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  • 1 week ago
पढ़ें बेतवा नदी (वेत्रवती) के पौराणिक और पारीछा बांध के ऐतिहासिक महत्व पर आधारित प्रताप सिंह के संपादन में संवाददाता शाश्वत सिंह की स्पेशल खबर.

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00:001440 साल से बुंदेल खंड की प्यास बुजारा पारीशाबांद अब विश्पटल पर रेखांकित हो गया है
00:07जी हाँ, 1855 में बना पारीशाबांद को UNESCO ने अपने ISID प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया है
00:13जिसमें 100 साल से पुराने जितने बांद होते हैं उन्हें शमिलत किया जाता है और खास्तों से ऐसे बांद जो
00:19अपने इंजिनरिंग की वज़से आज भी मजबूती के साथ खड़े हैं
00:23इस बांद को अंग्रेजों ने बनाया था 1855 में जो आज भी मुंदेल खंड के प्यास बुजाता है बेतवा नदी
00:30पर बना ये बांद ना सिर्फ जहासी बलकि जालाउन हमीरपूर बांद ऐसे जिलों में भी पानी पहुचाने अकाम करता है
00:36और इसके साथ ही पासी बने पा
00:53स्विकार कर लिया गया है बतादें आपको इसमें 24 अधिक बांद है परटन के लिहास से भी बेहत खास बांद
01:01है क्योंकि परटन यहां पर बड़ी संख्या में लोग आते हैं और खास होसे मॉंसूंस जिए में जब यहां बांद
01:07पूरी तरफ घर जाता है लबालब होके पा
01:22परीचा बांद को सुक्वा डुक्वा बांद की तरह आइसी डी दुवारा वर्ल्ड हेरेटिज साइट की रूप में अगस्थ 26 तो
01:30सेलेट किया गया है परीचा बांद करीब 140 वर्ष पुराना है और देखा जाय तो उननी सी शतापदी से लगातार
01:36इस प्रकार से मुंदिल
01:39खंड्ड में जल उप्सपन व्करप्ता के Kerry का भूराय, उसका प्रतिविंब भी है पर दिखाय लेक्श और डिया और तो
02:00अगे आने वाले समय में जो कि आभी में वर्ल्ड हेरेटेज
02:09We will develop waterfront tourism so that more people will be able to get more and more.
02:18PTE Bharat, Shashwath Singh, Chhansi.

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