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कब्र से वापसी | डरावनी Animated Horror Story | Hindi Ghost Story | Suspense Story

एक सुनसान गाँव में एक रहस्यमयी कब्र से जुड़ी ऐसी घटना सामने आती है, जिसने पूरे गाँव को दहशत में डाल दिया। 😱 इस रोमांचक Animated Horror Story में डर, रहस्य, भूतिया घटनाएँ और suspense से भरपूर कहानी देखने को मिलेगी। पूरी कहानी अंत तक देखें और जानिए कब्र से वापसी का असली राज़।

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00:26आप अभी आराम कर लीजिए
00:28सभर भी लंबा था
00:30और सामान भी अभी घर पहुँचा है
00:32गाओं में रात को रास्ते थोड़े सुनसान रहते हैं
00:35इसलिए सुभे उजाला होने पर ही बाहर निकलना अच्छा रहेगा
00:39मुरली एक पुराने डाग घर में नौकरी करता था
00:42हाल ही में हुए ट्रांसफर की वजह से
00:45आज वो अपनी पतनी सविता के साथ
00:47कालीधार नाम के इस अंजान गाओं में आया था
00:50जब वे गाओं पहुँचे तब रात पूरी तरह उतर चुकी थी
00:54चारों तरफ घना अंधेरा पहला हुआ था
00:57आसमान धुन्दला था और हलका हलका कोहरा
01:00पूरे इलाके में तैर रहा था
01:02अब बताओ तो रात में खाएंगे क्या
01:04तुम चावल तो लाए ही नहीं
01:06हर काम इतनी जल्दी जल्दी में करते हो
01:08एक बार सामान समेटते समेट
01:10ठीक से देख तो सकते थे
01:11अब बोलो हम क्या करें
01:13घर में और भी कुछ खास नहीं बचाए
01:15इतनी रात को मैं क्या बनाऊ
01:17अरे गल्ती हो गई मुझसे
01:19इतना सामान था
01:21शायद उसी में ध्यान नहीं गया
01:23तुम गुस्सा मत हो
01:24मैं अभी जाकर देखता हूँ
01:25शायद कहीं कोई दुकान खुली मिल जाए
01:27रात काफी हो चुकी है
01:29बाहर कोहरा भी है
01:31मुझे ठीक नहीं लग रहा
01:33तुम अभी बाहर नहीं जाओ
01:34सुभ़ तक काम चला लेते हैं
01:36तो क्या हो जाएगा
01:37नहीं तुम चिंता मत करो
01:39मैं जल्दी ही वापस आ जाओंगा
01:41जादा दूर नहीं जाओंगा
01:42बस आसपास ही देखता हूँ
01:44अगर दुकान मिल गई तो ठीक
01:46नहीं तो तुरंत लोटाओंगा
01:47ठीक है लेकिन जल्दी वापस आना
01:50और रास्ते में ध्यान से जाना
01:51गाउन नया है
01:53हमें अभी कुछ पता भी नहीं है
01:55हाँ तुम दर्वाजा अच्छे से बंद कर लेना
01:57मैं जादा देर नहीं लगाऊंगा
01:59कुछ मिल गया तो लेकर आता हूँ
02:00नहीं तो खाली हाठी वापस आ जाऊंगा
02:02पतनी को घर पर छोड़ने के बाद
02:04मुरली धीरे धीरे कोहरे से ढखी
02:06गाउं की सुनसान सडक पर आगे बढ़ने लगा
02:09चारो तरफ फैले धुंत के कारण
02:11रास्ता साफ दिखाई नहीं दे रहा था
02:13दूर कहीं रेलवे लाइन की तरफ से
02:16कभी कभी ट्रेन की सीटी की आवाज गोंज उटती
02:19जो सन्नाटे को और गहरा करते थी
02:22चलते हुए मुरली के मन में कई तरह के खयाल आने लगे
02:25और वो इस अंचान गाउं के अजीब माहौल को महसूस करते हुए
02:29आगे बढ़ता चला गया
02:30ठंडी हवा के जोके कभी कभी कोहरे को चीरते हुए गुजरते
02:35और माहौल को और भी जादा डरावना बना देते थे
02:38ऐसा लग रहा था जैसे रात होते ही यहां जिन्दगी रुख जाती हो
02:42लगता है इस तरफ दुकान मिलना मुश्किल है
02:45पूरा रास्ता सुनसान पड़ा है
02:47शायद मुझे थोड़ा और आगे जाकर देखना चाहिए
02:50क्या पता आगे कहीं कोई छोटी दुकान खुली मिल जाए
02:52घर में चावल भी नहीं है
02:54खाली हात वापिस जाओंगा तो सविता परिशान हो जाएगी
02:58मैं भी न नया गाओं है और मुझे पहले ही जरूरी चीजे देख लेनी चाहिए थी
03:03अब रात मैं ऐसे घूमना पड़ रहा है
03:05चलो थोड़ा और आगे चल कर देखता हूँ
03:07शायद किस्मत से कहीं कोई दुकान खुली मिल जाए
03:10अगर नहीं मिली तो वापिस जाना ही पड़ेगा
03:12लेकिन एक बार और कोशिश कर लेता हूँ
03:14अचानक सडक के ठीक दाएं और लाल्टेन की पीली रोशनी चमचमा रही थी
03:19वहीं पुरानी गुम्टी वाली दुकान थी
