00:00पांस सितवमर यानि की सिक्षक दिवत, सिक्षक दिवत पूरे देज भर में धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन मैं कांकेर
00:08जिले के अंधरूनी इलाकों में पदस्त जो सिक्षक हैं, उनकी एक तस्वीर मैं आपको दिखाना चाहूँगा, यह इस वक्त कोटरी
00:16नदी घाट म
00:26कांकेर के कोईली बेडा से सिक्षक दिवस पर समर्पन की एक मिसाल सामने आई है, यह गुरू जी अपनी जान
00:33जोखिम में डाल कर बच्चों का भविश्य सवार रहे है
00:50तस्वीरे कोईली बेडा विकास खंड के बारकोट की है, बरसात में कोटरी नदी का जलस्तर बढ़ जाता है, बावजूद इसके
00:58बारकोट प्राथमिक शाला के सिक्षक हर दिन नाओ के सहारे नदी पार कर स्कूल पहुँचते हैं और बच्चों को पढ़ाते
01:06है
01:26अब बारेस में बस ऐसी नाओ के भरोसे ही इसकूल आते जाते हैं और हमारे साथी सर लोग को चलाना
01:34भी आता है जैसे चलाने वाले नहीं रहते हैं तो सर लोग ही चला के इधर उधर हम लोग कर
01:39लेते हैं
01:41शिक्षक कोई एक दो साल से नहीं बलकि दशकों से इसी तरह नदी पार कर बच्चों को पढ़ाने आ रहे
01:47है
01:481998 से बच्चों को पढ़ा रहे हरिवंच वैदि कहते हैं डर तो लगता है पर बच्चों का भविश्य सवारना ही
01:55सबसे बड़ी जिम्मेदारी है
01:582006 से इसी रास्ते से आ रहे हैं लोकनात कुम्बकार ने तो खुद नाव चलाना भी सीख लिया है
02:04कहते हैं कभी-कभी नाव डूब जाती है तो तैर कर जान बचानी पड़ती है
02:09जान जोखी में डाल करके सेवा देने से मतलब कहीं न कहीं सिख्षक को ये डर रहता है कि मेरी
02:16जान चली जा सकती है
02:17तो वो करना बहुत उचित नहीं है तो जिला प्रशासन इसके लिए पुरी एक कार्योजना बनाएगा
02:40जिला प्रशासन भी इन सिख्षक को के समर्पन को सलाम करता है
02:44साथी सुरक्षा की लिहाज से साधन मुहया कराने के बाद भी कहता है
02:49ये सिख्षक सिर्फ पढ़ा ही नहीं रहे बलकि बच्चों को हिम्मत और कर्म करने का ज्यान भी बाड़ रहे है
02:57बाड़ के दिनों में खासकर इन्हें इसी नाव के सहरे आना जाना करना पड़ रहा है
03:03कांकेर से सुशिल सलाम एटीवी भारत
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