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विनीत म‍िनोचा मर्डर केस में पुल‍िस है शालू की गुनहगार? देखें क्राइम कहान‍ियां व‍िथ शम्स

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00:00आप नमस्कार गुड़ीवनिंग सच्छेकार एक बाद फिर आप तमाम लों का स्वागत है क्राइम कहानिया विद शम्स
00:04क्राइम रिपोर्टिंग में एक बेसिक कहें की उसूल है
00:08कि जो भी खबर हम आपको दिखाते हैं
00:11उसको क्रॉस चेक करते हैं पुलिस से
00:14पुलिसी एक जिसके पास ऑथरिटी है
00:18जो केस को इन्विस्टिगेट करती है
00:21कि इसकी जांच करती है
00:24आरोपियों को पकड़ती है
00:25फिर बताती है कि उनके पर क्या-क्या इल्जाम है
00:29और जब पुलिस रिकॉर्ड पर यह चीज़ें कहती है
00:31आफ रिकॉर्ड नहीं कैमरे पर बाकायदा या प्रेस नोट के जरीए
00:35तो फिर वो सारी चीज़ें हम आप तक पहुंचाते हैं
00:42पिछले करीब 16 दिनों से कानपूर के दवा कारोबारी विनीत मिनोचा मडर केस पे
00:48मीडिया, सोशल मीडिया यहां तक कि मैं कितनी बारा आपको कहानिया सुना चुका हूँ
00:56विनीत मिनोचा का जो कतल है, जो मडर है
01:00वो पांच सितंबर की रात को होता है
01:03उसके 72 घंटे के अंदर-अंदर कानपूर पुलिस उनकी बहुत शादू को गिरफतार कर लेती है
01:10फिर पुलिस कहानी बताती है, कि शादू इस सादिश में शामिल है, मास्टर माइंड है
01:16और उसी ने दो सुपारी किलर विशाल और राज किशोर को हायर किया च्छे लाक रुपे में और फिर कखले
01:23करवाया
01:24वही सारी कहानी हमने आप तक पहुचाई, शालू को जेल भी भेज़ दिया गया
01:28अब सब कुछ ये रिकॉर्ड पर है
01:31लेकिन कानपूर पुलिस के इस बयान और शालू की गिरफतारी के बाद
01:34जो स्टेटमेंट या मीडिया से बाचीत के बाद
01:37पिछले सोला दिनों से शालू को लेकर मीडिया, सोशल मीडिया में
01:43यहां तक कि मैं अपने आपको भी गुनाइगार मानता हूँ
01:46और सौरी भी बोलता हूँ शालू से
01:48कि हम सब ने क्या-क्या दिखाया
01:50एक महिला, एक पत्नी, एक माँ, एक बहु
01:54कि जिस वक्त ससू का कतल हो रहा था
01:57वो कलब में डांस कर रही थी
01:59कैसी भू है जिसने अपने ससू का कतल कर दिया
02:03सारी चीज़े
02:07लेकिन असली गुनाइकार कौन था
02:09कानपूर पुलिस ने जब शालू को गिरफतार किया
02:12और उसके बाद जेल भेजा, उन्होंने जो कहानी सुनाई
02:15हम सब बंधे हुए हैं क्योंकि उनके पास अथरिटी है
02:19इन्विस्टिगेशन की, जांच की, गिरफतारी की
02:23तो वही चीज़े हमने आपके सामने रखी
02:25सभी मेडिया, सोशल मेडिया
02:28कि एक सबक है ये केस
02:30हम सब के लिए भी
02:34और फिर उसी शालू को लेकर जुस्तावाम बाते हुए
02:39सोला दिन के बाद अचानक पूरी कहानी परड़ जाती है
02:41और वही कानपूर पुलिस जिसने एक वक्त शालू को
02:45मास्टर माइंग बताया, अपने ससुर का कातिल बताया
02:48वही कानपूर पुलिस 24 सितंबर की दोपहरे
02:51एक बजे कानपूर में एक प्रेस कॉनफरेंस करती है
02:53और जो वहां के कमिशनर सहाब है
02:57रगुबी लाग, ठीक उनकी कुर्सी के पीछे
03:01विनीत मिनोचा का बेटा सुबरत खड़ा रहता है
03:05और फिर उसी प्रेस कॉनफरेंस में कानपूर के पुलिस कमिशनर कहते है
03:09कि असल में विनीत मिनोचा का कातिल, मास्टर माइंग
03:13जिसने पूरी साजिश्र ची, वो शालू नहीं
03:17उनका बेटा सुबरत है, यानि शालू का पती
03:21शालू तो बही कसूर है, शालू को फसाया गया
03:26और ये सब क्यों?