03:22मुरली रुग गया
03:23अरे ये क्या? यहां एक छोटी सी गुम्टी दुकान है
03:27मैंने आते समय रास्ते में यही दुकान तो देखी थी
03:30या शायद मैं गलत याद कर रहा हूँ
03:32इस गाओं में तो मैं नया हूँ
03:34लेकिन ये जगा कुछ जानी पहचानी सी लग रही है
03:36चल कर पास से देखता हूँ
03:38अगर दुकान खुली हुई मिल गई तो अच्छा है
03:40इतनी रात में अगर यही कुछ मिल जाए
03:42तो बड़ी रहात हो जाएगी
03:43अच्छा हुआ मैं थोड़ा और आगया गया
03:45नहीं तो ये दुकान शाय दिखती ही नहीं
03:47तब ही उसकी नजर दुकान के अंदर
03:49खड़ी एक औरत पर पड़ी
03:51वो देखने में गाउं की साधारन औरत
03:54जैसी लग रही थी
03:55लेकिन उसके चहरे पर एक अजीब सी
03:57मीठी मुस्कान फैली हुई थी
03:59जो माहौल से मेल नहीं खा रही थी
04:01उसकी आखे जैसे सीधे मुरली
04:04को ही देख रही थी
04:05पोस्ट मास्टर को देखते ही
04:07उसने धीमी मीठी
04:09लेकिन अजीब सी आवाज में उससे
04:10बात करनी शुरू की
04:11ए बाबू आईए आईए मेरी दुकान में आईए
04:15इतनी रात में बाहर क्यों भटक रहे हैं
04:17जो चाहिए आराम से मिल जाएगा
04:19यहां घबराईए मत
04:21अंदर आईए
04:21अबे दुकान बन नहीं की है मैंने
04:23गाउं में रात को सब जल्दी बंद कर देते हैं
04:26लेकिन मैं थोड़ी देर और बैठती हूँ
04:28बताईए बाबू
04:29क्या चाहिए आपको
04:30चावल, आटा या कुछ और
04:32जो चाहिए निकाल देती हूँ
04:34दुकान के करीब पहुँचते ही
04:36मुरली अचानक थोड़ा चौंक गया
04:38जैसे उसे वहां के माहौल में
04:41कुछ अजीब सा महसूस हुआ हो
04:43फिर भी हिम्मत करके
04:45वो धीरे धीरे आगे बढ़ा
04:46और जैसे ही दुकान की देहली पर पहुँचा
04:49उसकी नजर दुकान के बीचो बीच
04:51सामने रखे एक पुराने
04:53घड़े पर जाटिकी
04:54उस घड़े के चारों ओर
04:56काली सी काई जमी हुई थी
04:58जैसे वो बहुत सालों से वहीं रखा हो
05:01घड़े के आसपास की जमीन
05:16ठीक से दिखाई भी नहीं दे रहा
05:18आप जड़ा इसे पैर से साइड कर दीजे न
05:21नहीं तो मैं खुद हटा देती
05:23लेकिन अभी ठीक से देख नहीं पा रही
05:25अच्छा ये घड़ा ठीक है
05:27हटा देता हूँ
05:27वैसे हाँ बीच में क्यों रखा है
05:49मुरली ने बिना कुछ सोचे
05:51जुमरी के कहने पर उस घड़े को
05:53जोर से लात मार दी
05:55जैसे ही उसका पैर घड़े से टकराया
05:57वो दूर जाकर भारी आवास के साथ
06:00जमीन पर गिरा
06:00और जोरदार धमाके से तूट कर
06:03कई टुकडों में बिखर गया
06:04घड़ा तूटते ही उसके अंदर से
06:07राख जैसी धूल
06:08छोटी छोटी हड़ियों के टुकडे
06:10और सूखे हुए मुर्जाय फूल
06:12बाहर फैल गए
06:14जैसे वे बहुत सालों से उसके अंदर
06:16बंद पड़े हो
06:17जमीन पर गिरते ही उन चीजों से
06:19एक तेज सड़ी हुई बद्बू हवा में फैलने लगी
06:22जिससे आसपास का माहौल
06:24अजीब और भारी सा लगने लगा
06:26मुर्ली कुछ पल तक तूटे हुए घड़े
06:28और जमीन पर फैली उन चीजों को देखता रह गया
06:31उसे ये सब बहुत आजीब लगा
06:33ये, ये कैसी बद्बू है
06:35और ये जमीन पर क्या बिखरा हुआ है
06:38ये सब क्या है यहाँ
06:40अरे कुछ नहीं बाबू
06:41आप चिंता मत कीजे
06:43यहाँ आसपास बच्चे खेलते रहते हैं न
06:45पता नहीं कौन क्या उठा कर फेग जाता है
06:48मैं तो रोज साफ करती रहती हूँ
06:50लेकिन फिर भी गंदगी हो ही जाती है
06:52बाबू आप बताईए ना
06:54आपको क्या चाहिए
06:55मुझे चावल चाहिए
06:56आपके पास चावल है क्या
06:58मुझे एक किलो चावल दे दीजी
07:00हाँ बाबू है ना
07:02अभी देती हूँ आप यहीं रुकिए
07:04फिर उसने दुकान के एक कोने से
07:06एक पैकेट उठाया
07:07जो बाकी सामान के मुकाबले
07:09बिलकुल नया और चमकदार लग रहा था
07:12उसने धीरे से वो पैकेट
07:14मुरली के सामने रख दिया
07:15जैसे वो उसी के लिए पहले से
07:17अलग रखा गया हो
07:18उस पैकेट पर धूल का एक भी कण नहीं था
