00:00नमशकार, मैं दिव्या मितल.
00:02अभी कुछ दिन पहले मैंने आईये से त्याग पत्र दिया और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिये.
00:07कुछ दिनों तक जवाब नहीं दिया क्योंकि काम बड़ा था और मैं होसला जुटा रही थी.
00:11पर आज उन जवालों के जवाब देने आई हैं.
00:14आगे क्या? किस के साथ? और कहां से?
00:18पहला सवाल आगे क्या? राजनीती.
00:21लोगों ने मुझे कहा कि तुम सब कुछ तो बन गई अब और क्या बनना है?
00:25मुझे आवाज बनना है.
00:26उन लोगों की आवाज, जिनकी आवाज किसी दफतर तक नहीं पहुच पाती और अगर पहुच भी जाए तो सुनी नहीं
00:33जाती.
00:33और उन लोगों की तरफ से मुझे अपनी देश की अजादी के 80 सालों का हिसाब चाही.
00:38एक बार में लहुरिया दह की पहाड़ी पे पानी पहुचाने के लिए निरीक्षन कर रही थी.
00:43तभी एक औरत मेरी तरफ आने लगी.
00:45मुझे लगा उसे कुछ चहिये होगा शायद पैंशन या पका मकान.
00:49आकर मुझसे बोली कि माडम आपसे कुछ मांगना है.
00:51और उसने जो मांगा उससे मेरा सर शर्म से जुग गया.
00:56उसने कहा माडम हमारे गाउ में स्कूल केवल पाचवी कक्षा तक है
00:59और उसके बाद जंगल और पहाड के बीच में बच्चों की पढ़ाई का अंत हो जाता है.
01:03मुझे आगे की कक्षा तक अपने गाउ में स्कूल चाहिए.
01:07उस वक्त तक उस महिला के घर में पानी नहीं था और उसने स्कूल मांगा.
01:12मैंने नियम देखे, स्कूल स्विकृत किया.
01:15और आज तीन साल हो जाने के बाद उस स्कूल बनना शुरू नहीं गुआ.
01:20अब मुझे बताईए कि क्या नहीं था?
01:23पैसा नहीं था, नियम नहीं था, स्विकृती नहीं थी, था तो बस इरादा नहीं था.
01:28अगर इरादा होता तो पहाड भी रास्ता दे देता और इरादा नहीं था, तो एक फाइल ही पहाड बन गई.
01:34मुझे उन गायब स्कूलों का हिसाब चाहिए
01:37मैं विशेश सचेव राजस्व थी
01:39और एक आदमी एक पन्नी में
01:41अपने कागज और उमीद को लपेटे हुए
01:43मेरे पास आया
01:43उसने मुझे कहा कि मैडम मैं भूमी हिन था
01:46और कुछ साल पहले एक SDM ने
01:48एक सरकारी जमीन का छोटा सा टुकड़ा
01:50मुझे पटे पे दे दिया
01:51कागज तो मिल गए पर जमीन पे कबजा नहीं मिला
01:53मैंने उसके कागज देखे रिपोर्ट सरासर जूट थी
01:56तो मैंने संबंदित जिले के अधिकारी से बात कली
01:59उसने माना की रिपोर्ट गलत है
02:01रिपोर्ट वापस हुई बनाने वाले पे कारवाई भी हुई
02:03अब मामला आया कबजा देलाने का
02:06मैंने दो बार फून किया
02:07तेन बार कहलवाया
02:08तो वहां से जवाब आया कि उपर से मना किया गया है
02:12ये उपर कौन है
02:14सम्विधान तो कहता है कि सबसे उपर लोग है
02:16तो उसे न्याय के लिए इधर उधर क्यों भटकना पड़ रहा है
02:20जो उपर से दिया जाए वो क्रिपा
02:22और न्याय तो हक है
02:24तो मुझे उन पन्नियों में लप्टे अन्याय का हिसाब चाहिए
02:28हजारों गाउं है जहां आज भी सड़क नहीं है
02:31नदी है तो पुल नहीं है
02:32बरसात में गाउं टापू बन जाता है
02:35और इंतजार चल रहा है पीडियों से
