- 11 minutes ago
कैसे हुआ आतंक के 'उस' चैप्टर का अंत? वंदे मातरम् में देखें ऑपरेशन महादेव की कहानी
Category
🗞
NewsTranscript
00:04आपरेशन सिंदूर के जलिये पाकिस्तान को तो सबक सिखा दिया गया था
00:32लेकिन धर्म पूच पूच कर कतले आम करने वाले आतम की जिन्दा थे निर्दोष सिविलियन्स पर किया गया एक हीनियस
00:40अटाई था
00:47देश की बेटियों का सिंदूर उजारने वाले दरिंदे छिपे हुए थे बिल में और उनकी आहट भी नहीं निल पा
00:53रहे हैं
00:54पांच जुलाई दो हजार पक्चीस वो पहला दिन था जब हमें कुछ सटी ख़बर हमी शुरू हुई
01:00ठोज जानकारी मिली की हो सकता है इस हेरिये में अभी वो दैशतगर्द मिलिकेंट आज पर
01:13लगबग सुबा पांच बजे हमें ख़बर मिल गई थी कि पक्का हो गया था कि वो किस जगा पर है
01:18मैंने अपने टूप से यही कहा कि वो यहां से अब बाहर नहीं जाने से
01:25हिंदुस्तान का कलीजा चलनी था और हिंदुस्तान के रण बाकुरों को तब तक चैन नहीं मिलने वाला था
01:32जब तक एक एक गुनहगार का इंसाफ न हो जाए
01:43जो इस तरह से आतन को बढ़ावा देता है तो उसका इंजाम ऐसा ही होगा
01:51इस्ट में हमने जस्टिस को सर्फ की
01:59नमस्कार मैं हूँ श्वेता सिंग और आप देख रहे हैं आज तक
02:03पहलगाम की बैसरन घाटी में जहां पर रक्त बहाया गया निर्दोशों का
02:08जहां पर रिष्टों को तार-तार किया गया उसके बाद
02:12ओपरेशन सिंदूर जो चलाया गया देश की सरहद के पार आतंग के उस धाचे को खत्म करने के लिए
02:18और ओपरेशन महादेव जो चलाया गया पहलगाम के उन गुनहगारों का इंसाफ करने के लिए
02:26आज मेरे साथ ओपरेशन महादेव की टीम है और ये है इनकी कहानी
02:56इंतकाम नहीं ये इंसाफ की कहानी के नायरी है शोर नहीं ये भारत की संयम वाली ताकत के योद्धा है
03:10ये रणबाकुरे है भारत के स्वाभिमान के सम्मान के
03:31इस रोज आधे घंटे तक मौत का खेल खेला गया था
03:39पूरे देश का खून खौल उठा था जब कश्मीर की बैसरन घाटी खून से लाल हो गई थी
03:5426 हिंदुस्तानियों की जान गई थी
03:5926 मान का सिंदूर उजड़ गया था
04:09आज हम आपको उस हाई इंपक्ट ऑपरेशन की कहानी सुनाने वाले हैं
04:14जहां चूप की कोई गुंजाईश नहीं है
04:21ऑपरेशन सिंदूर के चार दिन तो दुनिया की आखों के सामने चले
04:25लेकिन उन आतंकियों को चुन चुन कर कैसे उतारा गया मौत के घाट
04:30जिन्होंने भारत के विरुद्ध ऐसा घिनोना शड्यंत्र रचा था
04:38कैसे आतंकवादियों की पहचान हुई
04:41कैसे बना प्लान
04:44गहने जंगलों में कैसे आतंकियों को भूंडा गया
04:48खुविया जानकारी कैसे इकठा की गई और कैसे पहलगाम के गुनहगारों को खत्म किया गया
04:58आपकी मुलाकात भारतियस सेना के उन जाबाजों से कराएंगे
05:02उन शूर वीरों की एक कहानी उनहीं की जुबानी सुनेंगे
05:07जिनोंने उन आतंकियों को उनके अन्जाम तक पहुचाया
05:12मैं इसके प्लाइनिंग से लेकर एक्जिक्यूशन तक शामिल था
05:19I was the company commander, I was responsible
