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Transcript
00:02आज जल्दी काम खतम कर लूँ
00:04सुभह से कुछ खाया नहीं
00:06पेट भी बार-बार याद दिला रहा है कि खाना बनाना है
00:11बस थोड़े चावल, थोड़ा आटा और गुड़ बचा है
00:16कोई बात नहीं, आज इसी को भगवान का प्रशाद समझ कर खाऊंगा
00:21भोले नात, गणेश जी, आज घर में बहुत थोड़ा सामान है
00:26पहले आपको भोग लगाऊंगा, फिर जो बचेगा उससे अपना पेट भरूंगा
00:33थोड़ी सी खिचडी बन जाएगी, दो रोट फिर गुड़ से हलवा बनाऊंगा
00:37आज तो मज़ा आ जाएगा
00:42अरे पेट महराज, थोड़ा धैर्य रखो, खिचडी पक रही है, रोटी भी बस बनने वाली है, फिर तुम्हारी सारी शिकायत
00:50दूर कर दूँगा
00:52वाह, हलवे की खुश्बू तो बहुत अच्छी है
00:55गणेश जी को मीठा पसंद है, इसलिए इसमें से उनका हिस्सा सबसे पहले निकालूँगा
01:01गणेश जी, पहले आपका भोग
01:04खाना थोड़ा है, लेकिन प्यार बहुत सारा है
01:07आप स्विकार कर लेना, फिर मैं भी आराम से खाऊंगा
01:13आखिर खाना तयार हो गया
01:15अब बस हाथ धोकर आता हूँ, धीरे धीरे बैटकर पूरा खाना मजे से खाऊंगा
01:22आज खुश्बू कुछ ज्यादा ही अच्छी आ रही है
01:24लगता है भूग की वज़े से मुझे अपना साधारन खाना भी राजभोग जैसा लग रहा है
01:32ये कैसी अदभूत खुश्बू है
01:35खिचडी, गरम रोटी और गुड का हलवा ये सुगंध तो सीधे अढ़हिया के घर से आ रही है
01:40हाँ पुत्र, अढ़हिया ने अपने लिए थोड़ा सा भोजन बनाया है
01:46लेकिन ध्यान रखना वो सुभह से भूखा है और घर में राशन भी कम है
01:51बस थोड़ा सा चक्कर तुरंत लोट आऊंगा पिता जी
01:55जाना जरूर, मगर उसके हिस्से का ध्यान रखना पुत्र
02:01अढ़हिया, क्या मैं अंदर आ सकता हूँ?
02:04गणेश जी, मेरा घर आपका ही है, जल्दी अंदर आईए
02:12आज तो मेरा भाग्य खुल गया, मैंने अभी अभी खाना बनाया है
02:16और आप खुद आ गए, अब पहला निवाला आपको ही खिलाऊंगा
02:21नहीं अढ़हिया, मैं बस थोड़ा चक्कूंगा
02:24आप जितना चाहें खाईए, आपकी खुशी में ही मेरी खुशी है
02:33वाह अढ़हिया, इतनी स्वादिष्ट खिचडी मैंने बहुत दिनों बाद खाई है
02:37मसाला भी सही है, और इसमें तुम्हारे प्रेम का स्वाद अलग है
02:41अगर थोड़ी और मिल जाए तो
02:45थोड़ी क्यूं गणेश जी, पूरी देख्ची आपकी है, आप आराम से खाईए
02:53ये रोटियां भी बड़ी नरम लग रही है
02:56दोनों आप खालीजिये, मुझे देखकर ही खुशी हो रही है
03:02हाँ, अब ये हलवा देखकर मन रुक नहीं रहा
03:05इसी लिए तो बनाया था, पूरा खालीजिये, बिल्कुल मत सोचिये
03:13अढ़या, सच में आज पेट और मन दोनों भर गए
03:17बस यही सुनना चाहता था गणेश जी
03:22अढ़या, तुम्हारी थाली कहा है?
03:25मैंने तो सारे बरतन खाली कर दिये
03:28तुमने अपने लिए कुछ अलग रख लिया था ना?
03:35नहीं गणेश जी, कोई बात नहीं
03:37आज पानी पी कर सो जाओंगा, कल फिर कुछ न कुछ बन जाएगा
03:42अरे, मुझे रोक क्यों नहीं दिया?
03:45आपको भूखा देखकर रोक देता
03:47तो खाना खाते समय मुझे अच्छा कैसे लगता?
