00:22ुपाड़ी छेत्रों में लगातार हो रही बारिस के चलते अब गंगा का जल इसतर उफान पर है
00:27इस वक्त हमारी मौझूदी कानपुर के गंगा बैराच में आप मारे ठीक पीछे देख सकते हैं कि जो गंगा का
00:33पानी है अब वो हिलोरें लेते नजार आ रहा है और गंगा रूप में दिखाई दे रही है
00:37आप ठीक सामने देखेंगे तो ये गंगा बैराच के पीस गेट है जिनको पिरसासन के द्वारा 2400 घंटे खोलने के
00:44आदेश दे दिये गए हैं और गंगा का जो पानी है वो भारी आवाज के साथ यहां से निकल आ
00:50है और पानी आपको साब तरीके से दिखाई दे रहा होगा
00:53तस्वीरों में कि यह पानी है किस तरीके से यहां पर हिलोरें ले रहा है अब गंगा कहीं न कहीं
00:58रौद रूप लेती हुई नजर आ रही है और कानपुर के जो गंगा के तटी इलाके हैं जो 176 गाउं
01:04हैं उनको पिरसासन के द्वारा हाई अलर्ट पर रखा गया है पिरसा
01:23का पानी गाउं में किसी भी वक्त घोश सकता है आप हमारे ठीक इस तरह देखेंगे तो आपको दिखाई देगा
01:29यह गंगा का जो गेज है पॉइंट है यहां पर गेज के द्वारा यहां पर इंगित किया गया है कि
01:35अभी गंगा का पानी जो है 114.30 मीटर तक पहुंच गया
01:40अभी फिलाल चेतावनी बिंदु से थोड़ा सा ही नीचे बचा है पानी लेकिन कहीं न कहीं गंगा का जो जल
01:46इस्तर है अब लोगों के मन में अब चिंता का विसाय बना हुआ कहीं न कहीं ग्रामीड 2010 की वो
01:53यादें एक बार फिर से डरा रही है और उस भयावदी इस्थित
01:57को याद दिला रहे हैं कि 2010 में आपको बता दें कि इस तरीके से गंगा ने अपना रौद रूप
02:03दिखाया था कि प्रसासन और मसीनरी भी काम नहीं आई थी तब जाकर आर्मी के द्वारा यहां से लोगों का
02:09रेस्क्यू किया था कई हजारों बीगाल लोगों की फसलें वहा
02:25काम होती दिख रही हैं बीते आने वाले दो तीन दिनों में अस्तर जो है कुछ कम होने की पूरी
02:32उमीजत आ जा रही है प्रसासन को प्रसासन ने एलेट किया है कि बाल को देखते हुए सुरच्षित रहे सतर्क
02:39रहे हैं
02:40दो जा उनतीसनों दो हजार दस में हाई फलेड आया था वहराज का 115.80 का हमारे हां लेविल था
02:46तो उस जैसी स्थित्य तो अभी नहीं दिखरी दूर दराज तक क्योंकि उसको उस स्थित्य में पहुचे लेगे कम से
02:53कम नरावरा से हाई डिस्चार्ज होना चाहिए जो के भ
03:00पानी है मुले गाउं को बगल से है सक घर में नहीं कुछा माले बाहर है काहे जोट बोले आप
03:09असलों में भी आप असले तो पूरी डूब यह तो देखे रहे हो यह सब बरवाद हो गई है बरवाद
03:15नहीं है काफी आज कि नुक्सान का मालोब सब धंदा चली रहा था निकल
03:31पानी बहुत नीचे था जब से कोई नहीं है ज़्यादा माने बारी सोई पर तो जब वह सकता है उतने
03:37भी आ सकता है पानी पानी बहुत नीचे था जब से कोई नहीं है जब से कोई नहीं है ज़्यादा
03:46माने बारी सोई पर तो जाब वह सकता है उतने भी आ सकता है पानी बा
03:51When I was growing up, my school was filled with water in the school, so my school was shifted to
03:59Ludhva Kheira, and there were children who were growing up there.
04:05We are living in the middle of the school.
04:08How much water was reduced or growing up.
04:13We can go inside and see that there are no walls of the building.
04:16They are not able to reach the trees.
04:18Do you have a chance to study the trees?
04:20Yes, there is a chance to study the trees.
04:22But sometimes it is adjusted.
04:24Because they are not able to study the trees in the water.
04:27So in this valley, our people are living in the mud.
04:31So the teacher told us that you have to study the trees.
04:36And the children have to study the trees.
04:39What is the city of Ganga?
04:42The city of the city is the same as water.
04:44It is so nice.
04:46We went to a garden,
04:47there is a garden,
04:49all the plants are all going to be Burnt.
04:51Did you have the water in the garden?
04:53Yes.
04:54We have been here,
04:55all the products have been there.
04:57Do you have the water in the garden?
05:00Well, there is a water in the garden.
05:03Is there somebody because of the grass?
05:07Yes, it is a good water.
05:09The other people have lost.
05:10Yes, I have lost in the garden.
05:11What is these desarrolla?
05:13I know its story.
05:19What's the alarm?
05:22No alarm.
05:26Nobody is coming out of here.
05:29What's the alarm?
05:33What's the alarm?
05:52Q. A. A. U. T. V. E. T. V. Bharat Kahanpur.