00:07नाक्पुर की धर्ती पर एक ऐसी जगह है जहां सिर्फ एक इसमरक नहीं बल्कि भरत के इतियास का एक मात्यपून
00:17अध्याई जीवित है
00:18एक ऐसी जगह जहां लाखों लोग स्रध्धा के साथ आते हैं जहां सांती समानता और मालता का संग्रेश महसूस होता
00:30है यहां है लिक्षा भूमी नाक्पुर्ण आईए आज चलते हैं इस एतिहासिक और पवित्र इस्तल की एक सांत और खूबसुरत
00:41यात्रपर
00:48नमस्कार दोस्तों आज देख रहे हैं इंडियन टूरिजम आज हम पहुंचे हैं महराष्ट की नाक्पुर्ण सहर में स्थिप लिक्षा भूमी
00:57लिक्षा भूमी भारत के प्रमुक बहुत तिर्थ इस तलों में से एक है इस परिशर की सबसे खास पैचार है
01:04इसका विशाल स
01:06जो दूर सो ही लोगों का ध्यान आपनी और आकरशित कटा है लेकिन दिक्षा भूमी के पहचान सिर्फ इसकी भैवे
01:14वस्तु कलगक सिमित नहीं है इसके पीछे जुड़ा है एक ऐसा एतिहासिक प्रसंग जिसने आधुमिक भारत के समाजिक इतिहास पर
01:23गहरा प्रभाव ड
01:35लक्तर बाबा साथ भीम राव आमबिटकर ने अपने लाखों अनुव्याग्यों के साथ बहुत धर्म की दिक्षागरन की यह घटला भारतिय
01:45इतिहास में एक महत्तपून मोड की रूप में देखी जाती है लक्तर बाबा साथ आमबिटकर ने अपने जियों में समानता,
02:04स्�
02:06जिसी इतिहासिक घटला की कारण इस इस्थान को दिक्षा भूमी के नाम से जाना जाता है आज यहां अलेवाला हर
02:14वक्ति इस इतिहास को अपने अपने तरीके से महसूस करता है
02:20और अब आते हैं दिक्षा भूमी की एक दहेत महतपूल حिस्से कीयों बोधी विख्ष बौध प्रमपरा में बोधी विख्ष क्यान
02:31और जागरिती का एक महतपूल प्रतीक मना जाता है
02:35गौतन बुद्ध को बुद्ध गया में बुद्धी विच के निचे ग्यान प्राप्थ हुआ था
02:40इसी प्रमपरा से जुरा बुद्धी विच बुद्ध अनियायों के लिए विशेश अध्यात्मिक महत्वर रखता है
02:48दिच्छा बुद्ध में मौझूद या विच प्रिशर के सांत वातावरा को और भी विशेश बना देता है
02:54यहाँ कुछ छण रुपकर विच को देखना उसकी चाया में खड़े होना और आसपास की सांती को नासूस करना अपने
03:04आपने अलग अनुभा है
03:07आप देख सकते हैं दिच्छा बुद्ध में का विशाल प्रिशर और सामने दिखाई देता इस जगे का सबसे प्रमुक आकर्शन
03:15विशाल बहुत इस्टूप
03:17सपेद रंग की इसकी भावे सबक्ता दूर से ही बेहत आकर्शक दिखाई देती है
03:22जैसे जैसे हम इसके परिश पहुंसते हैं इसकी विशालता और वास्तिकला और भी इस्पेस्ट दिखाई देती है चारों तरफ का
03:31वातवरण काफी साल्थ और कंभीर महसूस होता है
03:35यहां आले वाले स्रग्दान्दू और परियाटक कूर समय रुखते हैं परिशर को देखते हैं और इस एत्यासिक इस्थान की अनुपूति
03:43करने की कोशिस करते हैं
03:51जब आप बहुत इस्थित के अंदर की और जाते हैं तो वहां का वातवरण बाहर की तुल्ला में और भी
03:58साल्थ महसूस होता है
04:00जिसाल गंबुदाकार सरफला, साब्चित्री वास्तुकला और चारों लिखा देती बहुत परंपर से जुरीवी सिस्था हैं इस जगह को अलग ही
04:10पहचान देती हैं
04:11यहां कुछ पल बैट कर अगर आप आस पास के वातवरण को महसूस करें तो सहर की बीरवार से बिलकुल
04:18अलग एक सांट रोगों मिलता है
04:21यही सायब इस जगह की सबसे खुबसरब बात है यहां सिर्फ आके ही नहीं बलकी मन भी कुछ देर के
04:29लिए ठहर जाता है
04:32आज दिक्षा वुनिकेवल नाकपुर की पहचान नहीं है यह देश और दुरिया के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले लोगों
04:40के लिए एक महत्रपून इस्तल है
04:42विसेश आफसरों पर यहां बड़ी संक्या में सरफ दालू कहुंसता है
04:46विसेश रुच से ढम चग्र परिवर्टन विवस के आफसर पर यहां का वातवरण बेहत पिसिस हो जाता है
04:54लेकिन किसी भी समान दिन पर भी दिक्षन होगे की अपने अलग सांती दिखाई देती है
05:00यहां आले अले लोगों के लिए यह जगा इतिहास, विचार, शब्दा और आतर चिंदन उन सभी का संगम बन जाती
05:09है
05:12कुछ जगा ऐसी होती है जिनों सिर्फ कैमरे में केड़ नहीं किया जा सकता
05:18उन्हें महसूस करना पड़ता है दिक्षा भूने भी ऐसी ही एक जगा है यहां की विसाल वस्तुकला, बोधिवरीच, सांत वातावरण
05:28और इससे जुरा इतिहास
05:30हर चीज आपने आप में एक कहानी कहती है एक ऐसी कहानी जो हमें इंसान को इंसान के रूप में
05:38समान देने के समान करें और अपने इतिहास को जानने की पहना देती है
05:44so दोस्तों अगर आप लागत रहा है तो दिख्षब गुनमे को अपने यात्राम में जदूत सामिल करें यह recognize एक
05:51प्रेतनी स्थन नहीं है नहीं यह भारत के तिहास का एक वहतारपोंड अध्याय है अगर आपको हमारा सफस्थ पसल रहा
05:59हु
05:59If you like this video and subscribe to our channel and subscribe to our channel and subscribe to our channel.
06:09We'll see you next time.
06:13Namaskar
06:14Jaijim Namobudhai
06:29Jaijim Namobudhai
06:30Jaijim Namobudhai