Skip to playerSkip to main content
  • 19 minutes ago
सऊदी की विशाल सेना हूती के सामने क्यों इतनी लाचार? देखें ब्लैक & व्हाइट

Category

🗞
News
Transcript
00:00नमस्कार मैं हूँ श्वेता सिंग और ब्लाक और वाइट में आपका स्वागत हूँ
00:03आज सबसे पहले ये समझने की कोशिश करेंगे कि जब भी भारत अपनी खूट नीतिक और आर्थिक ताकत से दुनिया
00:12के बड़े मंचों पर अपनी धाक जमाता है
00:14तब तब पश्चिमी मेडिया का एक पूर्वागर है सामने क्यों आ जाता है
00:19चाहे जी ट्वेंटी हो या हाल का ब्रिक्स सम्मेलन भारत की सफल कूटीती की तस्वीरों को दरकिनार कर
00:26विदेशी मीडिया ने जान बूज कर होर्डिंग्स के आगे साइकल चलाते व्यक्ती की तस्वीरों को प्रमुखता दी
00:32यह किवले कि इत्वाक है या भारत के बढ़ते कट को कमतर दिखाने की सोची समझी विज्वल ट्रोलिंग
00:40आज सवाल ये है क्यों 1963 में साइकल पर रॉकेट धुने वाले भारत से लेकर आज की अंतरिक शक्ती तक
00:48पश्चिमी मीडिया का ये नजरिया बदलता क्यों नहीं है
00:52इसके बाद आपको बताएंगे कि प्रधानमंत्री मोधी और चीन के राष्ट्रपती शी जिन पिंग की मुलाकात को कैसे चीन का
00:59सरकारी मीडिया रिष्टों का नया अध्याय मान रहा है
01:02चीनी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के अनुसार भारत के यूपी आई और चीन की फिंटेक ताकत मिलकर ब्रिक्स का नया डिजिटल
01:11पेमेंट सिस्टम बना सकते हैं
01:13इसके अलावा दोनों देश क्रिशी, उर्जा, आई-टी, फार्मा और मनुफाक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में हाथ मिलाकर काम कर सकते हैं
01:39इसके बाद आपको बताएंगे जिस व्रिटन ने कभी दुनिया के कई मुलकों को माटा
01:42कभी भारत के सीने पर विभाजन के जख्म दिये कि आज वही ग्रेट ब्रिटन खुद तूटने की कागार पर है
01:50ब्रिटन का हिस्सा रहे स्कॉटलिंड, वेल्स और उत्तरी आईरलिंड ये तीनों देश अब अलग होकर अपनी आजादी की मांग कर
01:58रहे हैं
02:00पाकिस्तान और उसकी नौटनकी ये दो ऐसी चीजे हैं जो कभी खत नहीं हो सकती
02:09फाकिस्तान फिर से दुनिया की आँखों में धूल जोकने के लिए ड्रामे बाज मोड में आ गया
02:14और पाकिस्तान ने आतंकी मसूद अज़र पर घोशती नाम को सतर लाख पाकिस्तानी रुपए कर दिया
02:20खजब कलाकारी
02:21खुद ही आतंकीयों की नरसरी चलाओ उन्हें अपनी ही सरपरस्ती में पालो पोसो और जब FATF की ग्रे लिस्ट का
02:28डंडा चले
02:29तो नाम मातर का इनाम बढ़हा कर दुनिया को बेवकूफ बनाने निकल पड़ो
02:35इसके बाद पाकिस्तान की एक और शर्मनाक हरकत दिखाएंगे
02:38भारत की जावाज बेटियों ने क्रिकेट के मैदान पर जब एश्या कप अपने नाम किया
02:43तो बेशर्मी से पाकिस्तान के ग्रे मंतरी मोसिन नक्वी ट्रोफी पकड़ाने पहुँच गए
02:49लेकिन भारत की चैंपियन बेटियों ने नक्वी के हाथों ट्रोफी लेने से इंकार कर दिया
02:53स्टेडियम में जब ट्रोफी चोर के नारे गूंजे तो मोसिन नक्वी खिसिया कर
02:58ट्रोफी दबा कर मैदान से ऐसे भागे जैसे कोई रंगे हाथों पकड़ा गया
03:03यही हरकत उन्होंने मेंस एशा कप में भी की थी
03:10पश्चिमंगाल की सरकार ने राज के 252 मदर्सों को बंद करने का आदेश दिया है
03:16साथी 100 से ज्यादा मदर्सों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है
03:19यह आक्षन एक सरकारी सर्वे के बाद लिया गया
03:22आरोप है कि यह मदर्से अवैद रूप से चल रहे थे
03:25इस बीच मंतरी दिलीप घोश ने बयान दिया कि कई मदर्सों से
03:30राज्य में हुए आतंकी हमलों के तार जुड़े थे
03:32और बांगलेदेशी चरम पंथी इनमें शरण लेते थे
03:36ब्रिक्स समिट की सुरक्षा में तैना दिल्ली पुलिस के जवान
03:39ने लाइक्स और व्यूज के लिए ड्यूटी को प्रात्मिक्ता देने के बजाए
03:43रील्स बनाना ज्यादा जरूरी समझा
03:46स्नाइपर राइफिल के साथ बैग्राउंड म्यूजिक लगा कर बनाई गई
03:50ये रील जैसे ही इंटरनेट पर वाइरल हुई
03:52महकमे में खलबली मच गई
03:53सुरक्षा प्रोटोकॉल और अनुशासन की धज्जियां उडाने के आरोप में
03:57दिल्ली पुलिस ने जवान को सस्पेंट कर दिया
04:00देश में महगाई को लेकर बड़ी खबर
04:03सरकार द्वारा जारी नए आकड़ों के अनुसार अगस्त महीने में
04:06खुद्रा महगाई दर बढ़कर 4.82 प्रतिशत पर पहुँच गई है
04:10जो कि जुलाई के 4.45 प्रतिशत के आंकड़े से ज्यादा है
04:14सबजियों और खाने पीने की चीजों की कीन्तों में उच्छाल को
04:17इस वृद्धी की वजब आना जा रहा है
04:20उदर राजस्थान के निकाय चुनाओं के नतीज़े आ गए है
04:23रेज़े के 10 नगर निगमों में से 5 पर बीजेपी का परचम लहराया है
04:27जबकि कॉंग्रेस केवल एक पर सिमट गए
04:32अलवर, उदैपूर, कोटा, जैपूर और भीलवाडा जैसे बड़े शहरी केंद्रों में
04:37बीजेपी ने अपना दबदबा दिखाया
04:39हालकि अजमेर और बीकानेर जैसे शहरों में मिली हार
04:42चिंता का सबब बीजेपी के लिए ज़रूर
04:47यूपी चुनावों से पहले एक बार फिर मुख्यमंत्री योगी आदितनात ने बड़ा बयान दिया है
04:52उन्होंने राय बरीली में कहा कि सनातन धर्म का द्वज भारत की संप्रभुता और सुरक्षा की ग्यारेंटी है
04:59जो शक्ति सनातन को कमजोर करने की कोशिश करती है वो भारत के विकास में बाधा बनती है
05:07ये पावन कथा जब तक भारत की धर्टी पर चलती रहेंगी