05:24मैं टीम कमांडर था, यह सारा प्लान जो कॉर्डिनेशन है और जो प्लानिंग का पाज है वो देरा रोल था
05:34ऐसा है
05:36इसा अपरेशन में मैं सपोर्ट वेपन कैरी कर रहा था
05:42पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा एजन्सियों के सामने सिर्फ हमलावरों की पहचान नहीं बल्कि
05:50उन्हें ढून निकालने की भी चुनोती थी
05:54हमला खौफनाग था, पलटवार भी मिसाल होना चाहिए था
06:00आतंकबादी हमला करके भाग नितिया था, सामने था हजारों वर किलोमीटर का पहाड़ी इलाका, जंगल, पहाड, गुपाएं और दरजनू ऐसे
06:11रास्ते जिनसे कोई भी छिपकर निकल सकता था
06:18बाइस अपरेल दो हजार पचीस के बाद हम टेररिस्ट के खोजबीन में लग चुके थे, भारतिया सेना हर एक परियास
06:29कर रही थी, मल्टिपल एजेंसी से मिलकर कि कैसे उनको पहले हमने अइडिटिफाई किया था, फिर वो कहां कहां पर
06:37जा रहे थे, उनके खबरें हमें म
06:43महीना, उससे पहले लाइनिंग कहां खबर है, कहां हमें जाना है, कैसे हमें उनको एक जगे पे आकर बॉक्सिन करना
06:52है, ताकि हम उनको न्यूट्रलाइज कर पाए
06:58पहलगाम में हमला हुआ और सुरक्षा बल फॉरन फरकत में आए, आतंकियों की तलाश शुरू होगे, लेकिन ये एक ऐसी
07:08तलाश थी, जिसमें हर सुराग को पहले परखा जाना था, जंगल में एक गलत सूचना का मतलब बहुत खतरनाक हो
07:17सकता है, ऐसा भी हो सकता था, कि आ
07:20आहट पाते ही आतंकी सरहत पार निकल जाए और इंसाफ हमेशा के लिए अधूरा रहे जाए
07:29जब हमें पता चला जे 22 अपरेल को जो इंसिडेंट हुआ है, तो वो सभी के लिए वो बहुत ही
07:35दुखद न्यूस थी, और हमारे अंदर भी एमोशन्स जग रहे थे, लेकिन एक सोल्जर होने के नाते, हमारा जो सेंस
07:45ओफ ड्यूटी है और जो नेक्स्ट टास्क आने वाला
07:55तो इन दोनों विचारों में हमारा जो सेंस ओफ ड्यूटी और सेंस ओफ कमिट्मेंट तो ओवर टास्क वो जाधा ओवर
08:02पावर कर दा था, इमोशन्स को साइड में रखते हुए, तो उसके लिए फिर हमने अपनी प्रिपरेशन, ड्रिल्स, रिहर्सल्स, वो
08:09सब हमने अपन
08:10आटमेटिक, इस पार्ट ओफ ओवर ट्रेनिंग कि हमने वो स्टार्ट कर दी थी, यह सोचके कि टास्क आने वाला है,
08:16आतंकियों की तलाश में एक एक सुबूर जुड़ता जा रहा था, खुफिया इंपुट जुटाए जा रहे था, कहां से राशन
08:27आया, किसने खाना पहु
08:40दरसल इन जंगलों में आतंकियों को ढूनना ऐसा था, जैसे धूसे के धेर में सुई।
09:10आप सोचिए कि कितना कठिन ये पूरा इलाका है, कितनी उची ये चोटिया है, किस तरीके से वहाँ पर उन
09:17पेडों, उन चट्टानों के बीच में हमारे सैनिक दिन रात लगे रहे थे बरसात के उस मौसम में, और आप
09:25जब ये सोचते हैं कि आप शेहर के कितने करीब थे, म
09:37मुवेश आप श्रीनगर के एक शेत्र में ही मौजूद हैं, लेकिन शेहर के इतना करीब होकर भी, शेहर से कितना
09:46दूर रहकर, ना खाने का सुध, ना नींद, केवल और केवल एक प्रण कि आतम का खात्मा करना है, पहलगाम
09:55के दरिंदों का इंसाफ करना है.