03:27क्योंकि एक सुपारी किलर यानि विशाल ने
03:32कतले के 24 घंटे बार जिसके पैर में गोली मारकर पुलिस ने अरेस्ट किया था
03:36उसने पुलिस का स्टेडी में मीडिया के सामने कैमरे पर ये कहा था
03:39कि हाँ मैंने गतले किया लेकिन इस गतले के लिए मुझे भावी यानि शालू ने कहा था
03:44और उसे एक बैयाद पर पुलिस ने शालू को ग्रफतार कर लिया
03:48कितने मासूम है हमारे कदपुरिया पुलिस कमिशनर।
03:51कहते हैं उस वक्त उसने कहा तो हमें लगा, जब हमने कॉल डिटेल देखा तो हमें ऐसास हुआ,
03:59जब घर में एंटरी के लिए गार्ड में फोन किया और शालू ने कहा अंदर आ जाओ,
04:03तो हमें लगा तो हमें ऐसा लगा तब हमें ऐसा लगा तब हमें वैसा लगा और इसी वज़ा से फिर
04:10हमने तीन लोगों को गिरफ्तार किया और शालू, विशाल और राजपिशोर तीनों को जेल भीज दिया तब हमें ऐसा लगा
04:19उन्ता कितनी मासूमियत से एक पुलिस कमिश्टर ये सारी बात कहेंगे
04:23ये बिना सोचे समझे
04:26कि इस एक गलती से शालू की जिन्दगी पर क्या असर पड़ा
04:31उनके जरीए सारी मेडिया और सोशल मेडिया में ये खबरें आए
04:34कि एक बहू एक गातिल
04:38सोला दिन तक बिना किसे जरुम के वो जेल मेरे
04:42क्यों?
04:43क्योंकि एक गातिल ने नाम लिया तो
04:45अब आप पता हैं
04:47अगर कोई शक्स किसी का नाम लेता है
04:49कि हमने उसके कहने पर गतल किया
04:51तो क्या पुलिस उसको यहीं गिरफ़तार कर लेती है
04:53बल्कुल नहीं
04:53पहले जांच करती है
04:55सीसी टीवी कैमरा
04:56फोन पे कॉल डिटेल
04:58यह सारी चीज़े
05:01पांच सितंबर की रात
05:03को विनीत मिनोचा का कतल होता है
05:05छे सितंबर की रात
05:06इंकॉंटर होता है जिसके बाद विशाल
05:08और राजकिशोर को पकड़ा जाता है
05:10और उसके बाद अगले 24 घंटे के अंदर
05:127 और 8 सितंबर को
05:15सीधे कानपूर पुलिस शालू को उठा लेती है
05:17और एलान कर देती है
05:18कि यही मास्टरमाइन है यही कातिल है
05:21मतलब अगर उस कातिल
05:22ने कहा उसका नाम लिया
05:24तो एक बेसिक पुलिसिंग है
05:25कि आप पहले उसकी तफ्तीश करेंगे
05:27काल डिटेल की जांच करेंगे
05:29CCTV फुटेज को खांगा लेंगे
05:30क्या मोटिव है आप उसको टटो लेंगे
05:32उसका बैक्गराउंड टटो लेंगे
05:35उसके बैंक बैलेंस को टटो लेंगे
05:37रिष्टों को लेकर पड़ोसियों से
05:39रिष्टारों से बात करेंगे
05:41लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया
05:43एक कातिल ने नाम लिया
05:44CCTV कैमरे में उसको जाते हुए दिखाई दिया
05:47फोन करके उसने एंट्री दे दी
05:49शालू ने बस मुकानपूर पुलिस को लगा
05:51के सुलद के और उनने शालू को उठा कर
05:53गरफतार के और जेल भेज दिया
05:56लेकिन
05:56इसी कानपूर पुलिस ने उसी शालू के पती
06:00यानि विनीत मिनोचा के बेटे सुबरत से
06:04अगले आठ दिनों
06:05तक पूचताच करने की जरूवत ही नहीं समझी
06:07मतबए एक मडर केस