05:14सनातन का ध्वजा पता का कभी जुकने नहीं पाएगी और सनातन की ध्वजा पता का उंची रहेगी
05:21तो भारत का कोई बाल बांका नहीं कर पाएगा
05:27लेकिन आज सबसे पहले हम आपको ये बताएंगे कि सौधी अरब की विशाल सेना
05:32यमन में हूती लड़ाकों के सामनी इतनी बेबस और लाचार क्यों है
05:37दुनिया का सात्वा सबसे बड़ा रक्षा बजट सौधी अरब की सेना का है
05:41जो लगभग आठ लाक करोड रुपे का है
05:45ये पैसा नेपाल, जोजिया और लेबनन जैसे देशों की कुल जीडिपी से दो गुना है
05:50या जिस यमन के खिलाफ सौधी अरब संगहर्श कर रहा है
05:54उसकी कुल जीडिपी की तुलना में सौधी अरब का एक साल का रक्षा बजट दस गुना ज्यादा है
06:00अगर सिर्फ मिडली इस देशों की बात करें तो कोई भी देश अपनी सेना और हथियारों पर उतना पैसा खर्च
06:06नहीं करता जितना सौधी अरब करता है
06:08इस मामले में इस्रेल भी सौधी अरब से काफी पीछे है
06:13इसी वज़े से ये सवाल कई लोग पूछते हैं कि जब सौधी अरब के पास इतनी विशाल सेना है इतना
06:19बड़ा रक्षा बजट है और इतने आधूनिक हथियार है
06:21तब आखिर परिशानी कहा है और क्यूं सौधी अरब हूती के सामने हथियार नहीं उठाता
06:28आठ सितंबर को हूती विद्रोहियों ने सौधी अरब की सबसे बड़ी सरकारी तेल कमपनी साौधी अरामकों के ठिकानों पर बड़े
06:36मिसाइल और ड्रोन हमले किये
06:37और खुद इस सौधी अरब ने इन हमलों में कई लोगों के घायल होने की पुष्टी की लेकिन इन हमलों
06:43का उसकी सेना ने कोई जवाब नहीं दिया
06:4610 और 11 सितंबर को हुटी विद्रोहियों ने एक बड़ा सप्राइज मिलिटरी आपरेशन शुरू किया
06:52और केवल दो दिनों के भी तर रड़नीतिक रूप से बेहद एहम अल मोखा पोर्ट पर कबजा कर लिया
06:59और यहां भी सौधी अरब की सेना ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी
07:04उल्टा यमन के सेना ने अमेरिका और सौधी अरब पर आरोप लगाया
07:08कि उन्होंने हुटी विद्रोहियों के इस अप्रत्याशित हमले के खिलाफ मांगी गई हवाई मदद देने से इनकार कर दिया
07:16जिससे मोखा पोर्ट उनके हाथ से निकल गया
07:20मोखा पोर्ट के बाद हुटी विद्रोहियों ने लाल सागर के एक एहन द्वीप पर भी कबजा कर लिया
07:25जिससे बाबल मंदेब पर हुटी का सीधा नियंतरन स्थापित हो गया
07:30और इसके बाद दावा है कि हुटी लड़ाकों ने सौधी अरब के दक्षणी शहरों अभा और खमिस मुशायत में हवाई
07:39हमले किये
07:39लेकिन इतना कुछ होने के बाद भी सौधी अरब ने हुटी के खिलाफ बड़े हमले नहीं किये
07:45कुछ जगों पर उसने ऐस्ट्राइक जरूर की लेकिन हुटी का दावा है कि ये ऐस्ट्राइक उसकी स्थिती को बदलने में
07:51नाकाम रही
07:51और इसलिए आज ये समझना जरूरी है कि इस युद्ध में सौधी अरब की परिशानी क्या है
07:57लेकिन उससे पहले आप इन तस्वीरों को जरा देखे
08:28लेकिन उससे पहले आप इन तस्वीरों को जरूरी है
09:10पूते विद्रोहियों के हमले के बाद सौधी अरब ने अपनी इस्ट वेस्ट ओयल पाइपलाइन को बंद कर दिया है
09:15जो बारसो किलोमीटर लंबी है और जो फारस की खाड़ी को लाल सागर से जूडती
09:19जब स्ट्रेट ओफ हॉर्मूस बंद हुआ तब इसी पाइपलाइन के रास्ते सौधी अरब ने अपने तेल निर्यात को जारी रखा
09:26और उसकी अर्थ्विवस्था चलती रहे
09:28अगर आप इस नक्षे को देखेंगे तो हॉर्मूस बंद होने के बाद भी सौधी अरब मिसर की सुमेद पाइपलाइन और
09:37सूज कनाल के रास्ते योरोप में अपना कच्चा तेल भेज रहा था
09:41और बाबल मन्देब के रास्ते एश्या के देशों को कच्चे तेल का निर्यात कर रहा था लेकिन अब बाबल मन्देब
09:48पर हूती लड़ाकों के कबजे के बाद ये निर्यात पूरी तरह ठप हो सकता है और इसका असर भी दिखने
09:53लगा है
09:54केपलर के मुताबिक जून में सौधी अरब एश्या को करीब 34 लाख बैरल प्रति दिन तेल भेज रहा था जो
10:02अगस्त में घटकर केवल 1,28,000 बैरल प्रति दिन रह गया
10:06और अब ये और कम हो सकता है या या आपूरती पूरी तरीके से रुक भी सकती है क्योंकि बाबल
10:12मंदेब पर हूती लड़ाकों का कबजा है
10:14यानि मौजूदा स्थिती ये है कि जिस ट्रेट ओफ और्मूज से दुनिया का 20% कच्छा तेल गुजरता था वो
10:22भी बंद है
10:22और जिस बाबल मंदेब से दुनिया का 12% कच्छा तेल गुजरता था उसे भी इरान के प्रोक्सी हूती ने
10:30बंद कर दिया है
10:31और यहां ये भी समझे है कि हूती के लड़ाकों को रोकना मुश्किल क्यूं है।
10:35हूती के लड़ाके इस युद में human wave tactics की रणनीती अपना रहे हैं जिन्हें आप समुद्र की लहरों जैसा
10:42मान सकते हैं।
10:44जैसे एक लहर आती है, किनारे से टकराती है, उसके तूटते ही दूसरी बड़ी लहर आ जाती है।
10:51ठीक वैसा ही हूती के लड़ाके भी कर रहे हैं।
10:54सबसे पहले हूती अपने 50-100 लड़ाकों के एक ग्रूप को सीधे सामने वाली सेना की चौकियों पर हमला करने
11:01के लिए भेज देता है।
11:02और इनका मकसद जीतना नहीं, बलकि सामने वाली सेना को उलझाना और उन पर अंधा धुन्द फाइरिंग करवाना होता है।
11:10जैसे ही पहली लहर के लड़ाके मारे जाते हैं या घायल होते हैं, हूती तुरंट पीछे से 100 लड़ाकों की
11:17दूसरी लहर भीज देता है।
11:19जब तक विरोधी सेना संभलती है, तीसरी, चौथी लहरे आ जाती है।
11:24और हूती लड़ाकों की ये खतार अंतहीन लगती है और ऐसा क्यूं किया जाता है, वो भी समझे है।
