00:00Can you think of here 1000 km to America in room, there is an email of How the Mahal her
00:08how is this?
00:09Have some that have hath actually heard from  pelvic from the city now?
00:21Could you hear our MailNIpe and Georgia efficiencies in those ochanties?
00:31in this video, what do you think about it?
00:33Let's start with this video.
00:36First of all, let's understand the story of America's story.
00:41America's story is just a dynamic story.
00:44Or the story of America's story,
00:46which is a thousand kilometers away from their home,
00:49their own language, their own language,
00:51their own language and their own language.
00:54America's story of America's story,
00:56that's why we grow up!
00:57But desde China's history,
01:01in America's story,
01:06where there are people living in good life?
01:11Well those people living in America,
01:12gettingちゃんpliveness,
01:13and moving into autre
01:13there have come what you see.
01:26बाजारों में रौनक बढ़ जाती है और परिवार पूजा के लिए एक तूसरे से मिलने की तयारी करने लगते हैं
01:32लेकिन जब बंगाली परिवार पढ़ाई नौकरी और कारोबार के लिए अमेरिका पहुचे तो उनके सामनी एक सवाल था कि क्या
01:39अपनी इस परमपरा को नई
02:09जमीन पर भी उसी तरह जिंदा रखा जा सकता है।
02:11बड़ी संख्या में पिशिवर अमेरिका जाने लगे।
02:13इनमें बंगाली समुदाई की लोग भी शामिल थे।
02:16धीरे धीरे छोटे छोटे इस तर पर सांस्कृतिक कारेकरम शुरू हुएं और फिर दुर्गा पूजा जैसे बड़े आयोजन भी आकार
02:23लेने लगे।
02:23समुदाई बढ़ा तो पूजा का स्वरोप भी बड़ा होता गया लेकिन यहां एक बड़ी चुनावती थी जगह की।
02:29भारत में दुर्गा पूजा के लिए बड़े बड़े पंडाल बनाया जाते हैं जबकि अमेरिका में शुरुआत में ऐसी सुविधाय नहीं
02:35थी।
02:35इसलिए कई जगहों पर विश्वविध्यालियों, स्कूलों, सामुदाई केंद्रों और बड़े हॉल को पूजा इस्थल बनाया गया।
02:41जैसे जैसे लोगों की संख्या बढ़ी वैसे वैसे आयोजन भी बड़े होते गए।
02:45अमेरिका में दुर्गा पूजा के सामने एक और बड़ी चुनावती थी।
03:04यानि पूजा को इस तरह आयोजित किया गया कि लोग शुक्रवार, सनिवार और रविवार को जादा से जादा संख्या में
03:10इसमें सामिल हो सके।
03:11भारत में जहां पूजा का आयोजन कई दिनों तक चलता है, वहीं अमेरिका में लोगों की सुविधा के हिसाब से
03:17इसे सीमित समय में आयोजित किया जाने लगा, लेकिन समय कम होने के बावजूद पूजा की मूल भावना को बनाये
03:23रखने की कोशिश की गई।
03:24अब सवाल आता है कि अमेरिका में पूजा आखिर कैसे होती है, तो पूजा इस्थल पर मादुरगा की प्रतीमा इस्थापित
03:30की जाती है, आसपास फूलों और सजावट से जगों को सजाया जाता है, लोग पारंपरिक कपड़ों में पहुंचते हैं, महिलाय
03:36सारी में और प
03:54हंटियों की आवाज, शंकनाद और मादुरगा की आरती के बीच पूरा महौल भक्ती में हो जाता है, भले ही पूजा
04:00अमेरिका में हो रही हो, लेकिन उस समय लोगों को ऐसा महसूस होता है, जैसे वो भारत की किसी पंडाल
04:07में खड़े या फिर बैठे हो, पूजा के बाद �
04:09आयोजन सिर्फ धार्मिक कारेकरम तक सीमित नहीं रहता, कई जगों पर धुंची निर्ते होता है, लोकधा की आवाज पर निर्ते
04:16करते हैं और पूरा महौल उत्सौँ में बदल जाता है, इसके बाद सांस्कृति कारेकरम शुरू होते हैं, बच्चे निर्ते करते
04:23हैं, य�
04:36foreign
04:45foreign
04:46foreign
04:47. . . . . . .
