके थे कि चौधरी चरण सिंग अगर चाते तो वो ही मुख्य मंत्री बनते
07:31खेर, जन्ता पार्टी की सरकार में भी सब ठीक ठाक नहीं था
07:36दो साल बाद राम नरेश यादव का भी इस्दीफा हो गया, बाबू बनारसी दास मुख्य मंत्री बने
07:42लेकिन एक साल बाद फिर राश्च्रपती शासन लग गया
07:46जन्ता पार्टी कॉंग्रेस का विकल्प बनने चली थी, लेकिन उसका जो सियासी हश्र हुआ, उसने कॉंग्रेस को संजीवनी दे दी,
07:53देश में भी और उत्तर प्रदेश में भी
07:571980 में देश और यूपी के चुना हुए और पूरे देश में इंदेरा के नाम की आंधी चल गए
08:05यूपी में कॉंग्रेस ने 425 में से 309 सीटें जीत लिए, जनसंग से बनी भारतिय जनता पार्टी को 11 सीटें
08:13मिले
08:16आपात काल की बाद की ये बदली हुई कॉंग्रेस थी, पुराने नेताओं की जगे नई ब्रिगेड दयाद थी
08:22आम चुनावू में यूपी ने लगभग हर बड़े नाम को चुनकर लोगसभा भेजा था
08:28लिहाजा यूपी का मुख्यमंत्री ऐसा होना चाहिए था जो पार्टी और परिवार के प्रतीश समर्पित हो और काम भी कर
08:34सके
08:34इंदरा गांधी और संजय गांधी में वीपी सिंग पर भरूसा किया
08:42उस समय जो संजय गांधी के सहयोगी थे जिसको संजय ब्रिगेट भी कहते थे या अलग-अलग विशेशन दिये जाते
08:51थे
08:52तो वो दरसल वीपी सिंग उस ब्रिगेट की खोश थी
08:57लेकिन वीपी सिंग के लिए ये कुरसी कांटेदार थी
09:0249 मंत्रियों में से उनके चुरे हुए केवल 6 मंत्री थे जाती ये दरारों को भी वीपी सिंग पाट नहीं
09:09पा रहे थे
09:09और वो इस बात से बेहत परिशान थे कि 180 विधायकों समेत उनके आधे मंत्री मंडल पर आपराधिक माम ले
09:17थे
09:17विश्वनात प्रिटाप सिंग ने नौ बार मंत्री मंडल में फेर बदल जरूर किया लेकिन उन्हें एहम बदलाव करने की इजाज़त
09:26नहीं दी गए
09:28मुख्यमंत्री रहते वीपी सिंग कॉंग्रेस के नेताओं के रवये पर भी सवाल उठा दिया करते थे
09:33यही कारण था कि कॉंग्रेस के कई सांसद उनके पक्ष में नहीं थे
09:37पहराल विश्वनात प्रिताप सिंग इंद्रा गांधी के पसंदीदा थे तो सरकार चलती रही
09:42वीपी सिंग एक मांड़ा के राजा थे
09:47अच्छे संपन परिवार में पैदा हुए थे लेकिन उनका जो मानुविय प्रक्ष था वह बहुत मजबूप था
09:56जब बिनोवा भावे का आंदोनन चला जो सर्प्लस लेंड है या जो अत्रित भूमी है वो भूमी हिनमें बाट दी
10:05जाए तो राज परिवार होते हुए भी उन्होंने इसका
10:10इसको अपने हाथ में लिया अंदोनन को भी और उन्होंने खुट की भी जमीन दीर और उनकी दिलवाए इसलिए उनकी
10:17तारीफ होने लगी और जब उन्होंने वित्मंत्री पद से इस्तीफा दिया बाफोर्स के मामले उटाए तो हम लोग भी उस
10:27समय विपक्ष में थे और �
10:31उस समय ये नारे गुजते ते राजा नहीं पकीर है देश की तक्दीर है और वही नारे और वही वातावन
10:39उनको परधान मंत्री कुर्शी के करीव ले गया
10:42उस दौरान भुंदेल खंड में डाकूओं का बड़ा आतंक था और ये वीपी सरकार के लिए बड़ी चुनोती था
10:50वीपी सिंग ने एलान कर दिया था कि अगर डाकूओं से यूपी को मुक्त नहीं करा पाया तो मुख्य मंत्री
10:56की कुर्सी छोड़ दूँगा
10:58पर डाकूओं का आतंक बेकाबू हो रहा था