11:31जब सेंकडों लड़ाके एक साथ दुश्मन देश की सेना की तरफ दौड रहे हों, तो मशीन गन लगातार चलती हैं
11:38और इसी दौरान एक समय ऐसा भी आता है।
11:40जब सामने वाली सेना की बंदू के गर्म होकर बंद होने लगती हैं, जाम होने लगती हैं, उनकी गोलियों का
11:46स्टौक खत्म होने लगता है।
11:48इसी चीज़ का हूती विद्रोही फाइदा उठाते हैं और सामने वाली सेना से उसके नियंतरण के इलाके छीन लेते हैं
11:55और अभी यमन में भी यही हो रहा है
11:57अब आप के समझें कि सौधी अरब हूती विद्रोहीं के सामने इतना लाचार और बेबस क्यों दिख रहा है
12:03पहला कारण है अकेले पड़ जाना
12:06अमेरिका ने साफ शब्दों में कहा है कि वो हूती विद्रोहीं पर सीधे जमीनी या बड़े हमले करने का इरादन
12:11नहीं रखता
12:12जबकि तुर्किय और पाकिस्तान ने भी मक्का समझोते के तहट सौधी अरब की रक्षा के लिए अपनी सेनाएं भेजने से
12:18इंकार कर दिया है
12:20दूसरा सौधी अरब के पास महेंगे लड़ा को विमान, टैंक और पेट्रियोट जैसी मिसाइल डिफेंस सिस्टम है
12:25लेकिन हूती इरान की तरह बेहत सस्ते ड्रोन और बिलिस्टिक मिसाइलों का इस्तमाल करता है
12:31ऐसे में सौधी अरब के लिए लाखूं डॉलर की एक पेट्रियोट मिसाइल से हूती के कुछ हजार डॉलर के ड्रोन
12:38को गिराना आर्थिक रूप से आत्म घाती साबित हो रहा है
12:42और तीसरा हूती सीधे सामने आकर लड़ने के बजाए सौधी अरब के तेल के कुओं और अरामकों की रिफाइनरियों को
12:50निशाना बना रहा है
12:51इससे सौधी अरब की अर्थवेवस्था को सीधा नुकसान पहुंच रहा है और वो जवाबी का रवाई करने से हिचक रहा
12:57है
12:57यानि सौधी अरब नहीं चाहता कि हूती उसके आर्थिक धांचों को निशाना बनाए और इसके कारण क्राउं प्रिंस मुहम्मद बिन
13:06सल्मान का प्रोजेक्ट 2030 खतरे में पड़ जाए
13:10इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश है सौधी अरब की तेल पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करना और उसकी अर्थ
13:17विवस्था को एक आधुनिक और वैश्विक बिजनस हम के रूप में विक्सित करना
13:22जैसे नियोम सिटी यानि ऐसा शहर बनाना जो सो प्रतिशत रिन्यूबल एनर्जी पर चले
13:28लाल सागर के द्वीपों पर मालदीव की तरज पर लक्जिरी रिजॉर्ट्स और टूरिस्ट हब बनाना
13:35धार्मिक पुलिस की शक्तियों को खत्म करना
13:39महिलाओं को ज्यादा अधिकार देना परेटन के लिए सौधी अरब को विश्व के लिए खोलना
13:44अब अगर सौधी अरब हूती के साथ युद्ध में उलजता है
13:49तो मुहम्मद बिन सल्मान का ये मिशन खत्रे में पड़ जाएगा
13:52और इसलिए सौधी अरब यमन में हूती के खिलाफ सीधा सेन्य मुर्चा खोलने के लिए सहज नहीं दिखता
13:58यहाँ ये भी समझे कि हूती की सौधी अरब से लड़ाई क्या है
14:02और जिस सौधी अरब में मक्का और मदीना जैसे इसलाम धर्न के सबसे पवित्र धार्मिक शहर है
14:08उस सौधी अरब से हूती के इन मुस्लिम लड़ाकों की क्या दुश्मनी
14:14हूती का मतलब उन शिया मुसल्मानों से है जो यमन के उत्तरी पहाड़ों में रहते है
14:21इन्हें जैदी शिया भी कहा जाता है जो यमन की कुल आबादी का 35 से 40 प्रतिशत है
14:281990 के दशक में जब यमन सौधी अरब की वहाबी विचारधारा से प्रभावित हो रहा था
14:35तब इन्हीं जैदी शिया मुसल्मानों ने अपनी संस्कृती इतिहास और धार्मिक पहचान को बचाने के लिए
14:42एक आंदोलन शुरू किया जिसका नाम था शबाब अल मुअमिनीन यानि वो युवा जो अल्लाह और उसके नियमों पर सच्चा
14:52इमान रखते है
14:54यह अंदोलन हुसेन बदरुद्दीन अलहूती ने शुरू किया था और क्यूंकि उनका सनेम हूती था इसलिए उन्हें मानने वाले लोगों
15:03ने बाद में इस संगठन को हूती कहना शुरू कर दिया और इसकी शुरूआत 2003 में हुई
15:102003 में जब अमेरिका ने इराक पर हमला किया तो हुसेन अलहूती अमेरिका और इस्रेयल के खिलाफ हो गए
15:17और उन्होंने यमन के तत्कालीन राश्रपती अली अब्दुल्ला सालेह जो सौधी अरब और अमेरिका के दोस्त माने जाते थे उनके
15:25खिलाफ बगावत कर दी
15:27इसी वज़े से 2004 में यमन की सेना ने हुसेन अलहूती को मार गिराया और इसके बाद इस आंदोलन ने
15:35हथियार उठा लिये अपने मारे गए नेता के नाम पर खुद को हूती कहना शुरू कर दिया
15:40और जानते हूती और सौधी अरब की लड़ाई किया है आज सौधी अरब हूती को आतकवादी संगठन मानता है लेकिन
15:48ये हूती बना था सौधी अरब की वहाबी विचार धारा के खिलाफ वही विचार धारा है जिसमें सुन्नी सूफियों और
15:55शिया मुसल्मानों को भटके
15:57हुए या काफिर बुलाए गया जिस विचार धारा में ये माना गया कि
16:01किसी सूफी संथ की मजार पर जाना या पेगंबर के परिवार के
16:06सदस्यों की कबरों का सम्मान करना पाप है जब सौधी अरब
16:10में वहाबी टाकत में आये तो उन्होंने मक्का और मदीना
16:14में पेगंबर मुहम्मद साहब के साथियों उनकी पत्नी और परिवार की
16:19सदियों पुरानी आधिहा से कबरों और मजारों को बुल्डोजर से तुलवा दिया
16:23जिससे सौधी अरब के खिलाफ नाराज़गी बढ़ गए यहीं नहीं इस वहाबी
16:30विचारधारा से प्रेरित होकर अल-काइदा और आईसिस जैसे संगठन
16:34बने और आज होती कि तमाम विद्रोही यही कहते हैं कि सौधी अरब
16:41उन्हें आतंकी संगठन मानता है जबकि सौधी अरब खुद कटर वहाबी
16:45विचारधारा से जुड़ा रहा है और ऐसा क्यूं कहा जाता है वो भी देखिए
