00:00पिछले तीन सालों से जारी बस्पा में उथल पुथल अब रुकने का नाम नहीं ले रही।
00:04पहले आकाश आनंद की बस्पा में वापसी होती थी, फिर उन्हें बाहर किया जाता था।
00:08माय ओती जी जो पार्टी की राश्टे अध्यक्ष हैं, वो उन्हें कभी नेशनल कोडिनेटर बनाती थी, कभी हटा कर मामली
00:14कारकरता बना देती थी और अब तो उन्हें सीधे पार्टी से बाहर कर दिया गया है।
00:38का इशान को नेशनल कोडिनेटर बना दिया एलान किया कि ये पार्टी के बढ़ने इंताओं से सीखेंगे और पार्टी को
00:45आगे बढ़ाने का काम करेंगे अब सवाल उठ रहा है कि आकास तो अंदर बाहर होती रहे हैं इशान को
00:50ये कुरसी ये गद्धी कब तक किलिए मिली है
00:53क्या वो मायवती जी के कहेंसार चल पाएंगे या फिर उनका भी वही हश रोने वाला है जो आकास आनंद
01:00का हुआ था इस पर ही आजम बात करेंगे मैं सब केशो जी है केशो जी बसपा में जो कुछ
01:05चल रहा है और इशान आनंद को जो पद मिला है उसको मैं दो तरह से दे�
01:23नहीं है अगर इसको इस तरह से देखा जाए तो बस इसको एक पडिवारवाद का एक नेक्स्ट स्टेप के तौर
01:30पर मैं देखता हूं नंबर वन नंबर टू जो आपने अभी अपने इंट्रोडक्शन इंट्रो में कहा कि पहले दिपका अनंद
01:39को बनाने की बाद चली फिर
01:40इशान आनंद आ गए तो सवाल यह है कि वारिष जो है ओतो पुत्र ही होगा ही माया भटी की
01:48बतिजी है वह पीछे रहे लाग applicvania आ गया एक बतिजा आया था फिर गया फिर आया फिर गया अब
01:54दूसरे बतिजे को मौका दे रही हैं सवाल इसे यही सामने आता है कि क्या ये �
02:00यो रिजनल पार्टी है वो एक परिवार से उपर कव उठेंगे और यह सिर्फ समाज बहुजा समाज पार्टी की बात
02:07नहीं है सिर्फ बहुजा समाज पार्टी की बात नहीं है आप किसी भी रिजनल पार्टी को ले लीजिए चाहिए समाजबादी
02:12पार्टी हो चाहिए बिहा
02:29जब पार्टी का अगला चेहरा कौन होगा, तो फिर वहाँ भी निशान्त कुमार ही आते हैं, यह एक गंभीर प्रशन
02:37है, भारती ये राजनीती में, खासकर जो भारत की उक्षेत्रिय राजनीती है, उसमें ये बहुत गंभीर प्रशन बन चुका है,
02:45परिवार से आगे की ये
02:58फिर बदल वो भी लगातार करना, हर पंदा दिन में कोई बड़ा फैस्ता ले लेना, संगठनात्मक तोर पर, ये क्या
03:04बसपा के लिए नुकसान दायक नहीं है, क्या मायवती जी को ये समझ में नहीं आ रहा है, देखिए, बसपा
03:09के लिए इससे ज्यादा नुकसान दायक क्
03:13रही है, उसमें उनके कोई भी मेंबर ही नहीं है, एक विधायक थे उनके, अब वो भी नहीं रहे, सवाल
03:20ये नहीं है कि बसपा के लिए आगे क्या है, बसपा ने पीछे भी जो कुछ पाया था, वो सब
03:27खुच चुकी है, भारतिये राजनितिक इतिहास में देखें, तो बह
03:42राइट आफ नहीं कर सकते हैं, इस बयान मेरे इस स्टेटमेंट को उस अर्थ में नहीं लेना चाहिए, लेकिन असल
03:48मामला इहां पर मायावती जी के राजनितिक दिशा पर है, इस समय भारत की राजनिति कमोवेस दो धुरूबों में चल
04:00रही है, या तो आप इस पोल पे है
04:02या तो आप उस पोल पे हैं, या तो भारती जनता पाटी के नित्रितु वाली दक्षिन पंथी राजनितिक विचारधारा के