11:02फूलन देवी ने फरवरी 1981 में बहमाई हत्याकांड को अंजाम दिया
11:0721 ठाकूओं की हत्या कर दे
11:09मार्च 1982 में वीपी सिंग के भाई और भतीजे की हत्या ड़कैतों ने कर दे
11:13वीपी सिंग के भाई इलाबाद हाई कोट में जज थे
11:1728 जून 1982 को ड़कैतों ने कानपूर और मैनपूरी में 21 लोगों का नसाधा थे
11:25इस हत्याकांड से वीपी सिंग इतने विक्षुब्ध होए कि उन्होंने CM5 से त्याग पत्र दे दिया
11:36वीपी सिंग ने इससे पहले दो बार और इस्तीफे की चित्थी लिखी थी पहली बार जब सितंबर
11:421980 में मुरादाबाद और अलीगर में संत्रदाइक हिंसा हुई थी पर तब इंदरा गांधी ने इस्तीफा अस्वीकार कर दिया था
11:49और दूसरी बार
11:50जब नवंबर 1981 में राधे संतोशा ग्यांग ने मैनपुरी में 24 लोगों की मृशन सत्या कर दी थे तब पुलिस
11:59ने समय रहते राधे और संतोशा को गिरफतार कर लिया और एक महिने में 50 जकैतों को मौत के घाट
12:04उतार दिया पर इस बार वो इस्तीफे पर डटे रहे और आ
12:22वीपी सिंग केंद्र की राजनीती में लोट गए और एक बार फिर केंद्र में मंत्री बना दिया गए
12:30श्रीपती मिश्र जनाधार वाले ब्रमभण नेता थे जो जज से गाउं प्रधान और फिर सक्रिय राजनीती में आये थे
12:39श्रीपती ने भी डाकु मुक्त अभियान को आगे बढ़ाया पर उनकी राजीव गान्थी से बंती नहीं थी और तब तक
12:48राजीव केंद्रिय राजनीती में सक्रिय हो चुके थे
12:53लेकिन श्रीपती मिश्रा का अनुभाव कारे करने की शैली कांग्रेस की नेताओं को पसंद नहीं थी और उनके खिलाब बहुत
13:01ऐसंतोस विदिन कांग्रेस भी था और अब धीर गेरे 1984 का चुनावी निकट दीकर रहता जिसमें लोकसभा और दिलानसभा के
13:10नतिजे प्रभ
13:21देकाल के लिए नारायण तत्तिवारी को दूसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप दि गये
13:26कि उनकी एक बहुत व्यापाक दृष्टि थी वह बहुत अच्छे प्रशा सक्ते समर्पिक प्रशा सक्ते
13:34एंडी तिवारी को फिर से मुख्य मंत्री की कुर्सी सम्हालने के तीन महीने बाद ततकालीन प्रधान मंत्री इंदरा गांधी की
13:41हत्या हो गए
13:46पार्टी, संगठन, सब राजीव गांधी के पास आ गए
13:49इस बीच नई विधान सभा का चुनाव भी हो गया और कॉंग्रेस पूर्ण बहुमत से फिर सत्ता में लोटाई
13:59नाराणदत तिवारी ने फिर से मुख्य मंत्री पद की शपत ली
14:02एंडी तिवारी को पद सम्हाले मुश्किल से एक साल हुआ था
14:07जब एक दिन राजीव गांधी यूपी के दोरे पर गए
14:10कहते हैं वहाँ गोरकपुर के एकनेता से उनकी लंबी बात हुई थी
14:14और अगले ही दिन यूपी के इतिहाज ने एक और करवट ले ली
14:20राजीव गांधी से वीर बहादूर सिंग की मुलाकात के बाद
14:22नारायन दत्तिवारी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया
14:27और वीर बहादूर सिंग को मुख्यमंत्री पद की शपत दिला दी गई
14:33खेर वीर बहादूर बन तो गए मुख्यमंत्री लेकिन उनका कारिकाल मुश्किलों से घिरा रहा
14:39मुख्यमंत्री के साथ जो कमांडो और शाडो चलने का चलनाम दिखता है
14:43कहा जाता है वो वीर बहादूर सिंग के समय ही शुरू हुआ
14:46उन्हें शौक था टशन दिखाने का
14:48शुलकी वो गोरकपुर से तालुक रखते थे