10:00किसी भी जंगल में जब कोई आपरेशन होता है, तो तमाम चुनोतियां आपने साथ लेकर आता है, आतंकियों के लिए
10:06अंगिनत ऐसी जगें थी, जहां पर वो छिपे रह सकते थे, और सुरक्षा बलों के सामने किवल एक अवसर उन्हें
10:14ढून निकालने का, और ऐसे समय में
10:17हमारे सैनिकों की सबसे बड़ी ताकत बनी उनकी ट्रेनिंग, जो ओपरेशन था, उसमें ये टरेन हमारी एक वन अफ़ दिफिकल्टीज
10:32था, कहीं जंगल है, कहीं पहाड है, उनमें कोई पेड़ पौदे नहीं है, तो हमने इन सब चीजों को प्लानिंग
10:42में रखा था, और
10:42हमारी ट्रेनिंग का एक मुख्य पाट है, नेचर के साथ कैसे हमने उसमें रंग जाना है, कैसे हमने नेचर के
10:51साथ मिलना है, वो हमें ट्रेनिंग में सिखाया जाता है, अगर हम नेचर को उसको एडवांटेज तरीके में इस्तमाल नहीं
11:01करेंगे, तो वो हमारे लिए एक ड
11:33उसमें फरक पड़ेगा.
12:03एरिया को देखा है।
12:05हो आसपास गाओ हो नागरिकों की जिन्दगी पर भी खत्रा।
12:35आलोचक इस बात की चर्चा कर रहे थे कि आतंकी आखिर मिल क्यों नहीं रहे हैं।
12:39आप इनकी वीरता को देखेंगे तब उस संकल्प को समझेंगे जो ये देश के लिए उठाते हैं।
12:49आपरेशन्स में जब कोई सफलता मिलती है जानकारी के रूप में तो विफलता भी मिलती है।
12:54लेकिन उन विफलताओं के बावजूद अपनी मोटिवेशन को अपनी जोश को चरम पर रखना है।
13:02इसमें हमारे सैनिक पारंगत है।
13:0722 मई से जानकारी मिलना शुरू जलूर हुई लेकिन ये क्रम लगातार चलता रहा।
13:12इंटेलिजन्स टी में हर जानकारी को पूरी तरीके से वेरिफाई करती भारतिय सेना जमीन पर जानकारी को दूसरे इंपुट से
13:21मिलाती रही।
13:24इस तलाश में हुमन इंटेलिजन्स और तक्नीक दोनों का भड़पूर इस्तेमाल किया गया।
13:32देखने में शायद ऐसा लगे कि समय बीटता जा रहा है और कुछ हाथ नहीं लग रहा।
13:37लेकिन फकीकत ये थी कि लगातार हमारे सैनिक कोशिशों में जुटे रहे।
13:43इंटेलिजन्स जमा करना हो, सर्वेलांस करना हो, वेरिफिकेशन करना हो या फिर तालमेल बिठाए रखना।
13:52पांच जुलाई दो हजार पच्चीस वो पहला दिन था जब हमें कुछ सटीख ख़बरानी शुरू हुई।
13:59हमने एक लेड इंपुट बिल्डप किया था, जो कि सारी सिस्टर एजन्सी इंडियनामी, पुलेज, जेंड के पुलेज, सी आर्पिय, सब
14:10ने इंपुट देके हमने वो इंपुट कोर्लेट की और उससे हमें कुछ थोज जानकारी मिली की हो सकता है इस
14:17एरिये में अभी वो
14:19मिलीटेंट आ चुके हैं
14:20पहली थिंग वाज कि मैंने अपने टूप से यही का कि वो यहां से आप बाहर नहीं जाने चाहिए
14:26एटलीस्ट हमें यह पता चल गया है कि इस जंगल में और इस जंगल का चपा-चपा हमारा ही रिस्पॉंसिबिलिटी
14:31है
14:31तो हमें पता है उन्हें वो यहां नए हैं हम यहां पुरानी लोग हैं हमें अब वो यहां से बाहर
14:36नहीं जाने चाहिए
