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  • 8 minutes ago
लालगोपालगंज के इब्राहिमपुर में मुस्लिम समाज के परिवार पीढ़ियों से देवी मंदिरों में चढ़ाए जानेवाली चुनरी को तैयार करने का काम कर रहे हैं.

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00:00जी हाँ प्रियाग राज की जो गंगा जमनी तहजीब है इस गाउं से होकर जाती है ये गाउं है इबराहिमपुर
00:06और यहाँ लगबग देड़ सो ऐसे परवार हैं जो कलाई नाडा और मा की चुन्री बनाते हैं
00:13लाल गोपाल गंज इस तित इस इबराहिमपुर गाउं में कदम रखते ही आपको नजर आएगी वो साजा संस्कृती जिसकी मिशाल
00:23सदियों से दी जा रही है यहां मजहब की दीवारें तूटती हैं और आस्ता के रंग गहराते हैं गाउं के
00:32करीब डेर सो मुस्लिम परवार �
00:34पीडियों से इस हुनर को सजोय हुए हैं यह हाथ जो धागे परोते हैं वो हिंदू आस्ता का अटूट हिस्सा
00:43बनते हैं मा के दरबार में चड़ने वाली पावन चुनरी हो या कलाई पर रक्षा सूत्र बनकर बंदने वाला पवित्र
00:52कलाई नाड़ा हर धागे में केवल मे
00:56not but it is the love and love.
01:01His presence of the earth, the earth is the presence of God's love and love.
01:03He has a strong voice for this work and his love and love.
01:13He has a strong voice on his feet and his love and love.
01:22His presence of God is the presence of God's love.
01:23नफरत के सोर के बीच इब्रहाइमपुर गाउं की यह साजी विरासत यह सावित करने के लिए काफी है कि जब
01:32दिल जुडते हों तो हर धागा एक डूर बन जाता है
01:39और हमारे पीशे देख सकते हैं लगबग देड़ सो ऐसे परवार हैं जो कलाई नाड़ा और मा की चुनिरी बनाते
01:46हैं चलिए हम कुछ लोगों से बात करते हैं
01:49पाहिरवाई प्रशे डेड़ तो सालों से आप लगाता है किसला को और चली आ रहे हैं आप चौर्थी पीडियूए इस
01:55काम में यह काम कैसे आप लोगों नों सोचा इसको आगे कैसे बड़ा
02:14सब्सक्राइब
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