14:51और गोरकपुर में ठाकुर और ब्राम्हों का
14:54वहां जबर्दस्त दुन्द उस दौर में चल लहा था
14:57उसमें हर्शंकर टिवारी शाही और इसमें एक गुट को
15:02जो है वो कुछ राजनेतिक लोग सपोर्ट करते थे एक गुट को
15:06कुछ लोग करते थे अगर आप वैसे ही देख लें तो कहीं नाराइंदा
15:09तिवारी जी का साफ्ट कारणर हर्शंकर तिवारी की तरफ रहता था और बाकी जो
15:15आज के मुखमंत्री हैं उस मठका शाही के साथ चुड़ाओ रहता था कहीं
15:20ने कहीं बीरवादूर सिंग का भी साफ्ट कारणर रहता था तो और उस समय वहां कई मर्डर्स हुए थे तो
15:28उस लिहाज से और यह मुखमंत्री थे तो उस लिहाज से उन्होंने शाय दिये अपेक्षा की होगी
15:37उनके कारेकाल में 37 दंगे हुए अकेले मेरट दंगों में 181 लोग मारे गए
15:4539 संस्थानों ने लंबी हड़ ताले की किसान हितों के लिए महिंदर सिंग टिकैट के आंदोलन हुए और सबसे बड़ा
15:52अयोध्या विवाज सुलगने लगा
15:56यह मामला अदालत में था लेकिन अरूम नहरू ने दबाब डाल करके वीर बात दुरूपर उससे में ताला खुरवा तो
16:05उसको लेकर के बहुत विवाद हुआ और यह उससे में कहा गया कि यह भी संद्धी पहिसद्ध को खुश करने
16:13के लिए काम किया गया है और कांग्रेस
16:16इसके पतन की उत्तर प्रदेश में पटकठा उस दिन निखी गई जिस दिन यह काम है जो अलप संद्धा है
16:25जो इसके साथ जोड़ा हुआता कांग्रेस को उनको यह नागवार गुजरा और उन्होंने धीरे-धीरे कांग्रेस से दूरी बनाने शुरू
16:33कर दी जिसका फायद
16:43वीर बहादूर सेंग की कुरसी गई तो एक बार फिर से नारायन दत्तिवारी को ही सत्ता सौंपने गए नारायन दत्तिवारी
16:50इसके बाद करीब डेड़ साल मुख्यमंत्री रहे
16:53पुरा प्रांत व्यापी पुरा प्रदेश व्यापी इंफरा इस्ट्रक्चर डेवलप करने का जो अच्छा काम हुआ शुगर मिल्स यूनिवर्स्टीज मेडिकल कॉलेजेस
17:05वगरा वगरा सडकें नहरें पुल तो वो तिवारी जी के समय में बहुत अच्छा काम हुआ
17:13इस बीच केंद्रिय राजनीती की उथल पुथल का असर भी यूपी पर पढ़ने वाला था वीपी सिंग ने पार्टी के
17:18भीतर विवाद के कारण कॉंग्रिस छोड़ दी और राजीव गांधी के खिलाफ बोफोर्स का मुद्दा लेकर उतर गए
17:24विपक्षी दलों को जन्ता दल के बैनर तले लाकर वो इसका नेत्रत्व कर रहे थे
17:311989 में यूपी के चुनाव हुए और यहाँ से कॉंग्रिस के लिए फिर यूपी में कभी न खत्म होने वाला
17:37वनवास शुरू हो गया
17:44जन्ता दल ने रिकॉर्ड 208 सीट ने जिती
17:48कॉंग्रिस सिर्थ 94 सीटों पर सिमट गए बीजेपी को 57 सीटे मिले
18:01जन्ता दल को मुख्यमंत्री चुनना था मामला फसा था चौधरी चरण सिंग के पुत्र अजीच सिंग और मुलायम सिंग यादव
18:07के बीच
18:08वीपी सिंग देश के प्रधान मंत्री बन चुके थे तैय हुआ विधायकों के बीच मद्दान से फैसला किया जाए और
18:14बाजी मार ले गए मुलायम सिंग यादव
18:19लोहिया की सोशलिस्ट पॉलिटिक्स चरण सिंग की किसान राजनी थी और वीपी सिंग की बैकवर्ड सियासत के साथ मुलायम सिंग
18:26की सियासी ट्रेनिंग तगड़ी थी
18:30वो भारतिय जनता पार्टी जो आज यूपी में समाजबादी पार्टी की सबसे बड़ी प्रतिद्वन्दी है