07:22जो इस पुरानी और जजर दुकान में
07:24थोड़ा अलग सा लग रहा था
07:26मुरली ने बस सामान ये नजर से
07:28उस पैकेट को देखा
07:29उसे ये समझ नहीं आया कि
07:31इतनी पुरानी दुकान में
07:32इतना नया पैकेट कैसे रखा हुआ है
07:35दुकान के अंदर अजीब सी
07:37खामोशी बनी हुई थी
07:38अरे बाबू आपके लिए सबसे बढ़िया चावल दूँगी
07:41लीजे बाबू ये चावल रख लीजे
07:44पैसे नहीं लगेंगे
07:45आपका आना ही मेरी ले काफी है
07:47अरे पैसे क्यों नहीं लगेंगे
07:49नहीं नहीं मैं तो पैसे जरूर दूँगा
07:51मैं सामान लेकर बिना पैसे दिये नहीं जा सकता
07:54अरे बाबु रहने दीजिये न
07:56आपसे पैसे लेकर क्या करूंगी
07:58आप बस जब भी जरूरत हो
07:59मेरी दुकान पर आ जाए
08:01आपका आना ही काफी है
08:02जो भी चाहिए हो आप शाम के बाद आकर ले जाएगा
08:06आप पैसे ले लीजिये
08:08नहीं ये ठीक नहीं है
08:09सामान का पैसा तो देना ही चाहिए
08:11फिर भी कुछ पल चुप रहने के बाद
08:14जुम्री ने फिर से धीमी
08:15और बेहद मीठी आवाज में
08:17बात करना शुरू किया
08:18उसकी आवाज में ऐसी नर्मी थी
08:21जो सुनने में तो बिल्कुल साधारन लगती थी
08:24लेकिन जैसे किसी आने वाले खत्रे को
08:26बड़ी चालाकी से छुपा रही हो वैसी
08:38दुकान से बाहर निकल कर जाते समय
08:40जैसे ही मुर्ली ने एक बार पीछे मुड कर देखा
08:43उसके पूरे शरीर में अचानक सिन सी दोड़ गई
08:46लाला टेन की हलकी पीली होशनी में
08:48उसे उस औरत की परचाई अस्वाभाविक रूप से
08:52बहुत जादा लंबी दिखाई दे रही थी
08:53जैसे वो जमीन पर दूर तक फैली जा रही हो
08:57मुरली ने उस तरफ जादा ध्यान नहीं दिया
08:59और जल्दी से चावल का थैला उठा कर
09:01वहां से घर की तरफ चल पड़ा
09:04रास्ते भर वो चुप चाप चलता रहा
09:06मुरली को ये पता नहीं था
09:07कि अंजाने में कितने बड़े खत्रों से बच कर
09:10वो घर वापिस जा रहा था
09:12रात जैसे तैसे गुजर गई
09:15अगले दिन सुभा होते ही
09:16मुरली पोस्ट ओफिस पहुँच गया
09:18पोस्ट ओफिस के बाहर ही
09:20सरजुका का खड़े दिखाई दिये
09:22उन्होंने मुरली को देखते ही
09:24उसे पास बुलाया
09:25और जैसे उन्हें उससे कोई जरूरी बात करनी हो
09:27उनके चहरे पर हल्की गंभीरता थी
09:30जैसे वो कुछ ऐसा बताने वाले हो
09:32जो आम बात नहीं थी
09:33उन्होंने धीमी आवाज में उससे कहा
09:36बड़े बाबू
09:37आज मैं शायद थोड़ा जल्दी घर चला जाओं
09:39इतनी जल्दी क्यों सर्जू
09:41क्या हुआ
09:42सब ठीक तो है
09:43तुम अचानक ऐसा क्यों बोल रहे हो
09:45बड़े बाबू
09:47कल रात गाओं में एक बहुत बड़ी घटना हो गई
09:50लोग कह रहे हैं कि
09:52कई सालों से दबा हुआ पुराना साया
09:54फिर से लोट आया है
09:55इसी वज़े से गाओं में डर का माहौल है
09:58इसलिए सोच रहा था कि
10:00अंधेरा होने से पहले घर पहुंच जाओ
10:02लेकिन ऐसा क्या हुआ कल रात
10:04तुम ठीक से बता क्यों नहीं रहे हो
10:06आखिर मामला क्या है
10:08बड़े बाबू
10:34मुरली पूरे दिन किसी गहरी सोच में डूबा रहा
10:37उसे ठीक से समझ नहीं आ रहा था
10:39कि उसके आसपास क्या चल रहा है
10:41इसी लिए वो चुपचा पोस्ट आफिस में अपना काम करता रहा
10:44और साथ ही लोगों की बातों को ध्यान से सुनकर
10:47समझने की कोशिश करता रहा
10:50देखते ही देखते दिन बीद गया
10:51और शाम हो गई
10:52शाम ढलते ही मुरली घर की तरफ लोट गया
10:55जैसे ही वो घर पहुचा
10:57सविता खाना बना रही थी
10:59तभी उसने मुरली को घर के अंदर आते देखा
11:02और उसे देखते ही उसके चेहरे पर
11:04खुशी जलाक उठी
11:05अरे आज आप जल्दी घर आगे
11:07अच्छा ही हुआ
11:08मैं सोची रही थी कि कब तक इंतजार करूँ
11:11घर में तेल भी लगभग खतम होने वाला है
11:13आज नहीं तो कल
11:15लेकिन शाम के समय उस तुकान से तेल लाना ही पड़ेगा
11:18अच्छा हुआ आप जल्दी आगे