06:10जिसमें अभी इन्विस्टिकेशन जा रही है
06:13और उस घर में उस राच सिर्फ चार लोग है
06:17सुबरत उसकी वाइफ
06:18एक छे साल का उनका बेटा
06:20और ससुर
06:22और आप एक एहम
06:25किरदार से पूचताच करना भी
06:27अगले 8 दिनों तक जरूरी भी समझ रहे
06:31बीच में आया कि
06:32आईए चुटी पर है इसलिए पूचताच नहीं
06:33कौन से ऐसे केस में ऐसा होता है
06:35कि जतना आप इसको लाइट्री लेते है
06:38मतलब पहली बार
06:4112 या 13 सितंबर
06:43को सुबरत से पूचताच होती है
06:478-9 दिन तक कोई पूचताच नहीं
06:49शालू की गिरफतारी में
06:50सिर्फ 72 गंटे लेकिन उससे पूचताच करने में
06:52भी आपको 9 दिन का इंतिजार करना पड़ता है
06:56तो शालू की गिरफतारी में यतनी जल्दी क्या थी
06:58आप सारे investigation करते कहीं
07:00भाग नहीं रही थी कोई क्रिमिनल नहीं थी
07:02कोई terrorist नहीं थी
07:03और जब आपको लगता कि हाँ
07:06सुबूत है तो आप ग्रफतार करते
07:08लेकिन अब क्या हुआ
07:10आपने उस बेगुना को 16 दिनों
07:12तक जेल में लखा और आज प्रेस कॉंफेस
07:14करके आप कहा रहे हैं
07:15कि शालू बेकसूर है
07:16असल मास्टर माइन तो सुबूरत है
07:19उन 16 दिनों की जेल
07:21और उसकी जो बदनामी हुई
07:24मेडिया के सामने
07:25दुपट्टे से मूँ छुपाना पढ़ रहा है
07:27किसी पेशवर मुझरम की तरह
07:28जो बेकसूर है
07:29और उसके लिए हम सब सौरी है
07:31खुद मैं दिर्ग से शालू और उसके घरवालों से माफी मांगता हूँ
07:36लेकिन इसके जिम्मदार कानफूर पुलिस के लोग है
07:38क्योंकि उन्होंने हमें रिकॉर्ट पर ये स्टोरी दी हमें बताया
07:42और हमने भही आपको बताया
07:46एक पुलिस कमिश्र बनने के लिए
07:48आईपेस अफसर को 15 से 16 या 20 साल लग जाते है
07:52तो ये तो बेसिक पुलिसिंग है
07:54कि आपको इतनी जल्बासी करनी के जरूरत नहीं
07:56ये पहरे ठोस सबूत तो ले आओ
07:57सिर्फ किसी के कहने भर से अगर आपने किसी को
08:00कातिल करार दिया और कल को वो पलड रिया
08:02किसी और का नाम लिया तो क्या होगा
08:05और आपने मेन कारेक्टर से कभी पूछता ची नहीं
08:08कि 9 दिन बार पहली बार पूछता ची
08:11कानुन कहता है कि अगर कोई बेकसूर है
08:12ये किसी को जवानत मिल गए तो उसके बाद
08:14एक मिनट भी एक्स्ट्रा उसको जेल में ने लखना चाहिए
08:17यहां खुद कानपूर की पुलिस मान रही है
08:19कि शालू बेकसूर है उसने कटल नहीं किया
08:21कातिल उसका पती है
08:22लेकिन इसके बावजूद वो जेल में है
08:25और अगले 2-4 दिन से पहले
08:26उसके जेल से निकलने की कोई उमीद भी नहीं है
08:29जानी जिसको आपने बेकसूर करार दे दिया
08:31उसके बावजूद वो अगले कई दिनों तक भी और जेल में रहेगी
08:34इसका जिम्दार कौन है
08:35यह कैसा सिस्टम कैसा कानून है
08:38क्यों जेल में रहेगी
08:39क्योंकि अब वो
08:42नए खुलासे हुए हैं
08:43उसको डॉकुमेंट्स देखेंगे
08:45उसकी बागी चीजें देखेंगी