18:35मुलायम सिंग यादव की पहली सरकार उसी के बाहरी समर्थन से बनी थी
18:42केंद्र में वीपी, यूपी में मुलायम सिंग, दोनों में पुरानी अदावत
18:47लेकिन राजनीतिक रास्ते पर नजरें बचाते हुए दोनों साथ साथ चल रहे थे
18:51दोनों ही सरकारों को बीजेपी का समर्थन था
18:55मुलायम सिंग तो वीपी सिंग की वज़े से जनता दल का हिस्सा तक बनने को ही तयार नहीं थे
19:00वो तो जॉर्ज फर्नांडिस ने उन्हें मनाया और कहा वीपी तुम्हारे किसी काम में हस्तकशेप नहीं करेंगे
19:07तब उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी लोक दल का जनता दल में विले कराया
19:12मुलायम के लिए बतौर मुख्यमंत्री पहला ही कारेकाल निरणायक साबित हुआ
19:17कभी कुष्टी के ऐसे ही दाओं के चलते प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के नत्थू सिंग ने मुलायम सिंग को अपनी जस्वंत
19:23नगर सीट सौब दी थी
19:28उसके बाद मुलायम ने कुष्टी तो नहीं लड़ी लेकिन दाओं खोब आजमान
19:35मुख्यमंत्री बन चुके थे और अब समय उनके सामने ताल ठोग रहा था
19:48मुलायम सिंग यादव जी के साथ मेरा 40 साल का विष्टा रहा है
19:56सबसे पहली बार 67 में वह विधायक बनी थे जब डाक्टर रामन हो लोईया वहां ते चुना बड़ने गए
20:0369 में वहार गए वो एक बहुत मेहंती करमट और एग्रेसिव कारे करता था
20:18अधिया में राम मंदिर का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा था
20:31केंद्र में वीपे सिंग हल निकालने के लिए विश्व हिंदू परिशद के नेताओं से बात कर रहे थे समन्वे कमीटियां
20:37बना रहे थे
20:59मुलायम सिंग इसमें खुद को उपेक्षित पा रहे थे क्योंकि जो मुख्य कमिटी वीपी सिंग ने बनाई उसमें मुलायम को
21:05शामिल नहीं किया
21:05दोनों के रिष्टे इसकदर अविश्वास से भरे थे कि वीपी सिंग ने फ़दवरी 1990 में जिन संतों को अयोध्या जाने
21:13के लिए मना किया था मुलायम ने उन्हें गिरफतार करवा दिया
21:23दूसरी तरफ भारतिय जनता पार्टी मंदिर आंदोलन में बढ़ चड़कर हिस्सा लेने लगी थी
21:28जिसकी वज़े से यूपी में मुलायम सिंग तो केंदर में वीपी सिंग की स्थिती और सहज हो रही थी
21:46जानकार बताते हैं कि इससे वीपी सिंग के मन में एक उदासी इंतासी आ गई थी
21:53उस दोरान चुकि वीपी सिंग जी ने वहां एक आरक्षन के मामले को लेके
22:00एक मंदल को लेके जो उन्होंने लागू किया उसके बाद जो है भारती जनता पार्टी ने राजनेटिक रणने की से
22:07ये महशूस किया
22:08कि अब मंदिर आंदोलन को थोड़ी हवा दी जानी चाहिए और यहां पर एक इसको जो एक पिछलों को उन्होंने
22:17एक उनका ये मानना था बीजेपी का कि ये सब पिछलों अगलों को बाटने की एक प्रक्रिया है
22:23इस दिए उन्होंने चुकि मंदिर का मुद्धा ऐसा है कि इसमें ना अगला है ना पिछला है उसमें इन्होंने कमंडल
22:30को लाके ख़ला कर दिया और आयुद्या के मुद्धियों को आगे बढ़ाया शायद यही एक राजनेटिक कारणा प्रमुक्ता से रहा
22:43बुलायम सिंग को लगता था कि वीपी सिंग साधू संतों से बात करके उन्हें उनकी सरकार के खिलाफ उकसाते हैं
22:49ताकि किसी तरह ऐसा माहौल बने कि उनकी सरकार गिर जाए