04:08आप समर्थक हैं, या फिर जो एक अपोजीशन की विचारधारा है, चाहिए आप उसको इंडिया गटवंधन कहले या जो भी
04:14कहले, अगर आप इ
04:29जैसे सबसे बड़े सूवे में आप ये तटरस्त भाव बना करके राजनितिक दूरी तैन नहीं कर पाएंगे, यह गिवन फैक्ट
04:38है एक, आप देख लें, चाहिए कोई भी बड़ी पार्टी है, या कोई भी इस संदर्व में जो एहम पार्टियां
04:45है, चाहिए वो समाजव
04:46पार्टी हो चाहिए, यहां तक कि त्रिंड मूल कांग्रेस, त्रिंड मूल कांग्रेस यह दपी बेंगडावल में अलग चुनाव लड़ रही
04:52थी, लेकिन जब ऑपोजिशन की पॉलिटिक्स होती है, तब वो इंडी गट बंधन के साथ रहती है, टील सी, वो
05:00लोक सभा में
05:01या फिर जनता के बीच भी प्रधान मंत्री से कड़े सवाल पूछती है, वो जो तमाम हिपक्स के मुद्दे होते
05:08हैं, उनके साथ वो खड़ी होती है, चाहिए दक्षिन में आप स्टालीन का उदारन ले ले, वो भी सरकार में
05:14भी नहीं है, और उसी साब से देखे तो इंड
05:28या उन ग्राउंड, जैसे कल CEC का ही मामला देख लीजिए, ग्यानेश कुमार को लेकर कल से बावाल मचा हुआ
05:34है, उसमें जो कांग्रेस की मांग है, उसमें स्टालीन अपने सुर मिलाए है, इस बीच मायावती की आवाज गहीं खोशी
05:40गई है, न वो इधर दिखती है, उन
05:58की जो इस्थिपी है, उससे निकलना परेगा, उन्हें अपनी राजनितिक दिशा तैग करनी परेगी, आगे के चुनाओ के लिए भी
06:05यह जरूरी है, बिल्कुल, एक स्वाला और उठ रहा है केशो जी, कि जैसे आका शानन को जब फिर से
06:10अभी पद दिया गया था, तो उन्
06:14हाथ रस और एक दो जगहों पर रैली भी की थी, लेकिन फिर उनको मायोती जी ने हटा दिया, इशान
06:20को लेकर आई हैं, राजनितिक तोर पर इशान अभी बहुत ज़्यादा सक्रिय नहीं रहे हैं, रैलियों में भाशर देने के
06:24उनका कोई साजविनिक इतिहास भी मौजू
06:40है कि आखिर इशान भी टिक पाएंगे या अपने बड़े भाई की तरह इन पर भी कोई गाज गिर सकती
06:46भविष्ट में, क्योंकि मायोती जी का ये कहना है कि सब कुछ मेरे मुताबिक होगा, जितना मैं कहूंगी अप शर्षा
06:51वही पालन करना पड़ेगा, अगर आप ऐसा �
06:53करेंगे, तो जैसे आकाश्ट को हटा दिया गया, तो इशान को भी हटा दिया जाएगा, अब ये तो तय है
06:58कि बहुजन समाज पाटी में बहन माया वती जो कहेंगी, वही होगा, इशान अगर अबनी बुवा जी की मर्जी से
07:06चलते हैं, उनके नक्षे कदम पर चलते हैं, उ
07:12तको हैं नहीं, तो नहीं है, ये बात तो तय है, और ये सभी पार्टियों में अक्रेश ने एक समय
07:17पर शिवपालियादव को रास्ता दिखा दिया था, तो वो, that is given, अब सवाल ये है कि इनकी परिपकोता कितनी
07:24है, जो आपके सवाल का पहला हिस्सा था, कि इशान आनंद अ
07:38किसी अन्य अर्थ में नहीं लिया जाना चाहिए, मैं ग्रीह मंत्री अमित्शाह का उदारन देना चाहता हूं यहां पर, 2014
07:45के चुनाओं में, लोकसभा चुनाओं में, वो उत्तर प्रदेश के प्रभारी थे भारतिय जनता पार्टी के, और उन्होंने पूरी केंपेंड
08:05डि
