00:09जोब से रिटायर होने के बाद लोग आराम की जिन्दगी परिवार के साथ जीना चाहते हैं
00:14लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो सिक्षा और अपने हुनर को दूसरों तक पहुचाने के लिए अपने जिन्दगी
00:21खपा देते हैं
00:22ऐसा ही एक नाम है डॉक्टर पुश्पा दिक्षित का जिन्होंने संस्क्रित भाषा की सेवा के लिए अपने घर को ही
00:30गुरुकुल में बदल दिया
00:31डॉक्टर पुश्पा दिक्षित के गुरुकुल में देश विदेश से पढ़ने के लिए बच्चे पहुँच रहे है
00:36यहां छात्रों को न सिर्फ संस्क्रित पढ़ाया और सिखाया जाता है बल्कि उनको भारती मूल परमपरा और संस्क्रिती से भी
00:45परिचित कराया जाता है
00:46मैं मूलतह गुजरात से हूँ और मेरा रहना अमेरिका में है
00:52मैं यहां पे माताजी के संस्था में दो महिने से रह रहा हूँ और यहां से माताजी से शिक्षा ग्राण
01:00कर रहा हूँ
01:01तो यह जो संस्क्रित जो है संस्क्रित कैसा है संस्क्रित ये एनक की तरह है
01:24Dr. Pushpa के इस्थापित किये गये पानेनी ये शोध संस्थान में संस्क्रिट सीखने आने वाले विध्यारतियों में स्कूली बच्चों के
01:32साथ
01:32B.T.E.C., M.T.E.C. और PhD कर चुके छात्र भी शामिल है
01:57तो हमारे रिश्यों ने विचार वाली पद्धती दी है
02:00पहले शिक्चा में तरकशास्त होते ही होता था
02:03अनिवार ही होता था, सब पाउते थे
02:05तो हमारे देश में जो दो वहब फेलाए गए ना
02:07कि शिक्चा काली ब्रामोल के लिए थी
02:10अंग्रेजों का सर्विक्षन बताता है कि
02:11सत्तर से लेकर चौरासी प्रतिश्यों चुद रोते थे शिक्चार विध्यारतियों
02:15इस अंस्थान की खासियत यहां है कि यहां संस्कृत सीखने वाले विध्यारतियों से
02:20सिक्षा की फीस नहीं ली जाती
02:22बाहर से आने वाले छात्रों के लिए रहने और भोजन की विवस्था भी निशुल्ख की जाती है
02:28संजय कुमार यादव, ETV भारत, बिलास्पूर