00:04नालंदा के संस्कृति ग्राम परिसर में विश्व के पहले बोधिवन की स्थापना की गई है
00:10पौधा रोपन से पहले विभिन देशों के बोध भिक्षूओं और विद्वानों द्वारा भगवान बुद्ध की पूजा अर्चना और बोध मंत्रोचार
00:19के साथ कारिक्रम को आध्यात्मे को वातावरन प्रदान किया गया
00:25बोधिवन अठाईस प्रकार के बुद्धों को समर्पित है बौध मान्यता में मानते हैं कि 28 वे बुद्ध जो थे वो
00:33गौतम बुद्ध थे किन्होंने पीपल विक्ष के नीचे बोधि की प्राप्ति की उनके पहले भी 27 प्रकार के बुद्ध हुए
00:41हैं जो अलग-अलग व
00:53नव नालंदा महा विहार के कुलपती प्रोफेसर सिदार्थ सिंग कहते हैं कि बौध विक्ष ज्यान का प्रतीक रहा है यहां
01:01खरीब एक एकड़ में 28 वुद्धों से संबंदित बौधि विक्ष के बौधे लगाए गए हैं
01:08पहली बार 28 व्रकार के विक्ष जिसमें साल है बर्गध है नाग चमपा है नाग केसर है ऐसे बहुत सारे
01:19विक्षों जिनके नीशे विभिंद प्रकार के बुद्धों ने ग्यान प्राप्ति की थी उसको समर्पित बोधिवन एक तो साधना के लिए
01:27समुचित इस्थल प्रस
01:38इस तरह से एक अध्यात्मिक ऐसी इस्थरी जिसमें की बहुत धर्माव लंबी ही नहीं विश्व के तमाम लोग आ करके
01:46शांति कानव हो कर सके इस ज्ञान को प्राप्त कर सके कि कौन से बुद्ध किस रिक्ष से सम्मंदित है
01:52वहां उसका विवरण भी दिया हुआ है
01:54आखिर क्या है इसका मकसद नवनालंदा महाविहार के प्रोफिसर डॉक्टर धम्मा जोती ने इस बारे में विस्तार से बताया है
02:47वास्ता में दुनिया में अपनी तरह का ये अकेला और अनूठा बोधिवन है
02:53माना जा रहा है कि ये वैश्विक बौध विरासत और परेटन को बढ़ावा देने के लिहास से काफी बहत्तोपुर्ण सापित
03:02होगा
03:03नालंदा से एटीवी भारत के लिए महमद महमूद आलम की रिपोर्ट