00:27।
00:31पहले बैलगाडी और फिर टमटम जब उनकी इस कोशिस में काम नहीं आ पाएं तब रोहित ने जुगाड की एक
00:37गाड़ी से बच्चों को इसकूल पहुचाना सुरू किया।
01:00बच्चे को पहुचा रहे हैं बहुत दिन से करें पशिश्टी साल से हैं इसके पीछे का मकसद क्या है।
01:04मकसद बच्चा सब्सक्राइब कुछ करना साहिए।
01:09पर लिखके अपना फुसी बने कुछ करना साहिए।
01:12कि बदलाव आप इसे अपने मर्जी से खरीद लिए।
01:16किन किन परिशानियों का सामना करना पड़ता है।
01:19यह भी कोई परिशानियों करना पड़ता है।
01:21काई की सब में बोलता कि परशासन बोकेगा भी रोकने रहा है।
01:24इसलिए भी खुशी है इसी में हम लोग।
01:26किते बच्चे को पहुंचाते हैं।
01:28लग लग 15-16 बच्चा हैं।
01:29आप करते क्या हैं।
01:31हम तो मजदुनी करते हैं।
01:33जोगंतार का सम्मान होते हैं।
01:35तीस साल तक आपने बच्चे को स्कूल पहुंचाया है।
02:03हम सब छोटे थे तो पता नहीं पहले भी करते थे।
02:07जब हम सब छोटे थे तब भी वह अभी तो यह गाड़ी है।
02:11पहले टम-टम वहा करता था घोड़ा गाड़ी जानते ही होंगे।
02:13उससे हम सब को भी पहुचाते थे यह हमारे दोस्त।
02:16हम सब वह सब भी जाते से पढ़ने के लिए साथ में हम सब भी 10-12 थे।
02:46बच्चे भी अपने रोहित चाचा की गाड़ी में बैठ कर मजे से स्कूल पहुचते हैं।
03:15परिजनों को इस बात का सुकून है कि उनके बच्चों की जिमेदारी रोहित के कंधों पर है।
03:19जो पूरी साथानी से उनके बच्चों को उनके स्कूल तक पहुचा देंगे।
03:26पहुचा देता है।
04:00चहरे पर मुस्कुराहट लिए 30 सालों से रोजाना बच्चों को इसकूल तक पहुचाने के लिए रोहित कोई पारिस्रमिक भी नहीं
04:07लेते।
04:08यकीनानुवे समाज के लिए मिसाल है।
04:10ETV भारत के लिए भागलपूर से अमरजित कुमार सिंग की रिपोर्ट।