16:51सत्रसो के दशक में आज का सौधी अरब जैसा कोई देश नहीं था उस वक्त पूरा अरब
16:56छोटे-छोटे कभीलों में बटा हुआ था जो आपस में लड़ते रहते थे
17:00मक्का और मदीना पर उस्मानी सामराज का नियंतरन था और सौधी अरब के बिलकुल बीच में एक सूखा, पत्रीला, बेहत
17:10पिछड़ा इलाका था जिसे नज़्ड कहा जाता था
17:14इसी इलाके में दो लोग रहते थे जिनकी मुलाकात ने इतिहास रच दिया
17:21इनमें पहले थे मुहम्मद इबन अब्द अलवहाब जो एक धार्मिक स्कॉलर या मौलवी थे
17:28इनका मानना था कि अरब के मुसल्मान असली इसलाम भूल चुके हैं और वो सूफियों की मजारों पर जाकर या
17:35पेडों पत्थरों का सम्मान करके पाप कर रहे हैं
17:38दूसरे थे मुहम्मद इबन सौद जो नजड इलाके के एक छोटे से कस्वे दिरिया के अमीर थे उनके पास सेना
17:47और ताकत तो थी लेकिन वो पूरे अरब पर राज करना चाहते थे
17:51इसके लिए उन्हें कैसी बड़ी धार में एक वज़े चाहिए थी जिसके नाम पर वो दूसरे कबीलों पर हमला कर
17:56सके और अपनी सत्ता को सही ठहरा सके
17:58जब अल वहाब को उनके गाउं से निकाला गया तो वो शरण मांगते हुए मुहम्मद बिन सौद के पास पहुँचे
18:06और इसी दौरान ये समझोता हुआ कि मुहम्मद बिन सौद वहाबी विचारधारा को आगे बढ़ाएंगे
18:12और बदले में अल वहाब एक फत्वा जारी करके ये घोशना कर देंगे कि मुहम्मद बिन सौद और उनका परिवार
18:21ही इस पूरी धर्ती का असली और वैद शासके
18:24और इसी के बद सौद परिवार कई इलाके जीतता गया और बाद में 1932 में सौदी अरब नाम का देश
18:32बना और आज यही सौद परिवार वहां की सक्ता में है
18:36आगे बढ़ते हैं और आपको ये बताते हैं कि ब्रिक्स समिट से भारत को हासिल क्या हुआ
18:42और भारत ने कैसे ब्रिक्स की कुटिनी तिक परीक्षा को पास किया है
18:47लेकिन उससे पहले आप ये देखिए कि ब्रिक्स समिट के खत्म होने के बाद
18:51सोशल मीडिया पर कई unseen और candid वीडियो वाइरल हो रहे हैं
18:55और इन वीडियोज में दुनिया के बड़े नेताओं के बीच औपचारिक बैटकों से हट कर
19:00कुछ हलके फुलके और दिल्चस पल कैमरे में कैमरे में कैद हुए है
19:04जैसे इन तस्वीरों में प्रधानमंत्री मोदी, चीन के राष्ट्रपती शी जिन पिंग, रूस के राष्ट्रपती व्लादिमिर पुतिन के साथ
19:11बेहद अनुपचारिक अंदाज में बैटकर बाचीत और चाय पर चर्चा करते हुए नजर आ रहे हैं
19:17और यह तमाम तस्वीरें बताती हैं कि इस समिट में गंभीर मुद्दों और भाषणों से परे, परदे के पीछे इन
19:24वैश्मिक नेताओं के बीच काफी दोस्ताना और सहज माहौल था
20:03इस बार का ब्रिक्स समिट भारत के लिए सिर्फ एक सम्मेलन नहीं बलकि एक बड़ी कूटनीतिक परीक्षा थी
20:09और भारत उसमें काफी हद तक सफल रहा
20:11मुख्य रूप से भारत के सामने पांच बड़ी चुनोतिया थी
20:15पहला ब्रिक्स के अंदर अलग-अलग देशों के बीच मतभेद थे
20:19दूसरा इरान और यूए की बीच तनाव था
20:22तीसरा रूस और इरान पश्चिमी देशों के खिलाफ ज्यादा कड़ा रुख चाहते थे
20:28चौथा चीन ब्रिक्स को अमेरिका के मुकाबले एक मजबूत धड़े के रूप में देख रहा था
20:33और पांचवा इस सब के बीच भारत चाहता था कि ब्रिक्स पश्चिम विरूधी नहीं
20:39बलकि ग्लोबल साउथ देशों की आवाज बने और ऐसा करना कूगनितिक रूप से आसान नहीं था
20:45और अंतराश्च्रे मीडिया लगातार यही लिख रहा था कि भारत जॉइन डेक्लेरेशन के मोचे पर नाकाम रह सकता है
20:52लेकिन इन तमाम बातों के बावजूर भारत इसमें सफल रहा और इसलिए इस बार का ब्रिक्स पूरी दुनिया के लिए
20:59सबसे बड़ी हेडलाइन बना
21:01यह उपलब्धी इसले भी बड़ी थी क्योंकि इरान और युएई के बीच युद्ध को लेकर गंभीर मतभेद थे
21:07और इन मतभेदों के कारण महिने में जब ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों के बैठक हुई थी तब उसमें सैयुक्त बायान
21:14नहीं आ पाया था
21:15लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल गए इरान और युएई दोनों देशों ने मिटल इस्ट में सैयम दिखाने की
21:22अपील को स्वीकार किया
21:23जॉइंट डेक्लेरेशन पर अपनी सहमती जताई और इरान के रश्टपती मसूर पजेश्किन और युएई के क्राउन प्रिंस अल नहयान की
21:31दिल्ली में मुलाकात भी हुई
21:33यानि भारत ने सिर्फ ब्रिक्स के वीतर सहमती नहीं बनाई बलकि युद्ध में आमने सामने आये दो देशों के बीच
21:39बाचीत के लिए दिल्ली को मंच बना दिया
21:41इससे दुनिया को ये कुपनीतिक संदेश भी गया कि भारत खुद किसी एक पक्ष में खड़े हुए बिना भी बाचीत
21:48का रास्ता खोल सकता है
21:50जॉइंट डेकलरेशन पर चीन, रूस, ब्रजील और दक्षन अफरीका जैसे पुराने देशों के सहमती जताने का सीधा मतलब ये था
21:58कि ब्रिक्स अभी भी काम करने वाला और प्रासंगिक संगठन है
22:04तीसरा और सबसे बड़ा बिंदू ये है कि सहयुक्त बयान में पहलगाम के आतंकी हमले की निंदा की गई
22:11और ये भी तब हुआ जब ब्रिक्स में चीन भी है और चीन को पाकिस्तान का करीबी माना जाता है
22:17भारत ऐसा इसलिए भी कर पाया क्योंकि हमने इसे केवल भारत और पाकिस्तान का मुद्दा नहीं बनने दिया
22:22हमने इसे ग्लोबल टेर्रिजम के रूप में पेश किया यानि भारत का संदेश था कि आतंकवाद चाहिए कहीं से भी
22:29हो उसकी निंदा होनी चाहिए
22:31और उसके समर्तकों को जवाब देह बनाया जाना चाहिए
