00:04क्या इतिहास की घटनाओं को आज के तराजू में तोला जा सकता है?
00:07एक्टरस स्वरा भासकर ने फिल्म पदमावत के जोहर सीन पर एक ऐसा बयान दिया
00:11जिसने सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट्स तक एक नई बहस शीर दी है
00:15लोग उन पर रानी पदमावती और राजपूत महिलाओं के सरवोच्छ बलिदान का अपमान करने का आरूप लगा रहे हैं
00:21लेकिन क्या सच में स्वरा ने उन्हें कायर कहा या उनके बयान के पीछे की कहानी कोछ और है
00:25दरसल शुरुआत करते हैं पूरी कॉंट्रोवर्सी से
00:28स्वरा भासकर ने एक इविंट में कहा था कि पदमावत का क्लाइमेक सीन आज के समाज में बलतकार पीडितों को
00:33घलत मैसिज देता है
00:35जब इस पर भारी बवाल हुआ तो स्वरा ने सामने आकर खुलकर सपाई दी
00:38स्वरा ने साफ कहा कि मैंने कभी नहीं कहा कि इतिहास में जोहर करने वाली महिलाएं कायर थी
00:43विपरीद पर इस्थितियों में वो उनका साहस था
00:45स्वारा ने कहा कि उनका विरोध इतिहास से नहीं बलकि आज के सिनेमा से था
00:49उनका मानना है कि जब आज का डारेक्टर उस सीन को स्क्रीन पर बेहत खुबसूरत और ग्लैमराइज करके दिखाता है
00:55तो वो एक गलत नेरिटिव सेट करता है
00:57स्वारा का तर्क है कि बलातकार किसी महिला के जीवन का अंत नहीं है
01:01समाज को पीडितों को जीने और लडने की हिम्मत देनी चाहिए
01:04ना कि सम्मान के नाम पर जान देने की सोच को बढ़ावा देना चाहिए
01:27अब सरासर गलत तरीके से अनुवादित हो रहा है
01:31और जो एक जूट बनाकर पहलाया जा रहा है
01:34कि मैंने ये कहा कि रानी पदमावती और जो बाकी महिलाओं ने जोहर किया था वो कायर है
01:53मैं क्लिरली कहना चाहती हूँ
01:57दरसल मद्धे भारत में जब विदेशी आकरंताओं द्वारा किसी किले को घेर लिया जाता था और राजपूतों की हार निश्चित
02:04हो जाती थी तब किले की महिलाएं सामोहिक रूप से धतक्ती अगनी में कूद कर अपनी जान दे देती थी।
02:10ये कोई साधारन आत्म हत्या नहीं थी। ये शत्रू सेना के हातों बंदी बनने गुलामी और जीवन भर होने वाले
02:16शारिरिक और मांसिक शोशर से बचने का उनका एक आखरी और गरिमा पूर्ण रास्ता था।
02:22महिलाओं के जोहर कुंड में कूदते ही पुरुष के सरिया बाना पहन कर साका के लिए निकल जाते थे। यानि
02:27दुश्मन से तब तक लड़ना जब तक आखरी सांस ना थम जाए। ये उस दौर की एक बेहत दरदनाक लेकिन
02:33आत्म सम्मान के रक्षा से जुड़ी मजबूर
02:36अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर क्या उस समय की तुलना आज के समय से करना सही है इसका
02:41सीधा जवाब है नहीं सोचिये मध्यकाल में अगर कोई महिला बंदी बना ली जाती तो उसके पास नियाय मांगने का
02:47कोई रास्ता नहीं था ना कोई पुलिस थी ना आदालत और �
02:51मानव अधिकार वहाँ पराजे का मतलब था पूरा विनाश होना लेकिन आज 21 सदी में हम एक लोक तांतरिक समाज
02:58में रहते हैं आज हमारे पास कानून है समिधान और नियाय पालिका है आज का आधोनिक पिचार साफ कहता है
03:04कि अपराज चाहें कितना भी भयानक हो पीडित क
03:17पर फिल्मों में इतिहास दिखाता है इसका मतलब यह नहीं कि उस वक्त की तुलना आज से की जाए तो
03:22इतिहास में जो हुआ वो उस दौर की कुरूर सचाई और महिलाओं का अदम में साहस था जिसका सम्मान होना
03:28चाहिए लेकिन आज के वक्त में हमारा सिनिमा और हमारा समा
03:31आज इस बात पर केंदरित होना चाहिए कि किसी भी परिस्तिती में जीवन को चुनना ही सबसे बड़ा साहस है
03:35तो आप भासकर के बयान को लेकर आपकी क्या राय है कॉमेंट सेक्शन में में लिक कर जरूर बताएं वीडियो
03:40को लाइक करें शेयर करें और चानल को सब्सक्रा