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  • 2 weeks ago
Kesar's path intertwines with a mystical Fakir during a profound 40-day pilgrimage. Amidst spiritual awakening, the boy navigates the tender complexities of adolescent love shadowed by the pain of parting.
Transcript
00:10जिन्दगी चे हर चीज़ दे दो रंग ने सुख दुख मान अपमान मो विराग गुसा ते प्यार
00:23आला रसी पीला जित्ती रब ने तेन्व इन्ना सोणा बनाया काश थोड़ा जात मागवी देंदा नाल
00:42तुम आपस कदो ओना जित्ती पाथा नी तेरे जानतबाद मेरा जी के में लगूँ
00:53पेपे के सरता पता लग्या कुछ नहीं पुरते पता ही ने किते चला गया जी
01:01जावड़यां दरहान एदी माग उजर गई बाप एक वर ऐसा करों गया कि फिर वापस नहीं मुड़या
01:10मेला आप ते विछोड़ा नाल नाल चल देने
01:16मेनु दा लगदा तेरे हच मेरे नादी लगी रही है नी
01:22दुखी होना जा ना होना साड़े अपने हाथ बसंदा
01:25साड़े अपने हाथ बसके में जाएं जी
01:29इक दोहार मेरा मन कीता के मैं पाच जाँ
01:31फेर सोच या कि मैनु कभूले ना की नहीं है
01:37जीटी दिया से लियां दे ब्यावने शुरू होगे उन्हें देल भी मुंटा लपी है
01:44तेरे पिछे एक शेर दाओड रहा ते सामने अचाना के खूँ आगे ते की करना जाहेंगा
01:51मौत दा डार ता हरेक में होंदा ना
01:53जित्थे मौत दा डर खातम होंदा उत्थों जिन्दगी शुरू होंदे
01:58रबबा मेनु छेते छेते वड़ा करते
02:01तांके वड़ा होके ना मैं अपने बाबुनों वापिस का लिया हूँ
02:07जोख जिन्ना मर्जी वड़ा होजये
02:09परवदिया टानिया जरावल में बढ़ती है
02:15बबबजी तुसी हर साल 40 दिन दिया के साथ हुना करते
02:25बबड़े बबबबजी है ये जोटो खाल सुबा गोरखपुर चले गया
02:29अब तो 40 दिन के बादी बापे शाएंगे
02:39झाल

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