00:00है मस्जिद वाला यह क्या पूरा मामला है पहले इसको प्रताख लाग दिए यह एक मस्जिद इनों निर्मित कर ली
00:06थी जो कि अवैद थी सरकारी संपत्ती पर बनी हुई थी यह संपत्ती कलक्टि कचैरी परिसर के रूप में है
00:13इसलिए इसको अवैद पाया दिया था
00:16क्या पूरा एक मामला था क्या काग जुप्ति पूरी जाज़ कर दो हजार पच्चिस में मामला दायर हुआ था पीपिए
00:23एक्ट के अंतरगत और इसमें यह था कि यह लोग जो हैं मस्जिद के रूप में उसको कनवर्ट करके यह
00:31विश्राम इस्थल की जगह थी उसको मस्जि�
00:44काया भी वसूलना शुरू कर दिया था यह मामला था उसके बाद जांच कराकर के मुकदमा कायम किया गया और
00:50वो सिटी में स्टेट मोदे के यहां से डिक्री हुआ
00:53यह किसने मुकदमा जायर कराया और इसकी पूरी क्या कागजू की जो है क्योंकि कहीं आरोप लग रहे हैं कि
01:00जो खसरा नमबर है कि प्राइवेट व्यक्तिका तो कोई इसमें कोई राइट है ही नहीं क्योंकि यह 1296 के जो
01:11डोकुमेंट है जमाबंदी का डोकुमेंट है खेव�
01:231296 के डोकुमेंट में कलक्ट gemaakt के चेरी के रूप में दर्ज है तो उसके बाद 1326 का जो डोकुमेंट
01:29है उन्हें फाइल कि यह रहा» spielen के बाद 1326 दर्जोंकि के में उर
01:52महाल वाइद खां के रूप में दरज है तो उससे पहले तो dork women
01:57है यह सरकार केसरी हिंद और कलक्री कचेरी दरज
02:02हैं तो बाद बाद में किसी का नाम दरज हूआ हो तो क्ल्सकेरी की
02:06संपती छोड़ कि उभग कर दर रज नहीं हो इसके द्वारrev किया गया था इढ़
02:162021 में 1995 दावादाय किया गया। हमेश्तियागी जी के दोवाद इसको ह॑ग इसको की दिएस सीसी सिविल थे उस समय
02:24पर। उमेश्तियागी जी उसके बाद ये से फिली स्टेट के साथ
02:28हमने闪किया डोनों अधीकतार ह
02:30रहे दीजी सी मोदे विने चौहान जी भी रहे और मैं भी रहा वहां से यह दावा जो है सरकार
02:36के पक्षमें दिग्री हुआ जी उसके बाद उन्होंने अपील फाइल की अपील में हाला कि इस्टे उनको दे दिया गया
02:45था लेकिन उनका को राइट नहीं बन रहा था क्योंकि �
02:48उनके पास कोई इसका डोकुमेंट नहीं था कहीं भी किसी राजस्व रिकॉर्ड में मस्जीद दर्द नहीं थी मस्जीद का डर्द
02:55नहीं था किसी में भी
02:571911 का एक बिल्वो शोग कर रहे थे, कि 1911 से मस्जीद एस्टेबलिश है, 1911 में जिस दिन का वो
03:04कहते थे उस दिन रवी बार था, इसके अलावा हमने एक दोजास साथ की रूलिंग भी फाइल की थी, जिसमें
03:09ये मेंशन था, कि 1922 में पहली बार यहां साहरंपुर में विदू स
03:26के लिए, लाइसेंस के लिए अपलाई किया गया था, और 1928 में वो सेंक्शन हुआ, तो उससे पहले का कोई
03:37दोकुमेंट इनके पास था नहीं, 1911 को कोई एस्टेबलिशमेंट का सवाल नहीं बनता था, और कोई डेट इनोंने वेंशन नहीं
03:44की कि कि किसी ओर डेट में कनेक्
03:48लिए गया तो मुत्मली मस्जीद के नाम था, मस्जीद के नाम नहीं था, जिए, तो अब जब सारे कागेज सामने
03:55आगे और यह लोग यह लगाता है, आपनों में सुने होगे, क्या रोब लगा रहे हैं, यह चल रहा है,
04:00इस पर आपकी क्या कहना है, यह आगे हाई कोर्ट क
04:16अगे हैं, नगरपाली का रिकोर्ट, बिजली का बिल और एक वो जो उन्होंने, जो उन्होंने, जो उन्होंने डाख खाने के
04:29साथ एग्रिमेंट किया, उसके अलावा कोई दस्तावेज उनके पास नहीं है, उनीस सो पच्पन से पहले के किसी इस्टिबिश्मेंट का
04:36कोई �
04:36दस्तावेज है ही नहीं, वो देर सो साल से मस्जिद होना कहते हैं नहीं, ऐसा कोई डोकुमेंट नहीं है, तो
04:42यहां पर क्या कुछ तक्थे आप लोगों ने रखते कि यह पैसला जो है, उन्होंने सुई पास रही है, एक
04:52तो 1296 फसली के डोकुमेंट ने आले के सामने रखे
04:55और इसके अलाबा 1324 फसली, 1369 फसली के डोकुमेंट रखे, यह भी ने आले के समक्ष इसपष्ट किया गया कि
05:03जो नगरपालिका का रिकोर्ड है, उससे कोई मिलके त्या नहीं होती, बेजली के बिल से कोई मिलके त्या नहीं होती,
05:09और जहां तक डाखाने के साथ एग्रिमे
05:24किया जा रहा है.
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