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  • 10 hours ago
'अपना पुस्तकालय' बना युवाओं का सहारा, घर-द्वार के नजदीक मिल रही कम खर्च में अध्ययन सामग्री और आधुनिक सुविधाएं.

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01:051 August 2026
01:06I am very happy to be here in library, because I have never been in library, because in our school
01:13there was no library, so I had a good idea.
01:18And here at home, like they said, we have not read the district notes, so it's very good.
01:25Now we have 56 years of study. 20 years of study are preparing for the 20th grade.
01:33Pustakalya ka shant watawaran pardhai ke liye behead anukul hai.
02:04पहले चात्रों और युवाव को नीजी लाइबरेरी का रुख करना पड़ता था, जिसकी फीस काफी महगी रहती थी, वहीं अपना
02:11पुस्तकाल्या में तमाम सुईधाओं के बावजूद बहुत कम फीस देनी पड़ती है.
02:17आज की जितरे भी बच्चे हैं, जो पढ़ना चाते हैं, प्लीज लाइबरेरी जॉइन किये, और यहाँ पे महौल अच्छा है,
02:24नीचे हमें गर्मी बहुत होती थी, ठंड में ठंड जादा लगती थी, लेकिर यहाँ पे अच्छा है.
02:30लाइबरेरी में पर्तियोगी प्रिक्षाओं से संबंधित करेट 600 किताबे हैं, 200 पुस्तों के लोगों ने दान की हैं, छातरों को
02:38पढ़ने के लिए दो हफ्तों तक किताबे जारी की जाती हैं.
02:43मैं आजकल UGC.NET की प्रेपरेशन कर रही हूं और यहां लाइबरेरी आने से पहले मैं डिस्टिक लाइबरेरी में जाती
02:52थी, डिस्टिक मंडी, तो वहां का एक्सपीरियंस भी काफी अच्छा था, लेकिन पहां पर थोड़ा डिस्ट्रेक्शन का रहता था, लेकिन
03:01जो मैं
03:01यहां आई तो मुझे काफी अच्छा लगा और यहां पर जैसे बुक्स बगएरा की काफी अच्छी सुवीदा है, आज ही
03:09मैंने एक बुक इशू किये है, मॉडरन इंडिया की, तो ऐसी और भी बुक्स यहां पर एविलेबल है, और यहां
03:18पर नेट की सुवीदा है, जैसे �
03:22अगर हमें कुछ पेडिया पगएरा यहां से पढ़ने हो तो हम इंटरनेट का यूज़ कर सकते हैं
03:29SDM थुनाग का कहना है कि करसोव से शुरू हुई ये पहल अभियान का रूप ले चुकी है, इससे ग्रामिन
03:35कुछेतर के यूवाव को परतियोगी परिक्षाव की त्यारी के लिए घर के नजदीक बहतर संसाधन विल रहे है
03:44पुरी उमीद है कि इस पुस्तकाले के शांत वातावरन जिसमें वाइफाई की सुविदा है, कंप्यूटर की सुविदा है
03:50और पैटने के अच्छी विवस्ता हमने कोशिश किया है कि उन्हें दी जाए
03:54तो ये जो ग्रामीन क्षेतर है, इस क्षेतर के जो बच्चे हैं वो इस लाइबरेरी का अपना पुस्तकाले का खूब
04:03फाइदा उठाएंगे
04:04इसकी लागत लगभग तेरा लाग पजटर के आसपास आई है
04:09और हमारे पास अभी लगभग 600 के आसपास किताबें हैं
04:14कुछ किताबें हमर पास डोनेट भी हुई हैं इसके अलावा जो लगभग 200 के आसपास अलग से हैं
04:20और भी किताबें जो हैं डोनेट हो रही हैं और बच्चे जो हैं इनका लाग उता रहे
04:27अपना पुस्तकालिया सिर्फ एक लाइब्रेरी नहीं, ये उन युवाव की उम्मीद, मेहनत और सफलता का नय ठिकाना बनता जा रहा
04:34है, जो आपदा की मुश्किलों को पीछे छोड़कर अपने भविश्य की नई और सफल कहानी लिखना चाहते हैं
04:43ETV भारत केली मंडी से नितेश सैनिकी रिपोर्ट

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