22:34चौथा भारत ने ब्रिक्स को अमेरिका विरोधी ब्लॉक दिखने या बनने से भी रोका
22:40हमने संयुक्त बयान में इस भावना को डाला कि ब्रिक्स देश पश्चिमी देशों के खिलाव नहीं है बलकि ग्लोबल साउथ
22:47देशों के पक्ष में
22:48और आखर में इसी समिट के दौरान प्रधान मंत्री मूदी ने 15 द्विपक्षिय बैटकों में हिस्सा लिया
22:57और इनमें भी राष्ट्रपती शी जिन पिंग चीन के राष्ट्रपती पुतिन रोस के और इरान के राष्ट्रपती मसूद पजश्किन के
23:05साथ हुईद विपक्षिय मुलाकात से भारत को काफी कुछ हासिल हुआ
23:08और इसलिए आज इस सम्मेलन को भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है
23:25भारत ने ब्रिक्स के मन से मित्रता, सहभागिता और सहयोग को आगे बढ़ाया है
24:00अब इस सवाल पर आते हैं कि जब भी भारत किसी बड़े वैश्विक मंच की बेजबानी करता है
24:05तो विदेशी मेडिया जान वूज कर ऐसी तस्मीरें क्यों चुनता है जो भारत को केवल एक गरीब या विकास शील
24:12देश के रूप में दिखाएं
24:13जी ट्वेंटी की तरह इस बार भी कई अंतराश्य न्यूज एजनसी और मीडिया संस्थानों ने ब्रिक्स समिट की कवरिज करते
24:20हुए ऐसी तस्वीरों का इस्तमाल किया
24:21जिनमें बैक्ग्राउंड में प्रधानबंतरी मोदी और ब्रिक्स सम्मेलन का एक विशाल होर्डिंग दिख रहा है और उसके ठीक आगे से
24:28साइकल सवार गुजर रहा है
24:30अगर आप इस ग्राफिक्स को देखेंगे तो अल जज़ीरा, दे न्यू यॉक टाइम्स, फ्रांस 24, असोशियेटेड प्रेस, ब्लूमबर्ग, यहां तक
24:39की धाका ट्रिब्यून में भी पश्चिमी मीडिया के हवाले से खास तौर पर इसी तस्वीर को प्रकाशित किया गय
24:46जब इस बार के ब्रिक्स समिट की कई आधूनिक तस्वीरे मौजूद थी और भारत मंडपम से ऐसी भव्य तस्वीरे आई
24:53थी जिने अंतराश्ये मीडिया संस्थान चाप सकते थे
24:57लेकिन इनके द्वारा खास तौर पर इसी एक तस्वीर को चुना गया जो वैश्विक राजनीती में भारत के बढ़ते कद
25:04को कम करके आखती है
25:05और ऐसा नहीं है कि ये तस्वीर बिना किसी उद्देश्य के इस्तेमाल की गई होगी
25:09इसके पीछे बढ़ा उद्देश यही रहा होगा कि दुनिया ब्रिक्स की मेजबानी कर रहे है भारत की आर्थिक हालत उसकी
25:15गरीबी पर भी गौर करे
25:16और ये पश्चिमी मेडिया ने पहली बार नहीं किया है
25:192023 में जब भारत ने G20 समिट के मेजबानी की थी तब भी इसी तरह की तस्मीरे अंतरराश्य मीडिया संस्थानों
25:27निच्छापी थी
25:28जिनमें G20 के बड़ी-बड़े होडिंग्स के सामने से एक साइकल सवार गुजर रहा था
25:34और ठीक उसी पैटरन को इस बार भी पश्चिमी मीडिया ने दोराया
25:38और यहां बात के वल इन सम्मेलनों की मेजबानी की नहीं है
25:432013 जब भारत का अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह की कक्षा में स्थापित हुआ
25:47तब दे न्यू यॉक टाइम्स में भी एक ऐसा ही काटून प्रकाशित हुआ था
25:51तब इसमें एक भव्य कमरा दिखाया गया था जिस पर एलीट स्पेस क्लब लिखा हुआ था
25:56और इस कमरे के अंदर सूट पूट और टाइप पहने हुए कुछ पश्यमी देशों के वहग्यानिक बैठे थे
26:01जो हाथ में अख़बार लिए गंभीर दिख रहे थे
26:03जबकि कमरे के बाहर एक पारंपरिक भारतिय किसान हाथ में गाय की रसी पकड़े हुए
26:09उस एलीट क्लब का धर्वाजा खट-खटा रहा था और ये काटून उस वक्त भारत के प्रती एक मानसिक्ता को
26:15दिखा रहा था
26:16और आज भी ब्रिक्स को लेकर जो तस्वीरें इस्तमाल हुई वो भी इसी का हिस्सा दिखती है
26:22हम मानते ही कि भारत पूरी तर परफेक्ट नहीं है और हमारे देश में बुनियादी तोर पर कई कमिया है
26:28लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि भारत के लिए जान भूज कर ऐसी तस्वीरें चुनी जाएं जो उसके सामर्थे
26:33को कम करके आगती हुई
26:35कड़वा सच तो ये है कि भारत ने इस पूर्वागरे को कई बार जहला है और हमारी ये विज्वल ट्रोलिंग
26:40कई दशकों से हो रही है
26:4321 नवंबर 1963 को जब भारत ने थुमबा से अपना पहला साउंडिंग रॉकेट लॉंच किया था
26:51तब रॉकेट के नोस कोन को साइकल के पीछे क्यारियर पर बांध कर ले जाया गया था
26:56और इसके कुछ समय बाद जब भारत के पहले कम्यूनिकेशन साटलाइट आपल का परीक्षण होना था
27:02तो उसे एक बैल गाड़ी पर रखकर ले जाया गया था
27:05और ये इसलिए हुआ था क्यूंकि साटलाइट के मिटल कंटेनर के कारण गाड़ियों के सिगनल में दिक्कत आ रही थी
27:11और नॉन मेगनेटिक वीकल के रूप में उस वक्त बैल गाड़ी का इस्तमाल हुआ था
27:16लेकिन तब भी पश्चिमी मीडिया ने भारत का मजाक बनाया और ये कहा कि जो देश अपने नागरिकों को ठीक
27:22से खाना नहीं खिला सकता
27:23और जहां रॉकेट और साटलाइट धूने के लिए भी साइकल बैल गाड़ी का इस्तमाल होता है वो अंतरिक्ष में जाने
27:29के ख्वाब देख रहा है
27:30लेकिन इस मजाक और अपमान के बावजूद हमने अपना वो सपना पूरा किया और आज भारत दुनिया की बड़ी अंतरिक्ष
27:38शक्ति है
28:01जब भारत में ब्रिक्ष जैसा बड़ा अंतराश्रे सम्मेलन हो रहा था और दुनिया की नजरें दिल्ली पर थी
28:06तब खबरे नेताओं की बैटकों ब्रिक्ष देशों की बीच हुए समझोतों और भारत की कूटिनी तिक सफलता पर होनी चाहिए
28:14थी
28:14लेकिन हाबारे सोशल मीडिया ने एक दूसरी ही खबर खोज लिए और ये खबर भी सोशल मीडिया पर होने वाली
28:20विज्वल ट्रोलिंग के बारे में बताती है
