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  • 13 minutes ago
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी कई बार शिमला दौरे पर आए. उन्होंने यहां कई ऐतिहासिक सभाएं की.
शिमला से शिवानी कपूर की रिपोर्ट

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00:00राश्टरविदा महात्मा गांधी और राजधानी शिम्ला का अतिहासिक किनेक्शन है।
00:30गांधी और शिम्ला जो है उसके साथ ऐसा जुडाव है कि इसके बिना भारत का सोतंतरता आंदोलन जो है वो
00:38अधूरा नजर आता है।
01:01गांधी जी का शिम्ला में आने का मुखे जो मुद्धा था जैसा कि आपने भी बताया है वो भारत को
01:08सोतंतरता प्राप्ति के लिए था।
01:10और उन्हों ने अपनी बात ततकालिन वायसरायों के साथ रखी और उन्होंने अपने पक्ष को भी रखा जैसे आसायोग अंदोलन
01:19है दुटे विश्वियुद से उत्पंसिती है और शिम्ला कानफरेंस जो हुई थी उनीस सो पंतालीस के शिम्ला सम्मेलन हुआ था।
01:27उसमें वो एक प्रामर्श दाता के रॉब में आये थे और वैसे ही वो कैमिनेट मिशन के दौर में भी
01:32आये थे।
01:57उसमें गांधी जी ठेरे और उसमें सबसे ज़्यादा बड़ा परवास उनका 23 दिन का 1945 में था और उसके बाद
02:05जो 46 में उनका परवास चेडवी खाऊस में था तो जो चेडवी खाऊस है वो ओडिटेंट अकाउंट्स का आज संगराले
02:12बना है।
02:13इस संगराले में भी जाके आप गांधी जी के पच्चापों की आवास सुन सकते हैं।
02:18और गांधी जी की सबसे बड़ी जो अंचुई बातें ये थी कि गांधी जी ने 1921 और 1931 में दो
02:27जन समाहों को संबोधित किया।
02:48पर 14 मई सन 1931 को जन सबाह को संबोधित किया था।
02:53और ये उनकी जो जन सबाह थी किसी भारती राजनिता की पहली जन सबाह थी।
02:59क्योंकि ब्रिटिश काल में तो सिरफ महरानी का जनम दिन और उनके कारे करम ही रिज पे मना जाते थे।
03:33और भारतियों को तो आने की यहां पर मना ही थी।
03:341921 में जिस भवन में रह वो शांती कुटीर थे, वो चक्कर में वो भी नीजी भवन है।
03:40और एक भवन जो काल्टन ग्रोब है, वानाडेल मार्क पे वो भी नीजी भवन है।
03:44तो अब जो गांधी जी की यादों के साथ एक तो रिज मैदान है, और एक इदगा मैदान है, जहां
03:50उन्होंने 1921 में जनसभा को संबोदी किया था, तो अंत्ता ये कहना होगा कि गांधी जी के बिना शिमला का
03:59इतियास भी अधूरा नजर आता है।
04:01और इस बात को ये परदेशित करना चाहिए कि जो गांधी जी से जुड़े हुए चीज़े हैं, उनका सनक्षन हो।
04:09और सबसे बड़ी बात है कि गांधी जी ने जब इस एतिहासिक रिज मैदान पे जनसभा को संबोदीत किया, तो
04:15इसका नाम करण भी गांधी मैदान किया �
04:18चाहिए, ऐसा मेरा मानना है, और गांधी जी की जो पुस्तक है, उस उस पुस्तक में भी मैने इन बातों
04:25को उठाया, और उनकी क्यों आये, उनका आने का परपस क्या था, और सबसे बड़ा अंचुआ पहलू जो गांधी जी
04:33का, जो मुझे नजर आता है, उनका 1921 में लिख
04:48पाता, नव जीवन उनकी अख़वार में, उसमें गांधी जी ने जो उस समय की शिमला की जो समस्यां थी, उसको
04:55जागर किया, और उन्होंने 500 मी मंजिल शिर्शक देने का भी यही मकसद रखा था, कि जिस परकार कि 500
05:03मी मंजिल पे वहपार नहीं चल सकता, उस तरह अंग्रे
05:18पर इनको लियाना बढ़ेगा और तब ही हमारे देश की जनता की समस्याओं को समझ भाएगा
05:48उद्गाटन किया था, तो इस प्रतिमा की सबसे विशेष्टा ये है कि ये किस लिए मकसद से लगाई गई थी,
05:57ये इसी मकसद से लगाई गई थी, कि आने वाली पीडियां गांदी जी के अदर्शों और विचारों को आतम साथ
06:02कर सकें, और उन्हें गांदी जी की फस्तित
06:06सदे बनी नजर आए, तो इस बात थी कि इस प्रतिमा के जो पीछे पट लगा था, उसमें गांदी जी
06:14की यात्राएं जो थी, वो गलत लिखी थी, जब मैंने इस बीसो इकिस में अपनी किताब पर काशित की, तो
06:23सरकार को इस बारे में सूचित किया, कि जो यात्राएं हैं,
06:27गांदी जी की आठ नहीं हैं, ये दस हैं, तो सरकार नहीं इसका संग्यान लेते हुए, उन यात्राओं में भी
06:33शुद्धी करन करके, आप देख सकेंगे कि जो वो संग्वन मरुप के बारत लिखी है, वो दुरुस्ती करन भी करा
06:39गया था, और इसका सबसे बड़ी बात है क
06:42इसकी जिसको निर्माता है, उसका नाम नहीं पता लगा, कहीं से भी खोज में नहीं पराप्थ हुआ, पर ऐसा भी
06:49कहते हैं कि इस प्रतिमा के लिए ततकाली छिमला के निवासें ने चंदा भी दिया था, ऐसा भी कहते हैं,
06:56पर पुखता इसके परमान नहीं मिलते, और ये �
07:12Thank you very much.
07:31Thank you very much.
08:31Thank you very much.
08:39Thank you very much.

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