22:57उन्होंने कुछ तो वीपी सिंग और कुछ बीजेपी की राजनीती को जवाब देने के लिहाज से सांप्रदाइक सद्भाव रैली के
23:04नाम से पूरे उत्तर प्रदेश में मंदिर आंदूलें के खिलाफ बिगुल फूक दिया
23:101990 का साल इसी सब उठा पटक में बीत रहा था कभी सुनाई देता था कि अयोध्या को लेकर कोई
23:17अध्यादेश तैयार हु रहा है कभी पता चलता था कि मुलायम सिंग के विरोध के चलते वीपी सरकार अध्यादेश नहीं
23:22ला रही है
23:23अध्यादेश का विरोध करके मुलायम सिंग सेक्यूलर राजनीती के सबसे बड़े जंडाबरदार बंग है
23:31बहराल इस सब के बीच वीपी सिंग ने अचानक 7 अगस्त 1990 को मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने
23:40की घोशना कर दी
23:41दॉक्तर भीम रावम बेट कर किस नहाई वर्ष में एक फैसला हाल में सरकार ने लिया कि पिछडे वर्ग को
23:50हम सरकारी नौकिरियों में और पबलिक सेक्टर में स्थान में
23:58कि सत्ता के इस धाचे में देश की चलाने और सवारने में उसके पैसला करने में हम इस्सेदारी देने चाहते
24:06हैं वजबुती से ना चाहते हैं पूरा देश चलूठा था
24:33बीजेपी ने मंडल के इस दाओं के सामने कमंडल की राजनीती की लकीर खीजी लाल कृष्णा अडवाणी ने घोशना कर
24:39दी कि वो 25 सितंबर 1990 से सोमनाच से रामरत यात्रा शुरू करेंगे
24:50जो 30 अक्तूबर को अयोध्या में खत्म होगी इसके बाद कार सेवा की जाएगी नरेंद्र मोदी ने तब इस रथ
24:57यात्रा की पूरी मैनेजमेंट की थी
25:02मुलायम सिंग का हेलिकॉप्टर रोज कम से कम तीन जिलों में उतरने लगा
25:06और वो रैलियों में जोरदार धंग से कहते थे कि अयोध्या में परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा
25:11मुलायम समय की गती को समझ तो रहे थे लेकिन राजनीती तो कुछ और ही तैयारी कर रहे थे
25:25तैथा कि आडवानी की रथियात्रा कांतिम मैदान यूपी की अयोध्या थी
25:30लेकिन वीपी सिंग ने अयोध्या पहुँचने से पहले ही बिहार में लालू प्रसाद यादव को फोन करके आडवानी को गिरतार
25:38करने की सलाह दे दी
25:40तो जो मुलाइम सिंग यूपी में अडवानी की रथियात्रा को रोक कर मंडल और सेकुलर राजनीती के हीरो बनने की
25:47तैयारी कर चुके थे
25:48वो क्रेडिट वीपी सिंग की सलाह के बाद लालू प्रसाद यादव ले गए
25:55तो उस समय जब ये अडवानी जी का रथ निकलने की बात हुई तो फिर मुलाइम सिंग जी ने कहा
26:02ऐसा जाता है कि मुलाइम सिंग जी ने केंदर सरकार से ये कहा कि हम इनके रथ को इससे सामपरदाए
26:07कि सदभाव बिगलेगा या एक महौल खराब होगा तो हम अडवानी ज
26:22इसमें चर्चा होती रहती थी तो उसमें कहा जाता है कि बीपी सिंग ने केंदर सरकार को तब वो भी
26:27डबल इंजिन की सरकार थी तो उन्होंने केंदर सरकार को ये सला दी कि उत्तर प्रदेश की बजाए इनको बीपी
26:33अडवानी जी को बिहार में रुक लिया जाए पतना मे
26:51राजनीत को उन्होंने बचाए रहा है रध्यात्रा तो रुख गए लेकिन कार सेवा का योध्या में 29 अक्तूबर 1990 से
27:00ही पहुचने लगए मुलायम सिंग ने पुलिस प्रशासन की कड़ी विवस्था की थी लेकिन कई नेता जिन में अशोक सिंगल
27:07भी शामिल थे भेश बदल
27:09कर पहुच गए आपका कहना है कि आप किसी भी हालत में आपके कार सेवा नहीं छोड़ेंगे हम किसी अक्तूबर
