00:00प्रतेक बार सितंबर मां के 14 विवार को 29 दिवस के रूप में बना जाता है।
00:58लोगों के सामने प्रसुत किया।
01:00लेकिन विजट्वत वर्षों में विकास की जो अवधारना है पूरे दृष्टों में उसी के नुरूप भारत में भी जारी हुए।
01:14और जिसका नतीजा यह हुआ है कि हम लोग विकास तो करते गए।
01:20तो हमारे अप्षिष्ट है चाहे वो तरह लग्षिष्ट है या थौस अप्षिष्ट है वो ज्यादा तरह हम अपने नद्यों में
01:27और अप्षिष्टों में तर्चे गए।
01:30जिसके फ़रूप नद्या धीरे धीरे परदूशीत होती जाएं बाद में सरकारों का ध्यान इस्वर गया और धीरे धीरे धीरे फिर
01:40जो है वो जंत इतना भी जाग्रित होई और असी के दसक से ही भारत सरचाथ में नभी एक्शन प्लैन
01:53जिवर एक्शन प्लैन क्या है वो �
02:07तो ऑफिए अगर आप देखें कि हमारे नद्यों की क्या इस्टित है और नद्यों की उत्यूंता क्या है और क्या
02:17करने कि आवशक्ता है
02:18तो पुल्मिला की भारत एक ऐसा देश है जहां पर लगवग चार हजार इलियन क्यूबित मेटर वरुशा जल्ट प्रकुटी जे
02:29माध्यम से प्राफ्ट होता है जो बिसमें इसी भूभाज के बराबर किसी जिवर्ण देश के मुकाबले सरवाधिक है
02:37और इस चार हजार दियन क्यूबित मेटर में से एक त्रिया नौशो तिर्पन दियुट मेटर नदिया हमारी लेटे जाती है
02:46प्रवाह के माध्यम सोटों महावावागर में लागा जानी जो नदी प्रवाह है जोड़े आप प्रप्षत के रूप में देखेंगे तो
02:54नदिय
03:06प्रवाह के लिए उसका प्रवाह के लिए उसका होता है और कहने कहीं हम भारत में जग्यों को जीवन रेखा
03:31मानते हैं
03:32तो आज यह जो इसकी है नद्यों की हारत में लग्यों की खिल लंबाई है 45,000-453 किलो मेटर
03:42है इसमें से 12,300 किलो मेटर है किसी में किसी रूप में प्रदूर्शित हो जगी और यह आप प्रदूर्शर
03:52के अस्तर की एक प्रशा कहां ना उलुकं करें तो उसमें से फुल जो
03:56तो नद्यों की लंबाई है 45,000-453 किलो मेटर है उसमें से 15,000 अच्यजित प्रदूर्शित है और 20
04:05,000 मध्यम रूप के प्रदूर्शित है तो मात्रा 75,000 प्रदूर्श्चत जो जगी लंबाई है वास्धी जित दिशिती ही तो
04:15हमें और यह चहन्ता की वास है कि हर वर्ष प
04:24is
04:26I
04:27I
04:28I
04:34I
04:37I
04:38I
04:39I
04:39I