00:00जिस अभिनेता की आवाज सुनकर परदे पर सन नाटा चा जाता था जिसकी आखो और समवाद अदाईगी ने कई किरदारों
00:08को याद बना दिया आज वही नाना पाटेकर हमारे बीच नहीं रहे आठ अक्टूबर 2026 को 75 साल की उम्र
00:17में गोवा में उनका निधन हो गया शुर�
00:29विल्मों और अभिनेय तक सीमित नहीं है उनकी जिंदगी का एक ऐसा दौर भी था जब वह महज 35 रुपए
00:36महीने कमा कर अपने परिवार का सहारा बनते थी सवाल है कि 35 रुपए महीना में शुरू हुआ यह सफर
00:43आखिर कितनी बड़ी संपत्ति तक पहुंचा और नाना ने
00:47अपनी कमाई का कितना हिस्ता जरूरत मंदो को दान दिया और इसके साथ ही नाना अपने पीछे कितनी संपत्ति छोड़
00:54कर चले गए तो शुरुआत करते हैं नाना पाटेकर के जन्म से
00:59नाना पाटेकर का चन्म महराष्ट के रायगड चीले में हुआ था उनके पिता का कारोबार था लेकिन परिवार को आर्थिक
01:06छटका उस समय लगा जब एक करीबी वेक्ति ने कथित तोर पर उनके पिता के कारोबार और संपत्ति को हडप
01:13लिया परिवार आर्थिक मुश्कि
01:25पुष्टर रंगने का काम करते हैं और इसके बदले उन्हें महीने के सिर्फ 35 रुपए मिलते थे पुष्टर रंगने के
01:32लिए उन्हें रोचाना कई किलो मीटर तक पैदल जाना पड़ता था यानि जिस सक्ष ने आगे चलकर हिंदी और माराथी
01:39स्दीनेमा में करोरो रु�
01:54और धीरे-दीरे अभिनाई की दुनिया में कदम रखा उनके पिता ने भी थेटर से जुड़ने में उनकी मदद की
02:00थी नाना पाटेकर ने 1978 में फिल्म गमन से फिल्मी केरियर की शुरुवात की हलाकि उन्हें बड़ी पहचान फिल्म अंकुष
02:08में मिली इसके बाद परिंद
02:21शाक और लेखक के तोर पर भी काम किया उनके अभिनाय के लिए उन्हें राष्ट्रिय पुरसकार समयत कई बड़े संबान
02:28मिले अब बात उनकी संपत्ती की जिससे लेकर उनके निधन के बाद चर्चा हो रही है अलग-अलग मेडिया रिपोर्ट्स
02:34के मुताविक नाना पा�
02:47कुछ रिपोर्ट्स के मुताविक वह एक फिल्म के लिए करीब दो से तीन करोर रुपए तक फीस लेते थे और
02:53विग्यापनों तथा दूसरे कामों से भी उनकी कमाई होती थी लेकिन नाना पाटेगर की संपत्ती की चर्चा सिर्फ करोड़ों रुपए
03:00के आकड़े तक करन
03:01उनकी कहानी को अधूरा छोड़ देगा उनकी सबसे बड़ी पहचान उनकी साथगी और दान के लिए ही रही कई रिपोर्ट्स
03:08में दावा किया गया कि उन्होंने अपनी कमाई का बहुत बड़ा हिस्ता जरूरत मंदों और समाजिक कामों में लगाया कुछ
03:15रिपोर्ट्स मे
03:28मेडिया दावों की रूक में देखना चाहिए किसानों की मदद के लिए नाना पातिकर का काम खासथ़ार पर चर्चा में
03:35रहा है , महाराष्ट में सूखे और किसान आत्महत्याओं के दौर में उन्होंने प्रभावित परिवारों की आर्थिक मदद कि ,
03:42साल 2015 में उन्होंने �
03:44अभिनेता मकरंद अनास सपूरे के साथ मिलकर नाम फाउंडेशन की शुरुवात की इस संस्था का मकसद सूखे से प्रभावित किशानों
03:53और ग्रामिन परिवारों की मदद करना था रिपोर्ट्स के मुताविक नाना ने कई किसान परिवारों को विक्तिकत तोर पर भी
03:59आर्�
04:12पर चिक्र हुआ यहां तक कि एक रिपोर्ट के मुताविक उन्होंने किसान परिवारों को आर्थिक मदद के तोर पर 1
04:19.5 करोर रुपए की कार तक छोड़ दी थी इसलिए नाना पाटेकर की कहानी को अगर सिर्फ 35 रुपए महीने
04:25से 80 करोर रुपए तक पहुंचने के कहानी
04:28तो शायद यह उनके जीवन के सबसे एहम हिस्ते को नजर अंदाज करना होगा असली कहानी यह है कि मुश्किलों
04:35से निकल कर उन्होंने शोहरत और पैसा तो कमाया लेकिन अपनी पहचान को सिर्फ दौलत से नहीं जोड़ा बलकि परदे
04:41पर उन्होंने जितने दमदार किरद
04:43निभाएं असल जिंदगी में भी किसानों और चरूरत मंदों की मदद के लिए खड़े न चराएं आज नाना पाटेकर हमारे
04:49बीच नहीं है लेकिन उनके पीछे सिर्फ फिल्में पुरसकार और करोडों की संपत्ती नहीं जुटी है उनके पीछे एक ऐसी
04:56मिसाल भी है जिस
05:11को नाना पाटेकर का कौन सा डायलक याद है या फिर कौन सा फिल्म आपको उनकी सबसे अच्छी लगी अपनी
05:17राय कमेंट सक्सर में जरूर बताएं और ऐसे ही तमाम अपडेट्स और शियर मार्केट से जुड़ी तमाम जानकारी के लिए
05:23आप बने रहें गुट रिटर्ण
05:24दिस्टल कसा