08:47मैच करेंगे तो इनमें टाइम लगेगा
08:49फिर कोट में जाएंगे और कहेंगे कि नहीं
08:52शालू वो पकड़के हमने गलती ही थे
08:54ये रहा असली कातिल इन पे चलाईए
08:56मुगदमा उसे बरी कर दीजे
08:58लेकिन ये कहां का इंसाफ है कि
09:00उसको आपने एक तरह से आज
09:01बता दिया कि वो कातिल नहीं है
09:03फिर भी वो जेल में है
09:05और पता नहीं इस हफते निकल पाएगी
09:08कि नहीं
09:09मैंने आपसे पहले ही कहा था
09:11तीन चार दिन पहले कि
09:1223 सितंबर वो तारीख है
09:15जब
09:16सुबरत कर अफ़तार हो सकता है
09:20क्योंकि कानपूर पलिस में ही
09:21बहुत सारे लोग थे जिने पता था
09:23कि सुबरत के खलाफ एविडेंस है
09:26लेकिन ये पता नहीं था
09:28कि सुबरत के इस साज़िश में
09:30उसकी पत्नी कहीं शामिली नहीं थी
09:32तो बेशक
09:3323 सितंबर को गरफ़तार होगा
09:35मैंने आपसे कहा और 23 सितंबर को ही राफ
09:38साड़े ग्यारा के आसपास
09:39उसकी गरफ़तारी की खबर आ गई
09:41लेकिन अफसोस ही है
09:42खुद मुझे भी
09:43कि इस दोरान हमने शालू की इतनी
09:46मतलब
09:50उसके
09:50खिलाफ दिखाना बोलना था
09:53वो सब कर लिया
09:55हाला कि इसके लिए
09:56असली मुझरिम मैं कानपर पुलिस को मानता हूँ
10:00तो खैर
10:02विनीत
10:03मिनोचा मडर केस
10:06विजब हुआ
10:08वो पूरी कहानी क्यों पल्टी कैसे पल्टी
10:10वो आपको बताता हूँ
10:12शुरुआत में जो गल्ती की तो की
10:14खुद कानपर पुलिस ने माना
10:16कि शालू ने कभी भी अपनी पूचताथ के दौरान
10:18ये नहीं कहा कि मैंने पतले किया
10:20वो हमेशा आपने आपको बेकसुर मानती रहे
10:23ये पूरा खुलासा सिर्फ एक सिम की वज़ा से हुआ
10:26सिम जो तीन सितंबर को पहली बार विशाल में ख़री दी
10:31और उस सिम के बाद उसने जो पहला कॉल किया
10:37वो किया
10:39सुबरत को
10:41नय सिम से
10:42और उसने अपना उस नया सिम जो लिया उसका नाम शुभम रखा था
10:49चार तारीख को यानि कटल से एक दिन पहले
10:51शालू से 6 यह बाद शालू को कहा था
10:55कि यह शुभम अब इसका नाम से कॉल आएगा तुम बात कर ले ना
10:58क्योंकि इससे सामान मगाना होता घर का
11:00चार तारीफ को
11:03जर्मास्ट्वी के लिए बहुत सारे सामान
11:04मगाने थे चार बार शादू ने
11:06कॉल किये
11:08और कुल मिलाकर उसने 7 बार कॉल कि
11:12लेकिन
11:12सुबरत ने
11:14कतल वाले दिन और कतल के बाद
11:16भी उसे बात की
11:17तो SIM नया और सीधे फोन
11:20दूसरा CCTV कैमरा
11:24CCTV कैमरे में
11:25कुछ कैमरे बंद किये गए
11:27कुछ खोले गए
11:28जब पुलिस ने तफ्तीश की तो पता चला
11:30कि CCTV कैमरा बंद करने वाली
11:32शालू नहीं थी खुद सुबरत था
11:36इसके लावा जब और तफ्तीश की
11:38तो पता चला
11:41कि 40,000 रुपे महीने मिलते थे
11:43सुबरत को खर्च के लिए
11:45और उस पर 40,000,000 का कर्जा था
11:47हर महीने करीब 56,000,000 रुपे
11:50तो सरिफ EMI देता था
