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Raat Ka Aakhri Safar एक डरावनी Hindi Horror Story है, जिसमें रात के सफर के दौरान रहस्यमयी और भयानक घटनाएं सामने आती हैं। अगर आपको horror stories, ghost stories और suspense वाली डरावनी कहानियां पसंद हैं, तो यह कहानी अंत तक जरूर देखें।
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00:04।
00:08।
00:30और पायल पता नहीं अब कितनी बड़ी हो गई होगी, शायद मुझे पहचान भी ना पाए।
01:00की डालियां जोर-जोर से हिलने लगी, कुछ ही सेकंड बाद आकाश में तेज बिजली चमकी, और देखते ही देखते
01:07मुसलाधार बारिश शुरू हो गई।
01:30उसने अपना बैग सर पर रखा और इधर उधर देखने लगा, तभी उसे कुछ दूरी पर एक पुराना जरजर बस
01:37स्टॉप दिखाई दिया, वो तुरंत उसकी तरफ भागा।
01:40बारिश अब और भी तेज हो चुकी थी, बिजली की हर चमक पूरे इलाके को कुछ सेकंड के लिए रोशन
01:47कर देती, और अगले ही पल चारों तरफ फिर घना अंधेरा चा जाता।
01:52लगता है आज किस्मत मेरा इंतिहान लेने पर उतर आई है, मासी बस थोड़ा इंतिजार करना, मैं जरूर आउंगा।
01:59इतने में उसे ऐसा लगा, जैसे सडक के दूसरी तरफ, सफेद कपड़ों में कोई इंसान खड़ा, उसे लगातार देख रहा
02:08हो।
02:08विक्रम ने आँखें मिचमिचा कर ध्यान से देखने की कोशिश की, कौन है वहाँ, अगर कोई है तो सामने आईए,
02:16कोई जवाब नहीं आया, उसी समय बिजली फिर चंपी, लेकिन इस बार वो साया गायब हो चुका था,
02:23शायद मेरा भ्रम होगा, सुभा से अकेला चल रहा हूँ, इसलिए दिमाग भी अजीव-जीव बाते सोच रहा है, करीब
02:3115 मिनिट बाद बारिश धीरे-धीरे कम होने लगी, हवा अभी चल रही थी, सडक पूरी तरह भीग चुकी थी,
02:39कीचड फैल गया था, पेड़ों से ल
02:52और भी ज्यादा डरावना लगने लगा था, दूर दूर तक कोई इनसान दिखाई नहीं दे रहा था, केवल जिंगरों की
03:00आवाज, मींधकों की टर-टर और हवा की सीटी जैसी आवाज, मानो पूरा जंगल किसी अंजाने खत्रे की चेतावनी दे
03:09रहा हो, कितनी अजीब ज
03:21विक्रम धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था, तभी उसे काफी दूर एक रोशनी टिम्टिमाती हुई दिखाई थी, अंधेरे के बीच
03:31वो रोशनी किसी उम्मीद की तरह चमक रही थी, विक्रम ने राहत की सांस ली, वो तीज कदमों से उस
03:38रोशनी की तरफ बढ़ने लगा,
03:40दूर दिखाई दे रही रोशनी, अब धीरे धीरे साफ होने लगी, वो एक पुराना रिक्षा था, रिक्षे पर एक अधेर
03:48उम्र का आदमी बैठा था, उसके चेहरे पर थकान साफ दिखाई दे रही थी, विक्रम तेजी से उसके पास पहुँचा,
03:56भाईया, जरा सुनिये, क्या आप रतनगड चलेंगे? मुझे वहाँ जितनी जल्दी हो सके पहुँचना है, काफी देर से पैदल चल
04:04रहा हूँ, अगर आप छोड़ दें, तो बड़ी महरबानी होगी.
04:07तुमने कौन सा नाम लिया बेड़ा?
04:10रतनगड, वही मेरी मासी रहती है, कई साल बाद उनसे मिलने जा रहा हूँ.
