00:00जितनी लोग कई बड़ी बीमारियों से अस्पतालों में नहीं मरते उसे ज्यादा लोग सड़कों पर मरते हैं
00:06पर अगर तुम गौर से देखो तो दुरघटनाओं में भी क्या वही frustrated इंसियान जिम्मेदार नहीं है
00:15उसको पता है भीतर से जिन्दगी ठप पड़ी हुई है तो बाहर से गाड़ी 140 पर उड़ाना चाहता है
00:21ताकि अपने आपको ये सांतना दे सके है कि कहीं कुछ तो मूवमेंट हो रहा है
00:26आपने देखा है आप जिब जिन्दगी से खुश होते हो तो रोड रेश तो छोड़ दो आप रैश ड्राइविंग भी
00:31नहीं करते जब मन भरा होता है चित्त शांत होता है तो गाड़ी लगभग क्रूज करती है आपके पास मौका
00:40भी होता है कि 140 कर दो तो भी आप अपना �
00:43गाड़ी को अराम से 80-90 बहुत हुआ तो 100 पे जितना असड़ा करूमत ही दे उतना आप चलाते है
00:48क्योंकि भीतर कुछ है जो अभी शांत है थमा हुआ है तो बाहर गाड़ी भगाने का बहुत जोश आता नहीं
00:56वो जोश रोश से आता है रोश जितना कम होगा गाड़ी भग
01:04लित हो जोईफुल एकदम उस दिन करोगे रोड रेज क्या तो सारी बात इसकी है ना कि खुंदक किसके खिलाफ
01:14अपनी जिंदगी के खिलाफ तो जिंदगी से अगर तुम को इतनी खुंदक है तो तुम बताओ ना कि तुमने जिंदगी
01:22में ये फैसले क्यों कर रखे
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