00:05इस बात का बड़ा भारी शोर सुना जा रहा है कि पढ़ने वाले नौजवान यानि विद्यारतियों को राजनेतिक या पॉलिटिकल
00:13कामों में हिस्सा नहीं लेना चाहिए।
00:17यह मैं नहीं कह रहा हूँ यह कह रहे हैं शहिद आजम भगत सिंग्ग 28 सितंबर उनका जन दिन है
00:25और आज से करीव 100 साल पहले 98 साल पहले वो जो कह गए उसे आज पढ़ना समझना जानना बहुत
00:33जरूरी है बिलकुल यही नसीहत जो आज हमारे युवा और जन्जिस को दी जा
00:38रही है तो कि वो आंदोल में उतर रहे हैं सडकों पर उतर रहे हैं बिलकुल यही नसीहत आजादी से
00:44पहले अंग्रेज परस्त लोग खासतोर से शिक्षक बुद्धी जीवी तमाम लोग विद्यारतियों को नौजवानों को सलह देते रहे हैं तो
00:53विद्यारती और राजनि
01:06में लिखा गया 1928 और हम 2026 में बात कर रहे हैं तो किरती में ये लेक प्रकाशित हुआ जिसमें
01:13वो क्या कह रहे हैं इस बात का बड़ा भारी शोर सुना जा रहा है कि पढ़ने वाले नौजवान यानि
01:17विद्यारतियों को राजनितिक या पॉलिटिकल कामों में हिस्सा नही
01:33नहीं लेंगे आगे हमारा दुरभाग्य है कि लोगों की ओर से चुना हुआ मनोहर जो अब शिक्षा मंत्री है उस
01:41समय का शिक्षा मंत्री इस्कूल कॉलोजियों के नाम एक सर्कुलर या परिपत्र भेशता है कि कोई पढ़ने या पढ़ाने वाला
01:48पलिटिक्स में हिस्सा �
01:49ना लें बिल्कुल आप ये आज 2026 में भी होता हुआ देख रहे हैं आपको याद है कि जब जंतर
01:55मंतर प्रिवाव पजन्जी का आंदुलन हुआ शिक्षा मंत्री धर्मिन प्रधान के इस्तिपय के मांग को लेकर तब भी दिल्ली इनिवर्शिटी
02:02जवाला नहरु इनिवर
02:19रहे हैं विद्यारती और आईनिती उन्हें करनी चाहिए और उस समय के भी हालात क्या थे तो आप देख रहे
02:27हैं कि जिन नौजवानों को कल देश की बागडोर हाथ मे लेनी हैं उन्हें आज ही अकल के अंधे बनाने
02:34की कोशिश की जा रही है कि इससे जो परिदान निकलेग
02:49चाहिए लेकिन लेकिन क्या देश की परिस्थितियों का ज्यान और उनके सुधार के उपाई सोचने की योगता पैदा करना उस
02:58शिक्षा में शामिल नहीं है
03:01कि यही वात है कि अगर देश के हालाद सुधारने के लिए उसे बदलने के लिए अकर युवा नराजनिती करें
03:14शडक पर ना आए तो हम उस शिक्षा को जो उसे शिक्षा एसी दी जारी है उसे निकम्य समझत में
03:19भगत नека 이제 क्लेर्किक करने के लिए ही हासल की जाए ऐसी
03:22सिख्षकी जरूरती क्या है को ज्यादा चालाक आदमी यह कहते हैं काका तुम पॉलिटिक्स के नुशार पढ़ो और सोचो जरूर
03:30लेकिन कोई वैवारिक हिस्सा ना लो तो मधिक योग्य होकर देश के लिए फायदमत साबित हो सकते हैं बहुत सयाने
03:38आज भी यह राय दे रह
03:50है और वो आपके साथ राजनिती कर रहा है तो भगसिंग क्या कह रहे हैं बात बड़ी सुन्दर लगती है
03:57लेकिन हम इसे भी रद करते हैं क्योंकि यह भी सिर्फ उपरी बात है इस बात से इसपर्ष्ट हो जाता
04:04है वो धारन देता है कि एक दिन एक विद्यारती एक पुस्
04:17पुस्तक है और यह तो कोई बंगाली नाम जान पड़ता है लड़का बोल पड़ता है कि प्रिंस क्रुप्टकिन का नाम
04:25बड़ा प्रसिद है वे अर्थशास्तर के विद्वान है इस नाम से प्रचित होना प्रतेक प्रफेसर के लिए बहुत जरूरी था
04:33प्रफेसर की यो�
04:45प्रटिकल पुस्तके पढ़ते हो यह हाल था देखिए आप प्रफेसर की योगता आज भी यह हाल है अब उन बेचारे
04:55विद्यार्तियों को उनसे क्या सीखना है ऐसी इस्तिती में यह नौजवान क्या सीख सकते हैं
05:02दूसरी बात यह कि वैवारिक राजनीती क्या होती है अब देखिए महत्मा गांधी जवालनेरु और शुबास अंबोस का स्वागत करना
05:08और भाशन सुनना तो हुई वैवारिक राजनीती उस समय के अधार पर लिखने में पर कमिशन या वाइसराय का स्वागत
05:14करना क्या ह�
05:23यही आज भी देख रहे हैं आप कि मोधी योगी का भाशन सुनना तो बेश वक्ती है सरकारी बस उमरकर
05:29स्कूल कॉलेज इनिवर्शिटी से युवाव को भर भर के उनकी सभाव में ले जाया जाता है लेकिन अगर वो राहुल
05:36वाली या किसी और की सभाव में जाये तो उसे
05:38पॉलिटिक्स कह दिया जाएगा तो यही हो रहा है बिलकुल आप देखा है कि तिहास दोरा रहा है अपने को
05:44सरकारों और देश के प्रबंद से सम्मद्दित कोई भी बात पॉलिटिक्स के मैदान में ही गिनी जाएगी तो फिर यह
05:50भी पॉलिटिक्स हुई हुई की नहीं कह
05:55जाएगा इससे सरकार खुश होती है और दूसरी से नाराज तो आप देख रहे हैं कि भई सरकारी कारेकरम में
06:01रजा नहीं होगा क्या विध्यारत्यों को जन्मते ही खुशामत का पड़ाया जाहिए हम तो समझते हैं कि जब तक हिंदुस्तान
06:08में विदेशी डाकू शाशन क
06:11यहां तक वफदारी करने वाले वफदार नहीं है यहीं आज भी बात हो रही है कि अगर देश के खिलाब
06:16को काम हो रहा है ये तो उस बात का उस चीज का हमें विरोत करना चाहिए चाहिए वह कोई
06:22भी कोई हो सरकार आगे लिखते हैं कि अन्धुस्तान को इस समय ऐसे देश स
06:38और वो नौजवान किसे मानते हैं इसी पुस्तक में लिखा है यह लेख है मतवाला में छपा था यूवक नाम
06:45से इसकी शुरुवाती लाइनी यह है कि यूवा वस्ता मानव जीवन का बसंत काल है उसे पाकर मनुश्य मतवाला हो
06:54जाता है जी हां और वो हर गलत का बिरूद करत
06:58रहा है जब हर गलत के वास्ते मुठी तनी रहे जब सरकशी अदा लगे समझो जवान हो भागत सिंग कह
07:05रहे कि संसार के इतिहास के पन्ने खोल कर देख लो यूवक के रक्त से लिखे हुए अमर संदेश भरे
07:11पड़े हैं संसार की क्रांति और परिवर्तनों के वर्णन च्�
07:27क्या इंग्लेंड के सभी विध्यारतों का कॉलिच छोड़कर जर्मन के खिलाब लडने के लिए निकल पनलना पॉलिटिक्स नहीं था तब
07:38हमारे उब देशक कहां थे जो उनसे कहते जाओ जाकर पहले सिक्षा हासिल करो
07:43सभी देशों को आजाद कराने वाले महां के विध्यारतियों और नाजवान ही हुआ करते हैं क्या हिंदुस्तान के नाजवान अलग
07:50अलग रहकर अपना और अपने देश का स्थे तो बचा पाएंगे ये भी समझने हैं कि उन्हें एक भारी क्रांती
07:55की जरूरत है वे पढ़
08:12कोई उपाए नजर नहीं आता तो 1928 में शहीदा जम्भगत सिंग हमें ये संदेश दे गहें तो आज जो युवाव
08:22को ये सलहा देते हैं कि गुराईनी तुसे दूर रहे और इन सब कामों जो देश बचाने का काम है
08:27दरसल चाईवाब का वोट बचाना है लोकतंत्र बचान
08:30है शिक्सा सुधारना है स्वास्ता सुधारना है रोजगार की मांग करना है ये सब चीजे जो है देश भक्ती में
08:39गिनी जाने चाहिए लेकिन ये अफसोस कि आज इन्हें देश द्रूह की संग्या दी जाती है और ऐसे ही नोजवनों
08:46को आज भी पागल और पदब्रष्ट क
08:58ये परेगा