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04:51.
05:20,
05:28is
05:29४४ूजा का प्रसाद बित्रन होता है। कहीं मिठाई और फल दिये जाते हैं।
05:33४ूजा का प्रसाद छोटे पैकेट में बाटा जाता है।
05:36इस पूरे करम में बच्चों से लेकर बुझुर्गों तक सभी की भागीदारी रहती है।
05:48शमय के साथ अमेरिका में दुर्गापूजा का दायरा भी बढ़ा है पहले जहां यह आयोजन मुखे रूप से बंगाली समुदाय
05:55करता था अब कई चगों पर दूसरे भारतिये समुदायों के लोग भी इसमें शामिल होने लगे हैं यही वज़ा है
06:01कि दुर्गापूजा कई
06:02अमेरिकी शहरों में एक बड़े सामुदायक आयोजन का रूप ले चुकी है मैरी लेंड में सांस्कृती जैसे संगठन लंबे समय
06:10से दुर्गापूजा का आयोजन कर रहे हैं वहीं न्यू जर्सी में कालोल का आयोजन भी काफी बड़ा नाम माना जाता
06:16है इन आयोजनों मे
06:18सिर्फ पूजा नहीं होती बलकि संगीत और सांस्कृति कारेक्रम भी होते हैं कुछ आयोजनों में भारत से कलाकारों को भी
06:24बुलाया जाता है इससे अमेरिका में रहने वाले लोगों को भारतिय संगीत और संस्कृति से जुड़ने का एक और मौका
06:31मिलता है अब जरा सबसे
06:33एहम पहलू पर आते हैं अमेरिका में पैदा हुई नई पीड़ी के लिए भारत वैसा नहीं है जैसा उनके माता
06:38पीदा के लिए हैं उन्होंने शायद अपना पूरा बच्पन अमेरिका में बिताया हो उनकी पढ़ाई अमेरिका में हुई हो उनके
06:44दोस्त अमेरिकी हो और उ
07:00उन्हें अपनी भारतिये पहचान का एक हिस्सा करीब से देखने को मिलता है। यही वज़ा है कि अमेरिका में दुर्गा
07:06पूजा आने वाली पीडियो तक संस्क्रीती पहुंचाने का एक चरिया भी बन चुकी है। तो अगर आप अमेरिका की दुर्गा
07:12पूजा को सिर्फ एक
07:27साथ होने का एहसास। भारत से हजारों किलोमीटर दूर रहने वाला कोई परिवार जब पूजा इस्थल पर पहुंचता है। मा
07:34दुर्गा के सामने हाथ जोडता है और फिर दूसरे परिवारों के साथ बैठ कर प्रसाद गरहन करता है। तो कुछ
07:40घंटों के लिए उसे द�
07:44अपने शहर ही है और अपनों के बीच अपने मिट्टी के साथ है और शायद यही अमेरिका की दुर्गा पूजा
07:51की सबसे बड़ी कहानी है। जगह बदल गई, जिंदगी बदल गई, पूजा का तड़ी का थोड़ा बदल गया लेकिन मा
07:57दुर्गा से जुड़ी आस्था औ
08:01आज भी वही है। यही वज़ा है कि अमेरिका में दुर्गा पूजा हर साल सिर्फ एक तेवहार के तौर पर
08:07नहीं बलकि हजारों भारतिये परिवारों को एक सांथ जोडने का मौका लेकर आती है। तो यह रही अमेरिका में दुर्गा
08:14पूजा की पूरी कहानी। अब आप
08:16को क्या लगता है क्या अमेरिका की दुर्गा पूचा भारतिये परंपरा को जोड़ने का एक शांदार उधारन है अपनी राय
08:23कमेंट सेक्षन में जरूर बताएं और ऐसे ही तमाम अपडेट्स और शेयर मार्केट से जोड़ी तमाम जानकारी के लिए आप
08:29बने रहें गुड �
08:29रिटर्न्स दिश्टाल के साथ