03:51मेरे घर कोई भूखा आए
03:53और मैं अपने खाने की चिंता करूँ
03:55ये मुझसे नहीं होगा
03:57भूख थोड़ी देर की है
03:59पच्चतावा बहुत लंबा होता है
04:02मैं चलता हूँ अढ़या
04:04लेकिन मन भारी है
04:06मन भारी मत कीजिए
04:08आपने खुशी से खाया
04:09बस वही काफी है
04:14आज पेट खाली है
04:17गणेश जी मेरे घर आये और खाना खाया
04:19इससे बड़ी खुशी मुझे और क्या चाहिए?
04:23इस छोटे बालक ने अपनी भूख छिपा ली
04:25लेकिन उसका खाली पेट मुझे से नहीं छिपा
04:28प्रेम की ऐसी परिक्षा अंदेखी नहीं की जा सकती
04:32पिता जी मैं उसका पूरा भोजन खा आया
04:35वो भूखा रह गया
04:37फिर भी उसने एक बार भी शिकायत नहीं की
04:42मैं अभी उसके लिए खाना लेकर जाता हूँ
04:55देखना चाहता हूँ कि अपनी भूख के बाद भी उसके मन में वही दया बची है या नहीं
05:03बेटा रात होने वाली है थोड़ी देर तुम्हारे यहां रुख सकता हूँ
05:07क्यों नहीं बाबा अंदर आईए
05:12आज खाना मैं बना दूँ
05:14बाबा रसोई आपकी है पर सामान लगभग खत्म है उससे क्या बनेगा
05:21बस एक मुठी चावल थोड़ा सा आटा एक आलू एक प्याज और नमक बचा है यही कल के लिए भी
05:29रखा था
05:32सब आज बना दूँ तो कल क्या खाओगे
05:36कल की चिंता आज क्यूं करे बाबा भगवान कल का रास्ता भी निकाल देंगे
05:42आप सब इस्तमाल कर लीजिये सामान बचा कर क्या करूँगा
05:46अगर आज कोई भूखा रह जाए कल जो होगा देखा जाएगा
05:52बाबा आप सच में खाना बना लेते हैं
05:55आज तुम खा कर बताना कि मैं अच्छा रसोईया हूँ या नहीं
06:03इतने तने थोड़े चावल के लिए इतनी बड़ी देखची
06:07बरतन बड़ा हो तो क्या बेटा नियत उससे भी बड़ी होनी चाहिए
06:11तुम भूखे हो बैठ कर आराम करो
06:23अपनी भूख भूल जाना आसान है दूसरों की भूख समझना कठिन
06:26इसी लिए भूखा दिखाई दे तो मैं पहले उसे खिलाता हूँ
06:33बाबा इतनी थोड़ी चीजों से इतनी तेज खुश्बू कैसे आ रही है
06:37थोड़ा धहरे रखो जवाब देखची खुद देगी
06:44ये कैसे हो गया बाबा? मैंने तो बस एक मुठी चावल दिये थे
06:48लेकिन पूरी देखची खिचडी से भर गई है
06:53शायद तुम्हारी मुठी छोटी थी, मगर देने का मन बहुत बड़ा था
06:57बड़े मन से दिया भोजन जल्दी कम नहीं होता बेटा
07:04आटा भी खतम नहीं हो रहा बाबा, टोकरी भर गई
07:07गिनना छोड़ो, अभी तुम्हारे हिसी रोटियां बाकी है
07:13अब ये मीठी खुश्बू किस चीज की है?
07:16खीर है बेटा, आज तुमने सब को खिलाया, अब कोई तुम्हें खिलाएगा
07:23बाबा, मेरे लिए किसी ने इतने प्यार से कभी खाना नहीं बनाया
07:27आज बिना चिंता के पेट भर कर खाना, बस यही मेरी इच्छा है
07:33आज तो सच में भूख बहुत लगी है बाबा
07:35अड़या, पहले भगवान को धन्यवाद दूँगा, फिर इस बार पूरा खाना जरूर खाऊंगा
07:43बेटा, कोई है?
07:45बहुत देर, बहुत देर से भूखा हूँ
07:49हाँ, अभी आया, आप वहीं रुकिये
07:52भाईया, सुबह से कुछ नहीं खाया, थोड़ा खाना मिल जाएगा
07:56थोड़ा नहीं, अंदर आओ, पेड भर कर खाना मिलेगा
08:03लेकिन ये तो तुम्हारी थाली है ना?