14:49तीन आतंकियों को ट्राक तो किया जा रहा था लेकिन सवाल ये भी था कि क्या ये वही तीन आतंकी
14:54हैं जो 22 अप्रेल को पहल गाम में 26 लोगों की हत्या करने के गुनहगार है
15:03और क्या इन तीनों को इस तरीके से घेरा जा सकता था कि वो दोबारा जंगलों से निकल कर किसी
15:09दूसरी जगे शरण न ले ले पहुँच न जाए छिप न जाए
15:1622 जुलाई को सेंसर्ज और सर्विलांस इंपुट ने आतंकियों की मौझूदगी की पुष्टिक कर दी थी
15:23और वो समय पास लग रहा था जब महीनों से जुटाई जा रही जानकारी को जमीन पर आक्शन में पदल
15:30लाथा
15:44हर बड़े सैन्य उपरेशन का एक नाम होता है कई बार उस नाम के पीछे सिर्फ एक सीक्रिट कोड नहीं
15:49बलकि उस इलाके की कहानी भी होती है इस उपरेशन के साथ भी कुछ ऐसा ही था जिस इलाके में
15:55आतंकियों की मौझूदगी के इंपुट लगातार मिल रहे थे वहां
15:58महादेव रिज और महादेव टॉप थे यही कारण था कि इस पूरे ओपरेशन का नाम रखा गया ओपरेशन महादेव
16:08देखे माम इंडिया नामी जब भी कोई operation करती है
16:11तो वो operation उस जगे के नाम से ही जाना जाता है
16:15हमारे एरिये में महादेव रिज है
16:18इसके बीच में के एक महादेव टॉप भी है
16:21उस रिज की ही हमें सारी खबरें आ रहे ही थी
16:23So accordingly हमारा जो plan था
16:26वो महादेव रिज पे ही बेश पे ही बना
16:29और वहीं पे execute हो
16:32आखरी दिन contact भी हमारा उसी रिज पे एक नाले के अंदर हुआ
16:36जहां हम तीनों terrorist को हमने मार गिराया
16:39तो यह जो operation था अब महादेव ये उस एरिये के कारण इसका नाम पर हो
16:51operation महादेव शुरू हो चुका था लेकिन सबसे बड़ा चालेंज अब भी तेरेन था
16:58हजारों वर किलोमीटर में फैला वो जंगल
17:01जंगल में operation हमेशा मुश्किल होता है
17:04नसरके होती हैं हर एक पेड़ दीवार होता है हर चटान एक आड़ है और हर बोड एक नया खत्रा
17:17दाचीगाम का जंगल खुले मैदान जैसा नहीं यहां सीधी चड़ाई भी है की चड़ भी और ये बहुत धना है
17:23मौसम भी किसी तय टाइम टेबल पर नहीं चलता कभी बारिश कभी धुन लेकिन जिस चीज को आतंकी अपने लिए
17:31पुद्रती कवर समझ रहे थे
17:32सुरक्षा भल उसी प्रकृती को अपने पक्ष में बदल रहे थे
17:40तो यहां मौसम का वरोसा नहीं है यह पाडियों की हाइट इतनी जाधा है तो आपको उन सब चीजों में
17:45प्रिपैर चलना चड़ता है बारिश किसी भी वाक्त आ सकती है अगर आपके रास्ते में जाते हुए बारिश आगई तो
17:51आपको जाने में प्रॉब्लम होगी आपके
18:05हो एक पाडियों तो आपको चलना थोड़ा दिकत हो जाती है कावर कम मिलता है क्योंग इgelा कि प्लेन पहारी
18:26है तो आपने आपको सर्प्राइज कृष्ट देने में काफी विक्ता прот mieszakan
18:29आपको समय लगता है, आपका जो इंडरेंस है कम होता है लेवल, चलने में काफी, शुलो चलना पड़ेगा आपको.
