जैसलमेर. पौ फटने के साथ ही शहर की गलियों और मोहल्लों में महिलाओं की चहल-पहल शुरू हो गई। हाथों में पूजन सामग्री और मन में संतानों की सलामती की कामना लिए महिलाएं गाय और बछड़े के पूजन में जुट गईं। जिलेभर में बच्छ-बारस का पर्व इसी आस्था, परंपरा और उत्साह के साथ मनाया गया। ब्रह्म मुहूर्त में महिलाओं ने गाय और बछड़े की पूजा-अर्चना की। पुत्रवती महिलाओं ने बेटों के माथे पर अक्षत-तिलक लगाया, नजर उतारी और प्रसाद खिलाकर उनकी दीर्घायु की कामना की। घर-घर में बच्छ-बारस की कथा पढ़ी और सुनी गई। भादवा कृष्ण द्वादशी पर महिलाओं ने पूरे दिन पर्व से जुड़ी परंपराओं का पालन किया।