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वीडियो जानकारी: 15.08.2026, वेदांत संहिता सत्र (VS)

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Transcript
00:00मैं मुसलिम फैमिलिस हूँ तो विरोध करता हूँ वो मतलब बक्राइद मनाते हैं मासवास खाते हैं तो मैं वो नहीं
00:07मानते हूँ तो मैं अकेले रहता हूँ जहां पर जोग करता हूँ
00:11मैं घर पर कभी-कभी जाता हूँ, तो क्या मैं में पापा को तोड़ार मतलब की ऐसे करें?
00:17देखो, तुम कठे निस्थिति में हो, एक पंथ को एक धर्म नहीं बोल रहा हूँ, क्योंकि हमारे पास जो होते
00:27हैं, सिक्ट्स होते हैं, कल्ट्स होते हैं, धर्म तो एक ही होता है, धर्म का कोई परयाय जैसा या कि
00:36उसकी आप बहु अचन मांगनोगे तो कुछ नहीं होता उस
00:47जो शुद्ध रिलिजेंट शब्द है, उसका कोई प्लूरल हो नहीं सकता, रिलिजेंट एक एक एक एक सर्ड शब्द है, जितना
00:58टुट्स, या जितना स्काइज, या जितना जीरोज, जैसे कि अलग अलग सीरोज होते हों, या इन्फिनिटीज,
01:11मुसल्मान आकर के गीता पढ़े
01:14हिंदू जाकर के कुरान पढ़े
01:17यहूदी चला जाए
01:19और मस्जिद में बैठ जाए
01:22और मुसल्मान जाकर के
01:25किसी रब्भी के बास नजर आए
01:29उसके आसपास वालों से तो विरोध आए गई आएगा ना
01:34और ये बात कोई तुम्हारे परिवार की नहीं है
01:37ये बात पूरी मनुश्यता की है
01:39तो ऐसे मत बोलो कि मेरे घर वाले विरोध करते है
01:43उमारी जगा कोई भी और होता तो उसको यही जहिलना पड़ता
01:46और ये तो अभी हमने हिंदू मुसल्मान हो गयरा कह दिया
01:50एक तबके से व्यक्ति दूसरे तबके में चले जाए वहाँ भी विरोध हो जाता है
01:55मीरा भाई हुई है संत नाम तो सुनाई होगा
02:00अब संत रविदास हैं
02:02वो कोई किसी दूसरे धर्म से नहीं है
02:05मुसल्मान थोड़ी है वो
02:08पर उनके घरवाले उनको जहर पिलाने को तयार हो गए थे
02:11उनके पास क्यों जाकर बैठती हो तुम
02:13वो दूसरी जात के हैं और
02:16उसके बाद तुम यहां बाहर निकलती हो
02:19गलियों में नाचने भी लग जाती हो
02:22मारने को यह तयार हो गए थे
02:24वहां तो आप यह भी नहीं बोलोगे कि
02:27धार्मिक भेद था वहां तो बस वर्ग भेद था
02:30वर्ग और वर्ण दोनों
02:33लास यह हम लोग कौन हैं
02:36हम राजसी ठाट के लोग हैं और वो क्या करते हैं
02:40वो तो चर्मकार हैं व्योसाय से
02:43बैठते हैं सड़क किनारे
02:44और वो जूतों का काम करते हैं
02:47तो तुम वहां जाकर क्यों बैठ जाती हो
02:49यह विरोध कोई आज की बात नहीं हमेशा से आता रहा है
02:52और जितने जितने आधारों पर आ सकता है आता रहा है

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