02:38और सड़क है तो उस पे इतने गड़े हैं
02:41कि उस पर चर्पकर स्कूल जाने वाले नन्ये पाउं पे
02:44जो कीचर लगते हैं उसके दाग उनके सफेद कपरों तक नहीं पहुच पाते
02:47और उसी गड़े में कोई मोटर साइकल वाला गिरता है
02:50तो उसके खून के छीते भी उनके कपरों तक नहीं पहुच पाते
02:54उनको जानकारी नहीं है ऐसा नहीं है
02:56उनको पता है कि गड़ा कहा है, फाइल का नंबर क्या है और मौतो का आकड़ा क्या है
03:02नहीं है तो फिक्र और जब फिक्र नहीं होती तो मौत हादसा नहीं फैसला होती है
03:08मुझे उन मौतो का हिसाब चाहिए
03:10मैं एक साधारन परिवार की लड़की थी, इस देश ने मुझे से वादा किया था कि पढ़ोगी तो बढ़ोगी
03:15मैंने पढ़ा और आज मैं आपके आगे खड़ी हूँ
03:18पर आज के बच्चों का वादा क्या, जो रात रात भर पढ़ रहे हैं और पेपर लीख हो जाता है
03:40सुरक्षित है कि नहीं, आज AI आ रहा है, बहुत सारे ये काम AI करेगा, हर नौजवान को इस बात
03:47का डर है, मैं दो बेटियों की मा हूँ, छोटी है, पर मुझे अभी भी इसकी चिंता है
03:51उनके पास जवाब नहीं है, कोई बात नहीं, किसी के पास नहीं है, पर सवाल तो हो सकता था, सोच
03:58तो हो सकती थी, कोई सदन नहीं है जहां पर इसके बारे में बात हो रही हो
04:01हमारे बच्चे जस भविशक की ओर चल रहे हैं उसके किसी को चिंता ही नहीं है
04:06आज हमारी राजनीती में सब कुछ है सत्ता है शिलन्यास है शोर है पर सोच नहीं है
04:13मुझे उस ना सोचने का हिसाब चाहिए
04:17उदेश केवल एक राजनेता बदलने का नहीं है राजनीती बदलनी होगी
04:21इरादे की राजनीती न्याय की राजनीती फिक्र की राजनीती और सोच की राजनीती
04:26वो राजनीती नहीं जो लोगों को सिर्फ गिंती है सीड़ी बनाकर सत्ता तक पहुँचना चाहती है
04:32वो राजनीती जो लोगों को सुनती है और वही पर रुख जाती है क्योंकि लोग ही तो मनजिल हैं
04:38और यही पर दूसरे सवाल का जवाब आता है
04:41जब मनजल आप हैं, तो मनजल तक पहुचने वाला रास्ता भी केवल आप ही से होकर गुजरेगा, किसी जंडे के
04:47नीचे नहीं, जिन जंडों के नीचे 80 सालों में हिसाब नहीं बदला, उन जंडों के नीचे खड़े होके हिसाब नहीं
04:53मांगा जा सकता, जो हिस्सा बन जाए,
04:55वो हिसाब नहीं मांग सकता, इसलिए मैं राजनीती करूँगी किसी दल के साथ नहीं, केवल आप के साथ, केवल लोगों
05:01के साथ, पर होगा कैसे, राजनीती तो शरीफ लोगों के लिए है नहीं, और इसका जवाब मुझे अपनी इस्तीफी के
05:09चंद घंटों में मिल गया, �
05:11जहां बहुत सारे आम लोगों ने मेरा समर्थन किया, वहीं एक बड़ी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता ने लिखा, कि मैं
05:18रात के अंधेरे में एक दूसरे बड़ी पार्टी के बड़े नेता से मिली थी, वो मुलाकात कभी नहीं हुई थी,
05:24ये बात लिखने वाले को भ
05:36करके बठा दो ताकि आम आदमी अच्छे लोग राजनीती में ना आए और इनका ऐसे ही राजनीती चलती रहे, और
05:44हमें इसी को बदलना है, इसलिए मैं डरूंगी नहीं, मैं सवाल ही पूछूंगी, ताकि इस देश की हर छोटी बच्ची
