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गिरिडीह में दुर्गा पूजा के मौके पर फूलहरा बनाकर मालाकार समाज सदियों से परंपरा को संजोये हुए हैं.

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00:01नवरात और दुर्गापूजा का उत्सा देखा जा रहा है, माता के जैकारों से पुरा देश भूंज रहा है।
00:07गिरिडी जिले का इस पुजा से एक बहुत खास और प्राचिन परंपरा जुड़ी हुई है, जिसके बिना यहां की दुर्गापूजा
00:15अधोरी मानी जाती है।
00:16हम बात कर रहे हैं फुलवारी यानी फुलहरा की, जिसका गिरिडी की पूजा संस्क्रिती में बिसेश अस्थान है।
00:24महास्टमी के पावन अवसर पर देवी मंडप में इसे बिसेश रूप से अर्पित किया जाता है।
00:30दुर्गापूजा शुरू होने से हपते भर पहले ही गिरिडी के करबारी इलाके में मालाकार समाज की लोग इस परमपरिक कला
00:38को सहिजने और तयार करने में जुट जाते हैं।
00:41बास की खचियों और रंग बिरंगे कागजों की मदद से बेहद बारिकी और खुबसूरती के साथ फुलहरा तयार किया जाता
00:50है।
01:01पुलहारा है, नाम हगति दुर्वर मैयकत सिंगार, सजीों से है। लुक्ता है कि हुमारे कि पुुरुवजी बनाते हैं साथ मोग
01:10वह युद पता नहीं है, बाता है, जो पुलहारा मनता हैं।
01:26पुरुवजों से बना रहे हैं।
01:28I have a lot of people who have been here.
01:38We have a lot of people who have been here.
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02:09in the of डिव्य वाहन आश्म सपेरों सच्छ बैंट में सब्याम है करे ऊंड़ा उसको जो है एक वो मंड़ब
02:18समझ कर दो लोगों उपर में अप्र कैंग देते थे और नीचिए भगोति का कुलें तक उसके नीचे चार वोगोरा
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