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  • 1 week ago
पढ़ें प्रताप सिंह के संपादन में संवाददाता गोपाल मिश्रा की खास खबर.

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00:00पास सितंबर को सिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है और डॉक्टर स्वर्वपली राधा कृष्णन के इसमती में यह
00:07दिन बहुत खास रूप से हर इसकूल, विद्याले, यूनिवस्टीज और वो तमाम सिक्षा संस्था है जहां पर सिक्षगों की भूमी
00:16का मतुमों ह
00:19काशी विद्वानों की नगरी और यहां एक से बढ़कर एक सिक्षक जन्म लिए और यहां की पवित्र भूमी में रहते
00:25हुए उन्होंने देश और दुनिया को बहुत अच्छे अच्छे शिश्च भी दिये
00:29ऐसे में अकसर बात तो ऐसे सिक्षकों की होती है जिनोंने भारतिय संस्कृती परमपरा में रहते हुए रम कर यहां
00:39की चीजों को जानने की कोशिश की
00:40लेकिन कम लोग ही जानते हैं कि एक ऐसे विदेशी प्रशाशक थे जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत में बनारस आकर अंग्रेजों के
00:50लिए प्रशाशन का कारे करते हुए जब यहां के संत महात्माओं और विद्वानों के साथ बैठना शुरू किया तो उनका
00:59ध्यान संस्क
01:00संस्क्रित सिक्षा की तरब जाना शुरू हुआ यही वज़ा है कि उन्होंने अपने जीवन को संस्क्रित के रिए समर्पित किया
01:05और संस्क्रित में ही जीवन जीते हुए उन्होंने ना जाने कितने वेद वेदांगों का संस्क्रित से अंग्रेजी हनुआत किया जिसमें
01:26स�
01:27से अलग संस्कृत को चुनकर एक विध्यारती के रूप में काशी में अपना जीवन जीना शुरू किया और संपूना न
01:34संस्कृत इनुवस्ति के उस वक्त अथारा सो शताब्दी में पहले प्रिंस्पल के रूप में यहां पर नियुक्त हुए
01:41संस्कृत के प्रशार प्रशार में उन्होंने प्रशार पूरा जीवन बिताया और संस्कृत को आगे बढ़ाने के लिए ग्रिफित ने अपने
01:48अंग्रेजी हुकूमत में जो बच्चे थे उनको भी संस्कृत का ग्यान दिया और संस्कृत को ही आगे बढ़ाते हुए जो
01:56चार
02:18And I urge you to put it on your own.
02:40उनकी पहचान स्रीमान ग्रिफित इनका पूरा नाम है राल्फ थामस हच्चन ग्रिफित इन लूप से ब्रिटिस स्कॉलर थे
03:04नाया कालेज्यों की रचणा प्रारंब हो ही थी ब्हारत के अंदर इस में से एक मद्यव्मेंट संच्क्त कालेज वारानशी बई
03:12था
03:14इस मद्यंट सfor का इस्वारानशी में अंग्रेजी के प्राध्यापक के रूप में उनकी निर्ति हो थे
03:23Indian Educational Services
03:25के माध्यान से
03:29बाद में वो यहां प्रीसफल भी रहे
03:31लगबग दस वर्सों तक
03:35सही कहा है तो आठ वर्सों तक
03:40लगबग
03:42तस वर्स तक प्राध्या पक रहे
03:52ग्रिफित किसे देश्टियों से महत्तव होना है वो पुटिया तो प्रतिकात्मक है लेकिन एक कदम के नीचे
04:01विस्विद्यले के स्थापना के समय ही
04:07उनको चिम्नित किया गया उस चिम्नित करने के पीछे कारण था
04:11कि संस्कत सहित्य को उनका बड़ा योगतान है आज जब सुचनाय सपस्टोही है जब संस्कत अंग्रेजी के बीच अनुवाद करना
04:20आसान हुआ है
04:25भारत की पुरानी संस्कती की पहचान मजबूत हुई है तब तो उनमें बहुत दोस्ट भी देखा जा सकता है लेकिन
04:33वो पाइनियर थे जिन्होंने संस्कत अंग्रेजीवन बाद किया उस द्रस्टी से उनका अतुलनी योगदान है
04:41स्रीमान ग्रिफित ने
04:45चारों वेदों के संधिता खंड कानुबाद किया उन्होंने बालमी की कृतर रामायड कानुबाद किया
05:02विविध रामायडों के आधार पर राम को लेकर किये एक राम कथा की अलग रचना की
05:12काली आसकत कुमार संभव का अनुबाद किया
05:20और भारत के अंदर जो तुलनात्म का धेन की प्रविक्ति हाई देती है
05:25हम येरोपी और भारती विशारों के बीच तुलना करने के आज अभ्यस पर हो चुके हैं
05:31इस तुलना के प्राथमिक लोगों में कुछ दो तीन नाम जो बड़े गिने जाएंगे
05:40प्री मैक्स मुलर मैक्स मुलर से पहले जिन्होंने काम सरू किया था उन प्री मैक्स मुलर लोगों में
05:50इस विश्विद्याले के पुरोवर्शंपुनान संस्क्रत विश्विद्याले के पुरोवर्ती रूप
05:55गॉवर्मेंट संस्क्रत कालेश के ने कंपरेटिव स्टुडीज और एंग्लो सेक्षन को आकार देना उन नहीं किया था
06:06इसमें एक Griffith सहाब है और हमारे इस विश्विद्याले के अनेक दिवालों पर उनका नाम अंकित आप पाएंगे
06:15Griffith सहाब एक प्रसासनिक अधिकारी के रूप में बनारस में अंग्रेजों के राज में प्रतिष्टित थे
06:22लेकिन जब वो भारत में आये और वो संस्कृत विद्या से जब जुड़ते हैं खास करके हमारे वेद से उपनिशद
06:30से पुरान से स्मृती से और संस्कृत साहित से तो उन्हें लगता है कि जीवन का जो महतपून रस है
06:38जीवन का जो महतपून उद्देश है और संसार के रहस समई जो विद्या है वो सब संस्कृत में नहीत है
06:45यही कारण है कि उन्होंने अपने प्रसासनिक जीवन को इंड किया और वे जो है एक संस्कृत विद्या के विद्यार्थी
06:53के रुप में आते हैं
06:54और उन्होंने सर्व प्रतम यह जो क्यून से कालेज आपने नाम सुना यह अंग्रेजों द्वारा स्थापित है अंग्रेजों को भी
07:03यह महसूस हुआ कि भारत में सासन हम तब कर सकते हैं जब भारतिया विद्या का प्रचार प्रसार हेतू हम
07:10भारतियों को अवसर देंगे
07:24This is a great gift in India.
07:27I say that there is a gift, a gift, a visit, a self-sacrific, a great gift.
07:35This is a great gift that he has to offer a great gift in English.
07:41When he has a great gift to any person, he has a great gift.
07:45And he also has a great gift to us.
07:48He has a great gift for today.
07:50He has a beautiful gift for his name.
07:53by the griffiths of the kutiya,
07:55so that in Sanskrit,
07:56I have said that
07:57Vasudhaiva kutumbakam.
07:59The idea of the dhyapak,
08:00is a very difficult life.
08:04We are so that,
08:06that the dhyapak,
08:08is an important thing to do,
08:10and that the dhyapak,
08:15shows his knowledge,
08:15gives his knowledge to give his knowledge.
08:16This process is very difficult,
08:18and that the process,
08:19our griffiths of the kutiya,
08:38Thank you very much.
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