11:20कम से कम आराम तो कर लेंगे
11:22मैं कब से आपका इंतजार कर रही थी
11:24उसी समय घर के बाहर से किसी अंजान आदमी की आवाज आई
11:28जैसे कोई मुर्ली को बाहर से बुला रहा हो
11:32पोस्ट मास्टर बाबू है क्या?
11:33घर पर है क्या?
11:35मैं गाउं से आया हूँ
11:36I thought I'd meet them?
11:38If you're new people, then you'll find it.
11:40If you're home, then tell me.
11:43I'll go out.
11:44I'll get out.
11:44Hi.
11:45I'm listening to Murali and Swita two of them.
11:47He got out.
11:48Murali just left the house.
11:51He looked at the house and saw him.
11:52He looked at the house of the town.
11:57His face was like, he's here.
12:00He looked at his house.
12:01And he saw him at his house.
12:24।
12:26।
12:29।
12:31।
12:31।
12:32।
12:32।
12:38।
12:49।
12:51खत्रा मंडरा रहा है
12:53खत्रा? कैसा खत्रा?
12:55और तुम इतनी गंभीर बात क्यों कर रहे हो?
12:57पहले भी मैंने कुछ सुना था
12:59साफसाब बताओ आखिल हुआ क्या था इस गाओं में
13:01बाबु, कई साल पहले इस गाओं में
13:04जुमरी नाम की एक औरत रहती थी
13:06उम्र रही होगी करीब 30-32 साल
13:09देखने में बहुत सीधी साधी लगती थी
13:11रेल लाइन के पास उसकी छोटी सी दुकान थी
13:14उसका व्यवहार इतना मीठा था
13:16कि लोग उसे प्यार से जुमरी दीदी कहते थे
13:19उसकी दुकान पर हमेशा भीड लगी रहती थी
13:22लेकिन फिर एक दिन अचानक गाउं की एक लड़की गायब हो गई
13:26बहुत ढुंढा लेकिन वो नहीं मिली
13:28फिर हर अमावस की रात जवान लड़के लड़कियां गायब होने लगे
13:32तीन-चार बच्चे ऐसे ही गायब हो गए
13:40एक दिन गाउं के ही एक आदमी ने छिप कर देखा कि जुमरी अपनी दुकान के पीछे काला जादू कर
13:47रही थी
13:48और पास के गाउं की एक लड़की बेहोश पड़ी थी
13:51तब गाउंवालों को समझ आ गया कि गायब हुए बच्चों के पीछे उसी का हाथ था
13:56गाउंवाले गुस्से से पागल हो गए सबने मिलकर उसे पकड़ लिया और इतना मारा कि वहीं उसकी मौत हो गई
14:02फिर गाउं के बुजुर्ग सन्यासी के कहने पर उसी दुकान के पास उसका अंतिम संसकार किया गया
14:08और उसकी आत्मा को बांधने के लिए दुकान के सामने एक मिट्टी की हांडी रखी गई
14:13तो फिर अब डर किस बात का है अगर वो मर चुकी थी तो
14:17डर इसी बात का है बाबू
14:18करीब 20 साल बाद किसी ना समझने वो हांडी तोड़ दी
14:23और जुमरी की आत्मा आजाद हो गई
14:25कल रात गाउं के एक आदमी को उसने साइकल समेत उठाकर जंगल में फेग दिया
14:30और उसे जिन्दा छोड़ कर कहा जाकर गाउंवालों को बता दे
14:34मैं वापस आ गई हूँ अब पूरे गाउं को खतम करूँगी
14:37इसलिए कह रहा हूँ बाबू शाम के बाद घर से बाहर मत निकलिये
14:42उस आदमी की आखरी बातें मुरली ठीक से सुन भी नहीं पाया
14:46लेकिन अब उसके सामने सच धीरे धीरे साफ होने लगा था
14:50उसे ऐसास हो गया था कि वो एक बड़े धोके का शिकार हो चुका है
14:54जूमरी ने अपने मीठे व्यभार और बातों से उसे भरोसे में लेकर उससे वही करवाया जो वो चाहती थी
15:00और उसी की वजह से वो बंधन से आजाद हो गई थी
15:04अब सीधी बात ये थी कि मुर्ली की एक गलती की वजह से पूरे गाउं पर खत्रा मंडराने लगा था
15:10ये सोचकर मुर्ली का मन भारी हो गया
15:13मुर्ली समझ गया कि अब इस आदमी को पूरी सच्चाई बताना बहुत जरूरी है
15:17नहीं तो आगे चल कर हालात और ज्यादा खराब हो सकते हैं
15:20उसने गहरी सांस ली और ठान लिया कि अब वो कुछ भी छिपाएगा नहीं
15:25उसे ये भी एहसास हो रहा था कि जो हो चुका है उसे बदला नहीं जा सकता
15:30लेकिन शायद सच बता कर वो आने वाले बड़े खत्रे को टालने में मदद कर सके
15:35अब हालात सिर्फ उसके अपने नहीं रहे थे
15:38बलकि पूरे गाउं की सुरक्षा उससे जुड़ चुकी थी
15:41बाभू, आप अचानक इतने शांत क्यूं हो गए?