04:15रिक्षा वाले के चहरे का रंग अचानक उड़ गया, उसने एक पल के लिए चारो तरफ देखा, जैसे कोई उनकी
04:21बाते सुन रहा हो.
04:22बेटा, इतनी रात में उस गाउं का नाम भी मत लिया करो.
04:26क्यों? ऐसा क्या है वहाँ? तुम पहली बार जा रहे हो क्या?
04:30नहीं, बचपन में गया था, लेकिन बहुत साल हो गये, अब रास्ता भी ठीक से याद नहीं.
04:35तब ही, इसी लिए तुम्हें कुछ पता नहीं.
04:38मतलब, पिछले कई सालों से सूरज ढलने के बाद रातनगड जाने वाला हर आदमी वापस नहीं लोटता.
04:46अरे भाया, ये सब गाउं वालों की अफवाहें होंगी, आजकल कौन भूत प्रेट पर यकीन करता है?
04:50मैं भी नहीं करता था, लेकिन अपनी आँखों से बहुत कुछ देखा है.
04:55क्या देखा आपने?
04:56एक बार रात में दो व्यापारी इसी रास्ते से गए थे, सुबह उनकी बैल गाड़ी मिली, सारा सामान मिला, लेकिन
05:04दोनों आदमी आज तक नहीं मिले.
05:06विक्रम कुछ पल के लिए चुप हो गया, लेकिन उसने खुद को संभाल लिया.
05:11संयोग भी तो हो सकता है, जंगल होगा, जानवर होंगे, कुछ भी हो सकता है, काश बात इतनी आसान होती.
05:18और क्या हुआ था?
05:19एक स्कूल मास्तर भी गया था, सुभा लोट कर आया, लेकिन उसके बाल एक ही रात में पूरे सफेद हो
05:27चुके थे, वो बस एक ही बात दोहराता रहा, अंधेरा होने के बाद उस गाओं में इनसान नहीं रहते, उसके
05:35बाद उसने कभी किसी से बात नहीं की, कुछ महीनों ब
05:41पड़ेगा, मेरी मासी अकेली रहती है, इतने साल बाद आया हूँ, वापस नहीं लोट सकता, नाम क्या है तुमारी मौसी
05:48का? कौशल्या देवी और मौसा देवेंद्र प्रसाद, इतना सुनते ही रिक्षा वाला जैसे पत्थर का हो गया, उसकी आखे फैल
05:57गई, देवेंद
05:59कौशल्या, तुम उनके रिष्टेदार हो? जी, मैं उनका भांजा हूँ, क्यों आप जानते हैं उन्हें? भाईया, क्या हुआ, आप अचानक
06:08चुप क्यों हो गए? कुछ नहीं, बस तुम्हें आखरी बार समझा रहा हूँ, आज की रात मत जाओ, सुभा उजाला
06:15होते ही न
06:25बचेगा, मुझे माफ कीजे भाईया, लेकिन मैं वापस नहीं जा सकता, मुझे हर हाल में आज ही पहुचना है, हिम्मत
06:32तो बहुत है तुम्हें, भगवान करे कल सुभह भी यही हिम्मत बची रहे।
06:55कड़ की ओर बढ़ गया, कुछ मिनिट चलने के बाद उसे दूर अंधेरे में एक टिम्टिमाती हुई पीली रोशनी दिखाई
07:02दी, वो एक छोटी सी चाई की दुकान थी, जहां उसका इंतजार कोई और कर रहा था, जैसे जैसे विकरम
07:09उस रोशनी के करीब पहुचा, उसे
07:12एक छोटी सी पुरानी चाई की दुकान दिखाई दी, लकडी की टूटी हुई मेज, मिट्टी का चूलहा और उसके पास
07:19बैठा लगभग सत्तर साल का एक बूढ़ा आदमी, जो बिना उपर देखे, चुप चाप चाई बना रहा था, दुकान के
07:26चारो ओर गहरा सननाटा प