18:43आपको नहीं पता, आपको ये पता है कि ये होना तो है, बट ये कब तक होगा, कितना लंबा चलेगा,
18:52ऑल्दो हम अपने सर्वाइवल के लिए कुछ गंटों का, 72, 96, 120 गंटों का खाना अपने साथ लेकर के चलते
18:59हैं, पानी उसी इसाब से हम वाटर डिसिप्लीन मिंटेन करत
19:02हैं, बट ऑल्दो, अगर ऐसे रिक्वाइरमेंट आती है, कि आपका खाना जो है, वो कम पढ़ रहा है, या फिर
19:07पानी जो है कम पढ़ रहा है, और आपकी सर्टेनिटी नहीं है कि कब तक ऑपरेशन चलेगा, तो हम उसी
19:12हिसाब से अपना फूर्ड या वाटर डिसिप्लीन म
19:15अभी आज जो है, वो इतने पही मेंटेन करना है, आज पानी इतना ही पिया जाएगा
19:23आतंकियों को अगर भनक लग जाती, तो वो किसी भी दिशा में भाग जाते, इसलिए सुरक्षा बनों का मकसद से
19:30पेक जगे पर पहुँचना नहीं था, मकसद था चारों तरफ से घेरा बनाना
19:38बताया जाता है कि रात करीब दो बजे आतंकवारियों ने थोड़ी देर के लिए अपना संचार उपकरण चालू किया
19:44सिग्नल इंटेलिजिंस ने तुरंट दाची गाम राश्ट्रियों उढ़्यान के पास लिडवास द्वारा क्षेत्र में उनके सटी कोडिनेट्स का नक्षा तैयार
19:53कर लिया
19:5928 जुलाई दो हजार पच्चीस ताची गाम के जंगलों में हमारे जवान लक्ष को घेरते हुए आगे बढ़ने लगे
20:1928 तारिक की सुबह करीब आठ से नौ बजे के बीच में हमारी एक फोर्सिस की टुकडी जो उनको एक
20:28टास्क दिया गया था उस टास्क को पूरा करके
20:33पूरे अपने सर्वलेंस एक्यूक्मेंट्स को इंपलॉई करके नीचे की तरफ आ रही थी जहांकि हमें ख़बर थी कि हो सकता
20:42है शायद यहां पे है और सारी इंटेलिजेंस पिक्चर भी उसी तरफ इशारा कर रही थी तो हमारी टीम उतनी
20:49ही चौकस थी कि अभी हम नीचे
20:51उतर रहे हैं कहीं पे कुछ भी हो सकता है फाइनली हमें टीन लोग डिग अ करिब साड़े नौ बज़े
21:13तर सैनिक बिना किसी रेडियो संचार के चुपचाप पहाड़ी पर चड़ गए
21:18सुबह के पुगरे का फाइदा उठाते हुए कमांडोज ने एक मजबूत मल्टी लेर धेरा तैयार कर लिए
21:25सुरक्षाबलूं को एक अडवांटिज था कि ये दिन का वक्त था और वो दुश्मन को साफ साफ देख पा रहे
21:34लगबग सुबह 5 बजे हमें खबर मिल गई थी कि पक्का हो गया था कि वो किस जगा पर है
21:39उस जगा पहुचने में हमें कुछ टाइम लगा होगा अब वहां पर हम जब थे तो समय का अंदाजा थोड़ा
21:45कम हो जाता है बठा रोश्नी इतनी हो गई थी कि लगबग दिन हो ग
22:01पॉजिशन में आए उस डॉमिनेटिंग पॉजिशन में हम आ सके जिस पर हम उन्हें वार कर सके और वो जो
22:06है हम पर क्रॉस फायर अगर करना भी चाहें तो हमें कोई भात ना हो उससे
22:16घने जंगलों में ये सैनिकों का लगातार चौदवा दिन था कितनी असफलताएं कितने सेट बाक कितनी मुश्किलों के बाव जोड़
22:23एक पल ऐसा नहीं निकला था जब वो हताश हुए है कभी ऐसा नहीं हुआ कि उन्होंने खामोशी की चादर
22:30छोड़ी हो कभी ऐसा नहीं
22:31हुआ कि उन्होंने आतंकियों के टोह लेना छोड़ा हो न भूख की चिंता न प्यास की फिक्र न घर की
22:37बात बस जुनून देश के उन दुश्मनों को ढूंड निकाल ले
22:47अपने तरीके से वह केमफ्लाइज और कॉंसर्मेंट के अनुसार एक छोटा सा हाइड आउट मतलब टंपरोरी हाइड आउट बना के
22:53रखे थे जिसे की कोई देख ना सके और मौसम भी बहुत उस दिन खराब था और सुवा का मौसम
23:00था तो वीजिबिल्टी भी थोड़ा कम
