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  • 5 minutes ago
गया जी के पितृपक्ष मेले में, अक्षयवट वेदी पर पितरों के मोक्ष हेतु जीवनभर के लिए पसंदीदा फल त्यागने की पौराणिक परंपरा है. रिपोर्ट-रत्नेश कुमार

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00:11पित्रपक्ष मेले की प्रसिद्धी विश्वभर में है।
00:30इस भौतिक्तावादी दुनिया में जहां इनसान अपनी पूरी जिन्दगी सिर्फ पाने की चाहत में गुजार देता है वहीं मुक्ष की
00:38नगरी कयाजी में ये तस्वीर बिलकुल बदल जाती है।
00:42यहां लोग कुछ पाने नहीं बलकि अपने पूर्वजों के लिए जीवन के सबसे पसंदीदा फल को हमेशा हमेशा के लिए
00:50छोड़ने आते हैं।
00:52विश्व प्रसद्ध पित्रपक्ष मेले में देश विदेश से आने वाले लाखोश रधालू पूर्वजों की आत्मा की शान्ती के साथ-साथ
01:00आधी काल से चलिया रही इस कठिन प्रतिग्या को भी दोहराते हैं।
01:19सनातन विदान की अनुसार श्राध के दौरान पिंडदानी को पूरी निष्ठा के साथ एक फल छोड़ने की शपत दिलाई जाती
01:26है।
01:27अधिक तर्श रधालू सीधा फल का त्याग करते हैं हलाकि ये अपने निष्ठा पर निर्भर करता है। आखिर क्या है
01:34इसके पीछे कारण आप भी सुनिए।
01:58जैसे बहुत सारे लोग तो सीता फल, सडीफा जो होता है अधिकतर लोगों को देखते हैं कि सीता फल का
02:05त्याग करते हैं।
02:18माना जाता है कि धर्ती पर इसांसारिक स्वाद का त्याग करने से पितरों को सुफल की प्राप्ती होती है।
02:26लेकिन इस त्याग और श्राध का संकल्प एक अक्षय वटव्रिक्ष के बिना अधूरा माना जाता है।
02:33इसके पीछे त्रेता युग में रामायन काल के दौरान माता सीता से जुड़ी एक कथा का संबंध बताया जाता है।
03:03करने के लिए अक्षवट में आना ही पड़ता है।
03:05दूसरी बात है यहां एक फल छोड़ना पड़ता है।
03:07फल छोड़ने का क्या महत्व है।
03:09हमारे सास्तों में लिखा है कि गया में को भी त्याग करने का अधिकार होता है।
03:13तो फल एक ऐसा चीज़ है कि हम कोई भी छोड़ सकता है।
03:16हम और कोई भी तो फल छोड़ने से सारोबर जीवन में ने खाना पड़ता है।
03:20इसलिए फल छोड़ने का नियम है जो हमारे रिष्यमुनी से चाली आ रही है।
03:25हमें सोच के पुझा करते हैं, हमें एक सांधी पुझा करते हैं, हमारी विष्वास से पुझा करते हैं, कि हम
03:30भगवान के पुझा करें तो हमें अच्छा होगा।
03:32It is not good for the work to be done.
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03:59ुप्राचीन गाल में 300 से अधिक वेदिया थी,
04:02जिन में से अब विश्नुपद, सीताकुंड, प्रेथशीला और अक्षयवट सहित केवल 54 वेदिया ही शेश हैं.
04:09इन सभी में अक्षयवट का स्थान सर्वोपरी है,
04:12जहां गया पाल पंडा श्रधालूओं को सुफल का आशरवाद देती हैं।
04:18सदियों पुरानी ये परंपरा आज भी सनातन धर्म की अटूट आस्था, त्याग और पित्र भक्ती का सबसे बड़ा प्रमान है।
04:27ETV भारत के लिए गया से रतनेश कुमार की रिपोर्ट
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