07:41इस रास्ते से गुजरने वाले हर मुसाफिर का चहरा मैं पहचान लेता हूँ, वेट, पहले चाई पी ले, रास्ता बहुत
07:49लंबा है, धन्यवाद काका, सच कहूं, तो सुभा से सफर कर रहा हूं, ठक भी गया हूँ
07:55चायवाले ने धीरे-धीरे मिट्टी के कुलहड में गर्म चाय भर कर विक्रम की तरफ बढ़ा दी, चाय से भाप
08:02उट रही थी, अद्रक और इलाइची की खुश्बू पूरे माहौल में फैल गई, विक्रम ने पहला घोट लिया, उसे लगा
08:09काफी देर बाद उसके शरीर म
08:11गर्माहट लोट रही है, कहां से आ रहे हो बेका? शहय से, और चानक आ रहे है? रतनगड, मेरी मासी
08:18वहीं रहती है, रतनगड सुनते ही चाय वाले का हाथ वहीं रुक गया, चूले की आग धीरे-धीरे जलती रही,
08:25लेकिन बुढ़ा बिलकुल शान्त हो गया, कुछ सेकें�
08:39कि कभी-कभी अंधेरा भी सुन लेता है, ये सुनकर विक्रम हलका सा मुस्कुराया, लगता है आप भी उसी रिक्षा
08:48वाले की तरह डरावनी बाते करेंगे, उसने भी रोका था, और तुम नहीं माना, है न? जी, उसने भी कहा
08:55रात में वहां मत जागा, मासी से मिलने की जि�
08:59अब वापस नहीं लोड सकता, रिष्टे निभाना अच्छी बात है, लेकिन हर रिष्टा समय के साथ वैसा नहीं रहता, जैसा
09:07हम छोड़ कर जाते हैं, क्या मतलब काका? अगर जिससे तू जून रहा है, वो वैसा ना निकले जैसा तू
09:14सोच रहा है, तब काका, आप साफ सा
09:18क्यों नहीं बताते? क्योंकि कुछ बातें अपने मूँ से कह देने पर सच हो जाती हैं, क्या आप रतनगड गए
09:26हैं? बहुत बार, लेकिन अब वर्षों से सूरज ढलने के बाद उस रास्ते की तरफ दीखता तक नहीं, इतना कहकर
09:35चायवाला उठा, उसने कांपते हाथ से �
09:38दूर अंधेरे की तरफ इशारा किया, उस कच्चे रास्ते पर सीधे चलता जाना, बीच में एक पुराना पीपल आएगा, उसके
09:46बाद तूटा हुआ कुँआ, फिर रतनगड, लेकिन एक बात गांट बांद ले, अगर रास्ते में कोई तेरा नाम लेकर बुलाए,
09:55तो पह
10:08की आँखों में देखता रहा, उन आँखों में डर भी था, दया भी और जैसे कोई ऐसा राज जो वो
10:15बताना चाहता था, लेकिन बता नहीं सकता था, विक्रम ने बैग उठाया, एक गहरी सांस ली और अंधेरे रास्ते की
10:23तरफ चल पड़ा, उसे बिलकुल भी अंदाजा �
10:25नहीं था कि कुछ ही देर बाद वो ऐसे इनसान से मिलने वाला है, जिसे वो वर्षों से देखने की
10:32आस लगाए बैठा था, ये रास्ता मुझे कुछ-कुछ याद आ रहा है, बचपन में मैं यहीं से भागते हुए
10:41खेतों में चला जाता था, मौसा जी मुझे पकड़ने के
10:45पीछे दोड़ते थे और मासी दूर से आवाज लगाती थी, विक्रम गिर जाएगा बेटा, कितने अच्छे दिन थे वो, अचानक
10:56हवा का एक तेज जोका आया, पेडों की सूखे पत्ते उड़ने लगे, उसी समय पीछे से किसी ने बहुत धीमी
11:05आवाज में पुकारा, वि