11:51अपने ही बाप की दुकान से
11:53मिडिकल स्टोर से दवाएं चुरा कर कहीं
11:55और बेज़ता था और चौरी के इस काम में
11:57उसके साथ विशाल शामिल था
11:59लेकिन सबसे बड़ी बात ये थी
12:02कि उसे अपने बाप से नफ्रत थी
12:05उसने
12:05चार से पांच महीने पहले ही
12:07अपने बाप को मारने का फैसला कर लिया था
12:11नफ्रत की वज़ा
12:11ये थी
12:25वो ने भी देखा
12:28फिर सुबरत को एक डर बैट गया
12:30कि किसी दिन ये किसी औरत को
12:32घर ले आए और कहें कि ये तुम्हारी मा है
12:33और पूरी जायदा तो उसके नाम कर दें तो फिर
12:35इन लों के हाथ क्या रगेगा
12:38और उसका ये भी कहना था कि वो
12:39उसकी मा भी परिशान थी
12:41तो उसने तैकर लिया था
12:43कि वो फैनेशली तो था ही पर परिशान
12:47लेकिन बाप के क्यरेक्टर की वज़ा से भी परिशान था
12:49और उसने तैकर लिया कि वो मारेगा
12:51जो उसने बाद में बात चीत कि
12:53हमारे रिपोर्टर से मरचावला से उसने ये कहा
12:56उसने पूछा कि तुम्हें अपने पापा को मारने का अफसोस
12:59तो उसने का अफसोस इस बात का कि उन्हें गूत कर मारा गया
13:03यानि चाकू से गोत कर मारा गया
13:06लेकिन मरने का अफसोस नहीं है
13:08मारने का भी अफसोस नहीं है
13:11करीब रात के धाई बजे
13:142324 सितंबर की बात बता रहा हूँ
13:17जब पुलिस कस्टेडी में शालू आई और विशाल और राज किशोर
13:22ते नों को एक साथ बिठा कर पूछताच की गई थी
13:25शुरुआत में तो लगातार मना करता रहा
13:29और शालू उसे देखकर रो रही थी
13:31वो शालू से नजने चुरा रहा था
13:33और शालू ने उससे कहा था कि तुमने मुझे फंसा दिया
13:36वो शालू से बात करना नहीं चाहता था
13:39लेकिन जब आमने सामने की बात हुई
13:41फिर पुलिस ने सारे उसके खलाफ सबूत दिखा रहे तब उसने कहा
13:47कि हाँ मैंने अपने पिता को मरवाया, मैं ही गातिल हूँ
13:52जिस विशाल ने उस दिन बयान दिया था कि भावी ने एक रवाया
14:09भावी ने नहीं, फिर उसके बाद सुबरत का बयान लिया जाता है
14:18सुबरत का जब बयान लिया गया, पुलिस कस्टडी में पूछता थूई
14:23तो उस बयान को रिकॉर्ड किया गया, जब आमने सामने बिठाने के बाद सुबरत
14:29पात सक्षए नहीं जो रहा है, आपने पिता को हीने विशाल को हायर किया था।
14:37तब शालू पहली बार बोलती है, विशाल के सामने और पोलिस कमिश्नर के सामने, जो तो ही बैठे हुए था।
14:45उन्होंने प्रेश कांशेंस पे खुद ये बात कही है।
14:48मैं आपको उनकी वो बात सुना भी दूँगा
14:52शालू ने कहा सुबहत से
14:54और पुलिस कमिश्टर से
14:57कि अब साफ हो गया
14:58कि कातिल कौन है
15:01मतलब मैं नहीं हूँ
15:03तो मैं जाओं
15:05लेकिन फिर भी देखे उस
15:08पत्नी की
15:09बातें वो कमिश्टर से कहती है
15:11कि इनको भी जाने दीजिए
15:13छोड़ दीजिए इन्हें फंसाईएगा मत
15:14अपने उस पती के वारे में कह रही है कि
15:17इन्हें फंसाईएगा मत इन्हें भी जाने दीजिए
