00:08एक गुरू का कर्तव्य केवल सिक्षा प्रदान करने तकसी मित नहीं होता।
00:30with a different example.
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02:07तक स्थीमित नहीं है किसी भी महापुरुष की जयनती या विशेश दिवस पर वे बच्चों को उस व्यक्तित्व के जीवन
02:14और विचारों से जोडने का प्रयास करते हैं
02:17खास बात ये है कि कई अवसरों पर वे अपने हाथों से महापुरुषों की तस्वीरें बनाते हैं और फिर बच्चों
02:24के साथ उस दिन को उत्साह पूरवक मनाते हैं
02:27इसके अलावा तरुन अब तक 24 से अधिक बच्चों को गोद ले चुके हैं और उनके जीवन का सहारा बन
02:33रहे हैं
02:34शहीदों के बच्चों की सिक्षा में मदद के लिए भी वे अपने कई महीनों का वेतन तक दान कर चुके
02:39हैं
02:57सब्सक्राइब के राजस्तान की पहली गुलेट ट्रेन और जो इसकुल है वह बनी थे स्प्रेन का रूप लेकिन ये गुलेट
03:04ट्रेन का रूप पहले रूप में दिया गया इसे के देखते हुए पूरे टॉंग जी लेके अंदर जिला क्लेक्टर मोगोदिया
03:12ने
03:13जो है ये प्रोजेक्ट चलाया है कि हर ग्राम बच्चाइद के अंदर पाच पाच ट्रेन का इसको देख कर दूनी
03:19विद्धेले के जो सब्सक्राइब कर दान है कि हमारे आसपास रहने वाला कोई भी बच्चा सिक्सा से दूर नहीं है
03:55तरुन का मानना है कि स्कूल में किये जाने वाले छोटे छोटे नवाचार बच्चों के व्यक्तित्व पर बड़ा प्रभाव डाल
04:02सकते हैं
04:02तरुन की कहानी इस बात की मिसाल है कि सिक्षा केवल ब्लैक बोर्ड किताब और परिक्षा तक सीमित नहीं है
04:09जब सिक्षक अपने आजरन को सिक्षा का हिस्सा बना लेता है तो स्कूल की चार दिवारी से निकल कर इसका
04:15असर पूरे समाज तक पहुँचता है
04:18जैपूर से ETV भारत के लिए जस्वंत सोलंकी की रिपोर्ट
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