11:14तेरा नाम लेकर बुलाए, पहली आवाज पर पीछे मत मुणना, उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगा, नहीं, ये मेरा
11:23ब्राम है, मुझे पीछे नहीं देखना चाहिए, वो दुबारा चलने लगा, लेकिन इस बार आवाज पहले से ज्यादा साफ आई,
11:32विक्रम, र�
11:42रोक नहीं पाया, पीछे मुढ कर देखा, सामने सफेद धोती कुर्ता पहने, हाथ में पुरानी लाल्टेन लिये, एक आदमी खड़ा
11:51था, चहरे पर हलकी मुस्कान, लेकिन आखों में अजीब सी चमक, अरे विक्रम, क्या सच में तु ही है? मौसा
12:01जी, आप? विक्रम खु�
12:06कर उनके पैर छुए. जीते रहो बेटा, इतने सालों बाद, आखिर तुझे हमारी याद आ ही गई. मौसा जी, मुझे
12:15माफ कर दीजिए, मैं कई बार आने वाला था, लेकिन पढ़ाई, फिर नौकरी की तयारी, फिर भालात, समय ही नहीं
12:24मिला. समय बेटा, समय किसी के पास �
12:27नहीं होता, निकालना पड़ता है. सच कहूं तो मैं हर साल सोचता था, इस बार जरूर आऊंगा, लेकिन हर बार
12:36कुछ ना कुछ हो जाता था. तेरी मासी, आज भी तेरा इंतजार करती है, जब भी कोई शहर से आता,
12:43वो सबसे पहले यही पूछती, मेरा विक्रम आया क्या?
12:46ये सुनकर विक्रम की आँखे नम हो गई. मासी आज भी मुझे याद करती है. बेटा, रिश्टे अगर सक्ची हो,
12:55तो सालों की दूरी भी उन्हें खत्म नहीं कर सकती. और पायल, वो कैसी है? अब तो मेरी उमर की
13:03हो गई होगी. ये सुनते ही मौसा कुछ सेकंड के लिए ब
13:16बस समय ने बहुत कुछ बदल दिया है. क्या मतलब? घर चल, सब बता देंगे. रास्ते में पुरानी बाते नहीं
13:25करते. इतना कहकर मौसा आगे चलने लगे. विक्रम भी उनके पीछे पीछे चल पड़ा. लेकिन चलते चलते उसे एक अजीब
13:34बात महसूस हुई. अरे, ये क
13:46नीचे देखा. गीली मिट्टी थी. उसके अपने पैरों के निशान साफ बन रहे थे. लेकिन मौसा के पैरों के नीचे
13:54मिट्टी बिलकुल वैसी की वैसी थी. कोई निशान नहीं. शायद अंधेरे की वजह से मुझे ठीक से दिखाई नहीं दे
14:00रहा. थोड़ी दूर चलने
14:01के बाद एक पुराना बर्गत का पेड़ाया. मौसा अचानक वहीं रुख गए. उन्होंने धीरे धीरे पीछे मुड़कर विक्रम की तरफ
14:10देखा. विक्रम, एक बात दूशो. जी मौसजी. अगर कोई अपना बहुत सालों तक तुम्हारा इंतजार करता रहे और तुम कभ
14:19भी वापिस ना ओ, तो गलती किस की होती है? मैं, मैं समझा नहीं. कुछ नहीं? चलो, घर बस सामने
14:26ही है. विक्रम ने एक बार फिर मौसा के चेहरे की तरफ देखा. उनकी मुसकान वापस आ चुकी थी. लेकिन
14:33अब वो मुसकान पहले जैसी अपना पन भरी नहीं लग रही �
14:36उसमें कुछ ऐसा था, जिसे देखकर विक्रम के दिल में पहली बार हलका सा डर पैदा हुआ. दोनों धीरे-धीरे
14:44आगे बढ़े और कुछी मिंटों बाद एक पुराने, जर-जर लेकिन कभी बेहत खुबसूरत रहे मकान के सामने पहुँच गए.