08:06अभी तक मेरी थी, अब तुम्हारी है
08:08जल्दी खाना शुरू करो
08:13अगर ये भी सारा खाना खा गया, तो तुम फिर भूखे रहोगे
08:16इसकी भूख मुझसे ज़्यादा है बाबा, इसे खाने दीजिए
08:23अगर मैं पूरी थाली खालूं तो तुम्हें मुझ पर गुस्सा नहीं आएगा
08:26भूखे इंसान से गुस्सा नहीं करते, उसे खाना देते हैं
08:32आराम से खाओ, कोई तुम्हारी थाली नहीं छीनेगा
08:35जरूरत पड़ी तो और दूंगा, बस आज यहां से भूखे मत जाना
08:43भाईया, थोड़ी खिचडी और मिल सकती है
08:45जितनी चाहिए उतनी लो, देख्ची भरी है, संकोच बिलकुल मत करना
08:52तुम्हारा पेट फिर आवाज कर रहा है बेटा
08:56करने दीजिये बाबा, इसका चेहरा देखकर मेरी आधी भूख चली गई
09:03अढ़या, तुम हर बार अपनी थाली किसी और को क्यों दे देते हो?
09:15किसी और को खिला दिया, सुबह की बात तुम्हें कैसे पता?
09:19वो सब जानता है अधाया
09:23तुम कौन हो? मैंने तुम्हें पहले कभी नहीं देखा?
09:27देखा है अधाया, बस उस समय मेरा रूप कुछ और था
09:34गणेश जी, आप फिर से मेरी परीक्षा ले रहे थे?
09:37हाँ अधाया, और तुम दूसरी बार भी खुद भूखे रह गए
09:42सुबह मुझसे बड़ी गलती हुई, मुझे क्षमा कर दो
09:46आप माफी मत मांगिये, मैंने खुशी से खिलाया था
09:52आप भूखे थे और मैंने खाना दिया, बस इतनी सी बात है
09:57जिसे प्रेम से दिया हो, उसका हिसाब थोड़े ही रखा जाता है
10:01अब एक बात और जाननी है, तो अपने रसोईये बाबा को ध्यान से देखो
10:06बाबा को? ये कौन है गणेश जी?
10:13बाबा, एक मुठी चावल से पूरी देख्ची कैसे भर गई?
10:17आप साधारण यात्री तो बिल्कुल नहीं लगते
10:22तुमने सही पहचाना बेटा
10:24कभी-कभी भगवान मंदिर से बाहर भी आते हैं
10:27ये देखने कि भक्त का प्रेम मूर्ती तक है या संसार तक
10:32भोलेनात, आप खुद मेरे घर खाना बनाने आए?
10:35हाँ बेटा, तुम्हारी भूख मुझे कैलाश तक सुनाई दे रही थी
10:42जो अपना भोजन देकर भी शिकायत न करे
10:45उसके लिए रसोई बनाना कोई उपकार नहीं
10:48आज तुम्हारे प्रेम ने मुझे यहां बुलाया है
10:52मैंने तो कुछ खास नहीं किया प्रभू
10:55यही तो खास है, तुमने अच्छा काम करके
10:58उसे बढ़ करके उसे बड़ा समझा ही नहीं
11:03भक्ती केवल हाथ जोडने में नहीं होती बेटा
11:05अपनी जरूरत से पहले किसी भूखे की जरूरत देख लेना भी
11:09उतनी ही बड़ी पूजा है
11:12अब तीसरी बार अपनी थाली मत देना
11:14इसे तुम्हें ही खाना है
11:17लेकिन बाहर कोई भूखा आ गया तो
11:23तुम्हारी एक थाली सुरक्षित है और बाकी देखची दूसरों के लिए
11:28आज इस घर से कोई भी भूखा वापस नहीं जाएगा
11:33ठीक है प्रभू मैं खाना खाऊंगा
11:35लेकिन जो भी दर्वाजे पर आए उसे पहले बैठा कर भोजन जरूर कराएंगे
11:46कहीं से बहुत अच्छी खुश्बू आ रही है
11:48लगता है अढहिया के छोटे घर की तरफ से आ रही है
11:51बेटा
11:53बेटा बस खुश्बू से खिचे चले आए परेशान नहीं करेंगे
11:57परेशानी कैसी अंदर आईए खाना तयार है
12:02तुम्हारी थाली ठंडी हो रही है अढहिया
12:05दो महमान बैठ जाएं फिर मैं भी इनके साथ खालूंगा