27:18को अचानक अयोध्या में जगे जगे से कार सेवक निकल ने और विवादित स्थल तक पहुच गए नारेबाजी शुरू हो
27:25गए पुलिस ने बल प्रयोग किय
27:27जिसमें कल लोगों को चोटें पहुचें कुछ लोगों के मारे जानी की खबर आई मुलायम सिंग ने ये दावा किया
27:33कि विवादित स्थल में किसी को भी खुशने नहीं दिया गया
27:57हाला कि देश भर में इस घटना के बाद हिंसा भड़की जिसमें 35 लोगों की जान गई 30 शहरों में
28:03कर्फियू लग वीपी सिंग ने मुलायम सिंग्स
28:06से इस पर स्फष्टिकरण मांगा
28:11मुलायम का दावा था कि स्थिती नियंत्रण में है लेकिन कार सेवक अयोध्या में जगे जगे मौजूद थे फिर आई
28:182 नवंबर की तारिया एक बार फिर विवादित स्थल की ओर कार सेवकों का रेला चल पड़ा
28:35इस पर मुलायम सिंग ने गोली चलाने का ओडर दे दिया
28:39टो यहां वीपी सिंग की सरकार खतर में पड़ गी और नौन कोन्फिजेंस आया वीपी सिंग की सरकार चलेगी उलायम
28:46सिंग की सरकार भी आईश्तिर होगी
28:48कॉंग्रेस पार्टी के लिए दिविदात हैं कि इधर जाए उधर जाए और वही दिन है यह कोंग्रेस पार्टी का जन
28:58आधार हिंदों में पिर मुस्लिन से
29:05अयोध्या में गोली कांड के बाद बीजेपी और कई हिंदुवादी संगठनों ने उन्हें मुलाना मुलायम सिंग कहना शुरू कर दिया
29:13एक लकीर खिज गई बीजेपी ने केंदर में वीपी सिंग सरकार से समर्थन वापस ले लिया
29:18वीपी सिंग की सरकार गिर गई केंदर में चंदरशेखर की सरकार बनी जिसे कॉंग्रेस ने समर्थन दिया
29:25मुलायम सिंग तुरंत पाला बदला और चंदरशेखर के साथ हुई
29:28कॉंग्रिस ने यूपी में मुलायम सिंग सरकार को सपोर्ट कर दिया इस तरह उन्होंने अपनी सरकार यूपी में बचाय रखी
29:35चंद्र शेखर प्रधान बंद्री बने तो उन्होंने आयोध्या मुद्धे को प्राथमिक्ता से हल करने के प्रयास्त
29:42एक समय लगने लगा था कि शायद कोई हल निकलने वाला है लेकिन तब ही राजीव गांधी के नित्रित्व वाली
29:53कॉंग्रिस ने उनकी सरकार पर जासूसी कराने का आरोप लगाते हुए समर्थन वापस ले लिया
29:58केंद्र की चंद्रशेखर सरकार गिर गई और यूपी में कॉंग्रेस नई चाल चलने की तैयारी में थी
30:06कॉंग्रेस मुलायम सरकार को गिरा कर राश्टुपती शासन लगाना चाहती थी ताकि अगले चुनाव की तैयारियों का समय मिल सके
30:14लेकिन ये खबर किसी तरह मुलाइम सिंग को लग गए
30:17उन्होंने अगले दिन कॉंग्रेस की समर्थन वापसी की घूशना से पहले ही
30:21तंके राज़पाल को इस्तीफा दे कर अगली व्यवस्था तक कार्यवाहत मुख्यमंत्री बने रहने का वर्दान पालिया
30:31कॉंग्रेस तब हाथ मलती रह गए
30:331991 के चुनाओं मंडल और मंदिर की बुनियाद पर लड़े जा रहे थे
30:38मंडल का चहरा यूपी में मुलाइम सिंग बने हुए थी
30:41मंदिर की राजनीती में भी विरोध का सबसे तीखा स्वर उनका ही था
30:45बीजेपी ने बहुत होश्यारी से इसकी काट तलाशिया
30:47OBC वर्ग से आने वाले कल्याण सिंग को यूपी में चुनाओं की कमान का सेना पती बनाया
30:53और मंदिर आंदोलन का वैचारिक रत भी उनी को थमा दिया
30:57कल्याण सिंग ने जिस शैली में प्रचार किया