14:57मौसा ने दर्वाजे की
15:02पीछे से किसी के धीमे-धीमे कदमों की आवाज आने लगी. दर्वाजा धीरे-धीरे चर्मराया और सामने एक अधेड उम्र
15:09की महिला दिखाई दी. सफेद साड़ी, लेकिन आखों में वही पुराना अपनापन. कुछ पल तक वो विक्रम को देखती ही
15:15रह गई. मानों उन
15:32पागल, इतने साल एक बार भी याद नहीं आई हमारी. तुझे पता है, मैं हर त्योहार पर तेरे लिए अलग
15:39से खीर बनाती थी. फिर खुदी रो देती थी कि पता नहीं मेरा विक्रम अब मुझे याद भी करता होगा
15:45या नहीं?
15:46ऐसा मत कहो मासी, मैं हर दिन आपको याद करता था, बस जिन्दगी ने मौका ही नहीं दिया. मौका नहीं
15:53दिया या तुने निकालने की कोशिश नहीं की? गल्ती मेरी ही थी, मुझे पहले आ जाना चाहिए था. चल, जो
16:01बीद गया उसे भूल जाते हैं. आज तु मेरे घर आ
16:15विक्रम ने जैसे ही घर के अंदर कदम रखा, उसे एक अजीब सी ठंड मैसूस हुई. बाहर गर्मी थी, लेकिन
16:23घर के अंदर मानो बर्फ जैसी ठंडी हवा बह रही हो. दीवारों पर पुराने फोटो टंगे हुए थे, कुछ तस्वीरों
16:30पर धूल जमी हुई थी, कुछ �
16:32तस्वीरें टेड़ी लटक रही थी, एक कोने में पुरानी घरी टिक टिक कर रही थी, लेकिन उसकी सूईया चल नहीं
16:38रही थी, घर पहले से काफी बदल गया है. समय सब कुछ बदल देता है बेटा, घर भी और घर
16:45वाले भी. मासी की ये बात सुनकर विक्रम कुछ पल के ल
17:02मुसा की तरफ देखा, मुसा ने भी नजरें जुका ली, कुछ सेकेंड तक पूरे घर में सन्नाटा चा गया. वो
17:08पास की गाम गई है, कुछ काम था, आज आएगी. अच्छा, कोई बात नहीं, मैं सुभा मिल लूँगा. तभी मुसा
17:16ने तुरंत बात बदल दी. पहले हाथ
17:30पानी निकालना शुरू किया, लेकिन हैंड पंप से पानी की जगा, कुछ काला सा गाड़ा पानी निकलने लगा. अरे यार,
17:38ये क्या? विक्रम घबरा कर पीछे हट गया, उसी समय मसी की आवाज आई. क्या हुआ बेटा? विक्रम ने दो
17:45बारा हैंड पंप की तरफ देखा,
17:47अब वहाँ से बिल्कुल साफ पानी निकल रहा था. अभी तो काला पानी निकला था, क्या मैंने घलत देखा? ठकान
17:55होगी बेटा, रात का वक्त है, आँखों को धोका हो जाता है, चल, खाना लगाती हूँ. विक्रम ने खुद को
18:02समझा कर सरहिलाया, और हाथ मूध होकर अं
18:14अभी की थी. लेकिन एक बात विक्रम को खटकती रही. मासी ने अपनी थाली क्यों नहीं लगाई, और मौसा जी
18:21भी सिर्फ पानी के गिलास के सामने बैठे हैं. मासी, आप खाना नहीं खाएंगे? नहीं बेटा, हमारा खाया हुआ है,
18:29तो खा ले आराम से. विक्रम ने खान
18:44अजीब सा स्वाद महसूस हुआ, मिट्टी जैसा, पुराना, सडा हुआ. ये, ये खीर का स्वाद ऐसा क्यों है, जैसे बहुत
18:52दिनों से रखी हो? उसने मासी की तरफ देखा. वो दिवार के सहारे खड़ी, एक टक विक्रम को ही देख
18:59रही थी. उनकी आखों में आसू थे,
19:02लेकिन होट पर अजीब सी मुस्कान. खाले बेटा, जितना खाना है उतना खाले. पता नहीं फिर कब मौका मिले? मासी,
19:11आप ऐसे क्यों बोल रही हैं? अब तो मैं बार-बार आऊंगा. हाँ बेटा, जरूरा ना.
