00:00इस रास्ते पर सफर करना आसान नहीं है लेकिन लातेहर के लुन्डी गाउं की आंगन बाड़ी सिवका सालोमी हेरेंच के
00:07लिए यह रोज का रास्ता है
00:10भोकाखार से लुन्डी गाउं तक करी पांच किलोमीटर जंगल और पहाड़ी रास्ते को हर दिन पैदल पार करना इनकी दिन
00:17चरिया है
00:18हलाकि मुश्किल तब और बढ़ जाती है जब बारिस का मोसम होता है
00:22रास्ते में पढ़ने वाली दो बरसाती नदिया जब उफान पर होती है तो इस रास्ते पर सफर करना काफी मुश्किल
00:29होता है
00:30इसके बावजूद आंगन बाड़े सिवका सालोमी हेरेंच कभी आंगन बाड़ी का दरवाजा भंद नहीं होने देती
00:38केंदर में पहुचने का बाड़ सुरू होती है इनकी दूसरी जिम्मेवारी
00:43बच्चों की देख भाल, पढ़ाई और पोसंद
00:45साइद यही वज़ा है कि ग्रामनों के बीच इनकी एक अलग पहचान बन गई है
00:57कि इसे ने जाएंगे बच्चा सबको अथी खिलाना पड़ता है हम उसी काम ने हम है तो जेगे ने करेंगे
01:03बोलती है
01:07रोज आई जाते हैं
01:10कितना दूर हैं सगाविन का
01:24जिनके लिए ये रोज 5 किलोमेटर का सफरताई करती है उन बच्चों और गाउं के ग्रामनों के लिए यह आदर्स
01:30है
01:31आंगन बाड़ी सेविका बताती है कि रास्ता तो मुश्किल है बरसात में परसानी भी होती है
01:36लेकिन बच्चे इंतजार करते हैं इसलिए कोशिस रहती है कि केंदर बंद न हो और बच्चों को कोई परिशानी न
01:44हो
01:44देली जाते हैं आंगन बाड़ी केंदर और जाने में भी हमको दीकत होता है फिर भी हम जाते हैं
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