15:44क्या बात आपके मन में चल रही है?
15:46घबराने की कोई जरूरत नहीं है
15:48बस मेरी बात मानिये
15:49शाम ढलने के बाद घर से बाहर मत निकलिये
15:52यही सबसे जरूरी है
15:54मैं आपसे एक जरूरी बात छिपाना नहीं चाहता
15:57सच ये है कि जो ये बड़ा खत्रा गाउं पर मंडरा रहा है
16:00उसमें मेरी भी गलती जुड़ी हुई है
16:02लिकिन भरोसा रखिये
16:04मैंने जान भूच कर कुछ नहीं किया
16:05मुझसे अंजाने में ऐसी गलती हो गई
16:07जिसका अंजाम इतना भयानक होगा
16:09ये मैंने कभी सोचा भी नहीं था
16:11बाबू आपकी बात सुनकर मैं और उलज गया हूँ
16:14आप साफ साफ बताईए
16:16आखिर ऐसा क्या हो गया
16:17आपने ऐसा क्या कर दिया जिससे ये सब शुरू हो गया
16:20मुरली ने गाउं में आने के बाद से
16:22अब तक जो कुछ भी हुआ था
16:24वो सब उस गाउं वाले आदमी को विस्तार से बता दिया
16:27उसने बताया कि कैसे शाम को घर में चावल खतम हो जाने की वज़े से
16:31उसे मजबूरी में उस पुरानी दुकान तक जाना पड़ा
16:34फिर उसने जुमरी के मीठे व्यवहर के बारे में बताया
16:37कैसे वो सामान्य गाउं की औरत की तरह बात कर रही थी
16:40और उसने मुरली का भरोसा जीत लिया था
16:43मुरली ने ये भी साफ साफ बता दिया
16:45कि जुमरी के कहने पर उसने उस मिट्टी की हांडी को बेकार कच्रा समझ कर दुकान से दूर लात मार
16:51कर फिंक दिया था
16:51और उसी के बाद वो हांडी तूट गई थी
16:54मुरली ने ये सब बताते हुए कहा कि उस समय उसे जरा भी अंदाजा नहीं था
16:58कि वो किसी बड़ी गलती की तरफ बढ़ रहा है
17:00उसे लगा था कि वो बस एक बेकार पुरानी चीज हटा रहा था
17:04लेकिन अब उसे समझ हा चुका था कि उस हांडी का कुछ और ही मतलब था
17:08ये सब बताते हुए मुरली का चहरा उतर गया
17:11और उसकी आवाज में पच्टावा साफ महसूस हो रहा था
17:14उसने गाउंवाले आदमी से कहा कि अगर उससे कोई गलती हो गई है
17:17तो वो उसे सुधारने के लिए जो भी जरूरी होगा वो करने को तयार है
17:21ओ तो ये सब आपकी वज़े से हुआ है बड़े बाबू
17:25आपकी इस बड़ी गलती की वज़े से आज पूरा गाउं खत्रे में आ गया है
17:29शायद आपको अभी भी अंदाजा नहीं है कि आपसे कितनी बड़ी भूल हो गई है
17:33ये कोई छोटी बात नहीं है इसके नतीजे पूरे गाउं को भुगतने पड़ सकते हैं
17:38मुझे अपनी गलती का एहसास है आप बस मुझे इतना बता दीजिए कि अब मुझे क्या करना होगा अपनी इस
17:45गलती का प्रायश्चित करने के लिए
17:47मैं जो भी जरूरी होगा वो करने के लिए तयार हूँ
17:50चाहे मुझे कितनी भी मुश्किल का सामना क्यों ना करना पड़े, मैं पीछे नहीं हटूंगा
17:56मुरली और गाउं के बाकी लोग आपस में बात करके गाउं के पूर्व दिशा में रहने वाले सन्यासी बाबा के
18:02घर की तरफ निकल पड़े
18:03कुछी देह में वे सब उनके घर पहुँच गए
18:06उस समय सन्यासी बाबा अपने घर के आंगन में बैठे हुए संध्या पूजा की तयारी कर रहे थे
18:12गाउं के लोग चुपचाप उनके सामने खड़े हो गए और गाउं में जो कुछ हुआ था वो सारी बात उन्हें
18:18विस्तार से बता दी
18:19गाउं वालों की पूरी बात ध्यान से सुनने के बाद सन्यासी बाबा कुछ देर तक शांत बैठे रहे
18:24जैसे वो सारी बातों को मन ही मन समझ रहे हो
18:28फिर उन्होंने धीरे से सब की तरफ देखा और गंभीर आवाज में उन्होंने कहा
18:32कि जो कुछ हुआ है वो साधारन बात नहीं है और अब सब को बहुत सावधानी से आगे बढ़ना होगा