28:23सोशल मीडिया पर कई लोगों ने भारत के राष्ट्रे सुरक्षा सलाकार अजीट डोवाल और विदेश मंत्राले के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल
28:30की कुछ तस्मीरों को साजा करते हुए ये लिखा
28:32कि जब इतना बड़ा सम्मेलन हो रहा है वहाँ कई देशों के शीर्षनेता मौझूद हूँ तब भारती अधिकारियों को बिना
28:38खाना खाये नहीं भेजना चाहिए
28:39कुछ लोगों ने रंधीर जैसवाल पर व्यक्तिगा टिपणी करते हुए ये तक लिखा कि वो इस बैठक में शायद खाना
28:45खाने आये था
28:45लेकिन जानते हैं इन वीडियोज की पूरी और असली सिपचाई क्या है
28:50हकीकत तो ये है कि इन वीडियोज को सामान ने वीडियोज की तुलना में तीन गुना तेज फास्ट फॉवर्ड किया
28:55गया था
28:56और ऐसा इसलिए हुआ ताकि रंधीर जैसवाल या राश्ट्रे सुरक्षा सलाकार अजीर डोवाल बैठक में सिर्फ खाना खाते हुए ही
29:03दिखाई दे
29:04और ये सिर्फ ट्रोलिंग के लिए नहीं हुआ ये हुआ इंगेजमेंट फार्मिंग के लिए
29:09यानि कुछ लोगों ने व्यूज पाने के लिए असली विडियो से चेर चाड़ की बाद में इनहीं के आधार पर
29:14भारती अधिकारियों का मजाक उड़ाय जाने लगा
29:16जबकि ऐसे सम्मेलन और बैटकों में हिस्सा लेने वाले हर सदस्य के लिए उसकी टेबल पर ऐसा खाना या स्नाक्स
29:23रखे जाते हैं जो स्ट्रेस इटिंग के लिए होते हैं
29:27इसके अलाबा ब्रिक सम्मेलन कोई छूटा कारिकरम नहीं था
29:29कई घंटे तक चलने वाले ऐसे कारिकरमों में अधिकारी लगातार काम करते हैं
29:34बैटकों में रहते हैं दूसरे देशों के अधिकारियों के साथ बाचीत करते हैं
29:39और इसे में बीच में कुछ खाना कोई बड़ी बात नहीं है
29:41लेकिन आजकल हमारे देश में वीडियो के साथ छेड़ छाड़ करके किसी का मजाक उड़ाना सामान्य हो गया
29:47और दुख की बात यह है कि इस तरह की ट्रोलिंग में कई लोग पूरा सच जाने बिना शामिल भी
29:53हो जाते हैं
29:54और इस मामले में भी यही हुआ है
30:22खेर इस बार के ब्रिक समिट में प्रधान मंतरी मोदी और राश्रुपती शी जिन पिंग के बीट
30:26साथ साल बार भारत में पहली बार द्विपक्षी अवारता हुई
30:29और अब चीन का सरकारी मीडिया इस मुलाकात को और इस समिट को भारत और चीन के रिष्टों के लिए
30:35नया अध्याय मान रहा है
30:38खासकर ये बात चीन के सरकारी मीडिया में लिखी जा रही है कि अगर भारत और चीन सहयोगी बनकर एक
30:43दूसरे के साथ काम करें
30:45तो दोनों देश दुनिया की बड़ी ताकत बन सकते हैं
30:49जैसे चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने ये लिखा
30:52कि भारत और चीन ब्रिक्स का डिजिटल पेमेंट सिस्टम ला सकते हैं
30:56क्योंकि भारत के पास UPI कानुभव है और चीन के पास Digital Payment Fintech और Alipay, WeChat Pay जैसे Technology
31:05Infrastructure की ताकत है
31:06इसी तरहे दोनों देश मिलकर ब्रिक्स देशों में क्रिशी और उर्जा के क्षेतर में सहयोग कर सकते हैं
31:12इसके अलावा दोनों देश मिलकर ऐसी Technology और उत्पादन व्यवस्था तयार कर सकते हैं जिसका फाइदा एशिया, आफरिका और दूसरे
31:19विकास शील इलाकों में देशों को मिले
31:23और यही वजह है कि इस खबर के साथ Global Times ने इस तस्वीर को प्रकाशित किया जिसमें भारत और
31:31चीन की केतली से ब्रिक्स के पौधे में पानी डाला जा रहा है
31:34यानि दोनों देशों के बीद सहयोग का सुनहरा मौका माना जा रहा है
32:02चीन के राश्ट्रपती शी जिन पिंग के भारत दोरे के बीच इस बात की भी काफी चर्चा हुई कि उनकी
32:07गाड़ी को दिल्ली में काले कपड़े से क्यूं ढखका रखा गया था
32:10इस कार का नाम है होंकी N701 जिसे चीन की होंकी कमपनी ने बनाया है और इसका मतलब होता है
32:18लाल जंडा या रेड बैनर
32:21दिल्ली पहुंचने से पहले जब इस कार को हवाई अड़े पर ले जाया जा रहा था तब इसे पूरी तरह
32:26काले कपड़ों से ढखका गया था
32:29और अभी यही देखकर कई लोग ऐसा पूछ रहे हैं कि क्या किसी खत्रे की वज़े से राश्रुपती शी जिन
32:35पिंग की सरकारी गाड़ी को भारत में काले कपड़ों से ढखा गया था
32:39तो इसका जवाब यह है कि ऐसा किसी खत्रे को देखते हुए नहीं किया गया था ऐसा प्रोटोकॉल के तहत
32:45होता है और इसके पीछे चार वज़ें बताई जाती है जिन में पहली वज़े है सुरक्षा
32:50चीन अपने रश्रपती की कार को समवेदन शील बानता है और इसलिए यात्रा के दौरान कार को लोगों की नजरों
32:57से दूर रखना सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होता है
33:01दूसरी वज़े है कार की पहचान और जानकारी छिपाना
33:04इस तरह की गाड़ियों की तक्नीकी और सुरक्षा व्यवस्था सारजनिक नहीं की जाती
33:09इसलिए यात्रा के दौरान उन्हें ढख कर रखने से उनकी बनावट और सुरक्षा से जुनी जानकारी को अनावश्यक रूप से
33:17देखने से रुका जाता है
33:19तीसरी वज़ा है कार को सुरक्षित रखना
33:22यानि कार को धूल, बारिश, मौसम, खरूच, सामान या दूसरी चीजों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए काले
33:29कपड़े से ढख देना
33:30और चौती वज़े है, एक जगे से दूसरी जगे ले जाना जो सामान ये ववस्था का हिस्सा होता है
33:36और दूसरे देशों में भी ऐसा हुआ है
33:39और इसलिए ये कहना कि राश्यपती शी जनपिंग की गाड़ी को दिल्ली में खत्रा था
33:43इसलिए उसे काले कपड़े से ढखा गया, ये सही नहीं होगा