31:00उससे उनकी फायर ब्रैंड हिंदू रिदय सम्राट की छवी बनी
31:04हालनकि बीजेपी के प्रचार में सबसे बड़ा बादा गुड गवर्नेंस का होता था
31:12कल्याण सिंग मुलायन सिंग यादव की उस राजनीती की काट थे
31:16जो बीजेपी की मंदिर राजनीती के खिलाफ मुखर थी चुकि लोगसभा की जुनाव भी साथ-साथ चल रहे थे तो
31:23वहां भी मंडल कमंडल का मुद्दा चाया हुआ था
31:25इसी बीच प्रचार के दौरान तमिलाड में राजीव गांधी की हत्या हो गई
31:43जुनावों को स्थागित करना पड़ा नई तारीखों के साथ फिर चुनावी संग्राम छेड़ा
31:49मुलायम सिंग पिछ़शनों और मुसलमानों के नेता के तरप पर स्थापित हो चुके थे तो कल्यान सिंग
31:55पिछड़ों और हिंदू के नेता के तौद पर उपो
32:00अयोध्या में कार सेवकों पर चली गूली की गूंज चुनाव प्रचार में खुब सुनाई
32:14चुनाव के नतीजे आए यूपी के इतिहास ने नहीं कर बचूँ
32:17पहली बार बीजे पी को पूर्ण बहुमत मिला था
32:24बीजे पी को 221 सीटे मिली जंता दल को मिली 92 सीटे और कॉंग्रिस को 46
32:34चुनावों में बीजे पी की बारात लेकर कल्यार सिंग निकले थे
32:37लिहाजा बहुमत से जीत मिली तो सहरा भी उन्हीं के सर पर बांधा गया
32:48कल्यार सिंग ने अपने कारिकाल में एक ऐसा फैसला लिया जिसने पूरी राजनीती को हिला कर रख दिया था
32:54फैसला था नकल अध्यादेश को लागू करने का
32:57उस समय चुकि नकल का बड़ा था कि हर छोटे बड़े जो गाओं के वहां थे वो पैसे दे के
33:05नकल हुआ करती थी
33:06और पैसों के साहरे नकल के साहरे बच्चे उत्यान हो रहे थे
33:12इस बात को कलियान सिंग ने गंभीता से लिया और उन्हों ने कहा कि ऐसे तो फिर आने वाली जो
33:18हमारी पीड़ी है वो अगर नकल के साहरे आगे बढ़ेगी तो फिर जो एक अच्छे या योग बच्चों को हम
33:28निकाल के लाने की जो इस देश को जरूरत है वो शायद कमी र
33:38हाला को यह सरकार का फेंसला था लेकिन इसका पूरा क्रेडिट जो है वो राजना सिंग को गया कि राजना
33:44से शिक्षा मंतरी थे कि उन्होंने इसको प्रभावी डेंच से लागू किया
33:48दरसल गोरकपूर के फिजिक्स लेक्चरर राजनाज सिंग कल्यान सिंग सरकार में शिक्षा मंत्री थे
33:53नकल अध्यादेश लाना उनहीं का निर्ने था
33:56जिसमें नकल करना और कराना दोनों संग्य और दंडनी अपराद थे
34:00इस मुद्दे पर खोब राजनीती चमकी थे
34:03मुलायम सिंग ने भी इसे खोब उचाला था और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किये थे
34:08कल्यान सिंग का मुख्यमंत्री बनना नियती का एक ऐसा खेल था
34:12जिसमें उनकी अभी समसे बड़ी भूमे का बाकी थी
34:15उनकी सरकार में माफियाओं पर कार्रवाई गुंडागर्दी के खिलाफ कड़ा आक्शन जैसे कई दूसरे फैसले भी लिये गए
34:31लेकिन मंदिर आंदोलन उनकी परीक्षा लेने की तैयारी कर चुका था
34:35और वो तारीख थी 6 दिसंबर 1922
34:44जो शोर उठा 6 दिसंबर 1922 को योपी की अयोध्या से उसकी गुंज आज भी देश की राजनीती में सुनाई
34:52देती है
34:53उस एक तारीख ने उत्तर प्रदेश और समूचे देश की सियासत को हमेशा के लिए बदल दिया
34:59दिखाएंगे सरकार के अगले एपिसोड में

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