08:08समादरित हैं, इसमें सवाल दो तरह से आपको समझने की जरूरत है, एक औरेटरी, भार्षन कला एक अलग विशे है,
08:17और संगठनिक शमता जो है, संगठन शमता जो है, वह एक अलग चीज़ है, हो सकता है कि उशान आनंद
08:25के पास पब्लिक गैधरिंग को अड्रेस करने का �
08:27अनभव नहीं हो, राजमीत में बहुत जादा उन्होंने अनभव नहीं पाया है, लेकिन उनमें एक अच्छे संगठन करता कि काभीलियत
08:36हो, हो सकता है कि बसपा का एक राजव्यापी संगठन है, पाउंडेशन अल्रेडी मौजूद है उनके पास, बीच में कुछ
08:43विखरा
08:44हुआ था, अपनी काभीलियत और अपनी बुआ जी के दिशा निर्देश में वो सब को संगठित कर लें, ये कर
08:52पाते हैं या नहीं कर पाते हैं, ये तो आने वाले चुनाओं में ही पता चल पाएगा, लेकिन आपके प्रस्में
08:58जो एक और बात था कि बसपा के लिए काउं�
09:18पाते हैं, ये जो कर रहें ये पोजिटिव रिस्क बोलते हैं इसको, ये आगे बढ़ेंगे, यहां से पीछे नहीं आएंगे,
09:25तो उनके लिए फाइदे मन्द ही हैं, और एक महत्रपुर्ण बात और मैं बोलना चाहता हूं, इसको मैं तुरा सा
09:30पढ़ दे के आड़ में ही �
09:32बोलना चाहूंगा, जो सियासी पार्टी है, खास करके जो ये रिजनल पॉलिटिकल पार्टी है न, चुनाव लड़ना, उनके लिए एक
09:41मजबूरी भी होती है, उनके अस्तित्तों के लिए एक मजबूरी होती है, और मैं केबल पॉलिटिकल अस्तित्तों की ही बात
09:46नहीं कह
09:47आप समझ ये कि ये जो सियासी पार्टियां हैं सारी सीटों पर यह जानते हुए भी कि वह नहीं जीतेंगे
09:54क्यों उमिदवार उतारती हैं और वह उमिदवार कहां से आते हैं इसको समझने कोशिश कीजिए और बहुजन समाज पार्टी इस
10:02प्रियोग के लिए वर्षों से जा
10:16बिल्कुल बस्पा के कुछ चुनावी आकड़े भी बता देते हैं पिछले पांचे चुनाओं के 2007 से 2012 तक बस्पा ने
10:23यूपी में अपने दंपर सरकार चलाई थी मायोटी जी मुक्षमेंटरी थी 2012 विधानसभा चुना हुआ था बस्पा को 80 सीटे
10:29मेरी थी फिर 2014 का जो लो
10:43बिधानसभा चुनाओं में बस्पा का सिर्फ एक विधायक चुना गया रसरा से जिसका अभी निधन हो चुका है और अब
10:48आ रहा है 2027 का चुनाओ, 2024 में लोगसभा चुनाओ भी हुआ था जिसमें भी बस्पा का खाता नहीं खुला
10:53था, तो जैसा कि केशो जी ने बताया कि
10:54खोने के लिए बस्पा के पास, मैयोती जी के पास कुछ नहीं है, ना एक लोगसभा का सांसद है, ना
10:59एक विधायक है, ना राजसभा कभी कोई सांसद नहीं है, एक सांसद ही उनका कारेकाला पूरा हो चुका है, तो
11:05एक आखरी सवाल केशो जी इसी से जुरा हुआ हुआ है
11:07बसपा को लेकर क्या जनाधार बचा हुआ है जो हम देखते थे कि दलितों का एक बड़ा हिस्सा मयोती जी
11:13के साथ जुड़ा रहता था
11:15ब्राम्हर भी 2007 में उन्हें अच्छी खाशी सख्ख्या में वोट दिये थे कहा गया था कि
11:18सतिश्चन मिश्रा का फॉर्मूला काम्याब हो गया अभी कितने वोट परसंट बचे होंगे साथ आट लोग कहते हैं कुस कहते
11:24हैं दस भी हो सकता है
11:25नहीं देखिए अगर बसपा के वोट के ग्राफ को देखेंगे न वो बचा हुआ जरूर है वो सीट में कनवर्ट
