00:00साथियों, सबका साथ, सबका अविकास, यही मेरे लिए सूसासन का आधार रहा है, हमारे देश ये एक बड़ी त्रास दिर
00:18रही है,
00:21राजनीती के लिए समाज को वोटों के हिसाब से बांट दिया गया, अब सोचिए, खेत में पानी नहीं आता, तो
00:35किसको नुक्षान होता है,
00:37क्या एक जाती के किसानी से प्रभावित होते हैं, बिजिली नहीं आती, तो क्या सिर्फ एक समुदाए के घर में
00:48अंदेरा रहता है,
00:50इन सभी सवालों का जवाब है, नहीं, समस्या सबकी है, तो समाधान भी सबके लिए होना चाहिए,
01:06और इसलिए हमने सूसाजन को सेचुरेशन से जोड़ा, सेचुरेशन यानी हर लाबारती जुड़े,
01:19कोई पात्र छुटे नहीं, कोई हगदार पीछे रहे नहीं, और किसी के हग पर कोई डाकान न डाल सके,
01:34यही सेचुरेशन है, यही बड़लाव की असली गाता है,
01:40साथियों, हमने इस देश पर जन्म लिया, माभारती की गोद में, पलने बढ़ने का सौभाग्य हमें मिला,
01:53यह हमारे उपर, मा भारती का रण है, इस देश की पावन पुनित माटी का रण है,
02:06क्या हर भारतीय का इस संकल्प नहीं होना चाहिए,
02:11कि वो कर्तद्य की प्राकास्ता से कुछ कर्ज उतारे,
02:19हमारे दिल की हर धड़कन में, क्या एक ही संकल्प नहीं गूजना चाहिए,
02:28हमें भारत के प्राचीन गावरव को पुनर जिवित करना है,
02:39भाईयों भाणों, जो भारत कभी विश्व की अर्थ व्यवस्ता का नेत्रुत्व करता था,
02:51जिसके किस से सुनकर दुनिया सम्रुद्धी की कल्प नहीं करती थी,
02:59लेकिन समय का चक्र बदला, गुलामी का काल खंडा आया,
03:07आकरंताओं और लुटेरों ने, उसी भारत को लुट कर तबा कर दिया,
03:14जो भारत दुनिया को दिशा दिकाता था, उसके विश्व विद्यालें नस्द कर दिये गए,
03:23उसके पुस्तगालें जला दिये गए, एक ऐसा भी समय आया,
03:32छोटे छोटे संकट भी विक्राल होने लगे,
03:37बयाव बुखमरी, विदेशों के हमले, संस्कृती, सम्मान और स्वाविमान पर कृप पहार,
03:49उपर से ऐसी गरीबी और विविशिकाएं, लेकिन तब भी, तब भी, मा भारती की संतानों का साहत नहीं तुटा,
04:12हर बार, बार-बार, कोई दिख्दर्सक जन्म लेता रहा,
04:21सामान्य मानवी में, नई सुबह का आत्म विस्वा जगाता रहा,
04:29स्वामी विवे कननजी ने कहा था, विवे कननजी की वाणी है,
04:40एक दिन, एक अद्भोत, गवरवशाली, और महान भारत का उदे होगा,
04:50विवे कननजी कहके गए है, महर्ची अर्बिंदो ने भी कहा था,
05:00महर्ची अर्बिंदो ने कहा था, भारत के भाग्य का सुरूर,
05:07भारत के भाग्य का सुरच जरूर उगेगा, और उसकी रोसनी, पूरे विश्व को आलो कित करेगी,
05:20स्री अर्बिंदों ने कहा था
05:23साथियों
05:25अदम में साहत
05:27और अमीड जी जी विशा में तपे
05:31हमारे वो पुर्वच
05:34हम उनी की संतान है
05:37उनी के तप
05:40त्याग
05:42और बलीदानों का परणाम है
05:45आज हमारे पास
05:48एक ऐसा देश है
05:51जहां हमारे सपने स्वतंत्र है
05:55और उन्हें
05:58पूरा करने का सामर्थ भी हमारे पास है
06:04आज हम खुद ही
06:05अपनी नियती के नियंता है
06:09इसलिए
06:11आज
06:13ये माँ भारती के साथ
06:16अन्याय होगा
06:19अगर हम
06:21छोटे लक्षों को लेकर चलेंगे
06:24ये राश के सामर्थ के साथ
06:28अन्याय होगा
06:28अगर हम
06:30आसान लक्षों को लेकर चलेंगे
06:33ये समय है
06:35जब हम
06:37एक देश के रूप में
06:40बड़े लक्ष रखें
06:42ऐसे लक्ष जो अभूत पुर्व हो
06:47ऐसे लक्ष जो असाधारण हो
06:52विक्सित भारत का लक्ष
06:56आत्मंदिर भर्ग भारत का लक्ष
07:00एकनोमी को टॉप फ्री में लाने का लक्ष
07:04गरीभी का नाम और निशान मिटाने का लक्ष
07:08ड्राँक स्प्री इंडिया मनाने का लक्ष
07:13इसाध्यों हम आई ऐसा भारत बनाना है
07:16कि तूरिज्ट की बात हो
07:19तो दुनिया भारत का नाम ले
07:23पड़ाई की बात हो तो दुनिया भारत को चुने मनोरंजन का डेस्टिनेशन हो वो भारत हो
07:33हेल्स अन्वेलनेस की प्रांस्विक्ता भारत ही बने
07:39स्पोर्ट का सिर्मोर भारत हो इनोवेशन का हब भारत हो
07:46टेक्नोलोजी में भारत का डंका पुरे विश्व में बजे
07:53ऐसे हो कि हर खेत्र में पिरंगासान से लहरा है।