19:17खाना खत्म करने के बाद मौसा विक्रम को एक पुराने कमरे में ले गए, जहां उसके सूने का इंतजाम किया
19:23गया था. कमरे में एक पुराना पलंग, मैल खुर्दी चादर और दीवार पर लटका हुआ एक बड़ा सा आइना था,
19:30जिस पर सफेद कपड़ा डाला हुआ था
19:32मौसा जी, इस आइने पर कपड़ा क्यों टाला है?
20:01जैसे कोई लड़की धीरे-धीरे गुन-गुना रही हो.
20:04ये आवाज कहीं पायल तो नहीं?
20:07विक्रम बिस्तर से उठा और दबे-पाउं दर्वाजे तक गया.
20:11उसने किवार थोड़ा सा खोला.
20:14आंगन में चांदनी फैली थी और उस चांदनी में कुएं के पास लड़की खड़ी थी.
20:19पीठ उसकी तरफ.
20:21पायल, तू वो ना?
20:23लड़की ने कोई जवाब नहीं दिया, बस धीरे-धीरे गुन-गुनाती रही.
20:27विक्रम बाहर आंगन में आया, कदम बढ़ाता गया.
20:31पायल, मैं हूँ विक्रम भाईया, पैचाना नहीं क्या?
20:34जैसे ही विक्रम उसके करीब पहुँचा, लड़की ने धीरे से गर्दन घुमाई.
20:39उसका चहरा चांदनी में साव दिखाई दिया.
20:42बिल्कुल वैसा ही, जैसा विक्रम ने बचपन की तस्वीरों में देखा था.
20:47लेकिन आखें, आखों में कोई चमक नहीं थी, बस एक गहरा, खाली अंधेरा.
20:54भाईया, तुम्हें इतनी देर क्यों लगी?
20:57उसकी आवाज में एक अजीब सा दर्थ था, जैसे सालों का गिला एक पल में बाहरा गया हो.
21:04पायल, तुम्हारी आखें, तुम्हें क्या हुआ है?
21:07कोहें में गिरी थी मैं भाईया.
21:09उस साल, जब तुम शहर चले गए थे, उसके थोड़ी ही देर बाद.
21:14सबने ढूंडा, लेकिन कोई मुझे बचा नहीं पाया.
21:18अम्मी पापा इतना रोये कि उनका रोना भी एक दिन चुप हो गया.
21:23ये सुनते ही विक्रम के पैरों तले जमीन खिसक गई.
21:26उसका सारा शरीर कापने लगा.
21:29नई, ये सच नहीं हो सकता.
21:31मैं अभी मासी से मिला, मौसा से मिला, वो तो बिल्कुल ठीक है.
21:37भाया, साल का पहला दिन होता है आज.
21:40वही दिन जब मैं गई थी.
21:42हर साल इस रात हम तीनों इस घर में लोटाते हैं.
21:45सिर्फ एक रात के लिए.
21:48अम्मी को लगता है शायद इस बार तुम आओगे.
21:50और सच में, तुम आ गए.
21:53तो इसका मतलब मासी, मौसा जी, वो भी?
22:00हाँ भाया, तुम्हारे जाने की दो साल बाद,
22:04उस महामारी में पूरा रतनकड़ खत्म हो गया था.
22:08सिर्फ हम तीन ही नहीं, पूरा गाओ.
22:11तभी से ये गाओ नक्षों से मिट गया.
22:13लेकिन हमारी रूहें, आज भी इस एक रात के इंतजार में भटकती हैं.
22:19विक्रम के हाथ पाऊं ठंडे पड़ गए.
22:22उसे अचानक चाय वाले की बात याद आई.
22:25अंधेरा होने के बाद, उस गाओं में इनसान नहीं रहते.
22:29तो मैं, मैं भी अब यहीं फस गया?
22:32नहीं भाईया, तुम्हारी लिए एक रास्ता है.
