00:00नहीं चाहिए, नहीं चाहिए, MDR नहीं चाहिए, बाद जिंदा बाद, यवाले का जिंदा हाँ
00:07दोन हजार उपैन पेक्षा अविक रख में चा यूटी आय वेभरान वर 0.4 टके MDR आकारने चा प्रस्तावाला नाक्तूर
00:16चेंबर ओपॉमर्स याने तिवर विरो दर्शोला है या प्रस्तावित शुलकामों लगु आने मध्यम सोरुपचा व्यहसायन वर अतिरुपकार थी
00:25आकार परेशक्तो है शी भुमिकाल नाक्तूर चेंबर ओपॉमर्स तरफे माणने तालिया है यास निल्नयासा निशेद मों दोने साथी नाक्तूर आतिल
00:33गोसर मगन सो गात्पया पारी बरगाने एकत रहे द वीधर शनी के लिए विशेश मजी यांगोलन अगर मैं रपैरन
00:54या प्रस्ताविक शिल्ता ता पुनर विचार करावा शिप्वमुक मागनी चेंबर चावतिमा केंद्री अर्थन परेंट पड़े करने तरिया है यूपिया यूपिया
01:05जो है यह तो मैं सरकार को बहुत-बहुत बथाई देता हूं उनका अभिवादन करता हूं कि एक रिव
01:23पाजनीकुरा जहां पर पाच हजार की और हजार का गाहँ है वहाँ पे भी आपको देखेगा बीमाब देखेगा पेतीम देखेगा
01:30तो बहुत अच्छा लाई थी हमको लग रहा था कि सरकार नी इत्ता अच्छा लाई और आगे डिजिटल करन्सी लाने
01:35वाली यह जिसको ब
01:53तो बोल रहे हैं कि बैंके को हमको देना है, हमको सीकृरिटी देखना है, अभी तक भी तो देख रही
01:57थी, दस साल से, और तो व्यलिम बढ़ रहा है, इससे जी एस्टी बढ़ आ है, आप देखो कली एक
02:01फिगर आया, दो लाख करोड के ऊपर जी एस्टी आया, क्योंकि सब लो
02:23और फिर कैश वाली एकॉनमी हो जाएगी, तो गवर्मेंट के रिविन्यू का भी फड़ पड़ेगा, यह क्यों ला रहे है,
02:29बहुत पैसा नहीं लग रहा है, क्योंकि अभी बोले, 30 सप्टेम्बर हैंने, एक अक्टोवर से कली, एपल वाला आ गया,
02:36एपल पे, एपल पे, �
02:37जो कि क्रेडिट कार्ड को एपल पोन के तुरू आएगा, बाहर के आ रहे हम तो क्या बोल रहे है,
02:42एक तो कि हमको इंडिन इजिनियस हमारा भारतिया चीज़ है, उसको आगे बढ़ाना है, और आपको एपल पे ला रहे
02:47हो, एपल पे आगे, एक्सिस बैंक के साथ चलो होग
03:07कि इसका incidence व्यापारियों पर नहीं फड़ेगा, जो हमारी वित्तमंत्री जी माननी वित्तमंत्री जी बोल रहे है कि व्यापारियों को
03:13देना है, व्यापारी कैसे जब से देगा, वो कोई खाली वेट आएगा, वो तो अपनी कोस्टिंग में डालेगा, और कि
03:18अपनी जब से
03:43अवाज लगाना चीह, इसे महंगाई वड़ेगी, इसे उंतो तकलिव हो।
03:49इसे इस मुक्लिव हो तकलिव हो।