00:01ुत्तरपिदेश की सरकों पर कौतूहल बना 308 पहियों वाला बाहुबली ट्रक अब बनारस की सीमा में दाखिल हो चुका है।
00:09चंदौली से बनारस तक पहुचने में इस ट्रक को कुछ परिशानियों का भी सामना करना पड़ा।
00:14दोसो टन वजनी विशालकाय मशीन को अपनी पीट पर ला दे इस महाकाय ट्रक को आगे बढ़ाने में NHAI के
00:23अधिकारियों और पुलिस प्रशासन को भारी मशक्कत करनी पर रही है।
00:27बता दें कि दोसो टन का ये वेसल बेल्जियम से समुद्री रास्ते भारत आया जहां ओडीसा के पारादी पोर्ट पर
00:36लैंड हुआ।
00:36वही से शुरू हुआ इसका लंबा सड़क सफर। चलिए सबसे पहले इसका पूरा रूट समझे।
00:45दोसो टन की मशीन को लेकर जाने वाले बाहुबली ट्रक के पूरे सड़क रूट की बात करें तो ये ट्रक
00:51ओडीसा के पारादी पोर्ट से चला है और उसके बाद ये जारखन पहुँचा।
00:57जारखन में राची, राची के पास नगडी टोल प्लाजा, पिसका रेलवे क्रॉसिंग के बाद इसका रूट सीधा बिहार की तरफ
01:05रहा।
01:06बिहार में पहले औरंगाबाद, फिर रोहतास और उसके बाद कैमूर से होते हुए बाहुबली ट्रक ने यूपी में एंट्री लीूपी
01:16के चंदॉली और वारा नसी से होते हुए अब ये बाहुबली ट्रक गासीपुर की ओर निकलने वाला है।
01:23उसके बाद आजमगड और फिर लखीमपुर खीरी होते हुए कुम्भी यूनिट में पहुचेगा।
01:31ट्रक की सबसे बड़ी खासियत। बाहुबली ट्रक में 308 पहिये हैं।
01:36विशेश मल्टी एक्सल हाइड्रोलिक ट्रेलर का इस्तमाल। ट्रेलर की लंबाई करीब 100 फीट।
01:43बाहुबली ट्रक की खास बात ये भी है कि इसके साथ पूरा काफिला चलता है।
01:49इस बाहुबली ट्रक के आगे पाइलट गाडियां चलती हैं।
01:53पाइलट गाडियों के साथ ही तकनीकी विशेशक्यों की टीम भी साथ चलती हैं।
01:58जो पूरे रास्ते ट्रक के निगरानी रखती हैं।
02:01और साथ ही इस्थानिय पुलिस, NHAI की टीम और इस्थानिय प्रिशासन इसके साथ रहता हैं।
02:08ताकि इतने बड़े और भारी कंसाइन्मेंट को सुरक्षित निकाला जा सके।
02:12अब जानते हैं कि आखिर इतनी बड़ी मशीन की जरूरत क्यों पड़ी।
02:17दरसल लखीम पूर खीरी के कुम्भी में बड़ा बायो प्लास्टिक प्रोजेक्ट बन रहा है।
02:23गन्य से बनने वाले उत्पादों की मदद से बायो डिग्रेडेबल प्लास्टिक पी ले तैयार करने की योजना है।
02:31रिपोर्टों के मताबिक परियोजना की लागत करीब 3,000 करोड से जादा बताई गई है।
02:37यही कारण है कि बेलजियम से आई भारी भरगम और ध्योगिक मशीनरी को कुमभी पहुचाया जा रहा है।
02:45इस 200 टन वजनी रियक्टर वेसल से चीनी और एथनॉल का उत्पादन किया जाएगा।
02:51बता दें कि यह पूरा मामला बलरामपुर, चीनी मिल और एथनॉल प्लांट से जुड़ा है।
02:57जिसके लिए विदेश से एक विशाल वेसल मंगाया गया है।
03:01गौर करने वाली बात यह है कि इस ट्रक के लिए सफर इतना आसान नहीं रहा है।
03:07इसके लिए रूट भी एक बड़ी समस्या के तौर पर सामने आई है।
03:11इस बात में कोई दोराय नहीं कि सडक पर चलता हुआ यह अनोखा बाहो बली ट्रक किसी अजूबे से कम
03:17नहीं है।
03:18जिसे देखने के लिए लोग सडकों के किनारे इखटा हो रही है।
03:23ऐसे में अब देखना यह है कि यह महा ट्रक अपनी तमाम बाधाओं को पार करते हुए कब तक सुरक्षित
03:30अपनी मन्जिल पहुच पाता है।