12:12महमान बढ़ते जा रहे हैं खाना कम पड़ सकता है
12:16कम पड़े तो मेरा हिस्सा भी बाट देंगे चिंता क्यों करें
12:23जरूरत हो तो मेरी थाली भी ले लीजिए
12:26यही सुनना था बेटा
12:28अब देखो तुम्हारे विश्वास का उत्तर
12:34देख्ची फिर से भर गई जिसका मन रसोई को कमी भी डराने नहीं आती
12:39बोलो बाल गजानन की जै
12:42सब लोग अंदर आईए लाइन बना कर बैट जाईए
12:46खाना बहुत है किसी को जल्दी करने या संकोच करने की जरूरत नहीं है
12:51बेटा इतने लोग हैं मेरे लिए कम मत पढ़ने देना
12:56आप पेट भर कर खाईए बाबा बाकी भगवान संभालेंगे
13:03भाईया एक रोटी और मिलेगी
13:05एक क्यूं दो लो
13:07भूख पूरी खतम होने तक खाते रहो
13:12इतने छोटे होकर सब को खिला रहे हो
13:15खाना मेरा कहा है काका देने वाले तो सामने बैठे हैं
13:23आज अकेले सेवा नहीं करोगे रोटिया मैं बाटूंगा
13:26फिर तो सबको दो दो ज्यादा देना गणेश जी
13:32और खिचडी मैं परोस्ता हूँ
13:35आज मेरी छोटी रसोई में तो भगवान भी रसोईया और परोसने वाले बन गए
13:43जिसका पेट भर गया हो वो भी खीर के लिए जगा बचा कर रखे
13:47बाबा ने इतनी प्यार से बनाई है कोई छोड़ेगा नहीं
13:56क्यूंकि आज मसाले के साथ इसमें अड़हिया का प्रेम भी मिला हुआ है
14:02भोले नात इतने लोगों ने खाया फिर भी देख्ची भरी है
14:06प्रेम बांटों तो उसका यही स्वभाव है वो घटता नहीं
14:12बेटा इतनी छोटी रसोई में इतना भोजन आया कहां से
14:16मैंने कुछ नहीं किया बाबा भगवान ने सब संभाला है
14:23चमतकार केवल भरी देख्ची नहीं है
14:25असली चमतकार वो दिल है जो अपना अंतिम निवाला भी किसी दूसरे के साथ बांट सके
14:32आज अड़हिया ने मुझे भी सिखाया कि स्वादिष्ट भोजन पेट भरता है
14:37लेकिन प्रेम से दिया भोजन मन भी भर देता है
14:42अड़हिया की जै हो
14:44मेरी नहीं उस भावना की जै बोलिये
14:47जो किसी को भूखा देखकर चुप नहीं बैठती
14:53शायद मैं देर से आया
14:55खाना खत्म हो गया होगा
14:57मेरी रसोई में देर हो सकती है
14:59खाना खत्म नहीं
15:04थोड़ा सा देदो बेटा
15:06भूख को थोड़ा खाना नहीं समझाता बाबा
15:09आप पूरा पेट भर कर खाईए
15:13लगता है आज ये देखची भी तुम्हारी तरह जिद्धी हो गई है
15:16सबका पेट भरने तक इसे खाली मत होने देना
15:22सच सच बताईए कोई भूखा तो नहीं रह गया
15:25नहीं अढ़िया सबका पेट भर गया
15:29अब तुम खाना खाओ
15:32अब कोई बहाना नहीं चलेगा
15:34ये तीसरी थाली है और इस बार इसका एक भी निवाला किसी और को नहीं देना है
15:40ठीक है प्रॉमिस
15:43पहले दर्वाजा देखलू कोई और तो नहीं आया
15:46अगर आएगा तो मैं खिलाऊंगा तुम बस बैठो
15:54भोलेनात खुद मुझे खाना परोस रहे हैं ये सपना तो नहीं
15:58नहीं बेटा आज तुम्हारी सेवा का उत्तर है
16:03ये दो रोटियां मेरी तरफ से
16:05और आज इन्हें मैं नहीं छीनूंगा
16:09फिर मैं जल्दी खा लेता हूं गणेश जी
16:11जी
16:12और ये खीर तुम्हारे लिए
16:15इतनी भूख लगी है प्रभू
16:17हाँ आज खीर के लिए भी खूब सारी जगह बची है
16:26इतना स्वादिष्ट खाना कभी नहीं खाया