15:19जो पती बार बार पुलिस से ही कहता रहा
15:21कि ये कतल मेरी पत्नी ने किया
15:24बतल्ब वो शालू को कातिल ठहरा रहा है
15:26और जो असल ने कातिल पत्नी सामने
15:28उसकी पूरी कहानी सुनने के बावजूद
15:30पुलिस से कह रही है
15:31कि इनको फंसाये, इनको जाने देजिए
15:34मतल्ब पती बारवार उसका नाम ले रहा है
15:36और पत्नी के लिए छोड़ दी जाए इस पूरी साज़िश के बारे में शालू को कहीं से पता नहीं था
15:44ये बात सुब्रत ने भी मानी और पुलिस ने भी मानी
15:49शायद शालू को फंसाया बनी जाता क्योंकि शुरुवात ये हुई थी कि जब ये कटल होगा तो पहले तो तक्ये
15:59से होगा मूद अबाकर तो किसी को पता नहीं चलेगा नैच्रल डेट हाट अटेक दिखाएंगे खुलासा नहीं होगा
16:03लेकिन गलती ये हो गई कि इवनी इतनी नुचा जाग रहे थे दोनों को देख लिया घर में शौर मचा
16:08दिया और उसके बाद उन्होंने चाकू माद दिया
16:11तो जब ये चाकू मारने वाली बात क्लियर हो गई रात को तो फिर सुबरत ने विशाल से ये कहा
16:17था
16:18कि तुम चाचा का नाम लेना मेरे इस मडर केस में लेकिन पता नहीं क्या हुआ कि विशाल ने चाचा
16:26की जगा बोल दिया कि भावी शालू ने कहा था
16:29और विशाल सुबरत का खास वफादार
16:32अब जब खुद विशाल ये कह रहा है कि भावी ने कहा
16:36और ये मीडिया के जरीए सुबरत तक बात पहुंची वो हैरान था
16:40कि विशाल ने उसकी वाईफ का नाम क्यों लिया चाचा का क्यों नहीं लिया
16:43लेकिन तब तक ये हुआ कि पुलिस आगे बढ़कर शालू को गरफतार कर लेते
16:47और अब खुल लगा कि चलो कम से कम बजग गया सारा इलजाम बीवी पर चला गया
16:51तो अब बीवी जेल जाएगी मैं गरफतार नहीं होगा
16:54वो और खामोश हो गया
16:56नौ दिन बाद जब उससे दो किस्तों में पूछता चुई
16:59पुलिस उसने बार बार यही का मुझे नहीं लगता
17:01पर मुझे यह लगता है कि मेरी वाइफ ही गातिल है
17:05पुलिस से भी कह रहा है
17:08और फिर धीरे धीरे उसे यकीन होने लगा था
17:11कि अब शालू पर ही सारा एज़ान चला गया और मैं बच जाओंगा
17:15लेकिन उसके बाद उसे एक गिल्ट भी फील हुआ
17:18एक मलाल भी कि इस पूरे मामले में उसकी वाइफ फंस गई
17:23इस मलाल के चक्कर मुझे नीन नीन नीन आती थी
17:25नीन की गोलियां खाकर सोता था
17:28फिर पुलिस वालों के सामने उसने बताया
17:30कि जैसे इसे दिन बीत रहे थे
17:33उसे ये तो था कि पता नहीं मैं पकड़ा जाओंगा नहीं
17:35लेकिन मेरी बीवी फंस गई है
17:37और जो कि गुनेगार भी नहीं है
17:39तो उसने ये भी प्लान कर रखाता है
17:41कि अगर ये मामला इतना तूल पकड़ा
17:44और बीवी की नजर में भी आफ गिर चुका है
17:46क्योंकि बीवी को पता है वो गातिल नहीं
17:48और ये चुप था
17:50तो फिर एक साथ नीन की गोलियां काने का भी प्लान कर रखा था
17:54सुखर ने
17:56लेकिन खैर उससे पहले ही पुलिस ने उसे ग्रफ़तार कर लिया
18:04इस पूरे मामले में
18:07कातिल अब तीन के तीन ही है
