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ब्रिटिश काल से चली आ रही परंपरा, मऊरानीपुर जलविहार में सबसे आगे गूदर बादशाह

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00:00कैसे ही श्री गूदर बादशा का देव विमान बना बंदेल घंड के जल्विहार की पहचान
00:04जासी कि मौमरानीपूर में 198 जल्विहार महुत सब बनाया जा रहा है
00:08सद्यू पुरानी इस परंपरा में श्री गूदर बादशा का देव विमान सबसे आगे चलता है
00:12और उसके पीछे 80 से जादा देव विमानों का कारवा रहता है
00:15इस्थानीय लोगों के अनुसार ये परंपरा खरीब धाई से 300 वश पुराने मानी जाती है
00:19और बिडिश काल्स से पहले चली आ रही है
00:21इस्थानीय मानने तक अनुसार बिडिश रश श्यासन के दोरान विमारी समय एक अन्य कारणों का हवारा दे कर जल विहार
00:26रोपने का प्रियास किया गया था
00:27उस समय महंत लालदास महराईज ने दूदर बादशा का विमान निकाल कर परंपरा जारी रखी
00:32और तबी से उनके विमान के सबसे आगे रहने के परंपरा मलगूत हुई
00:35पहले सिर्फ बूदर बादशा का विमान निकलता था लगिन समय के साथ साथ
00:38दूशे मंदिरों के देव विमान भी इसमें शामिल होते गए
00:41इस बार खरीब 70 से ऐसी देव विमानों की शामिल होने की उम्मीद है
00:44रात में नगर गुमर की बाद ब्रम्ब मुर्त में बुदर बाशा का जल विहर कराया गया
00:48हजारों शद्डालों के भीड को देखते हुए प्रिशासन ने सुरक्षा, सुच्छता और अन्य वेगस्ताइं की है
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