18:38उन्होंने ये भी कहा कि अब जो भी करना होगा सोच समझ कर और मिलकर करना होगा
18:44तभी गाऊं को आने वाले खतरे से बचाया जा सकता
18:47देखो, पोस्ट मास्टर उसे रोकने का एक रास्ता मेरे पास है और वो काम सिर्फ तुम ही कर सकते हो
18:56बाबा, ये आप क्या कह रहे हैं मुझसे? क्या करना होगा? सच बताओं, तो डर के मारे मेरे हाथ पैर
19:02काप रहे हैं
19:03डरना स्वाभाविक है, लेकिन अब हिम्मत रखनी होगी
19:08हाँ, ये काम सिर्फ तुम ही कर सकते हो
19:11कल अमावस्या की रात है, और ऐसे कामों के लिए वही सबसे सही समय होता है
19:17ज्यादा देर नहीं करनी होगी, अगर हम देर करेंगे, तो वो रात में अपनी दुकान से निकल कर टांडव मचाने
19:27लग सकती है
19:27जैसे ही अंधेरा गिरे, तुम मेरे साथ उसकी दुकान तक चलोगे
19:32ठीक है बाबा, मैं आपके साथ चलूँगा, वहाँ जाकर मुझे क्या करना होगा?
19:38वहाँ पहुँच कर, मैं तुम्हें जो कहूँगा, तुम्हें वही करना होगा
19:42डरना मत और मेरा भरोसा मत तोड़ना
19:45मैं पूरी कोशिश करूँगा बाबा, अब जो होगा मैं उसका सामना करूँगा
19:50बाकी गाउवाले भी आसपास रहेंगे, लेकिन सब मेरे इशारे का इंतिजार करेंगे
19:56अब देर मत करो, अपने घर जाओ, और याद रखना, आज रात कोई भी अपने घर से बाहर नहीं निकलेगा
20:03बूढे सन्यासी की बात मान कर, सभी गाउवाले धीरे धीरे अपने अपने घर लोट गए
20:09लेकिन उसी रात गाउव में एक और बड़ी अन्होनी हो गई
20:13गाउं के आखरी छोर पर हफते का एकलोता बाजार लगा हुआ था
20:17रात करीब नौ बजे, दुकानधार अपना अपना सामान समेट कर, घर लोटने की तयारी कर रहे थे
20:24तभी अचानक तेज आंधी चलने लगी
20:26हवा इतनी तेज हो गई कि कई दुकानों के टेंट और छप पर उड़कर दूर जा गिरे
20:32और इस अफरा तफरी में कई लोग घायल भी हो गए
20:35कुछ ही पलों में बाजार का पूरा माहौल बदल गया
20:38लोग अपने सामान को बचाने की कोशिश करने लगे
20:41लेकिन तेज हवा के सामने कोई कुछ नहीं कर पा रहा था
20:44चारों तरफ धूल, तूटे सामान और लोगों की घबराई हुई आवाजें गूंजने लगी
20:50कई लोग जमीन पर गिर पड़े और कुछ लोग अपने परिवार वालों को ढूंडने लगे
20:54उसी तेज हवा के बीच अचानक एक तीखी और डरावनी हसी गूंज उठी
20:59जो सुनते ही लोगों के रॉंग्टे खड़े हो गए
21:02वो हसी जैसे हवा के साथ पूरे इलाके में फैल रही थी
21:05उस हसी के साथ जैसे कोई भयानक ऐलान भी हवा में गूंज उठा
21:09जिसे सुनकर वहां मौजूद लोगों के चहरों का रंग उड़ गया
21:13देखो राद ढलते ही कैसा सन्नाटा चा गया
21:17और मैं लौट आई
21:20अरे रे ये क्या हुआ डर क्यूं रहे हो तुम सब
21:24घबराओ मत तुम्हारी जुम्री दीदी वापस आ गई है
21:29ये तो बस शुरुवात है अभी तो बहुत कुछ देखना बाकी है
21:34पूरा गाउं तयार रहे उस भयानक मंजर के लिए जो अब आने वाला है
21:41आज कोई नहीं बचेगा मेरी नजरों से
21:44भागो छुपो जहां छप सकते हो छुप जाओ
21:48लेकिन याद रखना मैं सब को ढूंड लूँगी
21:51अब ये गाउं मेरा है और अब यहां सिर्फ मेरा राज चलेगा
21:57अगले दिन घोर अमावस्या की रात थी
22:00जैसे ही अंधेरा पूरी तरह चारों तरफ पहला
22:04बुढ़ा सन्यासी, कुछ गाउं वाले और मुरली
22:07पहले से ही उस पुरानी दुकान के पास पहुँच चुके थे
22:10वे सभी चुप चाप वहां खड़े
22:13आसपास के माहौल को देख रहे थे
22:15जैसे किसी खास पल का इंतिजार कर रहे हो