18:11शालू, विशाल और राजकिशोर तीन थे
18:14अब शालू को आप इससे हटा दीजे
18:17लेकिन नमबर वही है तीन
18:20लेकिन इस पूरे केस ने कानपूर पुलिस की पूरी इन्विस्टिगेशन
18:23और जिस तरीके से उनने जाच की
18:25जिस तरीके से जल्दभाजी की
18:27जिस तरीके से अपनी राय बनाई
18:29उस पर एक गहरा सवाल है
18:30कि क्या पुलिस इसी तरह काम करती है
18:32मतलब किसी के कहने भर से और शुरुवाती उट पटांग जांट से ही आप किसी को कातिल बना देंगे
18:38उसकी पूरी जिंदगी दाव पर लगते
18:42ये सोला दिन जो भी तक उसने कातिल के तोर पर जेल में काटी
18:47आज किलियर हुआ है फिर भी अभी कुछ दिन और जेल में रहेगी तो जो भी करीब 20-22 दिन
18:52शालू ने जो जेल में काटे या काटने वाली थी क्या वो कभी भूर पाएगी
19:00उस सुसाइटी में या बाकी जगों पर क्या वो फिर से उसी तरह सर उठा कर चल पाएगी
19:06क्योंकि जो कुछ कहा गया जो कुछ हुआ उससे भी बड़ा सवाली है
19:10कि इस तरह के इन्विस्टिगीशन जांच करने वाली पुलिस कि इनके खलाफ कोई एक्शन होगा
19:17शालू को तो कोड जाना चाहिए
19:18और कानपूर पुलिस के खलाफ मानहानी का मुगदमा करना चाहिए
19:22क्योंकि पूरा करेक्टर एससेसनेशन कर दिया
19:27बेकसूर होते वे भी इतने जिनों तक जेल में रखा
19:32और अगर वो जाती है
19:33तो कानपूर पुलिस के लिए बह। मुसीबत और फ़जियत भी होगी
19:39लेकिन कुल विलाकर इन सारी चीजों के बावजूद
19:41एक चीज के लिए मैं कानपूर पुलिस की تعریف करूँगा
19:44और वह ये
19:45कि सचाई सामने आने के बाद कानपूर पुलिस चाहती
19:49तो आज भी ये कह सकती थी
19:51कि अभी कुछ और डाउंट सें
19:53कुछ सवाल हैं हम उसकी
19:55तवतीश कर रहे हैं तो अभी हम
19:57क्लीन चिट नहीं देंगे शालू को
20:00ये कहे कर
20:01कानूनी दाव पेच में उलजा सकती थी
20:03और कई और दिनों तक
20:06शालू ऐसे ही शक के घेरे में
20:07रहती और जेल में रह सकती थी
20:09लेकिन कानपूर के पुलिस कमिश्णा
20:11ने कम से कम एक अच्छा काम किया
20:14उन्होंने कहा
20:15कि वो इस साधविश में शामिल नहीं
20:17वो कातिल नहीं है, मास्टर माइंड पती
20:19वो और विशाल इन्होंने मिलकर ही
20:21साधविश्र की तीसरा कोई करेक्टर था ही नहीं
20:23जो तीसरा था वो सुपारी किलर था
20:27रादीप पिशोर
20:29कम से कम कानपूर पुलिस की
20:30इसी महंदारी की वज़ा से
20:32शालू की रहाई अब जल्दी मुम्किन हो जाएगी
20:35पक्नी के बारे में जरूर मलाल है उसे
20:37कि शालू को नहीं फसना चाहिए था
20:40लेकिन पिता जी से मारा
20:41उसके बारे में उसे कोई मलाल नहीं है
20:45तो कुल में लाकर अब देखें
20:47तो विनीत मिनोचा मडर केस
20:50शायद अपने अंजाम तक पहुँच चुका है
20:52और अब आगे की जो कागजी कारवाई है
20:55जो चार शीट है बाकी चीज़े
20:58वो कानपूर पुलिस करेगी
21:00तो फिलाल कहानी मित रही है

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