22:36लेकिन सूरज की पहली किरण दिखने से पहले, तुम्हें इस गाओं की सीमा पार करनी होगी.
22:43अगर सूरज निकल आया और तुम यहीं रहे, तो फिर तुम भी हमारे जैसे हो जाओगे.
22:48न जीवित, न मृत, बस इस रात में हमेशा के लिए कैद.
22:54लेकिन रास्ता, अंधेरी में मैं अकेला कैसे निकल पाऊंगा?
22:59वही कच्चा रास्ता, जहां से तुम आये थे, वही तुम्हें वापस ले जाएगा.
23:04बस एक बात याद रखना, चाही कुछ भी हो जाए, पीछे मुढ कर मत देखना.
23:10अम्मी पापा तुम्हें रोकने की कोशिश करेंगे, क्योंकि उनका मन नहीं मानता तुम्हें जाने देना.
23:15लेकिन अगर तुम रुख गए, तो वो खुद तुम्हें नहीं जाने देंगे.
23:19इतना कहकर पायल धीरे धीरे कुएं की तरफ पीछे हटने लगी, और अंधेरे में घुलती चली गई.
23:26विक्रम वहीं खड़ा, कापता रहा. तभी पीछे से मौसा की आवाज आई.
23:32विक्रम, इतनी रात को यहां आंगन में क्या कर रहा है?
23:36विक्रम घबरा कर मुड़ा. मौसा और मासी दोनों दरवाजे पर खड़े थे.
23:42उनके चहरों पर अब वो पहले वाली मुस्कान नहीं थी.
23:45एक खाली उदास नजर थी.
23:48बेटा, सब कुछ सुन लिया ना तुने?
23:51मासी, ये सब सच है क्या? आप लोग…
23:55हाँ बेटा, हम बहुत साल पहले इस दुनिया से जा चुके.
24:00लेकिन तेरे बिना जाने का दुख मौत से भी बड़ा था.
24:05इसलिए हर साल, इस रात, हमें वापस आने की इजाज़त मिलती है.
24:10सिर्फ उमीद में कि शायद इस बार तु आ जाए.
24:14और आज तु सच में आ गया. हमारी सब से बड़ी ख्वाहिश पूरी हो गई.
24:19तो अब… अब मैं क्या करूँ?
24:22अब तुझी जाना होगा, बेटा. तुरंट, सूरज निकलने से पहले.
24:27लेकिन मासी, इतने सालों बाद मिलाओं आपसे. ऐसे कैसे चला जाओं?
24:33इसलिए जा, बेटा, क्योंकि हम तुझसे प्यार करते हैं.
24:36अगर तु यहां रुका, तो हम खुद को कभी माफ नहीं कर पाएंगे. जा, अपनी जिन्दगी जी, हमारी तरफ से
24:44भी.
24:45मासी की आँखों से एक आँसू टपका. लेकिन जमीन पर गिरने से पहले ही, वो हवा में कायब हो गया.
24:52पूरब की दिशा में आस्मान का रंग हलका सा बदलने लगा था. रात ढलने वाली थी.
24:58विक्रम, चल दी कर बेटा, वक्त बहुत कम है.
25:03विक्रम ने एक आखरी बार उन दोनों को देखा. जुक कर उनके पैर छूने की कोशिश की, लेकिन उसके हाथ
25:10खाली हवा को छूकर रह गए.
25:12वो दोनों वहाँ थे भी और नहीं भी.
25:17मासी, मौसा जी, मैं जरूर वापस आऊंगा, हर साल इस दिन.
25:21आना बेटा, लेकिन दिन के उजाले में. रात में हमें ढूनने की कोशिश मत करना.
25:27इतना कहकर विक्रम बैग उठाया और घर के दर्वाजे से बाहर भागा. पीछे से मासी की धीमी आवाज आई.
25:35विक्रम, रुख जा बेटा, एक बार और देख ले मुझे.
25:39विक्रम का कदम एक पल के लिए थमा, लेकिन उसे पायल की बात याद आ गई. चाहे कुछ भी हो
25:45जाए, पीछे मुड़ कर मत देखना.
