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  • 3 days ago
पढ़िए संवाददाता मनीष पाराशर की खास रिपोर्ट.

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00:00बंगाल की दुर्गा पूजा के वारे में तो सभी ने सुना है लेकिन मेरट में एक जगा ऐसी है जहाँ
00:06पर 220 वर्षों से लगातार बंगाली परिवार मादुर्गा की पूजा अर्चना करते आ रहे हैं जिहां ये जगा है मेरट
00:13के कैंटिस्टिस सदर बाजार में दुर्गा
00:26करते आ रही हैं उसी मंदिर में आजम कड़े हैं यही वादुर्गा बाड़ी है जहां पर 220 वर्षों से लगातार
00:33मादुर्गा की पूजा अर्चना हो रही है जन्मास्टमी के दिन से यहां मूर्थी बनना काठोमा यानि मूर्थी बनना शुरू हो
00:40जाती है और उसके बाद
00:56भी बड़े ही धुंदाम से बंगाली परिवार की महिला हैं करती आती है यहां देखाई जाता है जिस वक्त यहां
01:01धुनूची निट्पे होता है तो वायजन देखने वाला होता है आज हमें पंडर जी ने बताया कि किस तरह से
01:06यहां पर पूजा आर्चना होती है और किस तर
01:22परिवार प्रति भाग करेंगे और आशिरवाद लेंगे विजा दश्मे को यहां सिंदूर केला करा आयजन होगा और माद्रुगा को मिदाय
01:30दी जाएगी यह 220 वा साल है 220 वा बरस गांट है हमारे पूजन के यह दुर्गावारी अत्री प्राचीन है
01:37आप लोगी समसके 220 साल
01:39पूजा ने हमारे जो पूजा है यह मुर्ति बनाने वाले यह बंगाल से आते हैं आपको बताना चाहूंगा कि वहां
01:46होता है करपोड़ी सेक्टर की पूजा करोर्व रुपय खर्चे होते हैं बड़े बड़े फ्लीम प्रडूजर है वो लोग खर्चा करते
01:52बड़े बड़
02:32मेरा नाम है गोविन दूश्वास और यह जो पूजा है यह हमारी 220 साल है
02:38इस पर जो रिकॉर्ड मिला है देखे शुवारम तो हमें पता नहीं लेकिन यह जो सुमाता है कि कुछ प्रवासी
02:44बंगाली जोते हैं यहां पर कुछ फैमिले न मिलके यह पूजा स्टार्ट कीती है तो उसके बाद धीरे धीरे बंगाली
02:50जोते चले गए इसमें काफी लोग
02:53बाहर भी चले गए कुछ लए भी आ गए हैं तो उस तरीके से हम लोग यह पूजा कर रहे
02:58हैं और यह पूजा जो परंपरा जो है वही परंपरा है जो हम लोग देखते हुआ हैं बच्पन से
03:04मेरा नाम अभे मुखर जी है और मैं बंगाली दुर्गावाडी समीती मिरट का इससे में प्रधान सची हूँ और इस
03:13वर्ष दोजार चप्विस में हम लोग दो सो बीस वे दुर्गापुजा मौसर्व का आयोजन करने जा रहे हैं
03:18220 वर्ष आप मानिये कि हमें भी इतना पुराना इत्यास यहां का नहीं पता है लेकिन जो लोग अभी यहां
03:25पे हैं उनको लगबग लगबग यह मानिये कि
03:27700 साल पीछे तक कि लोगों के बारे में उनको पता है कि उनकी जनरेशन यहां पे हैं
03:32तो 1926 में इस संस्थान का अपचारिक रिजिस्ट्रेशन हुआ था और इस समय मेरट में हमारी जो बंगाली दुर्गाबडी समीती
03:45है
03:45वह सबसे पुराने रिजिस्ट्र सोसाइटीज में से एक है तो अगर 1926 में हमारा रिजिस्ट्रेशन हुआ तो उस अनुसार आप
03:52मानिये कि
03:532026 यह जो वर्ष है हमारा शताबडी वर्ष है अपचारिक रूप से लेकिन दुर्गापुजा यहां पर 200 वर्ष से भी
03:59अधिक ठारसो छे साथ के आसपस जो है दुर्गापुजा यहां पर एक्चली कुछ बंगाली परीवार यहां पर आके माइग्रेट हो
04:06गए तो उन्हो
04:21कोटा हिस्सा था उसके बाद पीछे का हिस्सा फिर दूसरे किसी से लिया गया ऐसे करके तीन हिस्सों में यह
04:27प्रापटी लगबख 800 गच के असपास की प्रापटी है इसको लिया तो वह परिवार आये उसके बाद CDA जो सेंट्रल
04:35डिफेंस एकाउंट का जो एक ऑफिस बं�
05:00सबसे बड़ी जो बात है वो यह हर शहर में जहां तुर्गा पूजा होती है जारतर समान सब मार्केट से
05:08आता है
05:09लेकिन हमारे यहां सब कुछ अपने हाथों से तैयार किया जाता है चायए मा को लट्डू चलाने हो चाय माँ
05:18का और हो कमल पूल Przyp
05:33It is going to be a 220th.
05:35And this is 5 days.
05:38That will start from our 16th.
05:41That will be the 6th day.
05:43There are various things like
05:45the bog, the huja, the arti,
05:48the dhunuchi naach,
05:49the arti is finished.
05:52After that, there are cultural programs.
05:54There will be a day of dandia,
05:57there will be a day of agamani,
05:58there will be a day of naatia.
05:59There are many things that we have done.
06:02You can see that in 2020,
06:03the Pooda is still there.
06:05There are no new things.
06:08Manish Parashar, ETV, Bharat, Merat.

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