00:00तारदिय नवरात्र के दारान मा दुर्गे की पूजा अर्चना बड़े ही स्रधा के साथ की जाती है इस वक्त हम
00:07मौजूद हैं अखंड वासिनी मंदिर में जहां 1914 से अनवरत दीपक जल रहा है और यहां आस्था का जन सहलाब
00:18भी उमरता है
00:20नवरात्र के दारान मा दुर्गे की अलग-अलग रूप की पूजा होती है राजधानी पटना में भी मा दुर्गे की
00:27पूजा लोग बड़े ही स्रधा के साथ करते हैं इस वक्त हम मौजूद हैं अखंड वासिनी मंदिर में जो काफी
00:35पुरानी मंदिर है और यहां की खुबी
00:48और मा कमक्ख्या के अस्तान से दो अखंड जीप ला करके प्रजुलित किये जो उस समय से आस तक रियंतर
00:56प्रजुलित है और इस मंदिर की सेवा हम लोग तिसरा पर यह भी मंदिर की सेवा कर रहे हैं
01:01सवर्ट उत्ना क्या उनकी कुछ सपन में इसा मा का अदेश आया कि कमक्ख्या जाना वहां से दिप लाना है
01:06तो गया वहां से ले करका है
01:08नोरातर के जनकारी लिए कि मा के पास नो दिन में विशेष हल्दी और फूल चरहने का मुहत्व है
01:13साथ ख़ड़ा हल्दी नौ उर्हुल का लाल फूल एक सिंदूर के पूरिया पूरे बर्स मंगलवार को लोग मा के पास
01:18चरहते हैं
01:19चरहते हैं और एको dont कामना पूर्टा करती है और अगल दिब में घी और सर्शव का तिल डालते हैं
01:24जिसे माँ मनॉकाम्नाब फूर्टीım
01:36दिल से मंगले मौव धूर्फימी में ब्लत như नुधोर फूल होती है
01:48I have come to do my own work, so I have come to do my own work.
01:53I have come to do my own work.
01:54I have never known it before.
01:58I live in Bihar, but I have never known it.
02:02Whatever we do in front of the Bhagavati,
02:05we feel that Bhagavati is listening to me.
02:10We know what we can do in the Bhagavati.
02:11We know what we can do in the Bhagavati.
02:15We know what we can do in the Bhagavati.
02:19We don't get anywhere.
02:25If there is a problem or something,
02:28we are together for 2-3 years.
02:33The Bhagavati Vashni Mandil is named.
02:36Since the Bhagavati Vashni Mandil is born,
02:37From then on in 1934-25-2019.
02:43We started when it launched the Bhagavati Vashni Mandil.
02:51These people were tied to the Bhagavati Vashni Mandil.
02:59We are headed up to the Purgot.
03:00We are loving the Bhagavati Vashni Mandil that was fully stocked and now we are gettingettre property.
03:05जल रहा है और यहां के तत्कालीन पुजारी ने इसे कामख्या से लाया था अब देख सकते हैं मेरे पीछे
03:14दो दिपक जहाएं वो जल रहे हैं और एक घी का दिया है दूसरा तेल का दिया है दोनों दिया
03:221914 से अनवरत जल रहा है और मां अखंड वासनी की कृपा ही है कि वो द
03:29दिया अब तक बुजा नहीं और नहीं बुजा तो इसके पीछे क्या रहस्य है यह भी जानने की बात है
03:36असोक के साथ रंजीत एटीवी भारत पठाट