23:02लेकिन हम अपने ट्रेनिंग के अनुसार ही जैसे हम लोग हमेशा आपरेशन को अंजाम देते हैं उसी हिसाब से हम
23:08लोग आगे अडवांस करते रहे जैसे ही हमें लगा कि हाँ आगे कोई हाइड आउट है फिर हमने अपना बिरिफिंग
23:14लिया और फायर कंट्रोल का जो आद
23:35सुबह के लगभग साड़े दस बज रहे थे जब सैनिकों ने अंतिम का रवाई शुरू कर दी
23:44तो अमने क्या किया उदरी थोड़ा आड़ पोईशन ली तो अमने पांट दस मिल्ट क्या किया उसको देखते रहे हुं
23:51उसकी क्या एक्टिविटी है वह बंदा क्या है वहां से थोड़ा ठर्ण हुआ और उदरी जाके अपने हाइड आउट में
23:57छिप गया हुँ तो हमने प
24:11तो कमंडर ने बताया कि हम ऐसे ऐसे चलना है उसके मतलब नजदी से नजदी जाके उसके आईड़ावट के पास
24:17पहुचे हम तो नजदी पहुचे के तो जैसे ही अर्थ पोई तो पर उसके बाद में क्लोच उसके बाद वो
24:26ऑपरेशन जंगल का सननाता गोलियों की आवास स
24:31से चकना चूर होने लगा अब दुनिया की कोई आर उन आतंतियों को नहीं चिपा सकती थी
24:45कोई चमतकार उन्हें नहीं बचा सकता था ये हिंदुस्तान के रणमा करों का कहर था ये संदूर का इंसाफ था
24:58भीशन लेकिन बेहद नियंत्रिक मुढभेड में विशेश बलो ने तीस मिनट के अंदर तीनों आतंक वादियों को डेर कर दिया
25:06दो हफते से जंगल की खाक चान रहे जवान उन दरिंदों से देश के एक-एक सख्म का हिसाब ने
25:13चुके
25:15पहलगाम अटैक के बाद इतना हाई वैल्यू टागेट जिस पे पूरे देश की नजर थे यह हाई वैल्यू ऑपरेशन बना
25:23और जब यह हमें साबित हो गया कि यह वही हतियार हैं जो कि पहलगाम अटैक पे फायर हुए थे
25:31तो उसने हमारे अंदर एक सेंस ओफ क्लोजर दि
25:46पर हिंदुस्तान के योद्धा निराले होते हैं एक सफल ऑपरेशन का जश नहीं बलकि अब भी वो ये निर्धारित करने
25:53में लगे कि मारे गए आतंकियों की पहचान क्या है और क्या हथियार वही है जो बैसरन घाटी में इस्तमाल
26:00किये गए
26:10सुलिमान उर्फ फैसल जट हमजा अफगानी जिब्रान
26:21ऑपरेशन महादेव में मारे गए तीन आतंकिवादियों के पास से तीन राइफले मिली थी
26:27एक M4 काबाइन और दो AK-47 राइफल्स
26:36आफिर में जब इस पूरे ऑपरेशन के बाद ऐसा नहीं था कि आपने एक किल किया और उसके साथ खत्म
26:45हुआ
26:45उसमें जो काट्रिजेज मिले थे हमें पहल गाम में वो इनी वेपन्स के निकले कैसा था वो सेंस ओफ क्लोजर
26:54माम जब ये टर्रिस को न्यूटरलाइज किया गया ऑपरेशन महां खतम नहीं हुआ था
26:58विकाज हम अभी भी शौर नहीं थे क्या ये वही लोग है क्योंकि ये इसके दो पहलो है
27:03पहला चीज ये है कि ये हमारे लिए रोज का काम है ये हो सकता है कोई और ग्रुप भी
27:07हो सकता है और दूसरा ये था कि वो उस ऑपरेशन से उस अटाक से से सेंटिमेंट्स इतने ज़्यादा जुड़े
27:15थे कि हम चाहते थे ये वही लोग हो बाट देन उसके बाद में हमने �
27:19उस एरिया को पुरा सैनिटाइज किया, पुरा सर्च किया, चेक किया कि कहीं उनके अलावा कोई और तो नहीं है
27:24जो किसी और दूसरी जगा पर हो उसके बाद वहाँ से जो रेसिडूर्स थे वो उठाए गए उनको थौरोली चेक
27:30किया गया
27:32पहलगाम से मिले कार्तूस और दाची गाम में बरामद हथियार दोनों को जाच के लिए भेजा गया, फिर हुई बैलिस्टिक
27:39जाच, बरामद राइफलों से टेस्ट फाइरिंग की गई और फिर पहलगाम से मिले कार्तूसों की तुलना की गई