05:50अपने मन की बात कह सके और उसे र
06:05नहीं है, ठीक है, पर पैसा भी तो नहीं है, बाहुबल भी तो नहीं है, जाती धरम का समीकरण भी
06:11तो नहीं है, तीनों बाते सही है, पर अब यह बताईए, जो पैसा चुनाओं में बहाया जाता है, वो कहां
06:16से आता है, वो हमारी सडक से आता है, हमारे पूल से आता है, हमा
06:35इसलिए नहीं है क्योंकि मैंने कभी बैठाया नहीं, जब मैं अधिकारी थी तो न्याय करने से पहले मैंने कभी किसी
06:41का नाम नहीं पूछा, राजनीती में भी नहीं पूछूंगी, 80 साल तक इन्होंने समिकरनी तो बैठाये, और साथ में देश
06:47भी बैठा रह गया, इस तरह क
06:49कि राजनीती कैसे शुरू होगी, कैसे खड़ी होगी और कैसे चलेगी, यह हम लोग साथ मिलके तै करेंगे, अब तीसरा
06:56सवाल कहां से, मैं यहां अफसर बन के आई थी, पर यहां के लोगों ने मुझे अपनी बेटी बना लिया,
07:02सर पे हात रखा, घर का खाना खिलाया, ज�
07:19से, उत्तरप्रदेश से, मैं जानती हूँ कि हमें क्या बताया गया है, कि इस देश में कुछ नहीं बदलता, और
07:26खास तोर पे उत्तरप्रदेश में तो बिलकुल नहीं, लेकिन मैं उस देश को नहीं जानती हूँ, जिसे कहा गया था
07:33कि आजाती के बार टुकडों में बढ�
07:35और मेरा देश आज भी खड़ा है जिसे कहा गया था कि वो भूखा मरेगा और हमने उगा के दिखाया
07:41जिसे कहा गया था कि इतने गरीब देश में लोकतंत्र कैसे चलेगा और एक अरब लोगों के देश में लोकतंत्र
07:47आज भी चल रहा है मैं उस देश को जानती हूं और उत्त
08:02भी नहीं कर पाते हैं, वो लोग करके दिखाते हैं, देवरिया में ओपरेशन कब्जा मुक्ति के दौरान, लोगों ने खुद
08:08सरकारी जमीनों से अपने कब्जे छोड़े, लोगों ने खुद, और आज मैं उरी लोगों से कहती हूँ, कि हम 80
08:14सालों से किसी नेता, किसी मसीहा क
08:16इंतजार कर रहे हैं, और कोई नहीं आया, क्योंकि जिसका हमें इंतजार था, वो हम खुद हैं, इसलिए मैं आपको
08:22कह रही हूँ कि मुझ पे भरोसा मत करिए, अपने आप पर करिए, मैं आपको बुला रही हूँ, शिक्षक को,
08:27डॉक्टर को, किसान को, मजदूर को, वकील
08:30को, चात्र को, उस मा को, जिसको अपने बच्चे के सुनहरे कल की चिंता है, नई राजनीती को ये एक
08:36आदमी नहीं बना सकता, उसमें तो सबका साथ लगेगा, उनका भी जो बात को आगे बता सके, उनका भी जो
08:42अपने गाव कस्बे में इसको खड़ा कर सके, और उनका भी �
08:46ये लोगों के सामने खुद आत्मविश्वास से खड़े हो सके, तो आज सिर्फ इतना करें कि इस पोस्ट के नीचे
08:51कमेंट करें, या मेरे वाटसाप नमबर 1-98-956-957, दोबारा 1-98-956-957 पर वाटसाप मेसेज करके मेरे
09:03साथ जुड़ें, और एक दिन ऐसा आएगा, ज�
09:09किसी सरकारी दफ्तर जाएगा तो बिना किसी सिफारिश और बिना किसी फोन के उसके सुनवाई होगी और घर आके वो
09:15अपने बेटे से कहेगा कि बेटे आज मेरे साथ नया हुआ और बेटा कहेगा तो पापा इसमें नया क्या है
09:21तो उसे याद होगा कि उसके पन्नी का हिसाब
09:24किस दिन मांगा गया था
09:25चलिए हिसाब मांगते हैं