25:47उसने अपनी आखें बंद की और पूरी ताकत से दोड़ना शुरू कर दिया.
25:51अंधेरा रास्ता, गेली मिट्टी, पैरों में काटों की चुभन, किसी चीज की परवा की ये बिना विक्रम भागता रहा.
26:00पीछे से आवाजें आती रही, कभी मासी की, कभी मौसा की, कभी एक छोटी बच्ची की हसी जैसी.
26:05लेकिन उसने एक बार भी पीछे मुड़कर नहीं देखा.
26:09पूरब में आस्मान अब सुनहरी रोष्णी से रंगने लगा था.
26:12बरगत का पेड, फिर तूटा हुआ कुआ, फिर वही पुराना पीपल.
26:16विक्रम उन्ही निशानियों को पीछे छोड़ता हुआ दोड़ता गया.
26:19और जैसे ही सूरज की पहली किरण पेड की डालियों के बीच से जहां की,
26:24उसे दूर मुख्य सड़क दिखाई दी.
26:26विक्रम पूरी ताकत लगा कर सड़क तक पहुँचा,
26:29और वही ठके हुए घुटनों के बल जमीन पर बैठ गया.
26:33उसकी सांस फूल जो की थी, पूरा शरीर काप रहा था.
26:36उसने पीछे मोड़ कर देखा, जहां से वो आया था,
26:40महां सिर्फ एक घना, सुनसान जंगल था.
26:42ना कोई घर, ना कोई रास्ता, ना कोई कुआ,
27:00अरे भाया, इतनी सुबा सुबा, अकेले, इस सुनसान रास्ते पर, कहां से आ रहे हो?
27:08रतनगर से, दूद वाले का चहरा अजीब सा हो गया.
27:12रतनगर? भाया, वहां तो कोई नहीं रहता.
27:1620 साल पहले एक महमारी में पूरा गाउं खतम हो गया था.
27:20अब तो सिर्फ खंडर बचे हैं और लोग उधर जाने से डरते हैं.
27:25लेकिन मैं वहीं से आ रहा हूँ.
27:27मेरे मासी, मौसा, उनकी बेटी पायल,
27:31देवेंद्र प्रसाद और गोशल्या देवी का नाम लिया आपने.
27:35अरे, उनको तुम्हें बचपन से जानता था.
27:38बहुत अच्छे लोग थे.
27:40उनकी बेटी पायल कुए में गिरकर चलबसी थी.
27:43उसके कुछी साल बाद महामारी ने पूरे परिवार को ले लिया.
27:48उनकी कबरें आज भी गाउं के बाहर पुराने कबरिस्तान में हैं.
27:52विकरम कुछ बोल ना सका.
27:54उसने अपनी जेब में हाट डाला और वहाँ उसे एक चीज मिली जो रात को पहले नहीं थी.
28:00मासी के हाथों की बनी हुई हलकी ठंडी, सूखी खीर की एक छोटी सी पोटली,
28:06जिस पर धागे से बंधा एक पुराना धुंदला सा फोटो था.
28:10विकरम, मासी, मौसा और पायल सभी हसते हुए, बहुत साल पुराना.
28:16विकरम ने वो फोटो अपने सीने से लगा लिया और आखों में आशू लिये, धीरे से बोला,
28:21आप लोगों ने मुझे माफ कर दिया, और मैं आखरी बार आपसे मिल भी लिया, बस इतना ही काफी है.
28:29दूद वाले के तांगे पर बैठ कर, विकरम शहर की तरफ चल पड़ा.
28:34हमेशा के लिए पीछे छूड़ गए एक गाओ, एक रात और तीन ऐसी रूहों को याद करते हुए, जिनका प्यार
28:41मौत के बाद भी कम नहीं हुआ था.
28:44कहा जाता है कि आज भी साल में एक रात रतनगड के खंधरों में हलकिसी रोशनी जल उठती है, जैसे
28:52कोई आज भी किसी अपने के आने का इंतजार कर रहा हो.