27:46इनको भेजा गया चेक होने के लिए to confirm and to assist
27:50उस तब तक हमने किसी को भी बताया नहीं था कि जो है यह operation पूरा हो गया है
27:54after official confirmation आ गई
27:56ballistic reports से चेक हो गया यह confirm हो गया
27:59कि यह operation वही है यह उन्हीं लोगों को हमने neutralize किया है
28:02तब जो sense of closure था वो हमें लगा कि
28:05although यह हमारा regular task है
28:07बट जो sentiments उबर के आ रहे थे देशवासों के उन families के लिए
28:10तो हमें feel हुआ कि I think हमने justice serve कर दिया
28:18FSL की report ने सपश्ट रूप से साबित कर दिया
28:21कि पहलगाम हमले की जगे से बरामत कार्तूस
28:24मुटभेड के दौरान बरामत तीन राइफलों
28:26दो एके सीरीज राइफल और एक M4 राइफल से मेल खाते हैं
28:31जिन हथियारों से गोलिया चली थी
28:33वही हथियार आतंकियों के पास से बरामत हुए
28:36और यही वो सुबूत थे
28:38जिसने 22 अपरेल को 28 जुलाई से जुड़ दिया
28:41पहलगाम का न्याय पूरा हो चुका था
28:46उनके पास से तीन राइफलें बरामत एक 19 M4 कारबाइन अमेरिकन राइफल है
28:54और दो एके 47 राइफल है
28:58जिस दिन पहलगाम में गटना हुई
29:01हमारे विर्दोस नागरिकों को मारा गया
29:04उस दिन वहाँ से NIA ने खाली कार्टूसों को कबजे लिया था
29:11इनके मारे जाने के पहले ही
29:13वो खाली कार्टूसों का
29:16फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में
29:20एक प्रकार से इसकी जन्मक उनली निकाली थी
29:24कि एक कौन सी राइफल से चले है
29:26और जब यह मारे गए इनके पास से भी जो राइफली मिली
29:33फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में
29:36चंदीघड़ में रात को फोरेंसिक टेस्टिंग करकर
29:41सत्द प्रतिसत मिलान हुआ है
29:44कि इन ही तीन राइफलों का उप्योग रिया गया था जिसमें से
29:5040 कार्टूस 44 कार्टूस एक नाइंटीन एम फोर के थे और पचीस कार्टूस एके 47 राइफल के थे
30:02बैसरन घाटी में जो कुछ हुआ था वो हमारी देश में सबने देखा सबका खून खौला था क्या न्याए की
30:11जो एक जिम्मेदारी भारतिय सेना के कंधे पर थी आप लोगों के कंधे पर थी वो आपको और उर्जा दे
30:19रही थी इस आपरेशन के दोरा
30:20देखिए भारतिय सेना इमोशन से कम और अपने कर्तव्य पे जादा काम करती है बैसरन अटैक एक ऐसा अटैक था
30:33जो कि ना सुर्फ एक आतन की अटैक नहीं था बलकि निर्दोष सिविलियन्स पर किया गया एक हीनियस अटैक था
30:41इस अटैक के बाद जो देश में इमोशन �
30:46था काफी हाई था जैसे कि आपने बताया परन्तु हमारी जो ट्रेनिंग है वो हमें इमोशन को कर्तव्य में ट्रांस
30:54कैसे उसको ट्रांसफार करना बूद हमें सिकलाती है हमने वही किया पर लास्ट में हमने जस्तिस को सब्सक्राइब उन तीन
31:04आतंगवादियों को न्यू�
31:15सब्सक्राइब वाले इलाके में पारंपरिक निगरानी परियाप नहीं थी सुरक्षा बलों ने आतंगवादियों के ठिकाने का पता लगाने के लिए
31:22उन्नत तक्नीकी खुफिया जानकारी यानि टेक इंट का उपयोग किया आतंगवादी बेहद सुरक्षित ऑफलाइन सं
31:41तो और पेड़ों को भेदने के लिए इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सेंसर और हीट सिकनिचर इमिजिन से लेस भारी पेलोड वाले ड्रोन
