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  • 9 minutes ago
ऐसा कोई नहीं, जो गयाजी विष्णुपद मंदिर के गयापाल पंडा का क्लाइंट ना हो. इनके पास सभी के पूर्वजों का रिकॉर्ड. रिपोर्ट-सरताज अहमद

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Transcript
00:06बिहार की मोक्ष भूमी गयाजी एक ऐसी रहसे महिधरती जहां आए बिना देश दुनिया के सबसे ताकतवर लोगों के बितरों
00:15हो भी मोक्ष नहीं मिलता
00:17चाहे देश के प्रधानमंत्री हों, राश्रपती हों, सबसे बड़े उद्योपती हों या फिल्मे सतारे
00:23सबको यहां सिर जुकाना ही पड़ता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि गयाजी के इन गयापाल पंडों के पास
00:31एक ऐसा गुपत खजाना है
00:33जिसमें आपके हमारे और देश की बड़ी बड़ी हस्तियों के 500 साल पुराने पूरवजों का पूरा इतिहास दर्ज है
00:41इसे कहते हैं पंडा पोथी
00:44देश की राष्ट्रपती द्रौपदी मुर्मू जब गया जी आई तो उनके पुरोहित कटारियार परिवार ने उनकी बही खाता निकाली
00:51इसी बही खाते में राष्ट्रपती के उरिसा वाले गाउं और उनके पूरवजों का सदियों पुराना रिकॉर्ड दर्ज था जोसे देख
00:59कर हर कोई हैरान रह गया
01:34सिर्फ राष्रपती ही नहीं देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और ग्रिह मंत्री अमित शाह के पुरोहित हैं हाथी वाले
01:42पंडाजी यानि शंभूलाल बिठल का परिवार
01:45इनके पास प्रधान मंत्री के पूरवजों का 400 साल पुराना रिकॉर्ड है इसी परिवार के पूरवज राष्ट्र पिता महात्मा गांधी
01:53और कस्तूर्बा गांधी के भी पुरोहित थे
01:55नहरो वाश के पुरोहित दाढ़िवाले पंडाची के पास मोतिलाल नहरो के पिंडदान का लिखित सबूत आज भी मौजूद है
02:29सियासत के अलावा उद्योगपती मुकेश अंबानी
02:33अनिल अम्बानी और गौतम अडानी के पुरोहिपी यहीं है
02:37फिल्मे दुनिया के महानाया का मिताब बच्चन, धरमेंद्र, अक्षे कुमार और गोर्वंदा के पूरवजों का इतिहास भी इन्हीं बही खातों
02:45में कैद है
02:45पिछले साल संजेदत और हालही में दारा सिंग के बेटे ने भी यहां आकर अपने पितरों का तरबन किया था
03:30गयाजी की महिमा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है
03:33हैरान करने वाली बात यह है कि विभाचन के बाद पाकिस्तान, अफकानिस्तान और बांगलादेश में बसे हिंदू आज भी खींचे
03:41चले आते है
03:41बांगलादेश से हर साल पंधा से बीस हजार श्रत धालू समोह में यहां मोक्ष की काम ना लेकर पहुंचते हैं
03:49इन पंडों के पास उनके पूरवजों का भी पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित है
04:11हमने दखाए कि पुषावा अब फार्ट से लोग आये हैं इन्गालादेश से लोग बहुत आया है
04:17मानिता है कि द्रेता युग में स्वयम भगवान राम और माता सीता ने राजा दश्रत का पिंडदान इसी धर्ती पर
04:24किया था
04:25भगवान विश्णू यहां पित्र देवता के रूप में साक्षात विराजमान है
04:30यहीं वज़े है कि सद्यों से चली आ रही ये बहिखाता और सुफल की परंपरा आज भी उतनी ही जीवन्त
04:37है
04:37गया जी से ETV भारत के लिए सर्टाज एहमत के रिपोर्ट
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