33:47अब आपको ये बताते हैं कि जिस ब्रिटन ने, ग्रेट ब्रिटन ने भारत का विभाजन किया
33:54कैसे वही आज खुद विभाजन की कगाड़ पर खड़ा है
33:58संभवे की आने वाले दिनों में United Kingdom पूरी तरह खत्म हो जाए
34:02और दुनिया के नक्षे पर केवल England का नाम रहे
34:05बहुत सारे लोग इससे समय का चक्र या वक्त का हिसाब कह रहे है
34:09क्योंकि इस वक्त United Kingdom के भीतर अलगाव और आजादी की राजनीती बहत मजबूत हो गई
34:17United Kingdom चार देशों England, Scotland, Wales और उत्तरी Ireland से मिलकर बना है
34:24और मुझूदा विवाद ये है कि England को छोड़कर बाकी तीनों देशों में पहली बार ऐसी राजनीतिक पार्टियों की सरकारे
34:32हैं
34:32जो ब्रिटन से अलग होना चाहती है
34:35और इसी चीज़ को देखते हुए आज Wales की राजधानी कार्डिफ में एक एतिहासिक बैठक हुई है
34:40इस समिट में स्कॉटलन के फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्वीनी, Wales के फर्स्ट मिनिस्टर रून अप इयोवत
34:48और उत्तरी Ireland की नेता मिशेल ओनील शामिल हुए
34:52और इन तीनों नेताओं ने एक साजहा घोशना पत्र यानी जॉन डेकलरेशन पर हस्ताक्षर किये
34:57इसमें ब्रिटन सरकार से मांग की गई है कि वो इन देशों को अपने भविश्य का फैसला करने
35:04और आजादी के लिए जनमत संग रह कराने का अधिकार दे
35:09United Kingdom 319 वर्ष पहले 1707 में बना था
35:14जब Kingdom of Scotland और Kingdom of England और Wales एक संग बनाने पर सहमत हुए थे
35:20बाद में 225 साल पहले इसमें Ireland भी शामिल हुआ
35:25और 104 साल पहले Ireland का एक बड़ा हिस्सा इस से अलग हो गया
35:29पिछले 104 सालों में United Kingdom का नक्षा एक बार नहीं बदला
35:34लेकिन अब England को छोड़ कर बाकी देश इस United Kingdom से निकलना चाहते हैं
35:41और अगर ऐसा हो गया तो United Kingdom केवल England तक सीमत हो जाएगा
35:45अगर क्षेतर फल के हिसाब से देखें तो United Kingdom का सबसे बड़ा हिस्सा
35:49यानि 33 प्रतिशत क्षेतर फल England में आता है
35:53विभाजन की सूरत में यही 33 प्रतिशत क्षेतर फल उसके पास रह जाएगा
35:57जहां 84 प्रतिशत आबादी रहती है
36:00अगर दुनिया के कुल क्षेतर फल में देखें तो अभी United Kingdom की हिस्सेदारी दशमलव एक छे प्रतिशत है
36:07लेकिन विभाजन की सूरत में यही क्षेतर फल जशमलव शून्य नौ प्रतिशत रह जाएगा
36:12और सूचिए यह वही United Kingdom या Great Britain है
36:16जिसने भारत समेट दुनिया के कई देशों को अपना गुलाम बनाया
36:20एक जमाना था जब कहा जाता था कि
36:24ब्रिटिन के सामराज्य का सूरे कभी अस्त नहीं होता
36:28लगभग सौ देशों पर उसने राज किया था
36:31यानि किसी न किसी ऐसे देश में सूरज आसमान में रहता था
36:36अस्त नहीं होता था इसलिए ऐसा कहा जाता था
36:3823 प्रतिशत आबादी ब्रिटिश हुकूमत के अधीन रही
36:41दुनिया के 24 प्रतिशत 6 तरफल पर कभी ब्रिटिश हुकूमत का शासन रहा
36:46लेकिन आज ब्रिटिन की हालत ये है कि उसने भारत, फिलिस्तीन, साइप्रिस और आईरलंड का बटवारा किया
36:52आज यही उनाइटेड किंग्डम बंटवारे की दहलीज पर खड़ा है
36:56अब बात करेंगे गुरुग्राम की जहां पर गुंडागर्दी की एक अलग कहानी सामने आई है
37:01यहां पर एक कारचालक ने महिला बाइक राइडर को जान भूज कर टक्कर मारी
37:06और यह दिखाया जैसे अंजाने में आक्सिडेंट हो गया
37:09लेकिन उस कारचालक को यह नहीं पता था कि महिला बाइक राइडर ने अपनी बाइक में क्यामरा लगाया था
37:15उस क्यामरे में सब कुछ कैद हो गया उस कारचालक की हरकते और जान भूज कर टक्कर मारना
37:21सबसे पहले हम आपको वीडियो दिखाते हैं जिसमें कारचालक की छेट चार, गुंडा गर्दी और फिर जान भूज कर टक्कर
37:28मारना साफ साफ दिख रहा है
37:29पूरे वीडियो में पीरत लड़की शिवानी चोहान ने खुद ही सारी कहानी बताई
37:34वो खुद बता रही है कैसे एक सफेद कार चला रहे लड़के ने पहले तो छेट चार की, बाइक रोकने
37:41के लिए कहा
37:41जब लड़की ने बाइक आगे भगाई तो इस बात से कारसवार भड़क गया, उसने जान बूज कर उन्हें टक्कर मार
37:49दी
37:51पीरेच छिवानी ने शुरुआत में इस मामले के शिकायत दर्ज नहीं करवाई थी, उन्होंने सोशल मीडिया पर कार चलाने वाले
37:57इन लड़कों का वीडियो पोस्ट किया था, पर इस वीडियो के वाइरल होने के बाद गुरुगराम पुलिस ने खुद ही
38:02मामला दर्ज क
38:04पुलिस ने CC TV फुटिज के आधार पर अपराद में शामिल कार की पहचान कर ली, पुलिस के मताबिक ये
38:09कार मनीश नाम के एक शक्स की जिसने अपने दोस्त कल्यान बैसला को ये कार कुछ दिनों के लिए दी
38:16थी, हमारी टीम ने जल्दी कल्यान बैसला को ढून निकाला, इ
38:32छेट-छाड के आरूपों पर उसने कहा कि वो उस लड़की से धीमे चलाने के लिए कह रहा था, अलकि
38:36जब उससे ये पूछा गया कि उसने लड़की को टकर क्यों मारी, तो उसने कहा कि टकर गलती से लगी,
38:41जब ये पूछा गया कि गलती से टकर लगी, तो उसने रुक कर म
38:45पदद क्यों नहीं की, माफी क्यों नहीं मांगी, तो इस सवाल पर उसने कुछ अलगी जवाब देना शुरू कर दिया.
39:30अब हम बात करेंगे पाकिस्तान की इंटरनाशनल बेज़ती की जो साल दर साल हो रही है और भारतिय टीम के
39:37हाथों हो रही है.