31:48लॉंच किये गए अपरेशन सिंदूर का मकसद आतंगवाद के ठिकानों को निस्त नाबूत करना आतंग के आकाओं को खत्म करना
31:56और पा
32:01अदेव का फोकस उन आतंगियों का खात्मा था जिन्होंने पहलगाम के जर्य भारक को छली हिया
32:14यह जो आपकी आमी, CRPF और जमुकश्मीर पूलीस का सहयूकत आपरेशन पर यह एक ऐसा आपरेशन था जो बहुत डाइनामिक
32:22था, चीजें पल-पल में बदल रही थी, कैसे एंशूर होता है कि यह इतना फ्लॉलेस, इतना सीमलेस निकलता है
32:30देखिये, जैसे मैंने पहले भी, I have emphasized more on training and the cohesion between the forces, और हमारी जो
32:39team cohesion है आपस, डाइनमिक औरेशन, कितने दिन चलेगा हमें नहीं पता है, कब क्या होगा वो भी हमें नहीं
32:46पता है, तो हम step by step लेते हैं, कि आज खबर यहां पर है, आज हम यह करेंगा, अगले
32:54दिन, टीम रो
33:00अब इन सब चीजों में आता है, आपका logistic backup, आपके जवान physical endurance is required in all these things,
33:08जैसे कि पहाडी पे चड़ रहे हैं, बारिश भी आ गई, बरफ भी पड़ गई, नाले भी भर गए, उस
33:13दारान बहुत सारी चीजें ऐसी हो रही थी, तो हमने इसको एक systematic तरीके से plan किया था, हमने अ�
33:22उनको समय समय पर आराम दे पाएं, ताकि जब actual operation हो, तो हमारे पास जो मेरी force है, force
33:30preservation intact हो, और हम पूरी strong अपने दस्ते के साथ जाके इस operation को अंजाम दे पाएं
33:41इस पूरे operation की एक बड़ी कहानी, अलग-अलग एजनसियों के बीद समनवे की भी है, तालमेल की
33:48खूफिया बियोरो से मिली मानविया, खूफिया जानकारी, सेना और दूसरे सुरक्षा बलों की जमीनी निगरानी, सेंसर से मिली पुष्टी, राष्ट्रिय
33:57जाच एजनसी की जाच, स्थानियस तर से मिली जानकारिया, और आखिर में सुरक्षा बलों की जमीनी का रवाई
34:03इन सभी कड़ियों को जोड़ कर एक ऐसी शिंखला तैयार हुई जिसने 22 अप्रेल के पहलगाम हमले से 28 जुलाई
34:10के दाचिकाम अभियान का रास्ता बनाए
34:15मन में तसलिए मिली कि जिन लोगों ने हमारे देशवासियों का खुण भाया तो उसका बदला लेना एक हमारे को
34:23क्या है नियाए दलाना
34:25है जब ये निश्यत हो गया ये कंफर्म हो गया कि ऑन आतंकिों की पहचान वही थी जिनोंने पहलगाम में
34:34वा हमला किया था तब क्या कहा मनिं टो किसा मैसूँस जीस से
34:41ये हमला हुआ वसरांगां गाती में उश दिन से ही पुरी भारतिया दाना इसे पीछे सुनलगी।
34:55सुरक्ष्य एजेंसियों के तरद से यह कनफर्म हुआ कि हाँ यह वही अतंकी हैं तो एक मन में संतुस्टी हुआ
35:00कि जिन अतंकियों ने निर्दोस नागरीकों के उपर हमला किया था उनका उन नागरीकों का जो भरोसात हम पे वो
35:09आज पुरा हो गया तो यह कोई बदले का भा
35:26आज युद्ध बदल रहा है तो आतंक निरोधी ऑपरेशन्स भी बदल रहे हैं भारत पारंपरिक युद्ध भूमी से लेकर आंटी
35:35टेरर ऑपरेशन्स में भी शौर्य और तक्नीक का ऐसा संतुलन लेकर चल रहा है जो मिसाल ऑपरेशन सिंदूर हो या
35:43ऑपरेशन बहादर
35:45ये संकल्प है भारत के हर वीर का कि जब जब देश की तरफ कोई भी दुश्मन आख उठाएगा खुलेगा
35:52त्रिनेत्र होगा तांडव जीतेंगे महादेव
35:59ये कहानी है दृड़ता विश्वास और नयाई की आतंक की मन्शा कुछ भी हो उसका अंजाम एक ही होगा
Comments