22:18देखो पोस्ट मास्टर
22:20अब तुम्हें अपना दिल मजबूत रखना होगा
22:23ये काम अब सिर्फ तुम ही कर सकते हो
22:26हमारे पास जादा समय नहीं है
22:29याद रखना वो तुम पर भरोसा करती है
22:32क्योकि अंजाने में सही
22:34लेकिन तुमने ही उसे उसके पुराने बंधन से आजाद किया था
22:38तुम दुकान के अंदर जाओगे
22:41और उसे बातों में उलजाये रखोगे
22:43उसे शक नहीं होना चाहिए कि बाहर क्या हो रहा है
22:47जब तक तुम उसे रोके रखोगे
22:49तब तक मैं दुकान के चारो तरफ सुरक्षा का बंधन तयार कर दूँगा
22:54ताकि वो वहां से बाहर न निकल सके
22:57जैसे ही मैं दुकान के पास आकर तुम्हें इशारा करूँगा
23:01तुम बिना देर किये तुरंथ दुकान से बाहर निकलाना
23:04उसके बाद मेरा असली काम शुरू होगा
23:07उस समय पीछे मुढ कर मत देखना
23:10और जो भी हो डरना मत बस वही करना जो मैं कहूंगा
23:15सन्यासी की बात मान कर मुरली धीरे धीरे दुकान के अंदर चला गया
23:19मुरली को देखते ही जुमरी के चहरे पर खुशी साफ दिखाई देने लगी
23:24वो पहले की तरहां ही मीठे और सामान्य व्यभार में उससे बात करने लगी
23:30और उसे अंदर बैटने के लिए कहने लगी
23:32उसकी आवाज पहले की तरहां ही शांत और नरम थी
23:36जैसे कुछ भी बदला ना हो
23:38मुरली चुप चाप अंदर खड़ा रहा और आसपास नजर दोड़ाने लगा
23:43दुकान के अंदर वहीं पुराना सामान रखा हुआ था
23:47और लाल टेन की हलकी रोशनी पूरे कमरे में फैल रही थी
23:51ए पोस्ट मास्टर बाबू आईए आईए बैठिये
24:12जुमरी बार बार मुस्कुरा कर मुरली से बात करने की कोशिश कर रही थी
24:16जैसे वो उसे बिलकुल सहज महसूस कराना चाहती हो
24:19अरे ये तो बहुत अच्छा किया आपने
24:21मन परेशान हो तो यहां चले आया कीजे
24:24शाम की बाद तो मैं यही रहती हूँ
24:25आप बेजज़ा का सकते हैं
24:27ठीक है दीदी, अच्छा लगता है आपसे बात करके
24:30सोचा आज थोड़ा बैठ कर दिल हलका कर लो
24:33मुरली जान बूच कर जुमरी को बातों में उलजाये रखता है
24:36ताकि उसका ध्यान इधर उधर ना जाए
24:38उसी दोरान बाहर खड़े सन्यासी
24:41चुप चाप दुकान के चारो तरफ अपना बंधन पूरा कर देते हैं
24:44बंधन पूरा करने के बाद सन्यासी अचानक सामने आ जाते हैं
24:48सन्यासी की आवाज सुनते ही
24:50दुकान का माहौल एक पल के लिए जैसे थम सा जाता है
24:53मुरली तुरंट उनकी तरफ देखने लगता है
24:55जबकि जुम्री के चेहरे के भाव धीरे-धीरे बदलने लगते हैं
24:59उसी पल ऐसा लगता है जैसे दुकान के अंदर की हवा
25:02अचानक भारी और ठंडी हो गई हो
25:20तेज आवाज सुनते ही मुरली एक जटके में दुकान से बाहर आ गया
25:24और तेजी से जाकर सन्यासी के पास आकर खड़ा हो गया
25:27उसी समय सन्यासी लगातार मंत्र पढ़ते हुए
25:31अपने साथ लाया हुआ गंगाजल दुकान की तरफ छिड़कने लगे
25:35गंगाजल की बूंदे जैसे ही दुकान और दर्वाजे पर गिरी
25:39वहां का महौल अचानक बदलता हुआ सा महसूस होने लगा
25:42सन्यासी बिना रुके मंत्र पढ़ते रहे
25:45और पूरे दर्वाजे और आसपास की जमीन पर गंगाजल छिड़कते रहे
25:49आसपास खड़े गाओं वाले चुक चाप ये सब देख रहे थे
25:52उस समय हवा भी जैसे धीमी हो गई थी
25:55और चारो तरफ अजीब सा सन्नाटा फैल गया था
25:58जैसे कुछ होने वाला हो
26:00कुछ ही पलों में दुकान के अंदर से हलकी सी आवाजे आने लगी
26:04जिससे वहां मौजूद सभी लोग और ज़्यादा सतर्ख हो गए