39:39एशन क्रिकेट काउंसिल के अध्याक्षवर पाकिस्तान के ग्रे मंत्री मोसन नकवी अपनी किस्मत में भारतियों से अपमानित होना लिखवा कर
39:45लाएं.
39:45कल दुबई इंटरनाशनल क्रिकेट स्टेडियम में विमिन्स टीम इंडिया ने एशिया कब फाइनल जीता और जीतने के बाद मोसन नकवी
39:54से ट्रोफी लेने से इंकार कर दिया.
39:56मोसन नकवी को पता तो था कि भारत की लड़कियां उन्हें सबक सिखा सकती हैं. इसके बावजूद वो मंच पर
40:01पहुँच गए. मोसन नकवी को लगा था कि मेंस टीम इंडिया भले ही उनसे ट्रोफी लेने नहीं पहुँची. लेकिन भारत
40:09की लड़कियां किसी से कम है क्य
40:11वो भी ट्रोफी लेने नहीं गए. भारतिय लड़कियों ने मंच पर जाने के बजाए अवार्ड सेर्मनी के दोरान हेड कोच
40:19अमोल मजूंगदार के पास जाकर जीत को सेलिवरेट करना सही समझा. हेड कोच ने इस जीत पर भारतिय लड़कियों की
40:25सराहना की. मतलब यह है क
40:27विमन्स टीम इंडिया ने चांपियन बनने की खुशी का सेलिवरेशन आपस में ही करना बहतर समझा. विमन्स टीम इंडिया जब
40:34नकवी से ट्रोफी नहीं ली तो वही हुआ जो करीब एक साल पहले हुआ था. मोसिन नकवी बेज़त होकर ट्रोफी
40:40लेकर भाग गया. और ऐ
40:57यह कितना बड़ा इत्फाक है कि मोसिन नकवी की बेज़ती का समय और जगय वही था जो पिछले साल था.
41:03अब बात 14 सितंबर यानी हिंदी दिवस की. हर साल 14 सितंबर आता है, हर साल वही पुरानी बातें दोराई
41:11जाती है, नारे लगाय जाते हैं, दीवारों वाले पूस्�
41:28अगर हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाशा है, अगर 52 करोड 83 लाख लोगों की यह
41:35मात्री भाशा है, तो फिर यह भाशा सिर्फ मनुरंज अंचुटकुलों और रील्स तक क्यों सिमट कर रह गई? जब कोई
41:42छातर क्वांटम फिजिक्स समझन
41:56होता है, इस सवाल का उत्तक पोजने से पहले आपको भारत में इस्रेल के राजदूर रुवय नजार का वीडियो दिखाते
42:03हैं, जो उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है, और हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी भाशी लोगों को हिंदी
42:09भाशा में ही शुब काम न
42:12नमस्ते बाहरत, मेरा नाम रुवनाजार है, मैं बाहरत मैं इस्रेल का रजदूत हूँ, जब मैं दो साल पहले बाहरत आया
42:21था, उस समाई मैंने हिंदी सिखनी शुरू की थी, आज दो साल बाद मैं आप सब ही को हिंदी दिवस
42:29के अफसर पर हर्दिक शुक्वन ये देना च
42:39समझ रही है, लेकिन बात इतनी भर नहीं है, इस्रेल के राजदूत ने हिंदी बे विडियो बना कर शुब कामनाएं
42:45दे दी, इंटिनेट पर 95 करोड भारतिया ओनलाइन आ गए, लेकिन क्या हिंदी अब ग्यान और AI की भाशा बनने
42:52के लिए तैयार है, जब इस्रेल के रा�
43:07AI की रिपोर्ट की अनुसार, इंटिनेट सर्च में हिंदी और क्षेत्रिय भाशाओं का मार्केट शेर पिंचानवे प्रतिशत से ज्यादा हो
43:14चुका है, यूट्यूब पर रेसिपी, न्यूज, एडुकेशन और टेक रिव्यू के 85 प्रतिशत दर्शक, ये कॉंटेंट हिं
43:43इंदी या क्षेत्रिय भाशा में देखना पसंद करते हैं।
44:01क्षेत्रिय भाशाओं को समझ कर जवाब देंगे। लेकिन यहाँ सबसे गंभीर सवाल ये पैदा होता है कि जब AI से
44:07हिंदी में सवाल पूछा जाएगा, तो क्या उसका डिजिटल डेटा बेस सही और वैग्यानिक जवाब दे पाएगा।
44:22खेज खबरें और रील्स। लेकिन जैसे ही कोई छात्र हिंदी में ढूनता है साइबर सेक्योरिटी, क्वांटम कंप्यूटिंग, अडवांच्ट मेडिसिन या
44:30मिसाल के तौर पर एकनॉमिक थियोरी, हिंदी इंटरनेट जवाब देने में हाफने लगता है।
44:36गूगल पर हिंदी में कॉंटेंट की मात्रा तो बढ़ गई है लेकिन क्वालिटी और क्रेडिबिलिटी का बहुत बढ़ा सुखा है।
44:42अगर एक गरीब झातर हिंदी माध्यम से पढ़ाई करके वैग्यानिक बनना चाहता है तो क्या उसे इंटरनेट पर लेटिस्ट रिसर्च
44:49हिंदी में मिलेगी।
45:12खत्रा नहीं, चिंता इस बात की भी करनी चाहिए कि क्या हिंदी ज्यान की भाषा बन पाएगी।
45:44गूबल, मेटा जैसी कंपनियों को अपने AI को हिंदी सिखाने के लिए शुद्ध हिंदी भाषियों की जरूरत है।
45:51डिजिटल मीडिया, OTT और अड़टाइजिंग एजिंसियों में हिंदी स्क्रिप्ट राइटर्स, क्रिएटिव डाइरेक्टर्स के सालरी पाकेज अंग्रेजी वालों को मात दे
46:00रहे हैं।
46:00ग्लोबल गेम्स, विदेशी फिल्मे और आप्स को हिंदी में ढालने का बाजार हजारों करोड रुपे का हो चुका है।
46:08लेकिन यहां यह ज़रूरी है कि अगर सिर्फ हिंदी के दम पर बड़ी नौकरी चाहिए, तो आपकी हिंदी काम चलाओ
46:14नहीं बलकि मास्टर क्लास होनी चाहिए।
46:16इस बीच जब तमाम लोग यह मान रहे हैं कि अंग्रेजी नहीं हिंदी का रास्ता मुश्किल किया, तब उन लोगों
46:22को यह बातें भी समझनी चाहिए।
46:46अम्रिद्ध बनाना देश भक्ती का दिखावा नहीं, बलकि आर्थिक और रणनी दिक जरूरत है।
46:52इसका सीधा अर्थ यह है कि हिंदी को अब दया या संरक्षन की जरूरत नहीं है, हिंदी को जरूरत है
46:59डिजिटल कॉंटेंट क्रियेटर्ज, शोध करताओं, वैज्यानिकों और कोडर्ज की।
47:04तो आज के लिए बलाक और वाइट में इतना ही, अब आपसे हमारी अगली मुलाकात होगी कल रात नौ बजे,
47:10देखते रहें आज तरह।
Comments

Recommended