00:07विश्व प्रसिद अतिहासिक बस्तर दशरा करीब 600 सालों से मनाया जा रहा है इसमें कई अनूठी रस्में होती हैं जिन
00:15में से सबसे एहम है काच्छन गादी रस्म इस पूजा विधार में कांटों के जूले पर जूलती कुवारी कन्या बस्तर
00:23राजपरिवार को निर्भिग
00:26मनाने की अनुमती देती है जिसके बाद ही उत्सव का आगाज होता है लेकिन इस रस्में की शुरुआत हुई राजा
00:32के शिकार में निकलने और फिर उनके साथ हुई दो एहम घटनाओं से आई ये जानते हैं महरा समाज के
00:39संभाग ये अध्यक्ष से
00:42कि ने आज अारे � een सिकारी कुत्ता के साथ जब जगतवगूड जगडलपूर जो आज जाना जाता है तो यहां
00:49पे आने से उनके साथ
00:50Like in the Kumbra's car, the name of the Kumbra's car was shown to him.
00:57The Kumbra's car was seen by the Raja's hand, and the Kumbra's car was seen.
01:04The other thing is that the Kumbra's car was taken with the Kumbra's car.
01:19kudda
01:25raja
01:34ुशिकारी कुट्टे के पीछी हटने और हाती घोडों के थम जाने से राजा दलपत देव को यहां अद्रिशी शक्ती का
01:41एहसास हुआ
01:41इसके बाद राजा ने महाराज जी बसाने की इच्छा जताई जानकारी जुटाने पर पता चुला की एक शेत्र महारास समाज
01:50का एक कबीला है इसके सरदार जक्तु हैं जो माटी पुजारी भी है इसके बाद जक्तु ने क्या कहा जानिये
01:59दलपज जी को बोले कि आप आईए हमारे यहां पर जो हम पुजा पाट करते हैं हमारी एक देवी है
02:06जो काचन देवी है उससे हम पूछेंगे क्या चीज़ आपको दिखाई दिया ऐसा तो फिर आए और देवी को बैठाने
02:13से देवी बोला जो काचन देवी बोली कि भई आ�
02:21आई साअ काम से आया ठाई और मेरे कोई सिसा और वहना सकती दीखा इसलिए मैं यहां पर रहना का
02:25देवी बोले तो नैंगे सकती यह करों एक हम आपर रहने के लिए देश सक्टी हूं कि अगर आप यहां
02:41मेरा Color करोगे तो रहिए लेकिन क्यों सुब काम को आप करेंगे
02:46So, my own purpose will be to me and to me to take an opportunity to take advantage.
02:51Raja Nadevi's
02:52की शर्ट मानली और साल 1772 में भंगाराम चौक पर काचन गुडी बनवाई.
02:58तभी से बस्तर दशरे से ठीक पहले काचन गादी की ये रस्मनी भाई जा रही है,
03:04जहां देवी स्वरूपा कन्या तीखे बेल की कांटों पर जूलती है.
03:17इचिवी भारत के लिए बस्तर से सुनील कश्यप की रेपोर्ट.
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