16:28लगता है हर निवाले में घी से जादा आपका प्यार मिला हुआ है
16:32अनेश जी अब तो पेट महराज खुश है
16:35हाँ अब पेट भी खुश है
16:37और मन तो आप दोनों को देख कर पहले से ही भरा था
16:43अढ़या आज से तुम्हारे घर का चूला केवल तुम्हारे लिए नहीं जलेगा
16:47जहां संभव हो यहां से भूखा व्यक्ति भोजन लेकर जाएगा
16:53मैं वचन देता हूँ प्रभू
16:55जितना होगा उतना बाटूंगा
16:57भोजन कम हुआ तो आधा खाऊंगा
16:59लेकिन भूखे को खाली हाथ नहीं भेजूंगा
17:02अढ़या कल तुमने हमें खिलाया
17:05आज से गाउं का हर घर थोड़ा थोड़ा अनाज तुम्हारी रसोई के लिए देगा
17:13इतना सब लाने की जरूरत नहीं थी
17:15तुमने हमें सिखाया है बेटा
17:18थोड़ा थोड़ा मिलकर बहुत बन जाता है
17:21फिर तै रहा जो भी भूखा आएगा यहां बैटकर खाएगा
17:26जिसके पास ज्यादा है वो देगा
17:29जिसके पास नहीं है वो आशिरवाद देगा
17:33पिता जी अब समझ आया
17:36असली चमतकार देखची का भरना नहीं था
17:39पूरे गाउं के लोगों के दिलों का खुलना था
17:41बिलकुल पुत्र
17:43भगवान का चमतकार सबसे सुन्दर तब होता है
17:47जब वो किसी वस्तू को नहीं
17:49बलकि मनुष्य के व्यवहार को बदल देता है
17:52बेटा भगवान तुम्हें खुश रखे
17:56आशिरवात पूरे गाउं को दीजिये बाबा
17:58अब ये रसोई सबकी है
18:03मेरे पास बस इतनी मुठी चावल है
18:05प्यार से दी गई मुठी
18:07कभी छोटी नहीं होती काका
18:09यही सबसे बड़ी भेट है
18:13मेरे पास बस एक रोटी है
18:15क्या मैं भी दे सकता हूँ
18:16यही रोटी आज किसी भूखे का
18:19सबसे प्यारा भोजन बनेगी
18:22सेवा करने के लिए बहुत पैसा
18:24या बहुत अनाज जरूरी नहीं
18:26जो आपके पास है
18:28उसमें से थोड़ा प्रेम से बाटना ही काफी है
18:33कल तक हर घर अपनी थाली देखता था
18:36आज पूरा गाउं दूसरे की थाली देख रहा है
18:40कि कहीं वो खाली तो नहीं
18:43अगर एक थाली बाटने से इतने चहरे मुस्कुरा सकते हैं
18:48तो अपना हिस्सा थोड़ा कम हो जाए
18:50उसमें नुकसान कैसा
18:53क्या आज फिर उसके सामने चलें पिता जी
18:55नहीं पुत्र
18:57अब उसे हमारे दर्शन से ज्यादा
18:59अपनी सेवा की जरूरत है
19:02लेकिन उससे बात करने का मन कर रहा है
19:05जब वो किसी भूखे को खिलाता है
19:09समझना उसी समय हमसे बात कर रहा है
19:14पता नहीं क्यूं
19:15ऐसा लग रहा है जैसे भोलेना और गणेश जी
19:18यहीं कहीं खड़े होकर मुझे देख रहे है
19:22आप जहां भी हैं
19:24धन्यवाद
19:25आपने मेरा पेट भरने से पहले मुझे ये सिखाया
19:28कि किसी दूसरे का पेट कैसे भरा जाता है
19:33हम हमेशा यहीं है अढ़ाया
19:36जहां प्रेम से भोजन बाटा जाता है
19:38वहां भगवान को बुलाना नहीं पड़ता
19:42तो मैं यही कोशिश करूँगा प्रभू
19:45कि मेरे सामने कोई भूखा न सोय
19:47मेरी थाली छोटी रहे
19:49लेकिन मेरा दिल कभी छोटा नहो
19:53याद रखना अढ़िया
19:55प्रेम से दिया गया एक निवाला
19:57कभी छोटा नहीं होता
19:58और बाटने वाला दिल
20:00कभी खाली नहीं रहता
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