11:32नहीं हो पा रहा है इससे पहले का चुनाव देखिए उन्होंने किसके साथ लाड़ा था हमेशा ये कहा जाता है
11:36कि मायावती जब भी समाजवादी पार्टी
11:40के साथ गठवंधन में चुनाव लड़ी तो मायावती का वोट उधर ट्रांसफर होता है लेकिन उधर का वोट इनको ट्रांसफर
11:46नहीं होता ये बात मायावती जी ने भी openly बोल दिया था कि उनको गठवंधन का समर्थन नहीं मिला इसलिए
11:53उनके उमिदवार हार है जबकि �
11:54इनका जो वोट था उनको ट्रांसफर हुआ है चुनाव का नतीज़ा एक बात है और चुनाव में मत परतिशत एक
12:01अलग बात है आला कि मत परतिशत की कोई गिंती नहीं रह जाती है सक्रिये यूनो संसदीये राजनीत में मायावती
12:09का हर चुनाव मैं खासकर कि उत्तर प्र�
12:16लगातावर्ग लगातार बना हुआ है छे साथ प्रतिसत के आसपास जोन का वोट बैंक है उसमें शरन नहीं हो रहा
12:23है हाँ यह जरूर है कि पिछले कुछ दिनों से मायावती के विकल्ब के तौर पर चंदरशेखर आजाद देखे जाने
12:32लगे हैं उस्तरप्रदेश में भी म�
12:37एक चुनौती तो है अब मायावती और चंदरशेखर आजाद दोनों के सामने यह एक चुनौती है कि कैसे यह जो
12:46एक वोट बैंक है जिसे आप दलित वोट बैंक कह लें सीएस्टी वोट बैंक कह लें उसको कैसे कंसॉलिडेट रख
12:53सकते हैं अगर उसमें विखराव होता है
12:55तो निश्चित रूप से चंदरशेखर आजाद की शक्ती भी कम होगी मायावती जी की भी शक्ती कम होगी उधर एक
13:03राजवर एक और का स्टोडियन तयार हो रहे हैं तयार हो रहे हैं वो दावा करते हैं हलांकि किसी चुनाओं
13:09में किसी भी चुनाओं में अभी तक मुझे �
13:11वक्तिगत रूप से राजवर का प्रदर्शन ऐसा नहीं महसुस हुआ उनकी जो पार्टिय उसका उनका प्रदर्शन ऐसा नहीं महसुस हुआ
13:18जिससे हम ये कहें कि डलित वोट वेंक के कुछ हिस्से पर बीन का कवजा है वो अलग अलग गटबंधन
13:23के साथ आते रहें एक आ
13:38पर्फर्मेंस नहीं आया है उनकी पार्टी का इसलिए लेकिन एक हिस्से को वो भी अड्रेस करना चाहते हैं वो भी
13:45लगातार सक्रिय हैं तो एक महतोपुर्ण मोड पे है देश के सबसे बड़े सुगे की सियासत खासकर जो डलित वोट
13:55वेंक की राजनीत होती है वो इस समय
13:57एक बहुत ही महतोपुर्ण बहुत ही एहम पड़ाओ पे है यहाँ पर मायावती और चंशेखर आजाद की केमिस्टरी कैसी रहती
14:07है इन दोन के पार्टी किस हज़ता से एक दूसरे का स्थामना करते हैं या साथ चलते हैं यह देखना
14:15बड़ा ही रोमान चप होगा
14:16बिल्कुल जैसा कि आपने कहा कि दलित राजनिती इस वक्त एहम मोड पर है देश की मयावती जी की पार्टी
14:22बिखरी हुई है पार्टी के अंदर इक हिस्तान चल लही इसका फायदा लेने की भी कोशिश हो रही है अकलिश
14:27यादो जी ने अपनी जो युवाई काई है पार्
14:43या कि कॉंग्रेस भी दलित वोटो के पीछे उसकी भी कोई राजनिती चिपी हुई है तो देखते हैं उत्तर परदेश
14:48की दलित राजनिती में कौन कितनी हिस्सेदारी ले पाता है अपनी और मयावती जी जो चार बार की मुख्यमंतरी है
14:54यूपी की वो आगे कैसा फैसला �
14:56लेती है शानानंद पाइटी को कैसे आगे लेकर बढ़ते हैं