26:10जुमरी क्या तुमने सच में ये सोचा था कि मैं तुम्हें रोक नहीं पाऊंगा
26:15जब तक मैं जिन्दा हूँ इस गाओं का कोई भी अनिष्ट तुम नहीं कर पाऊगी
26:20इस बार मैं ऐसा बंधन करूँगा कि तुम चाह कर भी यहां से बाहर नहीं निकल पाऊगी
26:25तुम्हारी शक्ती यहीं थम जाएगी
26:28और इस बार तुम्हें कोई भी इस जगा से आजाद नहीं करा पाएगा
26:32चाहे वो कितनी भी बड़ी शक्ती क्यों ना हो
26:34उसकी आँखें भड़क उठी और उसका चहरा गुसे से दमदमाने लगा
26:38वो तेज गुसे में फुफकारती होई जोर से चिल लाई
26:42और उसकी आवाज पहले से बिलकुल अलग और डरावनी लग रही थी
26:46सन्यासी, तुमने मेरे साथ धोका किया है
26:50अगर मैं यहाँ से आजाद हो गई तो सबसे पहले तुम्हें ही खत्म करूँगी
26:54तुमने सोचा तुम मुझे हमेशा के लिए रोक लोगे
26:56मैं वापस आउँगी और तुमसे इसका हिसाब जरूर लोगी
27:00और तु, पोस्ट मास्टर, तुमने भी मेरा भरोसा तोड़ा
27:05मैंने तुम्हारा कभी बुरा नहीं किया
27:07फिर भी तुम इन लोगों के साथ मिल गए
27:08मेरे मीठे व्यभार का यही बदला दिया तुमने
27:11याद रखना, सन्यासी के बाद तुम्हारी बारी होगी
27:21सन्यासी इशारे से चार पांच और गाउवालों को बुलाता है
27:24सबको मंत्र सीख कर साथ में जब करवाता है
27:27अचानक जुम्री का शरीर और उसके दुकान में एक भयानक आगभड़क उठती है
27:32उसकी चीखें धीरे-धीरे हवा में घुल जाती है
27:35जुम्री बहुत ही दर्धनाक और फटी हुई आवाज में चीखने लगती है
27:40उसकी आवाज दूर तक गुंचती है
27:42जिसे सुनकर वहां खड़े गाउवालों के रॉंग्टे खड़े हो जाते है
27:45कुछी देर में आग और तेज होकर सब कुछ अपनी लप्टों में समेट लेती है
27:50जब आख शान्त होती है तो वहां कुछ भी नहीं बचता
27:53मानो वहां कभी कोई दुकान थी ही नहीं
27:56सन्यासी धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं
27:58और बची हुई राक, हड्डियों के टुकडे और सूखे फूलों को एकठा करते हैं
28:02फिर वो एक नई मिट्टी की हांडी लाते हैं
28:04और उन सभी चीजों को उसमें रख देते हैं
28:06उसके बाद वो हांडी को जमीन में दबाकर उपर से मिट्टी डाल देते हैं
28:11इसके बाद सन्यासी वहां एक बरगत का छोटा सा पौधा लगा देते हैं
28:14अब इसकी आत्मा फिर से बंधन में आ चुकी है
28:18यहां जो बरगत का पौधा लगाया गया है यही इसका पहरा बनेगा
28:24जब ये बरगत बड़ा और मजबूत पेड़ बन जाएगा
28:28तब कोई इसे काटने की हिम्मत नहीं करेगा
28:31जब तक ये बरगत यहां खड़ा रहेगा
28:34तब तक जुम्री की आत्मा भी इस जगह से बाहर नहीं निकल पाएगी
28:39इसलिए इस पेड़ की रक्षा करना यही पूरे गाउं की सुरक्षा है
28:44उसी रात जब सब कुछ शांत हो गया
28:47तो सभी गाउंवाले थोड़ा निश्चिंत होकर अपने अपने घर लोट गए
28:51हर किसी के मन में डर तो था
28:53लेकिन साथ ही ये भरोसा भी था कि अब खत्रा टल चुका है
28:58कुछ दिनों बाद गाउंवालों ने मिलकर
29:00उस जगा के चारो तरफ एक मजबूत दीवार खड़ी कर दी
29:03ताकि जब तक बरगत का पौधा बढ़ा और मजबूत ना हो जाए
29:07तब तक कोई वहाँ ना जा सके
29:20गाउंवाले समय समय पर दूर से उस जगा को देखते रहते थे
29:23लेकिन कोई भी दीवार के अंदर जाने की हिम्मत नहीं करता था
29:27उस घटना की याद गाउंवालों के मन में हमेशा बनी रही
29:31और लोग उस जगा को डर की नजरों से देखने लगे

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